नौकरी फोकस


ताज़ा अंक 14, 6 -12 जुलाई 2019

सृजनात्मक संतोष के लिये

वैकल्पिक कॅरिअर

निधि प्रसाद

स्कूली पढ़ाई शुरू करने के साथ ही आपसे पूछा जाने लगता है कि आप बड़े होकर क्या बनेंगे. इस सवाल पर आपका जवाब डॉक्टर, इंजीनियर या विमान चालक ही होता है. लेकिन यह सवाल इसी जगह खत्म नहीं हो जाता. यह तब भी आपका पीछा करता है जब आप कॉलेज की पढ़ाई की अपनी धारा चुन चुके होते हैं. कुछ छात्र अपने चुने हुए विषय को कॅरिअर के गंभीर विकल्प में तब्दील कर लेेते हैं. लेकिन कई विद्यार्थी अपने अकादमिक विषय से पूरी तरह हट कर एकदम नया रास्ता चुनते हैं.

सीबीएसई और आईसीएसई की परीक्षाओं के नतीजे आ चुके हैं. अनेक छात्रों ने परीक्षा में शानदार कामयाबी हासिल की और वे खुश हैं. लेकिन कई छात्र ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी उम्मीद के अनुसार अंक नहीं मिले. इन छात्रों को हरगिज निराश नहीं होना चाहिये.

आपके कॅरिअर का फैसला अंकों से नहीं होता. बेशक बुनियादी शिक्षा महत्वपूर्ण है. यह हमें अपनी जिंदगी को संवारने और सही रास्ता चुनने में मदद करती है. लेकिन शिक्षा सफलता की राह पर चलने की एकमात्र शर्त नहीं है. यह धारणा गलत है कि उच्च शिक्षा हासिल करके ही हम कुछ बन सकते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को नहीं समझते. छात्रों पर अच्छे अंक लाने, कॅरिअर के कठिन विकल्पों को चुनने और सबसे मुश्किल परीक्षाओं में बैठने का दबाव हमेशा रहता है.

अपना कॅरिअर चुनना आसान काम नहीं है. ज्यादातर हम कॅरिअर को चुनते नहीं बल्कि वह हमें किस्मत से मिल जाता है. जो छात्र अंक, ग्रेड और प्रतिशत की ऊंची उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाते उन्हें उनके सामने मौजूद विषयों और कॅरिअर के विकल्पों के बीच ही चुनाव करना पड़ता है. ज्यादातर छात्र रोज़गार के सीमित अवसरों वाले इंजीनियरी, कानून और चिकित्सा जैसे पारंपरिक कॅरिअर ही अपनाना चाहते हैं. हर रोज कॅरिअर के नये विकल्प सामने आ रहे हैं. फिर भी कॉलेज में पढ़े-लिखे और अच्छी शैक्षिक योग्यता वाले युवाओं के बीच बेरोज़गारी काफी अधिक है.

वैश्वीकरण और अर्थव्यवस्था के दरवाजे समूची दुनिया के लिये खुलने के बाद हर विषय में कॅरिअर के अनेक विकल्प सामने आये हैं. हर रोज नयी विशेषज्ञताएं सामने आ रही हैं. कॅरिअर के पारंपरिक विकल्प अब प्रचलन में नहीं हैं. आज का युवा जुनून, रचनात्मक संतोष और लीक से हट कर कुछ करने को तरजीह देता है.

क्या आपको अपनी मौलिकता को जाहिर करने में आनंद आता है? क्या खाली समय में नवोन्मेषी होना आपको पसंद है? नये व्यवसाय सामने आ रहे हैं. बाजार दिन-ब-दिन ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनता जा रहा है. ऐसे में किसी व्यक्ति या कंपनी का आगे बढऩा रचनात्मक ढंग से सोचने और काम करने पर निर्भर करता है.

कॅरिअर के ऐसे उभरते विकल्पों की कोई कमी नहीं है जो आपको अपनी रचनात्मक क्षमताओं के इस्तेमाल का मौका देने के अलावा अच्छा आर्थिक लाभ भी प्रदान करते हैं. यहां हम ऐसे ही कुछ वैकल्पिक कॅरिअर की चर्चा करेंगे.

1. डिजाइन

डिजाइन के व्यापक दायरे में फैशन से लेकर प्रौद्योगिकी और निर्माण तक विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं. हम जो कुछ भी देखते या पहनते हैं उसे किसी और ने डिजाइन किया है. डिजाइनर को रचनात्मक और सूक्ष्मता में झांकने की निगाह वाला होना चाहिये. इसके अलावा उसे 2डी/3डी ढांचों की पहचान की ऊंची दक्षता से भी लैस होना चाहिये.

डिजाइन में कॅरिअर के अवसर: डिजाइन के विस्तृत दायरे में फैशन डिज़ाइन, ग्राफिक डिज़ाइन, कार्टून डिज़ाइन, उत्पाद डिज़ाइन, परिधान डिज़ाइन, कपड़ा डिजाइन, चमड़ा डिज़ाइन, जेवर डिज़ाइन, यूआई/ यूएक्स डिज़ाइन, ऑटोमोबाइल डिजाइन, संचार डिज़ाइन इत्यादि शामिल हैं. हम अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप इनमें से किसी भी क्षेत्र को अपना सकते हैं.

डिज़ाइन के अध्ययन के लिये चोटी के कुछ संस्थान: राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (कई स्थानों पर), औद्योगिक डिजाइन केन्द्र (आईआईटी-बंबई), भारतीय कार्टूनिस्ट संस्थान (बेंगलूर), सर जेजे कला विद्यालय (मुंबई), सिमबायोसिस डिजाइन संस्थान (पुणे), सृष्टि डिजाइन और प्रौद्योगिकी विद्यालय (बेंगलूर), एमआईटी डिजाइन संस्थान (पुणे), एनआईएफटी (दिल्ली), एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय (मुंबई) तथा पर्ल अकादमी (दिल्ली, जयपुर और मुंबई).

हम यहां डिजाइन के कुछ ऐसे प्रचलित क्षेत्रों का जिक्र करेंगे जो आपकी रचनात्मकता को प्रौद्योगिकी से जोड़ते हैं.

यूआई/यूएक्स डिजाइन: हमारे जीवन को सरल बनाने के लिये हजारों ऐप और वेबसाइट मौजूद हैं. हर वेबसाइट अपने रूप, अनुभूति और इस्तेमाल के अनुभव में दूसरों से अलग है. इस भिन्नता को ही तकनीकी शब्दावली में किसी वेबसाइट का यूआई और यूएक्स कहते हैं.

यूआई का मतलब यूजर इंटरफेस है. इसका संबंध किसी ऐप या वेबसाइट के दृश्यगत आकर्षण से है. यह आकर्षण उपयोगकर्ता के संपूर्ण अनुभव को बढ़ाने में मददगार होता है. मसलन, किसी वेबसाइट को खोलते ही आपको ग्राफिक्स दिखायी देते हैं. आपका ध्यान इस बात पर जाता है कि वेबसाइट का मेनू बार कैसा है और इसमें बटन किस तरह व्यवस्थित किये गये हैं. इसी को वेबसाइट का यूआई कहते हैं.

इससे अलग यूएक्स का अर्थ यूजर एक्सपेरिएंस है. यूएक्स डिज़ाइन में उत्पाद के कामकाज के पहलू पर गौर किया जाता है. मिसाल के तौर पर आप वेबसाइट पर किसी उत्पाद को पसंद करने के बाद उसे खरीदने के लिये अपने कार्ट में डालते और भुगतान करते हैं.

ऑटोमोबाइल डिज़ाइन: क्या आपको कारें पसंद हैं? क्या आपने कभी अपनी कॉपियों को कारों की तस्वीरें बना कर भरा है? क्या आपको लगता है कि आप एक बेहतरीन कार डिज़ाइनर बन सकते हैं? क्या आपकी कार डिज़ाइन ऐसी है जो ऑटोमोबाइल उद्योग में क्रांति ला देगी? कार डिज़ाइन एक रोमांचक और रचनात्मक हॉबी होने के बावजूद रोज़गार में कम ही तब्दील हो पाती है.

भारत वाहनों का एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है. देश में कारों की बिक्री 20 लाख के पार पहुंच चुकी है. लिहाजा लगभग सभी ऑटोमोबाइल कंपनियां कार डिज़ाइनरों की सेवाएं लेने पर बड़ी रकम खर्च कर रही हैं.

ऑटोमोबाइल डिजाइनर के कार्य क्षेत्र में कार की आकृति और अनुभूति से लेकर इसकी सुरक्षा जांच तक सब कुछ आता है. मौजूदा समय में खरीददार हमेशा चाहता है कि उसका वाहन नयी डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी वाला हो. इसलिये ऑटोमोबाइल इंजीनियरी का डिजाइन क्षेत्र काफी तेजी से बढ़ रहा है. इस क्षेत्र में जाने के लिये कला और डिज़ाइन का कौशल होना चाहिये. यह आपको अपनी क्षमता, कौशल और नवोन्मेष को प्रदर्शित करने का बेहतरीन अवसर मुहैया कराता है.

ऑटोमोबाइल डिज़ाइन में विशेषज्ञता आपको मारूति सुजूकी, जनरल मोटर्स, होंडा, टाटा मोटर्स और कमिंस इंडिया जैसी वाहन निर्माता कंपनियों के अनुसंधान और विकास विभागों में काम करने के योग्य बनाती है.

ऑटोमोबाइल डिज़ाइन के अध्ययन के लिये चोटी के कुछ संस्थान: राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (गांधीनगर, बेंगलूर और अहमदाबाद), महाराष्ट्र प्रौद्योगिकी संस्थान (पुणे), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बंबई और गुवाहाटी) तथा आईआईआईटीडीएम (जबलपुर).

संचार डिज़ाइन: डिज़ाइन की एक विशिष्ट धारा संचार डिज़ाइन का तेजी से उदय हो रहा है. दृश्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रसार के साथ ही संचार डिजाइन का महत्व बढ़ता जा रहा है. इसके दायरे में टेलीविजन, विवरणिका चित्रण, एनिमेशन फिल्म निर्माण और वीडियो प्रोग्रामिंग आते हैं. ग्राफिक डिजाइन, एनिमेशन फिल्म डिज़ाइन और वीडियो प्रोग्रामिंग इसके तीन बुनियादी विषय माने जा सकते हैं. संचार डिज़ाइन टेलीविजन पर विज्ञापन देखने, मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने और किताब की मोहक जिल्द से आकर्षित होने समेत हमारे जीवन के हर पहलू को छूती है.

 

संचार डिज़ाइनर में एक जीवंत कल्पनाशीलता, रचनात्मक चित्रांकन कौशल, सामाजिक परिवेश, प्रचलित अभिरुचियों, आवश्यकताओं और रिवाजों में दिलचस्पी, जुनून, आत्मविश्वास, सिद्धांतों और विचारों को मूर्त रूप देने की क्षमता, जिज्ञासा और असाधारण प्रतिभा होनी चाहिये.

2. विज्ञापन

विज्ञापन दृश्यगत और मौखिक संदेशों के जरिये जनसाधारण को सूचित और प्रभावित करने का तरीका है ताकि वे किसी उत्पाद या सेवा को खरीदें. विज्ञापन के जरिये संभावित खरीददारों के मन में किसी उत्पाद या सेवा के लिये जागरूकता पैदा की जाती है. विज्ञापन के प्रचलित माध्यमों में टेलीविजन, रेडियो, वेबसाइट, समाचारपत्र, पत्रिकाएं, बिल बोर्ड और होर्डिंग शामिल हैं. दरअसल विज्ञापन प्रभावशाली संचार के जरिये ब्रांड को स्थापित करने वाला एक सेवा उद्योग है. यह मांग पैदा करने के अलावा बाजार प्रणाली और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में भी मददगार होता है. किसी भी व्यक्ति को विज्ञापन के क्षेत्र में सफलता के लिये चपल, रचनात्मक दिमाग वाला और समय के प्रबंधन में माहिर होना चाहिये.

विज्ञापन में कॅरिअर के अवसर: विज्ञापन प्रोफेशनल को अपनी दिलचस्पी के क्षेत्र के हिसाब से क्लाइंट सर्विसिंग, अनुसंधान, कॉपी लेखन, संपादन और स्क्रिप्ट लेखन जैसी विभिन्न भूमिकाएं अदा करनी होती हैं. विज्ञापन प्रोफेशनल के रूप में आप कॉरपोरेट घरानों, प्रकाशन संस्थाओं, मीडिया, विज्ञापन कंपनियों इत्यादि को अपनी सेवाएं दे सकते हैं.

3. छायांकन

छायांकन उन क्षेत्रों में शामिल है जिनमें आप शुरुआत अक्सर हॉबी के तौर पर करते हैं और बाद में यह पूर्णकालिक कॅरिअर बन जाता है. इसलिये अगर आप छायांकन में अपने कौशल और प्रतिभा का इस्तेमाल अंशकालिक हॉबी के रूप में करते हैं तो आपके लिये इसे पूर्णकालिक पेशे में बदलने का वक्त आ गया है. पारंपरिक तौर पर छायांकन कार्यक्रमों, विवाहों और फिल्मों तक सीमित रहा है. लेकिन हाल के बरसों में ई-कॉमर्स, विज्ञापन, जन माध्यम और संबंधित क्षेत्रों में तेज प्रगति के साथ ही प्रोफेशनल छायाकारों की मांग काफी बढ़ी है. फैशन और फूड फोटोग्राफी समेत वाणिज्यिक क्षेत्र में अच्छे छायाकारों की काफी मांग है. खेल फोटोग्राफी और वन्यजीव फोटोग्राफी जैसे अन्य क्षेत्रों की लोकप्रियता में भी इजाफा हुआ है. डिजिटल फोटोग्राफी की दुनिया में कॅरिअर बनाने के लिये आपको नयी तकनीकों और उपकरणों के बारे में पता होना चाहिये. कई संस्थान छायांकन के कौशल और तकनीकों की जानकारी देने के लिये पाठ्यक्रम चलाते हैं.

छायांकन में स्नातक डिप्लोमा/डिग्री कार्यक्रम चलाने वाले कुछ संस्थान: जवाहरलाल नेहरू वास्तुशास्त्र और ललित कला विश्वविद्यालय (हैदराबाद), राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (कई स्थानों पर), राष्ट्रीय फोटोग्राफी संस्थान (मुंबई), देलही कॉलेज ऑफ फोटोग्राफी (दिल्ली), सर जेजे अनुप्रयुक्त कला संस्थान (मुंबई), जामिया मिल्लिया इस्लामिया जनसंचार केन्द्र (दिल्ली), सिमबायोसिस फोटोग्राफी स्कूल (पुणे) और रघु राय सेंटर ऑफ फोटोग्राफी (गुरूग्राम).

4. एंकरिंग/रेडियो जॉकी

अच्छी और बुलंद आवाज वाले लोग सिर्फ गायन ही नहीं बल्कि संवाद में भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. यदि आपमें संचार के लिये जुनून, आत्मविश्वास और उत्साह है तो आप रेडियो जॉकी (आरजे) का कॅरिअर अपना सकते हैं. आकर्षक व्यक्तित्व सिर्फ आसपास के लोगों का ध्यान खींच सकता है. लेकिन एक असरदार आवाज हजारों लोगों पर अपना जादू चलाती है.

रेडियो जॉकी के कार्य: आरजे रेडियो पर वार्तालाप के कार्यक्रम की मेजबानी करता है. आसान शब्दों में कहें तो वह रेडियो कार्यक्रम का सूत्रधार है. उसके दायित्वों में कार्यक्रम की मेजबानी करने के साथ ही स्क्रिप्ट पढऩा तथा तय अंतराल पर संगीत और श्रव्य विज्ञापन चलाना भी शामिल है. वह चर्चा के विषयों को उठाता, विषय की रूपरेखा बनाता तथा श्रोताओं से टेलीफोन, ईमेल, सोशल मीडिया और एसएमएस के जरिये संवाद करता है. वह जो कुछ भी करता है उसे आकर्षक और मनोरंजक होना चाहिये.

इस पेशे के लिये जरूरी कुछ दक्षताएं हैं - मोहक और असरदार आवाज, स्वर में उतार-चढ़ाव, स्पष्ट शैली, सटीक उच्चारण, भाषा में प्रवाह, अच्छी हास्यवृत्ति, अनूठापन, रचनात्मकता, सहजता, संगीत और समसामयिक विषयों का ज्ञान तथा स्थानीय बोलियों में अच्छी तरह बोल पाने का हुनर.

भारत में रेडियो जॉकी का प्रशिक्षण देने वाले चोटी के कुछ संस्थान: रेडियो सिटी प्रसारण स्कूल (मुंबई), भारतीय जनसंचार संस्थान (नयी दिल्ली), जेवियर संचार संस्थान (मुंबई), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (नयी दिल्ली) तथा मुद्रा संचार संस्थान (एमआईसीए) (अहमदाबाद).

5. एथिकल हैकिंग

एथिकल हैकिंग कइयों के लिये कॅरिअर का आकर्षक विकल्प रहा है. यह चुनौतीपूर्ण काम कभी भी बोझिल नहीं होता. इसमें आपको अच्छे वेतन के अलावा कुछ उपलब्धि हासिल करने का संतोष भी मिलता है.

हैकिंग किसी कंप्यूटर सिस्टम की भेद्यताओं का पता लगा कर उनके जरिये उसमें अनधिकृत घुसपैठ की प्रक्रिया है. इसका इस्तेमाल सिस्टम की फाइलें मिटाने से लेकर संवेदनशील सूचनाएं चुराने तक जैसी दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिये किया जा सकता है. हैकिंग गैरकानूनी है और ऐसा करते पकड़े जाने पर आपको गंभीर नतीजों का सामना करना पड़ सकता है. अनेक मामलों में हैकिंग करने वालों को कई साल कैद की सजा तक भुगतनी पड़ी है.

लेकिन इजाजत लेकर की गयी हैकिंग वैध हो सकती है. कंपनियां अक्सर ऐसे कंप्यूटर विशेषज्ञों की सेवाएं लेती हैं जो हैकिंग के जरिये उनके सिस्टम की भेद्यताओं और कमजोरियों का पता लगा सकें. इससे उन्हें अपने सिस्टम को दुरुस्त करने में सहायता मिलती है. ऐसा एहतियातन किया जाता है ताकि गलत इरादों वाले अवैध हैकर सिस्टम की भेद्यताओं का फायदा नहीं उठा सकें. बिना किसी दुर्भावना के और इजाजत लेकर सिस्टम हैक करने वालों को एथिकल हैकर कहते हैं. इस तरह की हैकिंग की प्रक्रिया को एथिकल हैकिंग कहा जाता है.

इंटरनेट सुरक्षा का पर्याय एथिकल हैकिंग भारत में एक बेहद सम्मानित पेशा बनता जा रहा है. एथिकल हैकरों के लिये सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के काफी अवसर पैदा हो रहे हैं. एथिकल हैकर कंप्यूटर के अपने विस्तृत ज्ञान और रचनात्मकता का उपयोग कर सिस्टम के भेदनीय क्षेत्रों का पता लगाते हैं. इससे कंपनियों को अपने नेटवर्कों को अवैध हैकरों के हाथों हैक होने से बचाने में मदद मिलती है. एथिकल हैकर साइबर आतंकवाद को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ज्यादातर एथिकल हैकर अपने कॅरिअर की शुरुआत तकनीकी सहायक इंजीनियर के तौर पर करते हैं. वे सीईएच प्रमाणन के अपने आखिरी मुकाम तक पहुंचने से पहले सीसीएनए और सीआईएसएसपी जैसे प्रमाणनों के जरिये तरक्की की सीढिय़ां चढ़ते हैं.

एथिकल हैकरों को कंपनियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान निजी और संवेदनशील सूचनाओं की रक्षा या अपने नेटवर्क की सुरक्षा की जांच के मकसद से नेटवर्कों में सेंध लगाने के लिये रखते हैं.

इस पेशे में आने के लिये आपको सूचना प्रौद्योगिकी/कंप्यूटर विज्ञान विषय के साथ विज्ञान से 12वीं उत्तीर्ण होना चाहिये. आपको स्नातक (विज्ञान) में कंप्यूटर विज्ञान/ बीसीए/सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित कोई भी विषय लेना चाहिये. इसके बाद आप सीईएच, सीसीएनए, एससीएनएस, सीपीटीई और सीआईएसएसपी जैसे एथिकल हैकिंग के प्रमाणन पाठ्यक्रम को अपना सकते हैं.

या फिर आप सूचना प्रौद्योगिकी/कंप्यूटर विज्ञान विषय के साथ विज्ञान से 12वीं उत्तीर्ण हों. इसके बाद आप सीईएच, सीसीएनए, एससीएनएस, सीपीटीई और सीआईएसएसपी जैसे एथिकल हैकिंग के प्रमाणन पाठ्यक्रम में हिस्सा लें.

·         आपको फायरफॉक्स, लिनक्स और विंडोज जैसे ऑपरेटिंग सिस्टमों की जानकारी होनी चाहिये.

·         सी, सी++, पायथन और रूबी जैसी प्रोग्रामिंग की भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करें.

·         आपको एथिकल हैकिंग में प्रमाणन के सिवा किसी खास योग्यता की जरूरत नहीं है.

·         कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक डिग्री उपयोगी साबित हो सकती है.

एथिकल हैकर को रचनात्मक सोच वाला होना चाहिये. अवैध हैकर हमेशा सिस्टम में घुसपैठ के लिये नये-नये तरीके इस्तेमाल करते रहते हैं. इन तरीकों का अनुमान लगा कर उन्हें नाकाम करना एथिकल हैकर का काम है.

हमारे बीच इंजीनियरों, डॉक्टरों और वाणिज्य स्नातकों की कोई कमी नहीं है. इसलिये कॅरिअर के ऐसे गैर-परंपरागत विकल्पों को अपनाने की जरूरत है जो मौजूदा समय में उद्योग में समान रूप से व्यावहारिक हैं. अपने ज्ञान का बेहतर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है. खास तौर पर तब जब आपको पता हो कि आप कौन सा काम अच्छे ढंग से कर सकते हैं. हमारी सलाह है कि आप खुद को भविष्य के लिये तैयार करें.

(लेखक वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक सलाहकार हैं. ई-मेल आईडी:nidhiprasadcs@gmai.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)