नौकरी फोकस


Volume-6, 11 - 17 May 2019

जब परीक्षा में न मिलें अच्छे अंक

तो क्या करें

श्री प्रकाश शर्मा

कोई लडक़ा अपने अस्त-व्यस्त कपड़ों और बिखरे हुए बालों तथा उदास चेहरे के साथ, घर लौटता है और अपनी मां को संबोधित अपने स्कूल के प्रधानाध्यापक का एक पत्र सौंपता है, जिसमें लिखा है, ‘‘आदरणीय .....मैडम, आपका बेटा पढ़ाई में बहुत सुस्त है और हमारे स्कूल में पढ़ाई जारी रखने के वास्ते वह साधारण सी प्रतिभा भी नहीं रखता है. आपको सूचित करते हुए मुझे दु:ख हो रहा है कि आपके बच्चे को आगे पढ़ाई के लिये यहां रख पाना मेरे लिये बहुत कठिन है. बेहतर यह होगा कि आप कृपा करके उसे किसी अन्य स्कूल में शिफ्ट करवा दें, जो इनके जैसे बच्चों की अच्छी तरह से देखभाल करे.’’ पत्र को पढऩे के बाद, वह गऱीब महिला निराशा से ग्रसित हो जाती हैै और उसकी आंखों में आंसू भर आते हैं.

‘‘मां मेरे प्रधानाध्यापक के पत्र में क्या लिखा है?’’ बालक अपनी मां से बहुत मासूमियत से पूछता है. अपनी आंखों से तुरंत आंसू पोंछते हुए, महिला अपने बेटे को सीने से लगा लेती है, उसे कसकर पकड़ लेती है, उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरती है और कहती है, ‘‘इस पत्र में मेरे बेटे के बारे में कुछ खास बात लिखी है जिसने मुझे खुशी से अभिभूत कर दिया है.’’ आपके प्रधानाध्यापक ने लिखा है कि आप स्कूल के बहुत ही असाधारण छात्र हो. कोई भी आपका दोस्त आप जैसा बुद्धिमान नहीं है. इसलिये स्कूल प्रशासन को आपकी मौजूदगी में पूरी कक्षा को पढ़ाने में कठिनाई हो रही है. आपके प्रधानाध्यापक चाहते हैं कि आपको एक ऐसे स्कूल में दाखिला दिलवाया जाये जहां आप जैसे उच्च बुद्धिमान बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं’’.

लडक़ा तो शांत हो जाता है लेकिन मां नहीं, ‘‘डरो मत मेरे बेटा और न ही इन बातों को लेकर चिंता करो. आपको किसी दूसरे स्कूल में जाने की ज़रूरत नहीं है. मैं घर पर ही आपको स्वयं पढ़ाऊंगी’’. और बाकी का सब इतिहास है. क्या आप जानते हैं वह लडक़ा कौन था, जी हां, आपने शत-प्रतिशत सही अनुमान लगाया है....वह कोई और नहीं बल्कि थॉम्स अल्वा एडिसन, महान अमरीकी वैज्ञानिक और उस ज़माने के  महान विचारक थे, और जिन्हें दुनिया भर में आविष्कारों के सर्वाधिक पेटेंट होने के सम्मान का श्रेय प्राप्त है. परंतु यह उस कहानी का अंत नहीं है जिसने थॉम्स अल्वा एडिसन को विश्व में प्रसिद्ध और प्रतिभावान वैज्ञानिक बना दिया. कहानी का चरमोत्कर्ष अभी बाकी है जो बहुत ही प्रेरणादायक है.

वर्षों बाद, जब एडिसन की मां की मृत्यु हुई, एक दिन उन्होंने अपने स्कूल के प्रधानाध्यापक के पत्र को पढ़ा, जो उनकी मां ने उनसे छिपाया हुआ था. एडिसन के लिये, यह बहुत ही आश्चर्यचकित करने वाला क्षण था और उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था, विशेषकर तब जब उसने पत्र के संदेश को पढ़ा. वह अपनी आंखों में आंसू नहीं रोक पाये और दहाड़ें मारकर रोने लगे. उन्होंने अपनी मां के अदम्य साहस और महत्वपूर्ण योगदान को पहले से कहीं ज़्यादा याद किया और उस महिला के प्रति बहुत ऋणी महसूस किया जिसने जीवन बदलने वाली भूमिका निभाते हुए उन्हें स्कूल के सबसे ‘‘बेवकूफ लडक़े’’ से ‘‘दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली और प्रसिद्ध वैज्ञानिक’’ में बदल दिया. उन्होंने अपनी मां के बारे में लिखा, ‘‘मुझे मेरी मां ने बनाया है. वह बहुत सच्ची थीं, इसलिए मुझे यकीन था, और मुझे लगा कि मेरे पास जीने के लिये कुछ है, मुझे निराश नहीं होना चाहिये’’.

क्या आप जानते हैं कि थॉम्स अल्वा एडिसन ने अपने संपूर्ण शैक्षणिक जीवन में केवल तीन माह की औपचारिक स्कूली शिक्षा ग्रहण की थी. आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि एडिसन जब एक बच्चे थे तो उन्हें बहुत कम आयु में ही सुनने की समस्या हो गई थी. उन्हें  गऱीबी के कारण भी बहुत कष्ट सहन करना पड़ा था और अपनी मां की वित्तीय सहायता करने के लिये उन्हें अख़बार बेचने के लिये मज़बूर होना पड़ा. जीवन में असफलता के बारे में उनका उद्धरण उन लाखों अभागे युवाओं के लिये प्रेरणा का स्रोत बन गया है जो अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद अपने प्रयासों में असफल रहे हैं- ‘‘मैं असफल नहीं हुआ, मुझे अभी 10,000 ऐसे तरीके मिले हैं, जो काम नहीं करते हैं.’’

एडिसन के जीवन की ऊपर वर्णित कहानी से कोई भी आत्मा को झकझोर देने वाला सवाल पूछने पर मज़बूर हो सकता है, यहां तक उन दिनों अंकों और ग्रेडों का रहस्यवादी प्रभामंडल भी नहीं था, जिसमें थॉम्स जैसा बहुत धीमी गति से पढ़ाई करने वाला लडक़ा ऐतिहासिक उपलब्धियों के चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया, जिसे पूरी दुनिया हासिल करने के लिये आज भी तत्पर है.

गऱीब बच्चों को पढ़ाने के लिये स्कूल और महान शिक्षक कहां थे, जो उन्हें अपने जीवन के अंत में बनना था, इसका एकमात्र श्रेय उनकी मां को गया, जिन्हें अपने और अपने बच्चे पर एक अटूट विश्वास था?

पृथ्वी ग्रह पर परीक्षा में अच्छे अंकों के लिये छात्रों की लालसा बहुत स्वाभाविक होने के अलावा और कुछ नहीं है. यकीनन यह आम परीक्षार्थियों की परीक्षा से पूर्व और बाद की महत्वाकांक्षा होती है. पुरानी कहावत है, सफलता के समान कुछ भी नहीं होता है. कौन इस बात से इनकार कर सकता है कि उच्चतर प्रतिशत स्कोर न केवल एक अच्छी सामाजिक-व्यक्तिगत पहचान प्रदान करता है, बल्कि प्रतिष्ठित कालेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश का सुनहरा पासपोर्ट भी साबित होता है. इसलिये अच्छे ग्रेड और उच्चतर प्रतिशत अंकों को प्राप्त करने में एक बार असफल होने को गलती से मानव जीवन के सभी पहलुओं में लगभग विफल मान लिया जाता है. और यह असफलता इतनी अज्ञानतापूर्ण है कि अधिकांश मामलों में इसके नतीजे बहुत ही हतोत्साहित करने वाले और दिल तोडऩे वाले साबित होते हैं. 

परंतु क्या अच्छे अंकों का आकर्षण और प्रभाव वास्तव में इतना दूरगामी, निर्णायक और व्यापक प्रभाव वाला होता है. क्या एकल असफलता अंकों के एक विशेष मानक तक उठने में असमर्थता का कारण बनती है, जिसे हम प्रलय कह सकते हैं. क्या यह उन सभी खूबसूरत रोजग़ार विकल्पों की प्राप्ति की शुरुआत का अंत है जिनकी आपने अपने जीवन में कभी योजना बनाई होगी? नहीं, निश्चित रूप से ऐसा नहीं है. मशूहर अमरीकी भौतिकीविद और कवि ओलिवर वेनडेल होल्मस ने कहा था, ‘‘दुनिया के महापुरुष आमतौर पर महान विद्वान नहीं रहे हैं, न ही इसके महान विद्वान महापुरुष थे.’’ इसका सीधा सा मतलब है कि किसी व्यक्ति की महानता और बुद्धिमत्ता के बीच एक त्रुटिरहित और सार्वभौमिक संबंध स्थापित करना काफी असंभव है. हालांकि, कुछ हद तक महानता और बुद्धिमत्ता एक दूसरे के लिये सहवर्ती और परस्पर संबद्ध हो सकते हैं, परंतु उन्हें एक दूसरे का सहसंयोजक नहीं कहा जा सकता है.

विश्व इतिहास अत्यधिक प्रख्यात विद्वानों और उनके विषयक्षेत्र के पेशेवरों के कई उदाहरणों से भरा हुआ है, जिनके पास कोई उच्च और औपचारिक शैक्षिक डिग्री और डिप्लोमा न होने के बावजूद वह सब अविश्वसनीय रूप से हासिल करने में सफल हुए जो अब मील के पत्थर के रूप में स्थापित हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शैक्षिक योग्यता, अंक और ग्रेड लोगों और उनके कॅरिअर को बनाने में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते हैं, लेकिन किसी के सबसे अच्छे सपने को साकार करने के लिये भी यह एकमात्र मानदंड नहीं है. इसलिये, एक परीक्षा में उत्कृष्ट अंक या शानदार ग्रेड प्राप्त करने में असफलता का मतलब कॅरिअर और जीवन दोनों की सुंदर यात्रा का अंत नहीं है. यह रुकावटों में से एक हो सकता है, एक विराम परंतु स्वर्णिम पथ की स्थाई बाधा कभी भी व्यावसायिक विकास और जीवन की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिये अग्रणी नहीं होगी.

हमें यह समझने की आवश्यकता है कि उच्च प्रतिशत अंक प्राप्त करने में विफलता कभी भी जीवन का अंत नहीं है. वास्तव में, कम प्रतिशत अंक कभी-कभी एक रूपांतरित और आनंदित जीवन के लॉन्चिंग पैड के रूप में बदल सकते हैं, और यदि हम ईमानदारी से धैर्य और दृढ़ता खोए बिना निम्नलिखित चरणों से गुजरते हैं तो एक होनहार कॅरिअर की शुरुआत हो सकती है:-

आत्म-विश्वास को भंग न होने दें

कौन कहता है कि अंक मायने नहीं रखते? लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी छात्र के कॅरिअर और जीवन के बारे में सब कुछ अंक ही करते हैं. किसी को भी यह अवश्य समझना चाहिये कि एक निश्चित प्रतिशत अंकों के लिये जरूरी नहीं कि वह सरासर किसी छात्र की प्रतिभा और परिश्रम का परिणाम है. एक परीक्षा में अंकों की प्राप्ति भी छात्र के दिमाग और विशेष विषयों के लिये उसकी पसंद से प्रभावित होती है. इसलिये यदि आप अन्य छात्रों के अनुरूप अंक प्राप्त नहीं करते हैं तो अपने आपको कम करके न आंकें. आत्म ग्लानि से ग्रसित मत हों. न ही खुद को पश्चाताप की घातक भावनाओं से भरें. अपने आपको अभागा और प्रतिकूल विशेषाधिकारी के तौर पर विचार करना बंद करें. अपने आत्मविश्वास के स्तर को हमेशा ऊंचा रखें और अनचाही कठिन परिस्थिति को शानदार तरीके से संभालें.

प्रसिद्ध अमरीकी लेखक हेलेन कैलर ने एक बार कहा था, ‘‘कोई भी मुस्कुराहट उतनी खूबसूरत नहीं होती, जितना आंसुओं से संघर्ष होता है.’’ इसलिए यदि आप अपने को बहुत परेशान और पीड़ा में पाते हैं, हमेशा विश्वास करें कि केवल उन संघर्षों और पीड़ाओं के ही ऐसे नतीजे निकलेंगे जो आपको धरती पर सबसे सफल व्यक्तियों में एक बना सकते हैं.

ऐसे व्यक्तियों के बहुत उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने जीवन में विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में अपेक्षाकृत अच्छे अंक प्राप्त करने में असफल होने के बावजूद प्रतिष्ठा और वेतन पैकेज में उत्कृष्टता हासिल की है. उन्होंने प्रतिशतत, श्रेणी, डिवीजन, रैंक और ग्रेड को नजर अंदाज किया. केवल एक चीज जो उन्होंने ध्यान में रखी थी वह यह थी कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अंक प्रतिशत और ग्रेड मायने रखते हैं परंतु वे जीवन और मृत्यु के मामले में उतने अधिक गंभीर नहीं हैं. अच्छे अंक और ग्रेड हासिल करने में असफलता का मतलब कभी भी अच्छा कॅरिअर और सार्थक जीवन का अंत नहीं होता है. जीवन व्यावसायिक रूप से आशाजनक, भौतिक रूप से शानदार और व्यावहारिक रूप से सार्थक बनाने के लिये कोई भी व्यक्ति किसी भी समय शुरुआत कर सकता है.

इस बात को जानिए कि आप कहां पर कमज़ोर हैं और आपकी कौन सी कमज़ोरियां हैं         

व्याकुल होना आसान है और इससे अधिक स्वाभाविक कुछ भी नहीं हो सकता है कि जब कोई छात्र ऐसे परिणामों को हासिल करने में विफल हो जाता है जिसकी उसने कभी अपेक्षा नहीं की थी. परंतु परेशान और व्याकुल होने से आपको कोई फायदा नहीं होगा. अब यह स्थापित हो चुका है कि विफलता सफलताओं की एक शृंखला की नींव है जो केवल उन लोगों को ताज पहनाती है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिये संघर्ष करना नहीं छोड़ते हैं. असफलताएं हमें जीवन में अंतत: सफल होने के लिये समस्याओं की एक शृंखला को दूर करने के लिये अपरिहार्य गुर सिखाती हैं.

इसके लिये अपने जीवन में असफलता के कारणों को ठीक करने के लिये एक गंभीर और ईमानदार आत्मनिरीक्षण करना शीघ्र अपेक्षित होता है. जब असफलता के कारण स्पष्ट होते हैं और आप उन्हें ईमानदारी से स्वीकार करते हैं तो यह पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है कि आप कितनी तीव्रता से और तुरंत उन्हें सुधारने के कदम उठाते हैं. उनका कहना है कि विश्व की सबसे लंबी यात्रा की श्ुारूआत अकेले होती है और अपनी दुखती रग को पहचानने का यह एक कदम जीवन में प्रगति और समृद्धि का अग्रदूत साबित हो सकता है.

परीक्षा में अंक हासिल करना ज्ञान से बहुत अलग हैै

सर्वमान्य नियम है कि परीक्षा किसी विशेष विषय की जानकारी का परीक्षण है और अंकों का प्रतिशत उसके बाद उपलब्धि का मूल्यांकन होता है. परंतु होता क्या है कि छात्र विषयों का अच्छा ज्ञान रखने के बावजूद अच्छे अंक प्राप्त करने में असफल रहते हैं. इसका कारण यह है कि अच्छे अंक प्राप्त करना पूरी तरह से ठोस योजना, निर्बाध और रणनीतिक तैयारी कार्यक्रम, त्रुटिहीन समय प्रबंधन, प्रतिकूल सामाजिक-पारिवारिक स्थितियों और कई अन्य कारकों के साथ मुकाबला करने का साहस है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परीक्षार्थी की मानसिक स्थिति को प्रभावित करते  हैं.

यह आपके उत्तरों को त्रुटिरहित लेखन की कला भी है. कभी कभार, परीक्षा के दौरान कड़ाई से न टिकने की ललक, कार्यनिष्पादन के स्तर को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है और इन कारकों का किसी परीक्षार्थी के ज्ञान के स्तर से बहुत कम संबंध होता है.

कम अंक हासिल करने का अर्थ अपमान नहीं है

बुरे परिणामों या परीक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने में विफल रहने की प्रतिक्रिया के रूप में छात्रों के घर से भागने और आत्महत्या करने की घटनाएं सामान्यत: होती रहती हैं जिनकी मीडिया में काफी चर्चा होती है. वास्तव में यह गंभीर प्रवृत्ति है जिसके लिये गंभीर आत्म विश्लेषण की ज़रूरत है. परीक्षाएं, परिणाम, अंक, ग्रेड आदि क्षणिक चीजें हैं जिनमें सुधार किया जा सकता है और ठीक किया जा सकता है और हमारी पसंद और वरीयता को बार-बार बदला जा सकता है लेकिन जीवन की सार्वभौमिक रूप से क्षणिक और अनिश्चित प्रकृति का क्या है? परीक्षाएं आती और जाती रहती हैं, परिणामों का इस वर्ष और अगले वर्ष इंतज़ार हो सकता है-परंतु जीवन के बारे में सोचिए? क्या कोई दुनिया की समूची दौलत से जीवन पुन: हासिल कर सकता है? नहीं. इसलिए जब हम सर्वाधिक अपेक्षित और सर्वाधिक पोषित परिणाम हासिल करने में विफल होते हैं तो जीवन की सुंदरता और वरदान के बारे में गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है.

सदैव याद रखें कि अच्छे परिणाम और अंक कठोर परिश्रम और सुसंगत अभ्यास का विषय होते हैं. हमें खुद के प्रति सच्चा होने की जरूरत है. अपने जीवन के लिये आपने जो सपना देखा है, उसके लिये कड़ी मेहनत करें और कष्ट सहन करें. एक भी चूक का मतलब स्थाई विफलता नहीं है.

महान चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने बहुत ही सहज ढंग से कहा था, ‘‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी देर तक धीरे-धीरे चलते हैं, क्योंकि आप रूकते नहीं हैं.’’ यदि हम जीवन में सही उद्देश्य के साथ सही दिशा में आगे बढ़ते रहें तो हम निश्चित तौर पर सफल होते हैं और अंतत: शीघ्र या बाद में अपने गंतव्य तक जरूर पहुंचेंगे.

जीवन हमें अपने सपनों को साकार करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है. वे कहते हैं कि जब एक दरवाजा बंद हो जाता है, तो सर्वशक्तिमान ईश्वर असंख्य दरवाजे खोल देता है. लक्ष्य प्राप्त होने तक धैर्य और कठिन परिश्रम के साथ लगातार सही दिशा में आगे बढऩे का साहस रखें.

 

(अगले अंक में जारी)

(छायाचित्र: गूगल से साभार)