नौकरी फोकस


Volume-2, 13 - 19 April 2019

सिविल सेवा परीक्षा-2019

प्रांरभिक परीक्षा में सफलता कैसे प्राप्त करें

एस.बी. सिंह

देश के शिक्षित, प्रतिभावान और परिश्रमी युवाओं में एक लोकप्रिय-सिविल सेवा परीक्षा, भारत में सबसे अधिक कड़ी प्रतिस्पर्धा परीक्षा है. जो सम्मान, प्रतिष्ठा और स्टेटस सिविल सेवाओं में है वह कोई भी अन्य सेवा नहीं दे सकती. इसके अतिरिक्त, एक सुखद जीवन शैली प्रदान करने के लिए यह सेवा रोज़गार-सुरक्षा और आकर्षक अनुलाभ देती है, किन्तु इन सभी घटकों से ऊपर, सिविल सेवा में निष्पादित किए जाने वाले कार्यों की प्रकृति ऐसी है जो अनेक व्यक्तियों को इसकी आकांक्षा के लिए प्रेरित करती है. चुनौतियां एवं विविधता देने के अतिरिक्त, सिविल सेवाएं समाज से अत्यधिक जुड़ी कुछ ऐसे कार्य देती है जो जीवन में सार्थकता और औचित्य लाते हैं. निजी क्षेत्र के कार्यों के विपरीत, जहां व्यक्ति समाज से अत्यधिक अप्रासांगिक कार्य, यहां तक विज्ञापन, विपणन आदि जैसे क्षेत्रों में सामाजिक रूप से हानिकारक कार्य करता है, सिविल सेवाएं नीति निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण आदि जैसे क्षेत्रों में संतोषजनक रोज़गार देती हैं, इसीलिए अनेक उम्मीदवार किसी निजी क्षेत्र में कॅरिअर तलाशने के स्थान पर सिविल सेवाओं में जाने के लिए कड़े प्रयास करते हैं.

जैसा कि सभी जानते हैं, यह प्रारंभिक, लिखित और साक्षात्कार वाली एक तीन चरण की परीक्षा है. प्रतिस्पर्धा के इन तीनों स्तरों (अर्थात प्रारंभिक, लिखित और व्यक्तित्व परीक्षण) में चुनौतिया होती हैं. किन्तु परीक्षा का पहला चरण अर्थात प्रारंभिक परीक्षा अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होती है. यद्यपि, प्रारंभिक परीक्षा, लिखित परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों को पात्र बनाने वाली मात्र एक उत्तीर्ण परीक्षा होती है, किन्तु वास्तविकता यह है कि इस परीक्षा के परिणाम का उम्मीदवारों के मन में डर बना रहता है. यह परीक्षा डरावनी इसलिए है क्योंकि, इस परीक्षा में बैठने वाले कुछ 4-5 लाख प्रत्याशियों में से केवल 15000 उम्मीदवारों को ही इस स्तर पर चुने जाने का अवसर मिलता है. इस तरह यह परीक्षा वास्तव में एक उत्तीर्णता परीक्षा नहीं है बल्कि यह चुनौती समाप्त करने वाली एक प्रक्रिया है और अत्यधिक प्रतिभावान प्रत्याशियों को भी इस प्रारंभिक स्तर पर अपनी चुनौती समाप्त होने का डर रहता है. यदि किसी उम्मीदवार की चुनौती इस स्तर पर समाप्त हो जाती है तो इसमें उत्तीर्ण होने और मुख्य परीक्षा में बैठने का अवसर प्राप्त करने के लिए उसे पूरे एक वर्ष की प्रतीक्षा करनी होती है. यह परीक्षा भयभीत करने वाली इसलिए है क्योंकि इसमें इतिहास, संस्कृति, भूगोल, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे पारम्परिक क्षेत्रों से लेकर वर्तमान एवं समसामयिक मामले आदि का व्यापक

अध्ययन करना होता है. मुख्य परीक्षा के लिए मामलों की संकल्पनात्मक समझ होनी चाहिए, जबकि प्रारंभिक परीक्षा के लिए दोनों-संकल्पनात्मक समझ और तथ्यात्मक ज्ञान होना जरूरी है, जो इसे और व्यापक बनाते हैं. इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी किसी भी उम्मीदवार के धैर्य, दृढ़ता, निरंतरता और लगन की सच्ची परीक्षा है.

प्रारंभिक परीक्षा की समझ

·         इसके लिए दोनों-संकल्पनात्मक स्पष्टता और तथ्यात्मक सूचना आधार होना आवश्यक है. लिखित परीक्षा में लिखित कौशल के माध्यम से उम्मीदवार की संकल्पनात्मक समझ की परीक्षा होती है, जबकि प्रारंभिक परीक्षा में संकल्पना और तथ्यों-दोनों की. यदि आप अपनी प्रारंभिक परीक्षा के लिए इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं तो आपसे दोनों धर्मों में आत्मा, भगवान, जन्मान्तरण/देहांतरण की संकल्पना के बारे में कोई प्रश्न पूछा जा सकता है, जिसके लिए संबंधित संकल्पनाओं पर बहुत अच्छी स्पष्टता की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, केवल तथ्यों अर्थात विभिन्न बौद्ध परिषदों, उनका आयोजन कहां किया गया आदि के बारे में भी प्रश्न पूछे जा सकते हैं. इसके लिए, इसके संकल्पनात्मक पहलुओं तथा तथ्यात्मक विवरणों-दोनों में पाठ्यक्रम की व्यापक तैयारी करना आवश्यक है.

II.यह दोनों-आई.ए.एस. और आई.एफ.एस. (भारतीय वन सेवा) परीक्षाओं के लिए एक सामान्य परीक्षण है:- चूंकि आई.ए.एस. और आई.एफ.एस.-दोनों के लिए एक प्रारंभिक परीक्षा ली जाती है, इसलिए दोनों क्षेत्रों से न्याय करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा के प्रारूप में संशोधन किया गया है. पहले इतिहास, राजतंत्र, अर्थशास्त्र जैसे पारम्परिक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रश्न पूछे जाते थे. किंतु अब, इस सामान्य परीक्षा में बैठने वाले किसी आई.एफ.एस. उम्मीदवार का मूल्यांकन करने के लिए भूगोल, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, वानिकी पर अधिक प्रश्न होते हैं. परीक्षा की यह नई विशेषता आपकी तैयारी के समय हमेशा आपके ध्यान में होनी चाहिए.

III. एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकों से तैयारी : सभी, यह परामर्श देते हैंं कि प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों की अच्छी तैयारी की जाए, यह कुल मिलाकर सच भी है. किंतु आप यह आशा नहीं कर सकते कि प्रश्न केवल एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तकों से ही पूछे जाएंगे. इसलिए आपको एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकों से भी तैयारी करना आवश्यक होता है.

IV. सर्वविदित तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं किन्तु कम विदित तथ्यों का भी महत्व होता है: इसमें कोई संदेह नहीं कि, आपको इतिहास, भूगोल आदि जैसे विषयों पर सभी सर्वविदित तथ्यों का ज्ञान होना आवश्यक होता है, किंतु साथ ही साथ आपको कम विदित तथ्यों का ज्ञान होना भी अपेक्षित होता है, क्योंकि सं.लो.से.आ. (यू.पी.एस.सी.) में ऐसे प्रश्न पूछने का एक पैशन है. कम विदित तथ्यों अर्थात ऐसे मामले जो समाचार या पुस्तकों में भी मुख्य रूप से प्रस्तुत नहीं किए जाते, उदाहरण के लिए यदि कोई मनी लॉड्रिंग अधिनियम और इसके प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहा है तो उसे यह भी पता होना चाहिए कि इस कानून के अंतर्गत कौन सी एजेंसी मामलों की जांच करती है और केस दायर करती है. इसे प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रवर्तित किया जा रहा है. इसी तरह हम प्रति वर्ष मनाए जाने वाले अर्थ आवर के बारे में भी जानते हैं, किन्तु यह जानकारी रखना भी महत्वपूर्ण है कि इसे कौन सी एजेंसी अर्थात डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ. कार्यान्वित कर रही है.

V. पिछले 15 वर्षों के सं.लो.से.आ. प्रश्नों को दोहराना : प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त करने का एक मंत्र यह है कि आप, प्रारंभिक परीक्षा में सं.लो.से.आ. द्वारा पिछले 15 वर्षों में पूछे गए वर्तमान घटनाओं से संबंधित प्रश्नों को छोडक़र सामान्य अध्ययन के सभी प्रश्नों का अभ्यास करें, आपको 15-20 प्रश्न आसानी से मिल जाएंगे. कभी कभी पिछले वर्ष के प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं. इनके अतिरिक्त सं.लो.से.आ. द्वारा सी.ए.पी.एफ., एन.डी.ए. के लिए संचालित पिछले वर्षों की परीक्षाओं से भी प्रश्न लिए जाते हैं. एस.एस.सी. परीक्षाओं से भी कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं. इसलिए व्यावसायिक कोचिंग एवं वेबसाइट द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों का अभ्यास करने की अपेक्षा पिछले वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास करना अधिक बुद्धिमानी है क्योंकि ये प्रश्न प्रामाणिक होते हैं और इन्हें परीक्षा में पुन: पूछा जा सकता है.

VI. सी.एस.ए.टी. हेतु तैयारी-नीति : सी.एस.ए.टी. उत्तीर्णता प्रकृति की होती है और अब इसके लिए केवल उत्तीर्णता अंक (अर्थात केवल33%) ही प्राप्त करने होते हैं, इसलिए सी.एस.ए.टी. के लिए बहुत अधिक समय देना समझदारी नहीं है. सी.एस.ए.टी. की तैयारी करने का श्रेष्ठ तरीका यह है कि आप सी.एस.ए.टी. पाठ्यक्रम में अपने मजबूत क्षेत्र का पता लगाएं और उत्तीर्णता अंक प्राप्त करने के लिए आप अपने उस क्षेत्र की अच्छी तैयारी करें, उदाहरण के लिए, यदि गणित और तर्कसंगतता में आप माहिर हैं तो आप इन्हें अपना साधन बनाएं और आप इनसे उत्तीर्णता के लिए अपेक्षित न्यूनतम अंक प्राप्त कर लेंगे. इसी तरह कॉम्प्रीहेंसन भाग आपके लिए विशिष्ट है. परीक्षा में लाभ लेने के लिए इसका उपयोग करें.

प्रारंभिक सामान्य अध्ययन (जी.एस.) पाठ्यक्रम की डिकोडिंग

·         राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वर्तमान विषय : अपने व्यापक कवरेज तथा विविध प्रकृति के संबंध में यह, प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम का सबसे चुनौतीपूर्ण भाग है. यहां वर्तमान घटनाएं स्वयं में कोई समस्या नहीं हंै. बल्कि समस्या है इसके संबंध में उम्मीदवारों की प्रवृति या सोच की. वर्तमान घटनाओं की तैयारी दिन-प्रति-दिन आधार पर की जाती है, किंतु अधिकांश उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा के अंतिम दिन तक इसे टालते रहते हैं और अचानक अंत में वे घबरा जाते हैं. अंतिम क्षणों में वर्तमान घटनाओं की तैयारी करना आपके लिए निश्चित रूप से कठिन होगा क्योंकि इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से आपको बहुत अधिक सूचना जुटानी होती है. इसलिए, यह क्षेत्र आपकी दैनिक तैयारी का एक भाग होना चाहिए. इसके अलावा, वर्तमान घटनाओं के विभिन्न विषयों पर सूचना एकत्र करने के स्रोत विभिन्न प्रकृति के होने चाहिएं. कम से कम 2-3 समाचार पत्रों का गहन पठन किया जाना चाहिए. इनमें कई पत्रिकाएं, द इकोनॉमिस्ट, टाइम न्यूजवीक जैसे कोई विदेशी साप्ताहिक समाचारपत्र भी शामिल होने चाहिएं. पिछले एक वर्ष की घटनाओं की विस्तृत रूप में तैयारी की जानी चाहिए. इसके अतिरिक्त, पिछले वर्ष से पूर्व के दो वर्षों की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं की भी तैयारी करें.

·         इतिहास एवं संस्कृति : आजकल कला तथा संस्कृति भाग पर अधिक प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति है. इसके लिए ए.एल. बाशय की द वंडर दैट वाज इंडिया और गजटियर ऑफ इंडिया आदि जैसी पुस्तकों के माध्यम से व्यापक तैयारी की जानी चाहिए आधुनिक भारत पर अधिक बल दिया जाए, क्योंकि इतिहास पाठ्यक्रम के इसी भाग से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं. प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के लिए उम्मीदवार एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तकों पर निर्भर रह सकते हैं, किन्तु आधुनिक भारत के 2-3 अलग-अलग पुस्तकों का अध्ययन किया जाना चाहिए.

·         भूगोल : भूगोल में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी भी शामिल है जो इसे प्रारंभिक परीक्षा का एक बड़ा भाग बनाते हैं. भूगोल खंड पर व्यापक ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि किसी भी अन्य भाग की तुलना में इस भाग के अधिक अंक होंगे. भूगोल को समझने के लिए एटलस पठन जरूरी है. पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के लिए एनविस इंडिया जैसी वेबसाइट और डाउन टू अर्थ जैसी पत्रिकाएं उपयोगी होंगी.

·          राजतंत्र : राजतंत्र भाग के लिए भारतीय संविधान का व्यापक ज्ञान होना जरूरी है. भारतीय संविधान पर अच्छी पाठ्य पुस्तकों का अध्ययन करें, किंतु इसके साथ ही संविधान तथा उसकी व्याख्या के लेख भी पढ़े जाने चाहिए. इसके लिए, मैं आपको भारतीय संविधान पर पी.एम. बक्षी की पुस्तक पढऩे की सलाह दूंगा. संवैधानिक प्रावधानों के अतिरिक्त न्यायपालिका, विधान मंडल अधिशासन मामलों में वर्तमान विकास भी अध्ययन किया जाना चाहिए. राजतंत्र और विधि (कानून) से संबंधित मामलों पर जानकारी को अद्यतन करने के लिए दो वेबसाइटों नामत: लाइव लो तथा पी.आर.एस. इंडिया का उपयोग करने का परामर्श देता हूं.

प्रारंभिक परीक्षा 2019 के लिए न्यायपालिका और उच्चतम न्यायालयों के महत्वपूर्ण अधिनिर्णयों, चुनाव कानूनों में परिवर्तन और आर.पी.ए. अधिनियम, 1951 में बदलाव मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.

अर्थशास्त्र एवं सामाजिक विकास : यद्यपि अंकों के संबंध में अर्थशास्त्र पर कम प्रश्न होते हैं, किंतु इसका करेंट अफेयर्स पक्ष बढ़ रहा है. अन्य शब्दों में, अर्थव्यवस्था पर पारम्परिक प्रश्नों के स्थान पर अधिक वर्तमान आर्थिक प्रश्न होते हैं. यह बजट, आर्थिक सर्वेक्षण के एक व्यापक ज्ञान को सुदृढ़ बनाता है और गुलाबी समाचारपत्रों (वित्तीय समाचार पत्र गुलाबी न्यूजप्रिंट में मुद्रित किए जाते हैं) में प्रकाशित होने वाले आर्थिक समाचारों का ध्यानपूर्वक मनन किया जाना चाहिए.

·         द्य सरकारी योजनाएं, नीतियां और कार्यक्रम: सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में प्रश्न बड़ी संख्या में पूछे जाते हैं. इसके लिए आपको महत्वपूर्ण सरकारी वेबसाइटें विशेष रूप से कृषि, ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, आदि मंत्रालयों, जो विभिन्न कल्याण योजनाएं चलाते हैं, की वेबसाइटें देखने की आवश्यकता है. यहां समस्या यह है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों पर प्रश्न आम प्रकृति के नहीं होते हैं. किसी विशेष योजना से संबंधित उसके तात्कालिक विवरण भी पूछे जाते हैं. इसलिए प्रत्येक सरकारी योजना के तात्कालिक विवरणों का अध्ययन करना भी आवश्यक होता है, अन्यथा आपके लिए प्रश्न का सही विकल्प लेने में कठिनाई आ सकती है, भले ही आप उस योजना के बारे में ज्ञान रखते हों.

·         द्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : इस भाग की श्रेष्ठ कवरेज के लिए दो आयामी नीति का अनुपालन किया जाना चाहिए, पहली, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के मूल सिद्धांतों का विज्ञान पर एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों का पठन किया जाना चाहिए. दूसरी, अनुप्रयुक्त विज्ञान (अधिकांश रूप से वर्तमान घटना भाग) की तैयारी समाचारपत्रों और वैज्ञानिक पत्रिकाओं से की जानी चाहिए.

प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्णता अंक प्राप्त करने की कार्यनीति : सभी को यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि प्रारंभिक परीक्षा के सम्पूर्ण  पाठ्यक्रम पर अधिकार प्राप्त करना अवास्तविक है. आवश्यकता यह है कि पाठ्यक्रम के पर्याप्त भाग पर अधिकार हो और वह भी चुनी हुई तैयारी में. सामान्यत: प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन भाग में उत्तीर्ण होने के लिए आपको 110 अंकों की आवश्यकता होती है. ये अंक प्राप्त करने के लिए एक सुरक्षित कार्यनीति यह है कि पाठ्यक्रम के कुछ महत्वपूर्ण भागों अर्थात इतिहास, संस्कृति और राजतंत्र पर आपका अच्छा अधिकार हो और यह सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों से आपके कम से कम 20-25 उत्तर सही हों. इसके बाद उम्मीदवारों को शेष महत्वपूर्ण भागों भूगोल, अर्थशास्त्र आदि से कम से कम 15-20 सही उत्तर सुनिश्चित करने चाहिए. इससे आपको कम से कम 40 सही उत्तर प्राप्त हो जाएंगे. अंत में उम्मीदवारों को कम से कम 15  सही उत्तरों के लिए वर्तमान घटनाओं की अच्छी तैयारी करनी चाहिए. यदि तैयारी की इस पद्धति का सही तरीकों से अनुपालन किया जाता है तो कोई भी उम्मीदवार कुल 200 अंकों में से अपेक्षित 110 अंक प्राप्त कर सकता है.

सुझाई गई अध्ययन पुस्तकों की सूची

वर्तमान घटनाएं

1.       इंडिया ईयर बुक - 2019

2.       पर्यावरण एवं वन, जनजाति कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण, सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग, अक्षय ऊर्जा विभाग आदि मंत्रालयों की वार्षिक रिपोर्टें.

3.       समाचार पत्र : टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, बिजनेस स्टेंडर्ड, मिंट.

4.       पत्रिकाएं : फ्रंट लाइन, डाउन टू अर्थ, योजना.

वेबसाइट : पी.आई.बी., पी.आर.एस. इंडिया.

इतिहास 

1.       एन.सी.ई.आर.टी. : प्राचीन भारत (आर.एस. शर्मा), मध्यकालीन भारत (सतीश चन्द्र), आधुनिक भारत (विपिन्न चन्द्र)

2.       ए.एल. बाशम : द वंडर दैट वाज़ इंडिया

3.       द गजेटियर ऑफ इंडिया खंड-2

4.       विपिन्न चंद्र : भारत का स्वतंत्रता संग्राम

5.       ए.आर. देसाई : भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि

6.       बी.एल. ग्रोवर : आधुनिक भारत

7.       आर.सी. प्रधान : राज और स्वराज

कला एवं संस्कृति

1.       बेसिल ग्रे : द आर्ट ऑफ इंडिया

2.       कला एवं संस्कृति पर प्रकाशन विभाग की पुस्तकें

3.       ए.एल. बाशम : द वंडर दैट वाज़ इंडिया (कला एवं वास्तुकला के अध्याय)

4.       द गजेटियर ऑफ इंडिया, खंड-2 : कला, साहित्य एवं संस्कृति के अध्याय

भूगोल

1.       कक्षा छठीं से लेकर बारहवीं तक कि एन.सी.ई.आर.टी. की भूगोल की सभी पुस्तकें.

2.       भूगोल पर आई.सी.एस.ई. की पुस्तकें-आठवीं से दसवीं कक्षा तक की.

3.       गोह चेह लिऑग : सर्टिफिकेट ह्यूमन एण्ड फिजीकल ज्योग्राफी

4.       ऑक्सफोर्ड इंडिया पब्लिकेशन का एटलस

राजतंत्र एवं संविधान

1.       पी.एम. बक्षी : भारत का संविधान

2.       डी.डी. बासु : भारत का संविधान

3.       एस.सी. कश्यप : हमारा संविधान

4.       एम.पी. सिंह : इंडियन फेडरलिज्म

5.       बी.के. शर्मा : भारतीय संविधान

अर्थव्यवस्था

1.       एन.सी.ई.आर.टी. : भारतीय आर्थिक विकास

2.       मिश्रा एवं पुरी : भारतीय अर्थव्यवस्था

3.       आर्थिक सर्वेक्षण 2015 - 2016

4.       योजना

5.       बिजनेस स्टेंडर्ड, मिंट समाचार पत्र

सामान्य विज्ञान

1.       एन.सी.ई.आर.टी. : भौतिकी, रसायन विज्ञान पर दसवीं कक्षा की पुस्तकें और जीव विज्ञान पर ग्यारहवीं एवं बारहवीं की पुस्तकें.

2.       पत्रिका : डाउन टू अर्थ.

(एस.बी. सिंह एक जाने माने शिक्षाविद् और आई.ए.एस. मैंटोर हैं. उनसे उनकी ई-मेल Sb_singh2013@yahoo.com पर सम्पर्क किया जा सकता है)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल से साभार)