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Career 42

आई.ए.एस. साक्षात्कार
अपने व्यक्तित्व को स्वाभाविक रूप में चमकने दें


एस. बी. सिंह


आई.एस.एस. साक्षात्कार की संकल्पना एवं इसका उद्देश्य आपकी अभिलाषा के कार्य के लिए आपकी उपयुक्तता का पता लगाना है. इसलिए, इस आधार पर कि आप जिस पद पर भर्ती किए जा रहे हैं और उस पद की मुख्य अपेक्षाएं क्या हैं साक्षात्कार सत्र विशिष्ट रूप में निर्धारित किए जाते हैं. लगभग आधे घंटे के एक छोटे से सत्र के दौरान विशेषज्ञों का एक पैनल इस उद्देश्य के साथ आपसे वार्तालाप करेंगे. आवेदित सेवा के लिए कोई उम्मीदवार कितना उपयुक्त है. आई.ए.एस. साक्षात्कार की संकल्पना आपको एक विशेषज्ञ पैनल सम्मुख बैठाना है और इसका उद्देश्य आपके सही एवं वास्तविक व्यक्तित्व का मूल्यांकन करना है. इस लेख का फोकस आपको इस तथ्य से अवगत कराना है कि आई.ए.एस. साक्षात्कार सत्र किस तरह संचालित किया जाता है, साक्षात्कारकर्ता आपसे क्या आशा रखते हैं, वे आपके व्यक्तित्व का मूल्यांकन कैसे करते हैं और इस मूल्यांकन के आधार पर, आपके प्रदर्शन के लिए वे आपको अंक कैसे देते हैं.
आई.ए.एस. साक्षात्कार का महत्व : प्रारंभ में, हमें यह पता होना चाहिए कि आई.ए.एस साक्षात्कार में दिए जाने वाले अंक, सम्पूर्ण चयन-प्रक्रिया का एक अल्प भाग होते हैं. साक्षात्कार केवल 275 अंकों का होता है, जबकि मुख्य परीक्षा के अंक अधिक अर्थात कुल 1750 होते हैं, ये अंक सामान्य अध्ययन वैकल्पिक तथा निबंध प्रश्न पत्रों के अंकों का कुल योग होते हैं. तथापि, साक्षात्कार मैरिट सूची में आपके अंतिम रैंक का निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. साक्षात्कार में, आपको असाधारण रूप से उच्च अंक प्राप्त करने का एक अवसर मिलता है, जो मुख्य लिखित प्रश्न-पत्रों में शायद ही संभव होता है. इसके विपरीत यदि साक्षात्कार में आपका प्रदर्शन अच्छा नहीं होता है तो या तो आप मैरिट सूची में नीचे आ जाएंगे या सूची से बाहर भी हो सकते हैं. इस तरह, साक्षात्कार के अंक, यद्यपि कुल अंकों का एक छोटा प्रतिशत होते हैं, आपको मिलने वाले रैंक, सेवा और संवर्ग निर्धारण में अहम स्थान रखते हैं.
साक्षात्कार के दौरान मूल्यांकित किए जाने वाले योग्यता गुण : संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), अपनी अधिसूचना में हमेशा उन व्यापक योग्यता गुणों का उल्लेख करता है जिनका साक्षात्कार सत्र के दौरान मूल्यांकन किया जाएगा. ये गुण निम्नानुसार हैं.
*मानसिक सतर्कता : इसमें किसी दिए गए मामले (विषय) या स्थिति पर मानसिक तत्परता तथा उत्तर देने की अपेक्षा होती है. इसमें विलक्षण एवं जिज्ञासु मस्तिष्क होना भी अपेक्षित होता है.
*आत्मसात करने की विवेचनात्मक शक्ति : इसमें तथ्यों को, जिस रूप में आपके सामने आते हैं उनकी विवेचनात्मक जांच करने के बाद एक साथ समाहित करने के गुण शामिल हैं.
*स्पष्ट एवं तार्किक प्रतिपादन : यह किसी तथ्य अथवा विषय को स्पष्टता एवं तर्क के साथ प्रस्तुत करने की आपकी क्षमता होती है.
*निर्णय का संतुलन : यह मामलों पर, उसके विभिन्न पहलुओं पर अतिवादी एवं असंयमी हुए बिना या किसी पक्षपात के/पूर्वाग्रही हुए बिना, संतुलन स्थापित करके निर्णय लेने के बारे में है.
*विविध एवं व्यापक रुचि : एक आई.ए.एस. प्रत्याशी के रूप में आपके जन जीवन पर प्रभाव रखने वाले विविध मामलों पर वास्तविक या सच्ची रुचि प्रदर्शित होनी चाहिए.
*सामाजिक संबद्धता एवं नेतृत्व गुण : सरकारी सेवाओं में अपने परिणाम देने के लिए यह एक प्रमुख गुण है. इसमें मानव संसाधनों का नेतृत्व करने और निर्णय लेने में सामाजिक प्रत्याशाओं के कारक होने की क्षमता निहित है.
*बौद्धिक एवं नैतिक सत्यनिष्ठा : उसमें सभी परिस्थितियों में चरित्र सत्यनिष्ठा प्रदर्शित करके एक नैतिक संहिता का निरंतर एवं सार्वजनिक पालन करना शामिल है.
उक्त गुण अथवा विशेषताएं एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं, किंतु आई.ए.एस. साक्षात्कार बोर्ड उन सभी पर एक-एक करके मूल्यांकन नहीं करेगा. आई.ए.एस साक्षात्कार इस तरह संचालित किया जाता है कि ये सभी गुण/विशेषताएं एक प्रश्नोत्तर प्रारूप में वार्तालाप की एक परस्पर जुड़ी श्रृंखला में जान ली जाती हैं.
अनेक साक्षात्कार सत्रों में एक सुनियोजित पद्धत्ति अपनाई जाती है, किंतु आई.ए.एस. साक्षात्कार इसका एक अपवाद है. एक सुनियोजित ढंग के विपरीत संचालित यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बोर्ड एवं उम्मीदवार के बीच वार्तालाप चलता रहता है. इस तरह, साक्षात्कार की एक प्रचलित अवधारणा के विपरीत एक प्रश्नोत्तर सत्र होने के कारण यह साक्षात्कार से कुछ ज्यादा है. यह एक ऐसा प्रतिवेश है जो औपचारिक तो है, किंतु अप्रत्यक्ष है. अप्रत्यक्ष का अर्थ है साक्षात्कार में एक पूर्व निर्धारित सत्र के स्थान पर एक स्वाभाविक अथवा सहज प्रक्रिया अपनाई जाती है, साक्षात्कार सत्र में उक्त दिए गए गुणों/विशेषताओं पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाता है. इस बात की उपयुक्त समझ कि उसका क्या मूल्यांकन किया जाएगा, उम्मीदवार की तैयारी को इसकी आवश्यकता के समीप ला देगी.
आई.ए.एस. साक्षात्कार निम्न के बारे में नहीं है :
*मात्र एक प्रश्नोत्तर सत्र
*ज्ञान अथवा सूचना अधिक्य की जांच
*कठिन प्रश्न पूछकर आपको जानबूझकर नीचा दिखाने के प्रयास
*आपसे असाधारण प्रत्याशा होना
आई.ए.एस. साक्षात्कार निम्न के बारे में होता है
*आपके स्वाभाविक व्यक्तित्व का मूल्यांकन
*एक परस्पर मैत्रीपूर्ण/अनुकूल सत्र
*महत्वपूर्ण मामलों पर आपकी राय और दृढ़ता का पता लगाना
*ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, वचनबद्धता, नेतृत्व आदि गुणों का पता लगाना
*इस बात का अधिक पता लगाना कि आप क्या जानते हैं न कि यह पता लगाना कि आप क्या नहीं जानते.
उक्त तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि साक्षात्कार की प्रकृति अनेक मामलों पर बोर्ड के साथ एक सकरात्मक  माहौल में एक आकर्षक वार्तालाप की है जहां आपको किसी भय अथवा दबाव के बिना स्वयं को सहज रूप में अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. बोर्ड के व्यवहार के इस विवरण से आप में बोर्ड का सामना करने के बारे में आपका डर समाप्त हो जाना चाहिए. अधिकांश उम्मीदवारों के लिए बोर्ड का सामना करना एक भयावह स्थिति जैसा होता है और साक्षात्कार स्थान पर प्रवेश करने से तत्काल पहले उन्हें एक अज्ञात डर सताता है. जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है. बोर्ड सामान्यत: अत्यधिक मैत्रीपूर्ण/अनुकूल तथा प्रोत्साहनशील होता है. यदि उन्हें यह पता लगता है कि आप किसी एक क्षेत्र के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पा रहे हैं तो वे आपसे ऐसे क्षेत्रों के विभिन्न प्रश्न पूछेंगे, जिन क्षेत्रों में आपकी पकड़ मजबूत हो, वे सत्र के दौरान आपको अपना श्रेष्ठ देने के पूरे अवसर देंगे.
बोर्ड का गठन :
यू.पी.एस.सी. के 8-9 अलग-अलग साक्षात्कार बोर्ड होते हैं. प्रत्येक बोर्ड में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं. प्रत्येक बोर्ड का अध्यक्ष यू.पी.एस.सी. का सदस्य होता है. अन्य चार सदस्य बाहरी सदस्य होते हैं जो यू.पी.एस.सी. द्वारा आमंत्रित किए जाते हैं. वे ब्यूरोक्रेट्स, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, सशस्त्र बल अधिकारी आदि होते हैं. वे विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध होते हैं. वे सभी अत्यधिक अनुभवी, आम जीवन की व्यापक जानकारी रखने वाले व्यक्ति होते हैं. उनकी ये सभी विशेषताएं उन्हें अलग-अलग प्रश्न तैयार करने और आपके उत्तर का सटीक मूल्यांकन करने में उन्हें सक्षम बनाती है. यह ध्यान रखें कि कोई भी व्यावसायिक  मनौवैज्ञानिक इन सदस्यों के साथ नहीं बैठता है.
साक्षात्कार का प्रारंभन :
आप जैसे ही बोर्ड में प्रवेश करते हैं और बोर्ड के सदस्यों का अभिवादन करने के बाद अपना स्थान ग्रहण करते हैं, अध्यक्ष कुछ प्रश्न पूछकर  साक्षात्कार प्रारंभ करेंगे. सामान्यत: वह आपका जीवन-वृत्त पढक़र और आपके द्वारा अपने जीवन-वृत्त में दी गई सूचना से संबंधित प्रश्न पूछते हैं. आपके साक्षात्कार के प्रारंभ के कुछ मिनट आपको बोर्ड के साथ सहज अनुभव कराने और साधारण प्रश्न पूछकर आपको तैयार करने का प्रयास होते हैं. अध्यक्ष आपसे कुछ और प्रश्न पूछ सकते हैं या अन्य सदस्य को प्रश्न पूछने का संकेत करते हैं. आपका साक्षात्कार इस तरह प्रारंभ होता है, और अगले 30 मिनटों में आप वार्तालाप में व्यस्त रहेंगे, जिसके दौरान आपके और बोर्ड के बीच प्रश्नों, प्रति प्रश्नों, राय, प्रति राय का विनियम होगा. आपको सहज बनाए रखने के लिए साक्षात्कार सत्र के दौरान कुल हल्के क्षणों का भी अनुभव कर सकते हैं. किसी सदस्य विशेष के प्रश्न का उत्तर देते समय, अन्य सदस्य सामान्यत: बीच में नहीं बोलते, हालांकि कभी-कभी वे, आप जो बोलते हैं, उसमें कुछ जोड़ देते हैं.
अंक देने की पद्धति
अध्यक्ष आपके प्रदर्शन के आधार पर अंक देने वाला मुख्य व्यक्ति होता है. वह अन्य सदस्यों को, आपको दी जाने वाली अंकों की एक प्रतिशतता का प्रस्ताव करेगा. यदि एक या अधिक सदस्य अध्यक्ष को आपको कम या अधिक अंक देने का परामर्श देते हैं तो अध्यक्ष उनके परामर्श पर विचार कर सकता है और नए अंकों का प्रस्ताव करता है. कभी-कभी बोर्ड, कई प्रदर्शन के आधार पर आपको आपसे पहले आए उम्मीदवारों के अंकों की तुलना में आपको अंक देते हैं. किंतु आपको अंक देने में सामान्यत: अध्यक्ष का निर्णय ही अंतिम होता है. किंतु अध्यक्ष बहुमत का भी ध्यान रखते हैं.
साक्षात्कार की तैयारी
यद्यपि साक्षात्कार के लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि यह एक व्यक्तित्व परीक्षण होता है और आपने अपने जीवन में अपने अध्ययन, अनुभव, जानकारी आदि के माध्यम से क्या संचित और आत्मसात किया है उसका साक्षात्कार के दौरान मूल्यांकन किया जाता है. फिर भी, साक्षात्कार के लिए कुछ तैयारी आवश्यक होती है. साक्षात्कार की तैयारी करने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:-
1. साक्षात्कार के लिए आचरण एवं शिष्टाचार सीखना :
1.  विनम्र एवं श्रद्धालु रहें.
2.  सदस्यों का हृदय से अभिवादन करें.
3. अच्छे, सादे कपड़े पहनें जो औपचारिक और मौसम के अनुकूल हों.
4.  आपने कोई भडक़ीला कपड़ा या आभूषण नहीं पहना हो.
5.  किसी सदस्य द्वारा प्रश्न पूछने या उसके द्वारा किसी स्पष्टीकरण के दौरान बीच में नहीं बोलें.
*वाक-शैली उपयुक्त एवं धीमी रखें.
*उत्तर देते समय हाथ या सिर बार-बार नहीं हिलाएं.
*विनम्रता के साथ-साथ आत्म-विश्वास, संकल्प तथा दृढ़ता की झलक हो.
2. अपने जीवन-वृत्त अर्थात डीएएफ (विस्तृत आवेदन पत्र) की तैयारी करना
आपने अपने विस्तृत आवेदनपत्र में जो व्यापक सूचना दी है जो बोर्ड के प्रत्येक सदस्य के सामने हैं. आपके द्वारा दी गई सूचना में आपकी शैक्षिक, पारिवारिक, व्यावसायिक पृष्ठभूमि, आपकी रुचि, आपकी उपलब्धियों, आपके वर्तमान व्यवसाय, सेवा की आपकी पसंद, संवर्ग-वरीयता आदि सूचना शामिल होती है. विस्तृत आवेदनपत्र में आपके द्वारा दी गई सूचना के प्रत्येक पहलू पर व्यापक तैयारी करना आवश्यक होता है. उदाहरण के लिए वे आपसे आपके रोज़गार की वरीयता का औचित्य देने के लिए कह सकते हैं, या अपने संवर्ग के राज्यों की पसंद के औचित्य के बारे में पूछ सकते हैं. इन सभी के बारे में आपके पास एक संतोषजनक उत्तर होना चाहिए. आपने अपने विस्तृत आवेदनपत्र में जो उल्लेख किया है आपको उसका बचाव या समर्थन करना होगा क्योंकि आपने जो भी तथ्य दिए हैं आप उनसे पीछे नहीं हट सकते. इसलिए मेरी सलाह है कि बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने से पहले अपने विस्तृत आवेदनपत्र के प्रत्येक पहलू पर गहन और गंभीर विचार कर लें.
3. प्रत्याशित वर्तमान घटनाओं की तैयारी :-
आप यह अंदाजा नहीं लगा सकते कि वे आपसे किस वर्तमान घटना पर प्रश्न पूछ सकते हैं. किंतु ताजी वर्तमान घटनाओं पर तैयारी करना और उन पर अपनी ठोस एवं विवेचित राय रखना बुद्धिमानी होगी. इस तरह की वर्तमान घटनाओं की तैयारी करनी चाहिए. इन विषयों के बारे में ज्ञान होने के अतिरिक्त इन विषयों पर अपने निर्णय पर दृढ़ रहना या ठोस राय बनाना आपके लिए आवश्यक है.
4. अपने स्वयं के राज्य के बारे में तैयारी करना :-
आप जिस राज्य से हैं, हो सकता है कि साक्षात्कार के दौरान विचार-विमर्श का वह एक संभावित क्षेत्र हो. आपको अपने राज्य के इतिहास, संस्कृति समाज, अर्थ-व्यवस्था, उद्योगों के बारे में उपयुक्त जानकारी होनी चाहिए. आपको, अपने राज्य में हो रहे नए विकास जैसे आरक्षण, निवेश के प्रति आकर्षण, कृषि अंतरण आदि जैसी कुछ नीतियों का भी गहरा ज्ञान होना चाहिए.
भारत वार्षिक पुस्तक में प्रत्येक राज्य के बारे में संक्षिप्त विवरण होता है. कुछ बुनियादी ज्ञान लेने के लिए आप इस पुस्तक का मनन कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, अपने राज्य के बारे में ताजी सूचना लेने के लिए आप राज्य की वेबसाइट देख सकते हैं.
5. अपनी रुचियों का बचाव/समर्थन करना :-
प्रत्येक उम्मीदवार अपने विस्तृत आवेदनपत्र में अपनी एक या अधिक रुचियों का उल्लेख करता है. बोर्ड को इसके/इनके बारे में अपना पर्याप्त ज्ञान दिखाकर इनका बचाव करना और औचित्य देना आवश्यक होता है. आपने स्वयं में जिस उल्लिखित रुचि का विकास किया है वे आपने उसके प्रति आपके उत्साह पर नजर रखेंगे. तथापि आपको अपनी रुचियों के शैक्षिक महारथ बनने की आवश्यकता नहीं है. आपको मात्र यह प्रमाणित करने में सक्षम होना चाहिए कि आपकी रुचियां मौलिक हैं और आपने उनका अपने वास्तविक जीवन में जहां तक संभव हुआ निर्वाह करने का प्रयास किया है.
6. अभिशासन मामले :
चूंकि आपकी सिविल सेवाओं में किसी कार्य के लिए परीक्षा ली जा रही है, इसलिए उभर रहे अभिशासन के मामलों पर कुछ पूछा जाना अत्यधिक स्वाभाविक है. इसमें वर्तमान अभिशासन पद्धतियों पर प्रश्न तथा इनकी स्थिति पर प्रश्न शामिल होंगे. जैसे:  यदि आप जिला मजिस्टे्रट या पुलिस अधीक्षक अथवा कुछ और हैं तो किसी विशेष स्थिति में आप क्या करेंगे. इसलिए स्थिति मूलक कुछ प्रश्नों का अभ्यास करें और उन पर अपनी धारणा पर अटल बने रहें.
कुछ महत्वपूर्ण सुझाव
*साक्षात्कार की तैयारी पहले से आरंभ करें
मुख्य परीक्षा के  परिणाम के बारे में आश्वस्त अधिकांश उम्मीदवार साक्षात्कार की तैयारी परिणाम प्रकाशित होने के बाद ही प्रारंभ करते हैं. इसके कारण उन्हें, साक्षात्कार के दौरान पूछे जाने वाले विविध प्रश्नों के उत्तर देने के लिए अपेक्षित व्यापक सूचना एकत्र करने के लिए थोड़ा समय मिलता है. यदि आप कोई अच्छा समाचार प्राप्त करने के बारे में आशान्वित हैं तो परिणाम की प्रतीक्षा न करें और अपनी तैयारी करना पहले से आरंभ कर दें.
*बोर्ड के समक्ष अपने स्वाभाविक/सहज रूप में रहें
बोर्ड के समक्ष आपसे अपने सहज रूप में बने रहने की अपेक्षा की जाती है. बोर्ड को वह दिखाने की आवश्यकता नहीं है कि जो आप नहीं हैं. बोर्ड आपसे असाधारण क्षमताओं वाला असाधारण व्यक्ति होने की आशा नहीं करता. पूरा बोर्ड आपमें कुछ मूल्यों के प्रति वचनबद्धता, कुछ व्यक्तित्व गुण और यह तलाशता है कि सिविल सेवा में आपको दिए जाने वाले किसी सेवा कार्य के लिए आप कितने उपयुक्त होंगे. इसलिए, आप स्वयं को वह दिखाने का प्रयास न करें जो आप वास्तव में नहीं हैं. आपकी झलक और आपकी वास्तविकता में कोई अंतर नहीं होना चाहिए.
*झांसा न दें. बोर्ड के समक्ष ईमानदार रहें:- बोर्ड आप में ये दो मुख्य गुण तलाशता है. इसलिए, आप बोर्ड के यथार्थवादी होने की छवि प्रस्तुत करें ताकि बोर्ड आपका मूल्यांकन एक निष्पादनकर्ता के रूप में करे न कि एक स्वप्नदृष्टा के रूप में. बोर्ड के समक्ष ईमानदार बने रहना श्रेष्ठ नीति है. यदि आप उन्हें झांसा देने का प्रयास करेंगे तो वे इसे पकड़ लेंगे और झांसा देने के लिए आपको अत्यधिक दंडित कर सकते हैं. यह अत्यधिक सामान्य है कि जब किसी उम्मीदवार से पूछा जाता है कि आप सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहते हैं तो वह देशभक्त होने और समाज तथा राष्ट्र के लिए महान कार्य करने संबंधी उत्तर देता है. इस तरह अतिशयोक्तियों से बचना चाहिए. यह तथ्य स्वीकार करना बेहतर है कि रोजगार सुरक्षा, स्टेटस, प्रतिष्ठा आपको सिविल सेवाओं की ओर आकर्षित करती है. आप यह भी कह सकते हैं कि सिविल सेवाएं चुनौतिपूर्ण एवं शानदार कॅरिअर देती हैं और विविध कार्य चुनौतियां पंसद करते हैं जिसके कारण सिविल सेवाएं आपका विकल्प है.
छद्म बोर्डों के संकेतों और सलाह का अंधानुकरण न करें :-
मैं साक्षात्कार के उम्मीदवारों को सावधान करना चाहूंगा कि साक्षात्कार के आसपास गलत सूचना देने वाले गलत व्यक्तियों से बचें जिन्हें साक्षात्कार की वास्तविक प्रक्रिया के बारे में कुछ पता नहीं होता. बाजार में अनेक ऐसे स्वयंभू विशेषज्ञ हैं जो आपके ध्येय को विकृत और साक्षात्कार के बारे में आपके मस्तिष्क को भ्रान्त कर देते हैं. वास्तविक साक्षात्कार गैर-अनुभवी झूठे साक्षात्कार विशेषज्ञ के विश्वास से बहुत भिन्न होता है. केवल उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त व्यक्तियों से विश्वस्त, विशेषज्ञ सलाह लें.
*शीशे (दर्पण) के सामने अभ्यास करें: साक्षात्कार से कुछ दिनों पहले अपने कमरे में 10 से 20 मिनट तक शीशे के सामने खड़े होकर समाचार पत्र पढ़ें. इससे आपको स्वर पर बेहतर नियंत्रण में सहायता मिलेगी. आप आत्म-विश्लेषण के लिए अपने निजी संवाद को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं.
 
(लेखक एक प्रख्यात शिक्षाविद् और आई.ए.एस. साक्षात्कार विशेषज्ञ हैं. उनसे उनकी ई. मेल: sb_singh2003@yahoo.com  पर सम्पर्क किया जा सकता है. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं)