नौकरी फोकस


Volume-12, 22 - 28 June 2019

बैंकों में कॅरिअर के आगामी अवसरों की तैयारी

आरती एस

देश में कुछेक ऐसे सम्मानजनक कॅरिअर हैं जिन्हें स्नातक जैसी साधारण योग्यता के साथ भी हासिल किया जा सकता है. इनमें से एक सिविल सेवा है जिसके लिये संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) हर साल परीक्षा आयोजित करता है. दूसरा ऐसा कॅरिअर सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में है जिसके लिये परीक्षाओं का आयोजन बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) करता है. यह आलेख इसी दूसरे कॅरिअर के बारे में है. भारत में खास तौर से सरकारी बैंक नौजवानों को कॅरिअर का बेहतरीन विकल्प मुहैया कराते हैं. इसलिये यह हैरानी की बात नहीं है कि ज्यादा-से-ज्यादा युवा सार्थक और टिकाऊ कॅरिअर के लिये इनकी ओर आकर्षित होते हैं. यह पता लगाने के लिये एक छोटा सा सर्वेक्षण किया गया कि ज्यादातर नौकरी तलाशने वाले सरकारी बैंकों में क्यों जाना चाहते हैं। सर्वेक्षण में भाग लेने वालों ने इसके आम तौर पर निम्नलिखित कारण गिनाये -

·         योग्यता की आसान शर्तें

·         पूरी तरह पारदर्शी, लोकतांत्रिक और साफ-सुथरी चयन प्रक्रिया

·         चयन प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाना

·         कर्मचारियों के लिये वेतन, भत्तों और अन्य लाभों समेत सेवा की सुस्पष्ट शर्तें

·         तरक्की के अच्छे अवसर

·         बैंक में काम करने को समाज में सम्मानजनक माना जाना

·         अवसर की देश भर में उपलब्धता

सर्वेक्षण में कुछ अन्य सकारात्मक कारण भी गिनाये गये. लेकिन ऊपर जो कुछ भी कहा गया है वह जरूरी योग्यता रखने वालों के लिये बैंकिंग को कॅरिअर के रूप में अपनाने पर विचार करने के वास्ते पर्याप्त होना चाहिये.

भारत में बैंकों ने अपना नेटवर्क जिस तरह बढ़ाया है उसका विश्व में शायद ही कोई सानी हो. देश में जुलाई, 1969 में तत्कालीन सरकार ने 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया. बैंकों से राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका अदा करने के लिये कहा गया. बैंकिंग सुविधाओं से वंचित गांवों और दूरदराज के अन्य इलाकों में बड़ी संख्या में बैंकों की शाखाएं खोली गयीं. देना बैंक और विजया बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय के बाद अब देश में 18 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं.

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) 1975 में जारी एक अध्यादेश के जरिये अस्तित्व में आये. वर्ष 1976 में आरआरबी कानून ने इस अध्यादेश की जगह ली. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पुनर्गठन के बाद मौजूदा समय में देश में 55 आरआरबी हैं.

पीएसबी और आरआरबी में काफी बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. इसलिये इनमें रिक्तियां भी नियमित तौर पर होती रहती हैं. अनेक कर्मचारियों के अवकाश ग्रहण और पदोन्नति के अलावा कुछ कर्मचारी अन्य संगठनों में भी चले जाते हैं. इस तरह खाली हुए पदों को भरने के लिये बैंकों को समय-समय पर नयी नियुक्तियां करनी होती हैं. इससे बैंकिंग में कॅरिअर तलाशने वाले नौजवानों के लिये अवसर पैदा होते रहते हैं.

बैंक नये लोगों को तीन स्तरों पर नौकरियां मुहैया कराते हैं - अधीनस्थ कर्मचारी, क्लर्क और अधिकारी. अधीनस्थ स्तर की बहुत सीमित रिक्तियां होती हैं और इनके लिये चयन अखिल भारतीय आधार पर नहीं होता. लिहाजा, इस लेख में हम सिर्फ सामान्य बैंकिंग अधिकारियों और क्लर्कों के लिये चयन प्रक्रिया पर ही गौर करेंगे. बैंकों में इन कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों की जरूरतों को प्रत्यक्ष तौर पर पूरा करने के लिये काम करता है. कर्मचारियों का एक छोटा

हिस्सा बैक ऑफिस के कामकाज अथवा सामान्य या परोक्ष प्रशासन में शामिल होता है.

आरआरबी और पीएसबी के लिये आईबीपीएस अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करता है. इन दोनों तरह के बैंकों के लिये क्लर्क और अधिकारियों की चयन प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के लिये चयन परीक्षा अलग से आयोजित की जाती है.

आरआरबी में क्लर्क का पद ग्रुप बीके तहत आता है और इसे कार्यालय सहायक - बहुउद्देश्यीय कहते हैं. क्लर्क और अधिकारी दोनों ही के लिये न्यूनतम शैक्षिक योग्यता किसी भी विधा में स्नातक है. इसके अलावा उस खास आरआरबी द्वारा निर्धारित स्थानीय भाषा में प्रवीणता भी होनी चाहिये. कंप्यूटर का कामकाजी ज्ञान वांछित है. आरआरबी में अधिकारी के पद के लिये कृषि, मछली पालन, कृषि विपणन और सहकारिता, पशुपालन, वानिकी, पशु चिकित्सा, बागवानी, कृषि अभियांत्रिकी, लेखा विधि, कानून, प्रबंधन या सूचना प्रौद्योगिकी में डिग्री वालों के लिये विशेष अवसर होते हैं.

आरआरबी में क्लर्कों और अधिकारियों, दोनों के लिये नियुक्ति परीक्षा दो चरणों में होती है. पहला चरण प्रारंभिक और दूसरा मुख्य परीक्षा का होता है. क्लर्कों के लिये प्रारंभिक परीक्षा में तर्क कौशल (रीजनिंग) और संख्यात्मक क्षमता (न्यूमेरिकल एबिलिटी) के प्रश्न होते हैं. अधिकारियों के लिये तर्क कौशल और परिमाणात्मक अभियोग्यता (क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड) के प्रश्न पूछे जाते हैं. कुल 45 मिनटों में 80 सवालों के जवाब देने होते हैं.

क्लर्कों के लिये मुख्य परीक्षा में तर्क कौशल, संख्यात्मक क्षमता, सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी भाषा तथा कंप्यूटर की जानकारी से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं. अधिकारियों के लिये संख्यात्मक क्षमता के बजाय परिमाणात्मक अभियोग्यता के सवालों का खंड होता है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये क्लर्क की प्रारंभिक परीक्षा में अंग्रेजी भाषा, संख्यात्मक क्षमता और तर्क कौशल के सवाल होते हैं. इस पद के लिये मुख्य परीक्षा में सामान्य/वित्तीय ज्ञान, सामान्य अंग्रेजी, तर्क कौशल और कंप्यूटर अभियोग्यता के सवाल होते हैं. प्रारंभिक परीक्षा में एक घंटे में 100 सवालों के जवाब देने होते हैं. मुख्य परीक्षा में 190 सवाल होते हैं और उन्हें हल करने के लिये 160 मिनटों का समय दिया जाता है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अधिकारियों के पदों के लिये प्रारंभिक परीक्षा में अंग्रेजी भाषा, परिमाणात्मक अभियोग्यता और तर्क कौशल के तीन खंड होते हैं. मुख्य परीक्षा में तर्क और कंप्यूटर अभियोग्यता, सामान्य/ अर्थव्यवस्था/ बैंकिंग ज्ञान, अंग्रेजी भाषा तथा डेटा विश्लेषण और व्याख्या के खंड होते हैं.

विषयों के नाम बेशक एक जैसे हों मगर पद के हिसाब से परीक्षा का स्वरूप और सवालों की जटिलता अलग-अलग होती है. प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में भी सवालों के स्वरूप और जटिलता में फर्क होता है. सभी परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं और परीक्षार्थियों को सवालों के जवाब परीक्षा केन्द्र में कंप्यूटर पर ही देने होते हैं.

प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहने वाले उम्मीदवारों को ही मुख्य परीक्षा में बुलाया जाता है. उम्मीदवार को हर खंड में न्यूनतम अंक हासिल करने होते हैं. योग्यता सूची में आने के लिये आपका अंकों का योग ऊंचा होना चाहिये. अधिकारी के पद के लिये मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवार को साक्षात्कार के लिये बुलाया जाता है. लेकिन लगभग दो साल पहले जारी सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्लर्क पद के लिये कोई साक्षात्कार नहीं होता.

परीक्षा का विस्तृत विवरण और तैयारी की रणनीति

तर्क कौशल: इस खंड के सवाल व्यावहारिक समझ और तार्किक सोच से जुड़े होते हैं. इनका उद्देश्य उम्मीदवार के विश्लेषणात्मक और तार्किक कौशल को परखना होता है. आपको नतीजों तक पहुंचने के लिये वक्तव्यों, आंकड़ों और सूचनाओं की व्याख्या करने को कहा जायेगा. यहां आपके वैचारिक और सैद्धांतिक ज्ञान की कोई भूमिका नहीं है. आप खुद को सिर्फ दिये गये सवाल पर केन्द्रित करते हैं. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पूर्वग्रह और व्यक्तिगत मान्यताएं बीच में नहीं आयें तथा उन्हें दरकिनार रखा जाये.

तर्क कौशल से संबंधित सवाल व्यवस्था, आलोचनात्मक तर्क, दृश्य तर्क, डेटा पूर्णता/ अपूर्णता, युक्ति, संगत-असंगत, शृंखला पूरा करना, अनुक्रमिक आउटपुट ट्रेकिंग जैसे विभिन्न स्वरूपों में होते हैं.

संख्यात्मक क्षमता: इससे संबंधित सवालों का मुख्य विषय संख्याओं से अभिप्राय निकालना है. इस खंड में सामान्य अंकगणित से लेकर जटिल गणनाओं तक को शामिल किया जा सकता है. आप इसमें सरलीकरण, औसत, प्रतिशत, समय, गति और दूरी, संख्या शृंखला, लाभ और हानि, साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज, अनुपात और समानुपात तथा समय और कार्य से जुड़े सवालों की उम्मीद कर सकते हैं.

इस खंड की तैयारी के लिये आपको दसवीं कक्षा के गणित के पाठ्यक्रम को फिर से देखना होगा. फार्मूलों को याद करें और बोडमास (ब्रैकेट, ऑर्डर, डिवीजन, मल्टीप्लीकेशन, एडिशन, सबट्रैक्शन) जैसे सिद्धांतों को अपने मस्तिष्क में दर्ज कर लें. इस खंड में गणित की मजबूत बुनियाद आपके लिये बहुत मददगार हो सकती है. कुछ मेहनत से इस खंड में आप काफी अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं. इससे आपके कुल अंक बढ़ेंगे जो योग्यता सूची में जगह बनाने के लिये बहुत महत्वपूर्ण है. 

परिमाणात्मक अभियोग्यता: परिमाणात्मक अभियोग्यता में संख्यात्मक क्षमता शामिल है. इसमें परिमाणात्मक सवालों को हल करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है. इसमें आपको दिये गये डेटा/इनपुट के आधार पर सही जवाब ढूंढना होगा. कुछ सवाल ऐसे भी हो सकते हैं जिनके लिये उत्तर में पर्याप्त डेटा नहीं हों. इस बारे में सुनिश्चित होने के बाद ही आपको पर्याप्त डेटा नहींके विकल्प को चुनना चाहिये. इसके पाठ्यक्रम में ऊपर वर्णित संख्यात्मक क्षमता के सभी विषय शामिल हैं. इसके अलावा साझीदारी, नौका और धारा, आयतन और सतह क्षेत्र, छूट के बाद मूल्य, उम्र, मिश्रण तथा ट्रेन जैसे सवाल भी पूछे जा सकते हैं. इस खंड में ज्यादा वर्णनात्मक सवाल हो सकते हैं.

इस खंड के सभी तरह के अनुमानित सवालों को भली-भांति समझने और उन्हें तरीके से हल करने की कोशिश करें. हो सकता है कि इन सवालों के पीछे के सिद्धांतों को आप अच्छी तरह समझते हों. लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि सिद्धांतों का बहुत सारे सवालों को हल करने में कैसे इस्तेमाल किया जाये ताकि आपको इन प्रश्नों का उत्तर देने की आदत पड़े.

सामान्य ज्ञान: इस खंड में भारत और विश्व से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों और उपलब्धियों के बारे में आपकी जानकारी को परखा जाता है. इसमें इतिहास (महत्वपूर्ण तिथियां/उपलब्धियां इत्यादि), भूगोल (देश, राजधानी, शहर, पर्वत, नदियां इत्यादि), विज्ञान (आविष्कार, आविष्कारक, परिभाषाएं इत्यादि), साहित्य (पुस्तक/लेखक), कला, मनोरंजन (फिल्म/थिएटर इत्यादि), खेल (टूर्नामेंट/चैम्पियनशिप, कीर्तिमान, विजेता, स्थल इत्यादि), महत्वपूर्ण हस्तियां और घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं, परिवर्णी शब्द और अन्य विषयों से संबंधित सवाल शामिल होते हैं.

चूंकि सामान्य ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती इसलिये इसकी पूरी तैयारी करना बहुत मुश्किल है. लेकिन अपनी तैयारी ज्यादा-से-ज्यादा विस्तृत रखें. इस खंड में अच्छे अंक हासिल करने के लिये डायरी के रूप में आप खुद का संदर्भ स्रोत बना सकते हैं.

वित्तीय ज्ञान: बैंकिंग और वित्त एक-दूसरे से नजदीक से जुड़े हैं. इस खंड में राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय संस्थाओं, कॉरपोरेट जगत, शेयर बाजार इत्यादि से संबंधित सवाल पूछे जायेंगे. इस खंड की तैयारी के लिये आपको वित्तीय आंकड़ों के अलावा संकल्पनाओं पर भी ध्यान देना होगा. मसलन, आपको हाल की मुद्रा स्फीति दर के साथ ही यह भी पता होना चाहिये कि मुद्रास्फीति आखिर है क्या. वित्तीय ज्ञान की तैयारी के लिये आप एक या ज्यादा वित्तीय अखबारों का सहारा ले सकते हैं.

बैंकिंग का ज्ञान: इस खंड में बैंकिंग जगत से सवाल होंगे. आपको सार्वजनिक, निजी, सहकारी, भुगतान, विकास और लघु समेत विभिन्न प्रकार के बैंकों के बारे में जानकारी होनी चाहिये. इस खंड की तैयारी के दौरान आपको बैंकिंग नियामक, बुनियादी/ सामान्य बैंकिंग उत्पाद और सेवाओं, बैंक राष्ट्रीयकरण के उद्देश्य, बैंकों के विलय, बैंकों के सामने मौजूद मुद्दों और चुनौतियों, बैंकों के जरिये लागू की जाने वाली सरकारी योजनाओं,  सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्यमों, बैंक बीमा, मौद्रिक नीति, सरकार की नीतिगत घोषणाओं, वित्तीय समावेशन, नाबार्ड/सिडबी इत्यादि की भूमिका के बारे में सूचनाएं हासिल करनी होंगी. इनमें से ज्यादातर के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट से हासिल की जा सकती हैं.

अंग्रेजी/हिंदी भाषा: भाषा के पत्रों में सवालों के स्वरूप में काफी समानताएं हैं. सवालों का एक सेट बोध गद्यांश पर आधारित हो सकता है. आपको उस गद्यांश को ध्यान से पढ़ कर उसके आधार पर सवालों के जवाब देने होंगे. बेशक ये जवाब आम धारणा और विचार से अलग हो सकते हैं. कुछ प्रश्नों का स्वरूप नकारात्मक हो सकता है (मसलन, गद्यांश के अनुसार ---------- के लिये कौन सा सही समाधान नहीं है). वाक्य पर आधारित सवालों में एक वाक्य को चार हिस्सों में बांटा जायेगा. आपको यह पता लगाना होगा कि किसी खास हिस्से में क्या कोई गलती है. अगर कोई गलती नहीं है तो आपको अपना जवाब यही देना होगा. इसके अलावा उम्मीदवार को किसी पैराग्राफ में उलट-पलट कर रखे गये वाक्यों को सही क्रम में लगाना होता है. एक अन्य तरह के सवाल में एक वक्तव्य दिया जायेगा और आपको दिये गये विकल्पों में से वह वक्तव्य चुनना होगा जो विचार में उससे मेल खाता हो. कुछ सवालों में आपको शब्दों के विलोम/पर्यायवाची शब्द बताने होंगे. मुहावरों और किंवदंतियों से जुड़े प्रश्न भी होंगे. दिये गये विकल्पों में से रिक्त स्थान को भरने के सवाल भी आपको हल करने पड़ सकते हैं.

अधिकारियों के लिये मुख्य परीक्षा में सब्जेक्टिव अंग्रेजी का 25 अंक का एक खंड होता है जिसमें दो सवाल होते हैं. इनमें से एक सवाल निबंध और दूसरा पत्र लेखन का होता है. इस खंड के लिये कुछ विषयों का अभ्यास करना बेहतर रहेगा. अपने लिखे निबंध और पत्र की समीक्षा करें ताकि आपको बेहतरी की जरूरत वाले बिंदुओं का पता लग सके. निबंध कुछ ऐसे लोगों को दिखायें जो सकारात्मक सुझाव दे सकते हों. सामान्य अंग्रेजी की किसी अच्छी किताब से नमूने के निबंधों और पत्रों का अध्ययन करें.

अगर आपको राष्ट्रीय समाचारपत्रों और पत्रिकाओं को पढऩे की आदत नहीं है तो इसे डाल लें. नये शब्दों के अर्थ मालूम करें और देखें कि वाक्यों में इनका इस्तेमाल किस तरह किया गया है. आप इन शब्दों के पर्यायवाची और विलोम का भी पता कर सकते हैं. आपको वाक्य विन्यास पर भी गौर करना होगा. साथ ही यह भी जानना होगा कि लंबे वाक्यों में वर्णन का क्रम क्या होगा.

नये शब्दों को सीख कर अंग्रेजी का ज्ञान बढ़ाना आपके लिये मददगार होगा. हर रोज शब्दकोश या अन्य स्रोतों से पांच से 10 ऐसे शब्द चुनें जिनकी आपको अब तक जानकारी नहीं है. इनके अर्थ लिख लें और जब भी समय मिले इन्हें दोहराएं. इस तरह आप धीरे-धीरे काफी नये शब्द सीख जायेंगे.

आरआरबी में उम्मीदवारों के सामने मुख्य परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी में से किसी एक को चुनने का विकल्प रहता है.

कंप्यूटर का ज्ञान: इस विषय को कुछ साल पहले ही जोड़ा गया है. मौजूदा समय में बैंकिंग में कंप्यूटर एप्लीकेशन और प्रोग्राम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिये बैंकों में नौकरी के उम्मीदवारों से आशा की जाती है कि उन्हें कंप्यूटर का कम-से-कम कुछ ज्ञान जरूर होगा. इस खंड में सवाल बुनियादी हार्डवेयर (इनपुट, आउटपुट, स्टोरेज डिवाइस), विंडोज, एमएस ऑफिस जैसे प्रोग्रामों, विशेषताओं, सॉफ्टवेयर, डेस्कटॉप एप्लीकेशनों, कीबोर्ड शॉर्टकट, इंटरनेट, इंट्रानेट, नेटवर्किंग, डाटाबेस, साइबर सुरक्षा इत्यादि से संबंधित हो सकते हैं.

कंप्यूटर और इंटरनेट के व्यावहारिक ज्ञान से निस्संदेह आपको सहायता मिलेगी. लेकिन आपको इसके अतिरिक्त तैयारी भी करनी होगी जिसके लिये विंडोज, इंटरनेट और कंप्यूटर एप्लीकेशनों के शब्दकोश का सहारा ले सकते हैं. शार्टकट की के बारे में जानकारी हासिल करें. विंडोज के सहायता/समर्थन पेज पर भी आपको काफी जानकारियां मिल सकती हैं.

इस कंप्यूटर परीक्षा का मकसद आपकी तकनीकी विशेषज्ञता का पता लगाना नहीं है. आपसे सिर्फ  इतनी उम्मीद की जाती है कि आपको कंप्यूटर के बुनियादी उपयोग के बारे में पता हो.

डेटा विवेचना: इस खंड में डेटा से भरी हुई एक स्थिति दी जाती है. उम्मीदवार से आशा की जाती है कि वह स्थिति को गौर से पढ़ कर इससे संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर दे. हर स्थिति से संबंधित दो से 10 सवाल तक हो सकते हैं. इसमें सबसे बड़ी चुनौती स्थिति को पढ़ कर सही ढंग से समझने की होती है. अगर आपने स्थिति को अच्छे से समझ लिया तो जवाब सही होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. स्थिति पाठ, तालिका, पाई चार्ट, बार ग्राफ, लाइन ग्राफ इत्यादि के रूप में हो सकती है. लिहाजा आपको सवाल को इनमें से किसी भी स्वरूप में देखने के लिये तैयार रहना चाहिये.

(लेखक एक शिक्षाविद् हैं. ई-मेल: Artmumb98@gmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.