नौकरी फोकस


volume-4, 27 April - 03 May 2019

वित्तीय जगत में रोजग़ार के अवसर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

प्रबंधन शिक्षा संस्थानों में एक सर्वेक्षण में यह पाया गया कि वित्त में विशेषज्ञता पाठ्यक्रम अधिकतम संस्थानों में उपलब्ध है और यह ऐसा विशेषज्ञता क्षेत्र है जिसकी मांग सबसे अधिक है. इसे मांग और आपूर्ति के रूप में समझा जा सकता है.

सभी व्यावसायिक संगठनों को अनेक संसाधनों की आवश्यकता होती है और वित्त भी इन संसाधनों में से एक है. वास्तव में धन या वित्त का संबंध किसी भी व्यापारिक संगठन के अधिकांश पहलुओं के साथ होता है. यहां तक कि व्यक्तियों और परिवारों के लिए भी धन अत्यन्त महत्वपूर्ण है. हमारा बजट राष्ट्र के लिए धन से ही संबद्ध है.

इस प्रकार व्यापक वित्त जगत में हम सभी समाहित हैं. व्यावसायिक कार्यनिष्पादन काफी हद तक वित्तीय प्रबंधन पर निर्भर करता है और सभी मध्यम और बड़े संगठनों को अपने वित्त का प्रबंधन करने के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है.

कंपनियों के लिए वित्त के अनेक निहितार्थ हैं. ऐसे सभी निहितार्थों को समझने के लिए विषय के विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है. वास्तव में, इस विषय को अध्ययन के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है. दुनिया के देशों के बीच बढ़ते सहयोग और उदार व्यापार प्रणालियों के मद्दे नजऱ, यह विषय अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है. प्रत्येक व्यावसायिक संगठन अपने लाभ को अधिकतम करने और शेयरधारकों की संपत्ति का मूल्य बढ़ाने के प्रयास करता है. व्यापार जगत दिन-प्रतिदिन प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है. प्रारंभ में अस्तित्व के लिए और फिर इस तरह की प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए वित्तीय संसाधनों सहित सभी संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक हो जाता है. इस प्रकार वित्तीय व्यवसायी हर जगह बड़ी मांग में हैं और उनके लिए रोजग़ार के असंख्य अवसर उपलब्ध हैं.

वित्तीय क्षेत्र में समुचित रोजग़ार पाने के लिए निम्नलिखित में से एक या अधिक योग्यताएं अपेक्षित हैं:-

वित्त में विशेषज्ञता के साथ व्यापार प्रबंधन में स्नातकोत्तर: प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि जिसे एम.बी.ए. या एम.एम.एस. के रूप में जाना जाता है, कि मांग इन दिनों युवाओं द्वारा सबसे अधिक की जा रही है. इसके लिए पूर्णकालिक पाठ्यक्रम को पूरा करने में दो साल लगते हैं जबकि अंशकालिक पाठ्यक्रम के लिए 3 साल की आवश्यकता होती है. पाठ्यक्रम में उम्मीदवारों को एक या एक से अधिक विशेषज्ञताओं का चयन करना होता है. वित्त को विशेषज्ञता के रूप में चुन कर आप इस क्षेत्र में अवसरों का लाभ उठाने के प्रयास कर सकते हैं.

वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर: कुछ प्रबंधन संस्थान मास्टर्स ऑफ फाइनेंशियल मैंनेजमेंट अर्थात वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर नाम से एक पाठ्यक्रम संचालित करते हैं जो काफी हद तक उपरोक्त पाठ्यक्रम के समान है.

मास्टर ऑफ कॉमर्स: वित्तीय क्षेत्र में रोजग़ार के लिए कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन यानी वाणिज्य में स्नातकोत्तर योग्यता भी एक माध्यम है. हालांकि एकाउंटेंसी या लेखाविधि वाणिज्य का एक प्रमुख हिस्सा होती है, फिर भी कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन को एक सकारात्मक पहलू समझा जाता है और कई कंपनियां अपने खातों और वित्तीय कार्यों के

लिए एम.कॉम डिग्री धारकों को नियुक्त करना पसंद करती हैं.

चार्टर्ड अकाउंटेंसी: यह एक उच्च विशेषज्ञतापूर्ण पाठ्यक्रम है और इसे

10 + 2 स्तर उत्तीर्ण करने के बाद शुरू किया जा सकता है. बैचलर ऑफ  कॉमर्स (बी.कॉम) के साथ भी चार्टर्ड अकाउंटेंसी कोर्स करने का विकल्प उपलब्ध है. यह पाठ्यक्रम दो भागों-इंटर और फाइनल में विभाजित किया गया है और इस के बाद इन्टर्नशिप के रूप में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है. इस पाठ्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी ‘‘इंस्टीट्यूट ऑफ  चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’’ की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है.

अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर: अर्थशास्त्र के अध्ययन से रोजग़ार के अवसरों के अनेक द्वार खुलते हैं. इस डिग्री के साथ वित्तीय क्षेत्र में भी रोजग़ार संभव है. अर्थमिति या सांख्यिकी में विशेषज्ञता के साथ आप इस क्षेत्र में अपनी संभावनाएं बढ़ा सकते हैं. सांख्यिकी में पोस्ट-ग्रेजुएशन का स्वतंत्र कोर्स भी उपलब्ध है.

कॉस्ट एंड वक्र्स अकाउंटेंसी: यह कोर्स चार्टर्ड अकाउंटेंसी की तर्ज पर विकसित किया गया है. इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वक्र्स अकाउंटेंट्स ऑफ  इंडिया की वेबसाइट से आप इस पाठ्यक्रम की प्रासंगिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

इस प्रकार वित्त में रोजग़ार पाने के लिए अनेक योग्यताओं को माध्यम बनाया जा सकता है. वर्तमान प्रवृत्ति को देखें, तो उपरोक्त अधिकांश वित्तीय रोजग़ार वित्त में विशेषज्ञता के साथ एमबीए योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को मिलते हैं, इसका एक कारण यह भी है कि उनकी उपलब्धता अधिक है. इसके बाद चार्टर्ड अकाउंटेंसी में योग्यता रखने वाले विद्यार्थियों का स्थान हैं, जो आपूर्ति में तुलनात्मक रूप से कम हैं.

वित्त संबंधी अध्ययन के विषय

वित्तीय क्षेत्र का कवरेज अत्यन्त व्यापक है. इससे संबंधित अध्ययन के विषयों में शामिल हैं- व्यापार विश्लेषण और मूल्यांकन, सुरक्षा विश्लेषण, पोर्टफोलियो प्रबंधन, जोखिम, परियोजना मूल्यांकन, बैलेंस शीट यानी तुलनपत्रक विश्लेषण, निवेश बैंकिंग, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन, व्यापारिक निर्णयों के लिए मात्रात्मक विश्लेषण, सुरक्षा मूल्यांकन, निजी इक्विटी, वैश्विक/उभरते वित्तीय बाजार, व्यवहारिक वित्त, विलय और अधिग्रहण, हेज फंड, डेरिवेटिव आदि.

यदि आप वित्त के किसी विशेष क्षेत्र में रुचि रखते हैं, तो आपको पाठ्यक्रम चुनने से पहले विशेषज्ञता और वैकल्पिक विषयों की जांच करनी चाहिए.

वित्तीय व्यवसायी के कार्य

वित्त व्यवसायी के कार्यों में शीर्ष प्रबंधन के परामर्श से संगठन की समग्र वित्तीय रणनीति तैयार करना, लाभ और हानि का अनुमान लगाना, सर्वोत्तम शर्तों पर वित्त के स्रोतों की खोज करना, वित्तीय विवरण और वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार करना, आंतरिक और बाहरी लेखा परीक्षकों के साथ समन्वय करना, कानूनी अनुपालन और विनियमन आदि सुनिश्चित करना शामिल है. उसके ये कार्य केवल प्रतीकात्मक हैं.

अध्ययन कहां करें

वित्तीय और अन्य संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछ संस्थानों के नाम इस प्रकार हैं:

भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (और अन्य केंद्रों पर).

श्रीराम कॉलेज ऑफ  कॉमर्स, नई दिल्ली.

जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्ट्डीज, मुम्बई.

एस पी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट रिसर्च, मुम्बई.

यह सूची लंबी हो सकती है, इसलिए केवल कुछ नाम दिए गए हैं.

वित्तीय प्रबंधन में सामान्य पाठ्यक्रम कई संस्थानों में उपलब्ध हैं. हालांकि, कुछ विश्वविद्यालय/संस्थान विशेष अभिविन्यास वाले वित्तीय पाठ्यक्रम लेकर सामने आए हैं. कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:-

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर-एमबीए विदेश व्यापार/वित्तीय प्रशासन/ वित्तीय सेवाएं.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  सिक्योरिटीज मार्केट, नवी मुंबई-क्वांटिटेटिव फाइनेंस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, वित्तीय इंजीनियरी और जोखिम प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, ट्रेजरी मैनेजमेंट में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट, पुणे-प्रबंधन (बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.

मैसूर विश्वविद्यालय- एम.कॉम (वित्तीय सेवाएं)

गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स, पुणे- एम.एससी (वित्तीय अर्थशास्त्र)

नर्सी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई-एम.एससी (फाइनेंस)

अल्केश दिनेश मोदी इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल मैनेजमेंट स्टॅडीज, मुंबई विश्वविद्यालय-वित्तीय सेवाएं प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि.

वित्तीय अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्व-विद्यालय-एमबीए बिजनेस इकोनॉमिक्स.

गोवा विश्वविद्यालय-एमबीए वित्तीय सेवाएं

टी.ए. पई प्रबंधन संस्थान, मणिपाल- प्रबंधन (बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.

मणिपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन - एमएससी वित्तीय अर्थशास्त्र.

प्रबंधन प्रौद्योगिकी संस्थान, गाजियाबाद-प्रबंधन (बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाएं) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.

बेरहामपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा- मास्टर ऑफ फाइनेंस एंड कंट्रोल.

आईएफएमआर ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस, चेन्नै-एमबीए फाइनेंशियल इंजीनियरिंग.

के जे सामैया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च-प्रबंधन (वित्तीय सेवाएं) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा.

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर-एमबीए फाइनेंस एंड कंट्रोल.

बेरहामपुर विश्वविद्यालय- बैंकिंग वित्त में स्नातकोत्तर डिप्लोमा.

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर- वित्तीय विश्लेषण और नियंत्रण में स्नातकोत्तर, एम.कॉम बिजनेस फाइनेंस और इकोनॉमिक्स, पीजी डिप्लोमा इन कॉर्पोरेट मैनेजरियल फाइनेंस, पीजी डिप्लोमा इन इंटरनेशनल बिजनेस एंड फाइनेंस.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी -पीजी डिप्लोमा इन इस्लामिक बैंकिंग एंड फाइनेंस, पीजी डिप्लोमा इन बिजनेस फाइनेंस.

रिसर्च नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस पॉलिसी, आईआईएम्स, आईएमआई.

रोज़गार के अवसर

वित्तीय पेशेवरों की जरूरत, सार्वजनिक क्षेत्र या निजी क्षेत्र, विनिर्माण या सेवा संगठन आदि सभी स्थानों पर है. वास्तव में, जैसा कि पहले कहा गया है, अधिकांश संस्थानों में स्नातकोत्तर प्रबंधन कार्यक्रमों में सभी विशेषज्ञता क्षेत्रों में वित्त विशेषज्ञता अपनाने वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक है.

यदि आपके पास अपेक्षित योग्यता है तो वित्तीय क्षेत्र में कॅरिअर चुनना चाहिए. यदि आप संख्या, अनुपात और गणना में कुशल हैं और आपको जटिलताएं अच्छी लगती हैं, तो वित्तीय क्षेत्र आपके लिए एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है.

वित्त प्रोफाइल के लिए अनेक चयन प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से किए जाते हैं. बहुराष्ट्रीय कंपनियां, विदेशी और नए युग के निजी बैंक कैंपस सिलेक्शनके जरिए जूनियर फाइनेंस प्रोफेशनल्स की अपनी जरूरतें पूरी करते हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी संगठन जैसे नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन, ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, ऑयल इंडिया लिमिटेड, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन, पेट्रोनेट एलएनजी आदि हर साल वित्त प्रबंधन और कुछ अन्य विषयों में प्रशिक्षुओं की भर्ती करते हैं. वित्त पेशेवर बैंकों (सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों) में सामान्य बैंकिंग अधिकारियों के रूप में प्रवेश कर सकते हैं. उन्हें क्रेडिट, कॉर्पोरेट और बुनियादी ढांचे के वित्त आदि के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों के रूप में भी लिया जाता है. सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बीमा कंपनियों को वित्त पेशेवरों की निरन्तर आवश्यकता होती है. जीवन बीमा निगम, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और ओरिएंटल फॉयर एंड जनरल इंश्योरेंस जैसे संगठनों के आकार को देखते हुए उनमें अधिक अवसर हैं. अधिकांश राज्यों में वित्त पेशेवरों द्वारा प्रबंधित राज्य वित्त निगम हैं. यहां तक कि औद्योगिक विकास/वित्त निगमों को भी वित्तीय पेशेवरों की सेवाओं की आवश्यकता होती है. कई कॉर्पोरेट घरानों के पास एक स्वतंत्र उद्यम के रूप में गैर-बैंकिंग वित्तीय शाखाएं हैं, जिसका एक उदाहरण पीटीसी इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज है. आईडीएफसी जैसी बुनियादी ढांचा विकास वित्त कंपनियां भी हैं. एक और बड़ा खंड हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का है जैसे कि कैनफिन होम्स, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस आदि. ऐसे सभी संगठनों में स्पष्ट रूप से अधिकतम अनुपात वित्तीय पेशेवरों का है.

म्यूचुअल फंड उद्योग हमारे देश में विकास की राह पर है. म्यूचुअल फंड शेयरों, ऋण और अन्य वित्तीय विलेखों में निवेश करने के लिए व्यक्तियों और कंपनियों से धन जुटाते हैं. इसलिए म्यूचुअल फंड का मूल काम कम से कम जोखिम के साथ अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना है. म्यूचुअल फंड कंपनियों में उपलब्ध दो प्रमुख पद फंड मैनेजर और इक्विटी विश्लेषक के हैं. फंड मैनेजर विशेष योजनाओं के तहत जुटाए गए धन के प्रबंधन की समग्र जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं, जबकि इक्विटी विश्लेषक ऐसी कंपनियों और शेयरों की सूची तैयार करते हैं जिनमें निवेश से अधिकतम रिटर्न आने की उम्मीद हो. वे नियमित रूप से यह तय करते हैं कि कौन से स्टॉक कब खरीदने या बेचने हैं. यहां तक कि स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियों को भी इक्विटी विश्लेषकों और शोधकर्ताओं की आवश्यकता पड़ती है.

वित्त में एक और आला कॅरिअर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में तलाशा जा सकता है. ऐसी सभी कंपनियों, जो जमा, इक्विटी और ऋण जुटाना चाहती हैं, को रेटिंग एजेंसियों से अपनी साख निर्धारित करवानी होती है. क्रिसिल, आईसीआरए और केयर हमारे देश की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां हैं. स्टैंडर्ड एंड  पूअर्स जैसी वैश्विक एजेंसियां भी हैं.

वित्तीय व्यवसायियों के लिए मर्चेंट बैंकरों, निवेश बैंकरों और घरेलू तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के साथ भी चुनौतीपूर्ण अवसर हैं. ऐसी संस्थाएं  आमतौर पर आकर्षक वेतन देने वाली समझी जाती हैं. ये संस्थाएं निश्चित रूप से काम के मामले में भी अधिक अपेक्षाएं रखती हैं. पेंशन फंड, राष्ट्रीय और वैश्विक ऑडिट फर्मों में भी रोजग़ार के अवसर मौजूद हैं.

सॉफ्टवेयर विकास कंपनियों को डोमेन विशेषज्ञोंके रूप में वित्तीय विशेषज्ञों की भी आवश्यकता होती है. पत्रकारिता में रुचि रखने वाले और वित्त या अर्थशास्त्र की पृष्ठभूमि वाले लोग मीडिया हाउस के साथ काम करना पसंद कर सकते हैं. वित्तीय पत्रकारों के लिए समाचार पत्रों, व्यावसायिक पत्रिकाओं या टीवी चैनलों में रोजग़ार के अवसर उपलब्ध हैं. इन व्यवसायियों के लिए वित्तीय योजनाकार या सलाहकार के रूप में भी अन्य संभावनाएं हैं.

अनेक इंजीनियर स्नातक योग्यता प्राप्त करने के बाद एमबीए (वित्त) के लिए जाना पसंद करते हैं. उन्हें औद्योगिक वित्त के क्षेत्र में काम करने के अधिक अनुकूल माना जाता है. वित्त के साथ एक और लोकप्रिय संयोजन कानून की डिग्री है. अतिरिक्त डिग्री या प्रमाणपत्र के लिए जाना व्यक्तिगत पसंद की बात है, लेकिन इस लेख के शुरुआत में वर्णित पाठ्यक्रमों में से कोई एक वित्तीय क्षेत्र में कॅरिअर के लिए पर्याप्त माना जा सकता है.

शैक्षणिक अभिरुचि वाले व्यक्ति कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, प्रबंधन और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों में वित्त शिक्षण का विकल्प चुन सकते हैं. यह शिक्षण कार्य फ्रेशर के रूप में या कुछ कार्य अनुभव होने के बाद किया जा सकता है. उच्च कक्षाओं को पढ़ाने के लिए डॉक्टरेट की डिग्री एक अनिवार्य आवश्यकता बनती जा रही है. आप भारतीय प्रबंधन संस्थानों में से किसी एक में प्रबंधन में फेलो (डॉक्टरेट के समकक्ष) पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर सकते हैं. प्रबंधन में डॉक्टरेट पाठ्यक्रम विश्वविद्यालयों और अन्य प्रबंधन संस्थानों जैसे एक्सएलआरआई आदि में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं.

कॅरिअर विकास

कॉरपोरेट कॅरिअर के तहत लंबी अवधि में, कोई भी योग्य और मेहनती पेशेवर किसी लघु, मध्यम या बड़े संगठन के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के पद तक पहुंच सकता है. मुख्य वित्तीय अधिकारियों (सीएफओज) में से कुछ पिछले अनुभव के आधार पर कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी बन सकते हैं.

(लेखक मुंबई स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल: v2j25@ yahoo.in)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल से साभार)