नौकरी फोकस


volume-20, 17-23 August 2019

ऑटोमोटिव क्षेत्र में नए रोज़गार

रुचि श्रीमाली

इस वर्ष 12वीं कक्षा पास करने वाले और विभिन्न कॉलेज पाठ्यक्रमों में प्रवेश

   लेने वाले अधिकांश विद्यार्थी 2022 में रोज़गार की तलाश में होंगे, क्योंकि भारत में अधिकांश स्नातक पाठ्यक्रम तीन वर्ष के हैं. जिन विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है, वे 4 वर्ष बाद यानी 2023 में रोज़गार के लिए तैयार होंगे. चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थी जानते हैं कि स्नातक होने के बाद वे डॉक्टर के रूप में कहीं भी काम कर सकते हैं - चिकित्सालयों में या अस्पतालों में, लेकिन बाकी लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि अगले 3 से 4 वर्षों में किन कौशलों की मांग रहेगी.

भारतीय वाणिज्य और उद्योग परिसंघ -फिक्की तथा राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर और सेवा कंपनी संघ - नेस्कॉम ने वैश्विक अभिरुचियों और भारतीय अर्थव्यवस्था को उनके प्रभाव का परीक्षण करने वाली कंपनी अर्नेस्ट एंड यंग के साथ भविष्य के रोज़गार के बारे में एक अध्ययन आरंभ किया है. भारत में पांच प्रमुख क्षेत्रों का विस्तार से अध्ययन किया गया और रिपोर्ट में उन कौशलों का उल्लेख किया गया, जिनकी जरूरत 2022 में पड़ेगी. ये क्षेत्र थे -

·         ऑटोमोटिव

·         बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा)

·         आईटी-बीपीएम (सूचना प्रौद्योगिकी और व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन)

·         रिटेल यानी खुदरा क्षेत्र और

·         वस्त्र क्षेत्र

यह माना जाता है कि निकट भविष्य में लंबे समय से चली आ रही और प्रत्याशित, नियम आधारित नौकरियों में कमी होगी, जबकि रचनात्मक, डिजाइन उन्मुख कौशल में, जिनके लिए उच्च स्तर का बौद्धिक कौशल (हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल) जरूरी है, बढ़ोतरी होगी.

कौशल में बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार भारत में इन क्षेत्रों में रोज़गार अवसरों पर प्रभाव डालने वाली तीन प्रमुख प्रवृत्तियां (ट्रेंड) होंगी - वैश्वीकरण, जनसांख्यिकी बदलाव और विभिन्न उद्योगों द्वारा नई प्रौद्योगिकी अपनाया जाना. अनुमान है कि सूचना प्रौद्योगिकी और बीएफएसआई सेक्टर में अधिकांश रोज़गार अवसर सृजित होंगे, ऑटो और रिटेल सेक्टर में भी कुछ अवसर सृजित होंगे और प्रमुख निर्माण क्षेत्रों जैसे - वस्त्र और चमड़ा उद्योगों में सबसे कम अवसर होंगे.

इन क्षेत्रों के भविष्य के कर्मचारियों के लिए आवश्यक कौशल में भी बड़े पैमाने पर बदलाव का अनुमान है.

इस आलेख में हम इस बात पर विचार विमर्श करेंगे कि निकट भविष्य में ऑटोमोटिव क्षेत्र में नौकरियां पाने के लिए आपको किस प्रकार के नए कार्य और नए कौशल की जरूरत पड़ेगी.

भारत में ऑटोमोटिव सेक्टर की मौजूदा स्थिति

भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार निर्माता और व्यावसायिक वाहनों का सातवां सबसे बड़ा निर्माता है. 2026 तक इसका टर्नओवर 16 लाख करोड़ से लेकर 18 लाख करोड़ रुपये तक हो जाने की आशा है. 2019 में भारत में लगभग 3 करोड़ 10 लाख वाहन तैयार किए गए.

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पारंपरिक रूप से दोपहिया वाहनों का वर्चस्व रहा है. इस वर्ष यह सकल घरेलू बिक्री का 81 प्रतिशत रहा. व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में भी पिछले वर्ष से 17.55 प्रतिशत की दर से बढ़़ोतरी हुई है. इतने बड़े उद्योग के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की भर्ती की जरूरत है. इन लोगों में नियमित कर्मचारियों के साथ साथ अनुबंध पर काम करने वाले भी शामिल हैं. आपका लक्ष्य चाहे व्हाइट कॉलर (कार्यालय पदस्थ) नौकरियां हों या कौशल आधारित रोज़गार या अकुशल श्रमिक वाली रिक्तियां हों, - ऑटोमोबाइल उद्योग आपको रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध कराता है.

भारत में शीर्ष पांच वाहन निर्माता और सहयोगी पुर्जे निर्माता कंपनियां लगभग डेढ़ लाख लोगों को रोज़गार देती हैं. मौजूदा समय में इस उद्योग में समग्र रूप से लगभग एक करोड़ 28 लाख लोग काम कर रहे हैं. मानव संसाधन फर्म पीपल स्ट्रांग के हाल के अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि 2020 में ऑटोमोटिव सेक्टर में रोज़गार में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.  

नए उत्पाद और प्रौद्योगिकी के आने, सख्त उत्सर्जन नियम और विस्तार क्षमता का अर्थ है, शीर्ष निर्माता कंपनियों के साथ-साथ सहयोगी पुर्जे बनाने वाली कंपनियों में रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे.

अध्ययन से यह भी स्पष्ट है कि नीचे दिए गए कौशलों और प्रौद्योगिकियों से संबंधित रिक्तियां प्रमुख रहेंगी -

·         संबंधित प्रौद्योगिकी, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन

·         डिजिटल इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) कौशल

·         5जी सम्पर्क

·         कोडिंग और

·         एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (उन्नत ड्राइविंग सहयोग प्रणाली) - एडीएएस.

अगले 12 से 18 महीनों के दौरान इन क्षेत्रों में रोजगार अवसरों में 17-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

अन्य क्षेत्र, जिनमें ऑटोमोटिव सेक्टर में रोज़गार की मजबूत संभावना व्यक्त की गई है-

·         अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) - इस विभाग में वाहन निर्माता  बिजली चालित वाहन डिजाइनिंग, इंजन और ईंधन प्रणालियों से संबंधित कौशल रखने वाली प्रतिभाओं की तलाश में रहेंगे.

भारत सरकार निकट भविष्य में केवल बिजली चालित वाहनों (ईवीएस) की बिक्री को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है. सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में इन वाहनों को लाने के लिए 11 शहरों का चयन किया गया है. लक्ष्य है, भारत को वैश्विक निर्माण और अनुसंधान विकास केंद्र के साथ साथ निर्यात केंद्र (ऑफ शोरिंग हब) बनाना. 2015 से राष्ट्रीय वाहन परीक्षण तथा अनुसंधान और विकास बुनियादी ढांचा परियोजना (एनएटीआर आईपी) के तहत 5 परीक्षण और अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं.

·         अंशांकन (कैलिबरेशन): यूरो-6 उत्सर्जन नियम के अनुपालन की समय सीमा अप्रैल 2020 तय की गई है. इसका अर्थ है, सहयोगी पुर्जा उद्योग को अपनी क्षमता में अग्रिम बढ़ोतरी करनी होगी यानी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएमएस) के साथ साथ वेंडरों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेगे.

वे कार्य, जिनका अस्तित्व बने रहने की संभावना नहीं है

ऑटोमोटिव सेक्टर में जिन कार्यों के निकट भविष्य में बने रहने की संभावना नहीं है, उनमें ये शामिल हैं:

·         वेल्डिंग

·         प्रेस मशीन संचालन

·         पेंटिंग

·         निरीक्षण सहयोग

·         इन प्लांट मैटिरियल हैंडलर.

ये रोज़गार लागत कम करने और प्रदर्शन सुधारने के उद्देश्य से आसानी से हटाए जा सकते हैं.

वे कार्य, जिनकी मांग जल्दी ही बढ़ेगी

वास्तव में, निकट भविष्य में ऑटोमोटिव सेक्टर में ये नए रोज़गार सृजित होंगे -

·         थ्री डी प्रिंटिंग तकनीशियन: यह तकनीशियन थ्री डी पिं्रट की तकनीकों और विधियों से अवगत होगा, अपेक्षित उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उनकी जांच करेगा, और थ्री डी निर्माण और इंजेक्शन मोल्डिंग कार्य की जानकारी रखेगा.

·         ऑटोमोबाइल एनालिटिक इंजीनियर: यह व्यक्ति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इन्वेंटरी प्रबंधन के लिए अनुमानित विश्लेषण लागू करने के वास्ते उत्तरदायी होगा; विभिन्न प्रक्रियाओं, पुर्जों और वाहनों की क्षमता बढ़ाने के प्रमुख कार्य सुनिश्चित करने के लिए अनुमानित मॉडलिंग का प्रयोग करेगा; और बिक्री संबंधी पूर्वानुमानों में सटीकता के लिए डेटा का उपयोग करेगा.

·         मशीन लर्निंग आधारित वाहन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ: यह विशेषज्ञ मानव संचालन शैली के अनुकरण के लिए मशीन लर्निंग लागू करने में सक्षम होगा, और उन्नत वाहन सुरक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए अधिक सक्षम लर्निंग तकनीकों का उपयोग करेगा. ये विशेषज्ञ ऐसी प्रणालियां भी विकसित करेगा, जिनसे मानव हस्तक्षेप के बिना सड़क पर संबंधित जोखिम  रोके जा सकें.

·         सस्टेनेबिलिटी इंटेग्रेशन विशेषज्ञ: ये विशेषज्ञ वाहन निर्माण संबंधी ऐसे समाधान विकसित करेंगे, जिनमें निरंतरता हो और जो मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ साथ पर्यावरण सुरक्षा संबंधी नियमों का भी अनुपालन करते हों.

मौजूदा रोज़गार, जिनकी प्रकृति में बदलाव हो रहा है?

ऑटोमोटिव सेक्टर में कुछ वर्तमान रोज़गार में भी परिवर्तन हो रहा है. इनमें रोज़गार पाने वाले व्यक्तियों को अपने कॅरिअर में आगे बढ़ने के लिए कुछ अतिरिक्त कौशल की आवश्यकता पड़ेगी. इन रोज़गारों में शामिल हैं:

क्ले मॉडलर का स्थान थ्री डी क्ले मॉडलर लेगा.

1930 के दशक में पहली बार वाहनों का डिजाइन तैयार करने के लिए क्ले मॉडलर का प्रयोग किया गया. इस काम के लिए औद्योगिक प्लास्टिसिन का उपयोग किया गया और इससे डिजाइनरों को उत्पाद की परिकल्पना में मदद मिली.

आज वर्चुअल रिएलिटी और थ्री डी प्रिंटिंग से वाहनों का भौतिक मॉडल तैयार होने से पहले वर्चुअल स्पेस में उनका डिजाइन तैयार करने के तरीके में परिवर्तन आ रहा है. क्ले का उपयोग अभी भी जारी रहेगा. कार की सतह पर प्रकाश और छाया के असर को दिखलाने के लिए क्ले मॉडल से बेहतर और कुछ नहीं है. हालांकि आज कार का मॉडल तैयार करने वाले उन लोगों की मांग है, जो डिजाइनर के स्कैच को वास्तविक, पूर्ण आकार, थ्री डी कार में बदल सकें, ताकि उत्पाद की स्पर्श योग्य अनुभूति मिल सके और इसके लिए आदर्श श्रम दक्षता निश्चित की जा सके.

इन थ्री डी मॉडल को बाद में थ्री डी सीएडी में स्कैन किया जा सकता है और वाहनों का डिजाइन तैयार करने में प्रयुक्त किया जा सकता है.

थ्री डी मॉडलिंग के लिए संबंधित सॉफ्टवेयर की अतिरिक्त जानकारी जरूरी है, जैसे जेडब्रश और मडबॉक्स जैसे आकार देने वाले तथा पॉलीपेंटिंग जैसे टेक्सचरिंग प्रोग्राम की.

उपभोक्ता सेवा कार्यकारी (कस्टमर सर्विस एक्जीक्यूटिव) का स्थान उपभोक्ता देखभाल विशेषज्ञ (कस्टमर केयर एक्सपर्ट) लेंगे.

किसी भी उद्योग में उपभोक्ता सेवा कार्यकारी आपके कॉल को रिसीव करने, आपके सवालों का जवाब देने और समस्या को हल करने के लिए जरूरी कदमों की जानकारी देने का काम करते हैं. ऑटोमोटिव सेक्टर में यह कार्य लोगों को उनकी पसंद की कार के मॉडल की कीमत या विशेषताओं की जानकारी देना है और कार के विभिन्न पुर्जों की वारंटी या गारंटी संबंधी कंपनी की नीतियों के बारे में बताना है. ये कार्यकारी एपल कंपनी द्वारा नियुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंस सिरी ( सिरी स्पीच इंटरप्रिटेशन एंड रिकग्निशन) की तरह काम करते हैं, जो आपको आपके प्रश्नों के प्रमुख शब्दों पर आधारित डेटा बेस से अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराते हैं.

उपभोक्ता देखभाल विशेषज्ञ से अधिक सहयोगी, मानवीय और उपभोक्ता अनुकूल व्यवहार की अपेक्षा की जाती है. वे उपभोक्ता संबंधी अनुभवों से अधिक जुड़े होते हैं. कस्टमर  केयर एक्सपर्ट के रूप में आप किसी उपभोक्ता की जिज्ञासाओं के समाधान या बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कड़ा रुख नहीं अपना सकते, बल्कि आपको अपने उपभोक्ताओं की जरूरतों को धैर्यपूर्वक सुनना होगा, उनके साथ एक संबंध कायम करने का प्रयास करना होगा और सही समाधान में उनकी मदद करनी होगी.

अधिक से अधिक कार निर्माता अपने उपभोक्ताओं के साथ संबंधों को सुधारने के लिए काफी धन खर्च कर रहे हैं. इसका अर्थ है कि उन्हें ऐसी प्रतिभाओं की जरूरत है, जो उनके उत्पादों तक पहुंचने, उत्पादों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने, उन्हें खरीदने, उपयोग में लाने और उस विशिष्ट ब्रांड के साथ एक भावनात्मक रिश्ता कायम करने के लिए नए उपभोक्ताओं से जोड़ने का विशिष्ट कौशल रखते हों. उपभोक्ता देखभाल विशेषज्ञों को कंपनी के उत्पादों या सेवाओं के संबंध में उपभोक्ताओं से प्रत्येक बिंदु पर संपर्क में रहना चाहिए.

डिजाइन इंजीनियर का स्थान इंटरेक्शन डिजाइनर लेगा

वाहन उद्योग में डिजाइन इंजीनियर नए वाहनों का खाका (रफ स्कैच) और कम्प्यूटर की मदद से डिजाइन (सीएडी) तैयार करता है. वे नए वाहनों की आकृति और रूप रेखा के साथ-साथ उनके कार्य प्रदर्शन के संबंध में नई अवधारणाएं सृजित करते हैं.

ऑटोमोटिव डिजाइन इंजीनियरी में बी.टेक चार वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसमें डिज़ाइनिंग, निर्माण और वाहनों के रख-रखाव के साथ साथ ऊर्जा, पर्यावरणीय सरोकार, परिवहन सेक्टर, जीवाश्म और वैकल्पिक ऊर्जा प्रयोग और भविष्य के वाहनों के विकास जैसे संबंधित विषय आते हैं. आईआईटी मद्रास, यूपीईएस देहरादून, एसआरएम यूनिवर्सिटी, चेन्नै इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाले शीर्ष स्थानों में हैं.

हालांकि वाहन उद्योग में डिजाइन इंजीनियरी का स्थान जल्दी ही इंटरेक्शन डिजाइनिंग लेने जा रहा है. मौजूदा समय में एक नई कार की डिजाइनिंग के लिए नई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल तथा सख्त सुरक्षा नियमों और विनियमों पर ध्यान देने की जरूरत है. इसका अर्थ है कि इस क्षेत्र में नए कौशल और नई विशेषज्ञता प्राप्त लोगों की जरूरत है.

वाहन उद्योग में इंटरेक्शन डिजाइनर कार के अंदरूनी साजो सामान को यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. इसके लिए श्रम दक्षता, रंग और सामग्री जैसे मानवीय कारकों की विशेषज्ञ जानकारी की जरूरत है.

इस बात पर गौर किया गया है कि नवीनतम प्रौद्योगिकी और आश्चर्यजनक सुरक्षा विशेषताओं के बावजूद कार दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है. ऐसा होने की वजह है कि लोग नई प्रणालियों को आसानी से इस्तेमाल करने में जटिल पाते हैं. इंटरेक्शन डिजाइनरों को कार की प्रौद्योगिकी और कार्यों को समझना होगा और उन्हें इस्तेमाल करने वालों के अनुकूल बनाना होगा. कार उद्योग में इंटरेक्शन डिजाइनर की अनिवार्यता स्थापित करने वाली कुछ प्रमुख प्रौद्योगिकियां इस प्रकार हैं -

·         कारों में टच स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ना.

·         वाहन चालक का ध्यान भटकाने वाले कारणों को कम से कम करने के नए उपाय करना.

·         वाहन चालकों के लिए फीडबैक संदेशों को अधिक तीक्ष्ण और स्मार्ट बनाना.

·         कार की व्यावहारिक उपयोगिता पर अधिक ध्यान देना.

मैकेनिकल इंजीनियर का स्थान मेकेट्रॉनिक्स कंट्रोल इंजीनियर लेंगे

वाहन उद्योग में मैकेनिकल इंजीनियर की डिजाइन इंजीनियर से लेकर रिवर्स इंजीनियरिंग, यंत्र विकास इंजीनियरी, एप्लीकेशन इंजीनियरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण इंजीनियरिंग, उत्पाद निरीक्षण और प्रचालन निरीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन, जल्दी ही इन भूमिकाओं के लिए मैकेट्रॉनिक्स कंट्रोल इंजीनियर की मांग इस क्षेत्र में बढ़ेगी.

मैकेट्रॉनिक्स में मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों उपकरणों का प्रयोग शामिल है. इस क्षेत्र में रोबोटिक्स का भी प्रवेश हो चुका है. इसी प्रकार कंट्रोल इंजीनियरी ऐसी नियंत्रण प्रणालियां सृजित करने के बारे में है, जो विद्युतीय (इलेक्ट्रिकल), यांत्रिक (मैकेनिकल) या रासायनिक (कैमिकल) हो सकती हैं.

जब हम मैकेट्रॉनिक्स और कंट्रोल इंजीनियर (एमसीई) की बात करते हैं, तो अभिप्राय: उन विशेषज्ञों से होता है, जो कार में विभिन्न यांत्रिक और विद्युत पुर्जों के नियंत्रण के साथ साथ कैमिकल इंजीनियरी प्रक्रिया के लिए कंट्रोल इंजीनियरी का इस्तेमाल कर सकें. एमसीई को मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल और कम्प्यूटर इंजीनियरी के तालमेल से कम्प्यूटर नियंत्रित आधुनिक कार और वाहन डिजाइन करने में सक्षम होना चाहिए.

एनआईटी सूरतखल, एनएमआईएमएस मुम्बई, एमआईटी मणिपाल और केआईआईटी भुवनेश्वर मैकेट्रॉनिक्स और कंट्रोल इंजीनियरी में स्नातक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाले शीर्ष कॉलेजों में शामिल हैं.

ऑपरेशंस एक्सेलेंस मैनेजर का स्थान लियन एक्सपर्ट लेंगे.

ऑटोमोटिव सेक्टर में ऑपरेशनल एक्सेलेंस मैनेजर का काम सर्वोत्तम निर्माण पद्धति लागू करने के लिए विभिन्न टीमों के साथ मिल कर कार्य करना है. वे फैक्टरी के संचालन-प्रचालन के लिए सर्वोत्तम तरीकों का आकलन करते हैं, उन्हें लागू करते हैं और उनका प्रबंधन रखते हैं.

हालांकि वाहन उद्योग को इनसे इस भूमिका से और अधिक की आशा है. यह उद्योग ऐसे टीम लीडर की खोज में हैं, जो टीम के बजट और लागत रिपोर्टिंग के लिए जवाबदेह और जिम्मेदार हों. इसके अलावा कंपनी के उत्पादों, प्रचालन, प्रणालियों और प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार ला सकें और उन्हें अधिक सक्षम बना सकें.

लियन एक्सपर्ट को निरंतर सुधार प्रबंधक या व्यवसाय सुधार प्रबंधक के रूप में भी जाना जाएगा. इनके पास इंजीनियरिंग की डिग्री सिक्स सिग्मा में मास्टर ब्लैक बैल्ट या समतुल्य योग्यता होनी चाहिए और निर्माण, परियोजना प्रबंधन के साथ साथ उपभोक्ता प्रबंधन की भी पृष्ठभूमि होनी चाहिए.

एक योग्य प्रशिक्षक होने और उद्योग से संबंधित पेशेवर संस्था की सदस्यता रहने से आपको इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने में अतिरिक्त लाभ मिलेगा.

रुचि श्रीमाली एक कॅरिअर कांउलर हैं ईमेल: rruchishrimalli@gmail.com.

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.  

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)