नौकरी फोकस


Volume-10, 8 - 14 June 2019

भारत में कृषि व्यवसाय प्रबंधन में कॅरिअर के अवसर

पीसी मीणा , रणजीत कुमार और संजीव कुमार

कृषि को हमारी अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है. भारतीय कृषि देश की जीडीपी में लगभग 17.50 प्रतिशत का योगदान करती है, बड़े पैमाने पर रोज़गार देती है और राष्ट्र की खाद्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करती है. यह कई प्रमुख उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल प्रदान करती है. हालांकि, भारतीय कृषि तेजी से बदलते कारोबारी माहौल, तकनीकी परिवर्तन की गति, और वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल के साथ कई चुनौतियों का सामना कर रही है. कुछ दशकों से, कृषि वाणिज्यिक अभिविन्यास की ओर बढ़ रही है और आपूर्ति से संचालित मांग को आगे बढ़ाने के लिए परिवर्तन की आवश्यकता है. नई जानकारी और नई प्रौद्योगिकियां हर रोज बाजार में आ रही हैं. हाल के दिनों में, भारत सरकार की सक्रिय पहल के साथ, 2022 तक  किसानों की आय को दोगना करने की माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान को पूरा करने के लिए कई नए कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की गई हैं. तेजी से हो रहे शहरीकरण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और डिस्पोजेबल आय में सुधार के साथ, उपभोक्ताओं के भोजन की विविधता में व्यापक रूप से परिवर्तन हुआ है. अब उपभोक्ता वर्ष में कुछ निश्चित गुणवत्ता वाले विभिन्न प्रकार के उत्पादों की मांग करते हैं. संसाधित और डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों के लिए मांग तेजी से बढ़ती जा रही है, जिसके लिए कारोबार को संभालने के लिए प्रशिक्षित जन शक्ति की आवश्यकता है. भारत में कुल खाद्य उत्पादों का केवल 14 प्रतिशत संसाधन किया जा रहा हैं, जबकि 35 प्रतिशत खाद्य पैकेजिंग और ढुलाई के दौरान बर्बाद हो जाता है. कई एग्री-स्टार्ट अप और एग्रीप्रेन्योर भी सर्विस डिलीवरी, प्रोडक्ट और प्रोसेस इनोवेशन के क्षेत्र में उभरे हैं. इसके अलावा, कृषि स्नातकों के लिए एग्री बिजनेस मैनेजमेंट एक लोकप्रिय कॅरिअर विकल्प बन रहा है. यहां पेशेवर कृषि व्यवसाय प्रबंधकों को विकसित करने की बहुत आवश्यकता है. कृषि व्यवसायी, जो न केवल प्रबंधन की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं, बल्कि किसानों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो सकते हैं.

कृषि-व्यवसाय क्या है?

कृषि-व्यवसाय में सभी व्यावसायिक उद्यम शामिल हैं जो किसानों के साथ संव्यवहार करते हैं और खाद्य उत्पादों और सेवाओं को अंतिम उपभोक्ताओं तक ले जाते हैं. संव्यवहार में एक उत्पाद, एक वस्तु या एक सेवा शामिल हो सकती है और इसमें (क) उत्पादक संसाधन जैसे चारा, बीज, उर्वरक उपकरण, ऊर्जा, मशीनरी आदि (ख) कृषि सामग्रियां जैसे खाद्य और फाइबर आदि (ग) सुविधा सेवाएं जैसे क्रेडिट, बीमा विपणन, भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकिंग, वितरण आदि शामिल हैं.

भारत जैसे विकासशील देश में, अगड़े और पिछड़े संपर्क के साथ कृषि सूचना (इनपुट) कृषि उत्पादन, कृषि प्रोसेसिंग और कृषि विपणन-वितरण जैसे चार मुख्य क्षेत्र शामिल हैं. इस प्रकार, कृषि व्यवसाय इसके बारे में है कि खाद्य एवं कृषि से जुड़े क्षेत्रों में व्यवसाय को सफलतापूर्वक किस प्रकार संचालित किया जाए. इसलिए कृषि व्यवसाय प्रबंधन, कृषि एवं कृषि व्यवसाय क्षेत्र में प्रबंधन सिद्धांतों का अनुप्रयोग है.

कृषि व्यवसाय शिक्षा की आवश्यकता

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने २७ जून, २०१८ को कार्पोरेट भारत के अग्रजों से कहा कि आवासन, सूक्ष्म सिंचाई, बैटरी भंडारण, रक्षा और कृषि क्षेत्रों में निवेश करके अधिक रोज़गार का सृजन करें.

प्रधानमंत्री मुंबई में राजभवन में, भारतीय अर्थ-व्यवस्था के एक व्यापक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले ४१ व्यवसाय अग्रजों से मिले और कहा कि सरकार एवं निजी क्षेत्र प्रगति में सहभागी बनने के लिए एक साथ आगे आएं ताकि अर्थव्यवस्था गति पकड़ सके. इसके लिए कृषि एवं कृषि व्यवसाय क्षेत्र में कुशल जनशक्ति होना आवश्यक है. कृत्रिम इंटेलीजेंस, प्रधानमंत्री कृषि फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) जैसे कृषि से जुड़ी अवसंरचना में सरकार का निवेश कृषि के क्षेत्र में व्यापक रोज़गार सृजित करेगा.

कृषि के व्यवसायीकरण के लिए विशेषज्ञतापूर्ण उत्पादन, फसलोत्तर प्रबंधन, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकेजिंग गतिविधियों और दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों की स्थिति का विस्तार शामिल हैं. भारत में हर साल लगभग 20.30 प्रतिशत फसल अनुचित तरीके से निपटने, खराब होने, बाढ़, सूखा, कीट और बीमारियों और फसल के बाद प्रौद्योगिकियों के ज्ञान की कमी के कारण खेत के स्तर पर बर्बाद हो जाती है. फलों और सब्जियों का अपव्यय 30 प्रतिशत के आसपास है. भारत में कुछ क्षेत्र जैसे कि पुष्पोत्पादन, जल कृषि, मुर्गी पालन, फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण को उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ मिल रहा है. कृषि-व्यवसाय क्षेत्र कृषि क्षेत्र के कई कार्यों जैसे एकीकरण, कृषि उत्पादन, कृषि-प्रसंस्करण और कृषि विपणन और व्यापार को समाहित करता है. जो कृषि उत्पाद मूल्य को बढ़ाता है. आजकल, कृषि-व्यवसाय भारत जैसे विकासशील देश में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन गया है ताकि इससे अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके.

सार्वजनिक, निजी और सहकारी संगठन व्यावसायिक रूप से सक्षम और प्रशिक्षित कृषि व्यवसाय प्रबंधकों की तलाश कर रहे हैं. कृषि विश्वविद्यालय मेधावी कृषि स्नातकों के प्रबंधकीय कौशल का विकास कर सकते हैं ताकि वे प्रभावी कृषि व्यवसाय प्रबंधक साबित हो सकें. वर्तमान में, भारत में 6000 से अधिक किसान उत्पादक कंपनियां हैं, हालांकि प्रबंधन विशेषज्ञता की कमी के कारण बहुत कम लोग ही अच्छा कारोबार कर रहे हैं. यद्यपि, अधिकांश राज्य कृषि विश्वविद्यालय (एसएयू) कृषि व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर स्तर के कार्यक्रम चला रहे हैं. कृषि व्यवसाय के उभरते क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए गुणवत्ता पूर्ण कृषि-व्यावसायिक शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण की अधिक आवश्यकता है.

कृषि-व्यवसाय शिक्षा चालने वाली संस्थाएं

वर्तमान में, कृषि व्यवसाय प्रबंधन कार्यक्रमों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाने वाली कुछ प्रमुख संस्थाएं इस प्रकार हैं:

·         आईसीएआर-नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट राजेंद्रनगर, हैदराबाद

www.naarm.org.in

·         नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर एक्सटेंशन मैनेजमेंट राजेंद्रनगर, हैदराबाद www.manage.gov.in

·         राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, जयपुर www..niam.gov.in

·         इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद, आणंद (गुजरात) www.irma.ac.in

·         भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद www.iimahd.ernet.in

·         इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, लखनऊ www.iiml.ac.in

कृषि-व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाने वाली अन्य संस्थाएं/ विश्वविद्यालय

·         प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय राजेंद्रनगर, हैदराबाद, www.pjtsau.ac.in

·         अंतर्राष्ट्रीय कृषि-व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, आणंद कृषि विश्वविद्यालय, आणंद (गुजरात) www.aau.in

·         बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) www.bhu.ac.in

·         सीएस आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर (उत्तर प्रदेश) www.csauk.ac.in

·         सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा) www.hau.ernet.in

·         कृषि एवं व्यवसाय प्रबंधन विद्यालय, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, अकोला, नागपुर www.pdkv.ac.in

·         डॉ. वाईएस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय (बागवानी कालेज) नौनी, सोलन (हिमाचल प्रदेश) www.ysuniveristy.ac.in

·         जीपी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय) पंतनगर (उत्तराखंड) www.cabm.ac.in

·         इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली www.cabm.ac.in

·         कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, नोएडा www.iabm.in

·         जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (कृषि महाविद्यालय), जबलपुर www.jnkvv.nic.in

·         जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, जूनागढ़ (गुजरात) www.jau.in

·         केरल कृषि विश्वविद्यालय सहकारिता, बैंकिंग एवं प्रबंधन कॉलेज त्रिशूर, (केरल) www.kau.edu

·         महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (राजस्थान कृषि कॉलेज) उदयपुर (राजस्थान) www.mpuat.ac.in

·         महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी विद्यापीठ, राहुरी (महाराष्ट्र) www.mpkv.mk.nic.in

·         राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान, राजेंद्रनगर (हैदराबाद) www.nicr.org.in

·         नवसारी कृषि विश्वविद्यालय (कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान) नवसारी (गुजरात)www.nau.in

·         पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (कॉलेज ऑफ एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट) लुधियाना (पंजाब) www.pau.edu

·         राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (कृषि-व्यवसाय प्रबंधन संस्थान) बीकानेर (राजस्थान) राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालयए पूसा (बिहार) www.iabmbbanan.org

·         उदयभान सिंह जी क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान, गांधीनगर, गुजरात,  सिम्बायोसिस अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय संस्थान, पुणे (महाराष्ट्र) www.urimanage.org.in

·         तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयम्बत्तूर (तमिलनाडु)

·         कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बैंगलोर, http://www.uasbangalore.edu.in

·         कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़, http://www.uasd.edu

·         मुंबई विश्वविद्यालय गरवारे कॅरिअर शिक्षा एवं विकास संस्थान www.dns2.mu.ac.in

·         कृषि प्रबंधन केंद्र, उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर www.camutkal.org

·         वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (महाराष्ट्र) www.mau.nic.in

·         जेवियर प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर www.ximb.ac.in

·         दून व्यवसाय विद्यालय देहरादून, http://www.doonbusinessschool.com

·         विश्व विश्वानी प्रणाली प्रबंधन संस्थान http://www.vishwavishwani.ac.in

·         कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान, नोएडा

·         मैसूर विश्वविद्यालय, http://www.uni-mysore.ac.in

·         खाद्य और कृषि प्रबंधन, हैदराबाद,http://www.svvr.org

·         भारतीय कृषि व्यवसाय विद्यालय, नई दिल्ली,http://isab.org.in

·         एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा,http://www.amity.edu

·         डॉ. डी वाई पाटिल कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय, पुणे,http:/www.dypagribussiness.ac.in

·         आचार्य एन जी रंगा कृषि विश्वविद्यालय, गुंटूरhttps://angrau.ac.in

·         लवली व्यावसायिक विश्वविद्यालय, जलंधर,http://www.ipu.in

पात्रता

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों (डेयरी, खाद्य, कृषि इंजीनियरिंग, वानिकी आदि) की पृष्ठ भूमि में कृषि व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम में प्रवेश करने की दिशा में पहला कदम है. जिन छात्रों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से कृषि या संबद्ध क्षेत्रों में स्नातक की डिग्री है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है. दाखिले के लिए हर संस्था या संगठन के अपने मापदंड होते हैं. इसलिए, इच्छुक छात्रों को प्रवेश मानदंडों को जानने के लिए संगठन की वेबसाइट पर जाना चाहिए.

कृषि व्यवसाय पाठ्यक्रम

वर्तमान में, भारत में कई प्रबंधन संस्थान और कृषि विश्वविद्यालय कृषि-व्यवसाय प्रबंधन में पाठ्यक्रम चला रहे हैं. विभिन्न संस्थानों में पाठ्यक्रम निश्चित रूप से ये पाठ्यक्रम हैं: अलग है. हालांकि, कुछ बुनियादी पाठ्यक्रम हैं जो लगभग सभी संस्थानों में प्रस्तुत किए जाते हैं.कृषि- व्यवसाय माहौल और नीति, व्यवसाय कानून और नैतिकता, बुनियादी कंप्यूटर कौशल, प्रबंधन और व्यवसाय संचार, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, प्रबंधन सूचना प्रणाली, प्रबंधकीय अर्थशास्त्र, प्रबंधकीय लेखांकन और नियंत्रण, विपणन प्रबंधन, प्रचालन अनुसंधान, संगठनात्मक व्यवहार, उत्पादन और प्रचालन प्रबंधन, परियोजना प्रबंधन, अनुसंधान पद्धति आदि. कुछ कॉलेज कृषि व्यवसाय में वैकल्पिक विषय भी पढ़ाते है जैसे वित्तीय प्रबंधन, कृषि विपणन प्रबंधन, कृषि आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, खेत व्यवसाय प्रबंधन, कृषि विद्युत और मशीनरी प्रबंधन, उर्वरक प्रौद्योगिकी और प्रबंधन, खाद्य रिटेल प्रबंधन, खाद्य प्रौद्योगिकी और प्रसंस्करण प्रबंधन, फल उत्पादन और फसलोत्तर प्रबंधन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सतत शासन, कृषि व्यवसाय सहकारी प्रबंधन, कृषि-रसायन उद्योग का प्रबंधन, पुष्प कृषि प्रबंधन और भूदृश्यांकन, पशु फार्मास्यूटिकल उद्योग प्रबंधन, डेयरी उद्योग प्रबंधन, मत्स्य पालन का प्रबंधन, पोल्ट्री और हैचरी प्रबंधन, ग्रामीण विपणन, बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी प्रबंधन आदि कई प्रमुख क्षेत्रों में से हैं जो पाठ्यक्रम केंद्रित हैं. पाठ्यक्रम में 6.8 सप्ताह की समर इंटर्नशिप की भी

आवश्यकता होती है, जबकि कई संस्थान अल्पकालिक लाइव परियोजनाओं, स्वतंत्र परियोजनाओं और अन्य औद्योगिक दौरों के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हैं.

रोज़गार के अवसर

कृषि व्यवसाय प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाने वाले लगभग सभी संस्थान प्लेसमेंट सहायता प्रदान कर रहे हैं. आज, कृषि व्यवसाय में रोजगार के अवसर भंडारण, रिटेल क्षेत्र, बीज कंपनियों, कीटनाशक कंपनियों, उर्वरक कंपनियों, वित्त सेवाओं, बैंकों, बीमा क्षेत्र आदि जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध हैं. कृषि व्यवसाय प्रबंधन प्रचालन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित जन शक्ति को विकसित करने में व्यापक गुंजाइश रखता है. संचालन के प्रबंधन, सहकारी समितियों और कृषि उद्योग की मांग पूरा करने के लिए प्रबंधन कर्मियों, वित्तीय क्षेत्र के नीति निर्माता, शैक्षिक क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित शिक्षण कर्मचारी, अनुसंधान क्षेत्र की सेवा के लिए तकनीकी रूप से मजबूत टीम आदि. इसके अलावा, कृषि परामर्श, पत्रकारिता, कृषि- बैंकिंग, हाइटेक फार्मिंग, कृषि संरक्षण, कृषि इंजीनियरी भी कॅरिअर के कुछ संभावित क्षेत्र हैं. कृषि व्यवसाय में कॅरिअर की संभावना कृषि से लेकर कमोडिटी ब्रोकर, कमोडिटी खरीददार, फूड  ब्रोकर, सप्लाई प्लानर, सप्लायर मैनेजर, खरीद एग्जीक्यूटिव, अधिप्रापण अधिकारी, ऋण अधिकारी, विपणन शोधकर्ता/विशेषज्ञ, उत्पाद विश्लेषक, खरीद एजेंट, सांख्यिकीविद् और थोक व्यापारी तक है. कॅरिअर के रूप में कृषि-व्यवसाय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ आशाजनक भी है, और अब यह एक लोकप्रिय व्यवसाय बन गया है.

पारिश्रमिक

कृषि व्यवसाय प्रबंधन शिक्षा पूरा करने वाला कोई भी छात्र, सार्वजनिक या निजी या सहकारी क्षेत्र में कार्य कर सकता है और अच्छा वेतन कमा सकता है. कृषि-व्यवसाय क्षेत्र में वेतन विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि छात्र की योग्यता, अनुभव, किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता आदि. इन क्षेत्रों में पारिश्रमिक समय बीतने के साथ अधिक आकर्षक हो रहा है. कुछ प्रमुख प्रबंधन संस्थानों के छात्रों को रु. 6.7 लाख प्रति वर्ष का औसत पैकेज मिल रहा है.  हालांकि, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे संस्थान का ब्रांड, देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति, छात्रों का प्रदर्शन आदि.

लेखक आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, राजेन्द्र नगर, हैदराबाद के कृषि व्यवसाय प्रबध्ंान प्रभाग में कार्यरत हैं.

ई-मेल: Pc_meena@rediffmail.com (छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)