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Career 45

आनुवंशिक इंजीनियरी में कॅरिअर

उषा अल्बुकर्क एवं
निधि प्रसाद

हम अपने अभिभावकों जैसे क्यों दिखते हैं? किसी तरह एक कोशाणु एक सजीव जीव-जंतु में विकसित हो जाता है? क्या आप सजीव प्राणियों में वंशानुगतता विज्ञान के बारे में जानना चाहते हैं? जेनेटिक्स शब्द प्राचीन ग्रीक शब्द ‘‘जेनीटिकोस’’ से आया है जिसका अर्थ जेनरेटिव’’ ‘‘(जनन)’’ है, जो जेनेसिस से निकला है और इसका अर्थ वंश या कुल है.

अत्यधिक साधारण से लेकर अत्यधिक विकसित के जीव-जंतु का एक आनुवंशिक कोड अथवा ‘‘ रूप रेखा’’ होती है, जो स्पष्ट रूप से यह निर्धारित करती है कि इसकी क्या विशेषताएं हैं. आनुवंशिकी एक स्पष्ट विज्ञान है जो हमें अत्यधिक लाभकारी विशेषताओं का पता लगाने और उन्हें विभिन्न जीवों में स्थापित करने में हमें सक्षम बनाता है. आनुवंशिक इंजीनियरी एक अत्यधिक परिष्कृत एवं जटिल क्षेत्र है जो जीव-जंतुओं में जैविकीय परिवर्तन के अध्ययन से संबद्ध है.

यह जैवप्रौद्योगिकी की शाखा है जो जीव-जंतुओं के कोशाणु (सबसे छोटा जीव एकक), संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई के अध्ययन से संबंध रखता है. यह जीन के निर्माण और एक जीव से दूसरे जीव में प्रतिरोपित करने के लिए जैविकीय विज्ञान द्वारा विकसित एक प्रौद्योगिकी है. यह मानव कौशल के माध्यम से आनुवंशिक कोड का परिष्करण है. यह ‘‘आनुवंशिकता विज्ञान’’ के रूप में भी जाना जाता है और इसमें रिकॉम्बिनेंट डी.एन.ए. तकनीकों द्वारा आनुवंशिक सामग्रियों की क्लोनिंग, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन, स्पीसीज़ हाइब्रिडाइजेशन या डायरेक्ट मैनिपुलेशन निहित है.

आनुवंशिकी इंजीनियरी, इंजीनियरों को कृत्रिम पद्धतियों द्वारा शरीर में डी.एन.ए. तथा जीन के आचरण के आध्यम में सहायता करती है. इंजीनियर जीवों से डी.एन.ए के निष्कर्षण, संरचना में परिवर्तन के अध्ययन तथा उन्हें पुन: उसी जीव या अन्य जीवों में प्रतिस्थापित करने जैसे विभिन्न कार्य करते हैं. आनुवंशिकी एवं आनुवंशिक इंजीनियरी अनिवार्यत: अनुसंधान उन्मुखी क्षेत्र हैं, जिसमें औषधि, भेषजीय, कृषि एवं पर्यावरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इसका अनुप्रयोग निहित है.

आनुवंशिक इंजीनियर के कुछ कार्य-क्षेत्र इस प्रकार हैं:-

औषधि: जैवप्रौद्योगिकीविदों द्वारा इस क्षेत्र में किए गए विशिष्ट विकास कार्य से, जानलेवा रोगों जैसे हेपिटाइटिस बी, एड्स, स्माल-पोक्स तथा अन्य रोगों के लिए निदान, औषधि एवं वैक्सीन में सुधार आया है. आनुवंशिक इंजीनियरी का उपयोग करके विभिन्न किस्मों के भेषजीय उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है. जो वंशागत व्यतिक्रम अब तक असाध्य माने जाते थे अब उनका आनुवंशिक इंजीनियरी के उत्पादों से उपचार किया जा रहा है.

कृषि एवं पशुपालन:  पौधों एवं पशुओं में आनुवंशिक इंजीनियरी का उपयोग अनेक प्राकृतिक महत्व की विशेषताओं में सुधार लाने, रोगों अथवा क्षति से प्रतिरक्षा बढ़ाने तथा अन्य विशेषताएं बढ़ाने के लिए किया जाता है. अधिक पैदावार वाले बीजों की किस्मों, या कम अवधि वाली फसल किस्मों अथवा जो आद्रता बनाए रखने या रोग एवं पेस्ट रेसिस्टेंट अथवा शुष्क अथवा अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होती हंै, जो अन्यथा जी.एम. (जेनेटिकली मोडिफाइड) खाद्य के रूप में जाने जाते हैं आनुवंशिक  इंजीनियरी का ही परिणाम है. आनुवंशिक रूप से इंजीनियर्ड पशु विकास हार्मोन से उच्च पैदावार के उत्पादन एवं पशु उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार आया है. अनेक किस्मों के आनुवंशिक रूप से इंजीनियर्ड, उच्च पैदावार वाले पशु ब्रीड का विकास हुआ है, जिससे डेयरी उत्पादों तथा मीट उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि हुई है. इसके परिणामस्वरूप भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है.

पर्यावरण: औद्योगिक वायु प्रदूषण का नियंत्रण, कूड़ा एवं निस्सारी शोधन भी आनुवंशिक इंजीनियरों के बड़े कार्य क्षेत्र हैं.  वे वायु में आपके पेय जलों तथा पृथ्वी-जहां आप रहते हैं पर संभावित जैविकीय, भौतिकीय या रासायनिक प्रदूषकों का पता लगाते हैं. वे जोखिम, ऐसे जोखिमों के उपचार तथा पद्धतियों का विश्लेषण करने तथा ऑयल स्पिल्स एवं जहरीले कूड़े आदि के लिए सूक्ष्म-जैवीय उपचार निर्धारित करने के लिए खतरनाक पदार्थों के कूड़ा प्रबंधन का अध्ययन करते हैं.

शैक्षिक अनुसंधान एक तकनीक होती है, जो विशिष्ट कार्य क्षेत्रों में अनुप्रयोग करने की अपेक्षा ज्ञान के क्षेत्र में विस्तावित करने के लिए अधिक संचालित किया जाता है. शैक्षिक अनुसंधान न केवल चिकित्सा एवं शैक्षिक संस्थाओं में, बल्कि कुछ बड़े भेषज एवं रासायनिक उद्योगों में भी संचालित किया जाता है.

पात्रता:कोई स्नातक डिग्री (बी.ई./बी.टेक) के लिए 10+2 या समकक्ष परीक्षा मूल पात्रता मानदंड है जिसमें भौतिकी, रासायन विज्ञान, गणित एवं जीव विज्ञान होना अभीष्ट होती है.

आनुवंशिक इंजीनियरी जैवप्रौद्योगिकी में एक विशेषज्ञता है और इसलिए छात्र आनुवंशिकी या आनुवंशिक इंजीनियरी में विशेषज्ञताजैवप्रौद्योगिकी में अपनी अधिस्नातक डिग्री करते समय प्राप्त कर सकते हैं.

अर्हताप्राप्त आनुवंशिक इंजीनियर आनुवंशिकी या संबंधित क्षेत्रों जैसे-जैवप्रौद्योगिकी, मोलेक्यूलर जीव विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान या जैव रसायन विज्ञान में स्नातक/अधिस्नातक आनुवंशिकी डिग्रीधारी होना चाहिए अथवा किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट (पीएच.डी.) धारी होना चाहिए. मुख्य रूप से जीवन विज्ञान पर बल देते हुए आनुवंशिक या प्रौद्योगिकी क्षेत्र को शामिल करते हुए आनुवंशिक इंजीनियरी का अध्ययन एम.एस.सी., या एम.टेक. के माध्यम से मास्टर स्तर पर और तत्पश्चात डॅाक्टोरल स्तर के अनुसंधान के समय किया जाता है. कृषि, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन, आयुर्विज्ञान, जीवन विज्ञान, आनुवंशिकी, फार्मेसी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैवप्रौद्योगिकी, रसायनिक इंजीनियरी, या प्रौद्योगिकी, कृषि इंजीनियरी, खाद्य प्रौद्योगिकी, मानव जीव विज्ञान एवं समवर्गी किसी एक या अधिक विषयों में डिग्रीधारी स्नातक आनुवंशिकी या आनुवंशिक इंजीनियरी में एम.एस.सी.या एम.टेक. में प्रवेश ले सकते हैं. अधिकांश संस्थान आनुवंशिक इंजीनियरी में विशेष विषय के रूप में पाठ्यक्रम नहीं चलाते हैं, बल्कि जैवप्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैवरसायन विज्ञान विधाओं में एक गौण या सहायक विषय के रूप में रखते हैं. जैवप्रौद्योगिकी में अधिस्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में आनुवंशिक इंजीनियरी में विशेषज्ञता कराई जाती है.

स्नातक पाठ्यक्रमों (बी.ई./बी.टेक.) के लिए चयन मैरिट अर्थात 10+2 की अंतिम परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर और प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है. आई.आई.टी. में प्रवेश जे.ई.ई. (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) के माध्यम से दिया जाता है तथा अन्य संस्थाओं के लिए उनकी निजी पृथक प्रवेश परीक्षा एवं अन्य राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है. विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (एम.एस.सी/एम.टेक.) के लिए चयन जे.एन.यू., नई दिल्ली द्वारा संचालित की जाने वाली अखिल भारतीय सम्मिलित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से तथा आई.आई.टी. में गेट के माध्यम से दो वर्षीय/चार सैमेस्टर के एम.टेक. पाठ्यक्रमों के लिए और जैव रासायनिक इंजीनियरी एवं जैवप्रौद्योगिकी में पांच वर्षीय एकीकृत एम.टेक पाठ्यक्रमों के लिए जे.ई.ई. द्वारा किया जाता है-

अपेक्षित कौशल: सफल आनुवंशिक इंजीनियर बनने के लिए किसी भी व्यक्ति में निम्नलिखित गुण/विशेषताएं होनी चाहिएं.
*प्रखर विश्लेषिक मस्तिष्क
*अनुसंधान के प्रति अभिरुचि
*उच्च स्तर की एकाग्रता
*विहंगम दृष्टि
*उच्च कल्पनाशीलता
*लंबे समय तक कार्य करने की प्रचुर शारीरिक क्षमता
*मिलकर कार्य करने की क्षमता

संभावना
जैवप्रौद्योगिकी एवं आनुवंशिकी के अंतर-संबंधित कई क्षेत्रों में आवश्यक क्षमताएं तथा रुचि रखने वालों के लिए भारत तथा विदेश में उभर रहे अनेक अवसर हैं. आनुवंशिक इंजीनियर वैज्ञानिक एवं अनुसंधानकर्ता सामान्यत: विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थाओं की प्रयोगशालाओं में कार्य प्राप्त करते हैं. कुछ ऐसे व्यक्ति जैवप्रौद्योगिकी उद्योगों के अनुसंधान तथा विकास अनुभाग में भी कार्य-भार ग्रहण करते हैं.

आनुवंशिक इंजीनियर निम्नलिखित उद्योगों/क्षेत्रों में रोजग़ार तलाश सकते हैं.
*भेषज एवं चिकित्सा उद्योग
*कृषि उद्योग
*एमएफएमसीजी कंपनियां
*खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां तथा जैवप्रोसेस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र
*जैव-कृषि (ट्रांसजेनिक किस्में, जैव-उर्वरक, बायो-पेस्टिसाइड्स)
*सरकारी एवं निजी क्षेत्रों के अनुसंधान एवं विकास विभाग
*अध्यापन एवं शिक्षाशास्त्र
*अनुसंधान

सरकारी एवं निजी क्षेत्रों के अनुसंधान संगठन रोग निवारण, प्रदूषण नियंत्रण, कूड़ा प्रबंधन के लिए और बड़ी हुई उत्पादकता के लिए विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के क्षेत्र में अनुप्रयोग हेतु उपायुक्त अनुसंधान एवं विकास अध्ययन करने के लिए भी आनुवंशिकविदों को सेवा में रखते हैं. वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, सेलुलर एवं मोलेक्यूलर जीव विज्ञान केंद्र, सूक्ष्म जैविकीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पादप जैवप्रौद्योगिकी केंद्र, केंद्रीय औषध अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय आहार संस्थान, टाटा आधारभूत अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय जीव विज्ञान केंद्र, आलू अनुसंधान संस्थान, तम्बाकू अनुसंधान संस्थान आदि न्यूनतम मास्टर योग्यताधारी व्यक्तियों  को भर्ती करते हैं.

चूंकि आनुवंशिक इंजीनियरी एक अत्यधिक अनुसंधान-उन्मुखी क्षेत्र है, इसलिए यदि आप कार्य की ऊंचाई पर चढऩा चाहते हैं तो कोई पीएच.डी. डिग्री होना आपके लिए आवश्यक है. पीएच.डी. स्नातक सामान्यत: अपना डॉक्टरोत्तर प्रशिक्षण पूरा करते हैं और विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में या उद्योग में अनुसंधान वैज्ञानिकों के रूप में कार्य ग्रहण करते हैं.

इसलिए, यदि आप ऐसा अनुसंधान करना चाहते हैं जो कि एक दिन एक ऐसे फल का उत्पादन करें जो हेपिटाइटिस-बी के लिए सुरक्षित, प्रभावपूर्ण तथा सस्ता वैक्सीन हो, या ऐसे अतिरिक्त विटामिनों वाले धान का उत्पादन करें जो भारत में रोगों से संघर्ष करने वाले शिशुओं की सहायता कर सके तो आनुवंशिकी या आनुवंशिक इंजीनियरी आपके लिए एक सही कॅरिअर  है.  आज यह कोई विज्ञान फिक्शन नहीं बल्कि एक अत्यधिक क्रांतिपूर्ण एवं लाभपूर्ण विज्ञान है.

संस्थान
भारत में आनुवंशिक इंजीनियरी पाठ्यक्रम चलाने वाले बहुत विश्वविद्यालय निम्नानुसार हैं :-
*एस.आर.एम. विश्वविद्यालय (आनुवंशिक इंजीनियरी में बी.टेक./एम.टेक.पीएच.डी)
*भारत विश्वविद्यालय, चेन्नै (आनुवंशिक इंजीनियरी में एम.टेक.)
*आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना (आनुवंशिक इंजीनियरी में बी.टेक. एवं एम.टेक.)
*आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार
*मदुरै कामराज विश्वविद्यालय ,मदुरै, तमिलनाडु
*आर.एम. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै
*वी.पटेल इंजीनियरी कॉलेज, खेरवा, गुजरात
*भारतीय विज्ञान संस्थान (आई.आई.एस.सी.), बंगलौर
*आनुवंशिक इंजीनियरों की भर्ती करने वाले कुछ सरकारी संगठन निम्नलिखित हैं:-
*राष्ट्रीय रोगप्रतिरक्षाविज्ञान, नई दिल्ली
*डी.एन.ए. फिंगरप्रिंट्स एवं डायग्नोस्टिक्स  केंद्र, हैदराबाद
*जैव रासायनिक इंजीनियरी अनुसंधान तथा प्रोसेस विकास केंद्र, चंडीगढ़
*जीनोमिक एवं इंटीगे्रटिव जीवविज्ञान संस्थान, दिल्ली
*वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसंधान परिषद (सी.एस.आई.आर.)

 

(उषा अलबुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर्स स्मार्ट प्राइवेट लि. में क्रमश: निदेशक और सीनियर काउंसिलिंग सायकोलॉजिस्ट हैं. ई-मेल : careerssmartonline@gmail.com)