नौकरी फोकस


Volume 2, 2017

कॅरिअर के रूप में क्रिकेट

श्री प्रकाश शर्मा

देहात के कच्चे-पक्के और असमतल मैदानों तथा घास के मैदानों में और अधिक भीड़-भाड़ वाले कस्बों और शहरों के गली-गलियारों में बच्चों का क्रिकेट खेलते दिखाई देना आम बात है और यह खेल हमारे जैसे देश - जहां क्रिकेटरों का प्रभाव और चमत्कार करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करता है और खिलाडिय़ों को सुपर मॉडल माना जाता है तथा क्रिकेट मैचों को उत्साहपूर्ण रूप में लिया जाता है, में हमारे मनोरंजन का लोकप्रिय माध्यम रहा है.
इतना ही सामान्य, जैन्टलमेन का खेल कहे जाने वाले २२ गज लम्बी पिच वाले इस खेल में हमारे पसंदीदा सेलेब्रिटी खिलाडिय़ों द्वारा मारे जाने वाले प्रत्येक चौकों और छक्कों पर खुशी से उत्तेजित एवं पागल होने वाले दर्शकों की भीड़ का ताली बजाना, कूदना, चिल्लाना, उछलना और नाच करना है. किन्तु दुर्भाग्यवश, हम हजारों ऐसे युवकों की क्षमताओं का विकास नहीं कर पा रहे हैं जो बचपन से ही अपने देश के लिए खेलने और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के किशोरों में क्रेज बन चुके और भू-मंडल के सबसे बड़े प्रजातंत्र के राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन चुके इस खेल में कॅरिअर बनाने का सपना संजोए हुए हैं और संघर्ष कर रहे हैं.
भारत में क्रिकेट का इतिहास भी उतना ही पुराना है जितनी देश के स्वतंत्रता-संघर्ष की गाथा. भारत में औपनिवेशिक अवधि इस विदेशी - किन्तु - अब सबसे अत्यधिक-लोकप्रिय - क्रिकेट के इस खेल की साक्षी रही है. कहा जाता है कि भारत में क्रिकेट को अट्ठारहवीं शताब्दी में यूरोपियन मन्र्चेन्ट सेलर्स में लेकर आए थे और १९७२ में सबसे पहला क्रिकेट क्लब स्थापित करने का श्रेय तत्कालीन कलकत्ता के नाम है, किन्तु भारत अपना पहला टैस्ट मैच केवल १९३२ में लंदन में लॉर्ड्स में खेलने में सफल रहा. १९७० की अवधि से भारत में क्रिकेट, सुनील गावस्कर, कपिल देव, रवि शास्त्री, गुंडप्पा विश्वनाथ, के. श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, मदनलाल, दिलीप वेंगसरकर तथा क्रिकेट के शिखर पर पहुंचे कई अन्य खिलाडिय़ों के आने से अभूतपूर्व उत्कर्ष का साक्षी रहा है.
एक क्रिकेटर बनने के लिए आपको क्या चाहिए?
आज के संघर्षपूर्ण प्रतियोगिता-युग में, क्रिकेट में एक कॅरिअर तथा क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में सफलता चुनौतियों से भरा हुआ है. इस युद्ध - जैसी - स्थिति में बने रहने तथा सफलता प्राप्त करने के लिए प्रत्याशित क्रिकेट खिलाडिय़ों में इस खेल के गौरव तथा चमत्कार को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित व्यावसायिक गुण होने चाहिएं :
*वे बहुत अच्छे खिलाड़ी एवं स्वाभाविक एथलीट होने चाहिए, और सबसे महत्वपूर्ण, वे कठोर परिश्रमी तथा कभी भी हार नहीं मानने की प्रवृत्ति रखने वाले होने चाहिए.
*अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की विपरीत परिस्थितियों जैसे - विदेश की संस्कृति, भोजन, धर्म-पंथ, भाषा, मौसम, प्रतिकूल दर्शकों एवं प्रशंसकों को स्वीकार करने की क्षमता.
*आकांक्षी खिलाड़ी शरीर के विभिन्न अंगों में लचीलापन लाने के लिए क्रियाशील फिटनेस वाले होने चाहिए.
*क्रिकेट एक ऐसा गतिशील एवं परिवर्तनात्मक खेल है, जिसमें खिलाडिय़ों से घंटों तक गेंदबाजी, बल्लेबाजी तथा क्षेत्र-रक्षण करने की प्रत्याशा की जाती है और इसमें परिपूर्णता के लिए आपके लिए जो सबसे आवश्यक है - वह है बहुत अच्छी शारीरिक फिटनेस एवं मानसिक धैर्य.
*एथलीटवाद, फिटनेस, प्रवृत्ति, बल्ले-बाजी, गेंदबाजी एवं क्षेत्र-रक्षण में उत्कृष्ट कौशल.
*आकांक्षी खिलाड़ी को क्रिकेट के निम्नलिखित आठ क्षेत्रों में उत्कृष्ट होना चाहिए - एथलीटवाद, फिटनेस, तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने का कौशल, क्षेत्र-रक्षण, विकटों के बीच दौडऩा, डेंजर ज़ोन में गेंदबाजी करना, शून्य पर आउट करने के लिए बॉल सटीक फेंकना और सबसे महत्वपूर्ण तत्काल निर्णय लेने की कुशाग्रता.
*कोई भी आकांक्षी खिलाड़ी अपने लक्ष्य पर पहुंचने के लिए समयनिष्ठ अदम्य कृत संलल्प होना चाहिए.
*क्रिकेट के सभी तीन क्षेत्रों - गेंदबाजी, बल्लेबाजी एवं क्षेत्र-रक्षण में से किसी एक क्षेत्र में प्रतिभा सम्पन्न होना चाहिए.
*संयमी व्यक्ति - जो हार को यथा-संभव सहज रूप में सामना कर सके. इसका अर्थ यह है कि वह साहसी और कभी भी हार नहीं मानने की प्रवृत्ति रखने वाला खिलाड़ी हो.
*टूर्नामेंट और मैचों की शृंखलाएं खेलने के लिए अन्य राष्ट्रों के दौरे की इच्छा तथा स्वाभाविक रूचि रखते हों.
*लम्बे समय तक परिवार एवं मित्रों से दूर रहने की क्षमता हो. गृह-विरह की भावनाएं खिलाडिय़ों के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं.
*और अंत में, किसी भी खिलाड़ी के अपने परिवार के साथ बहुत अच्छे भावात्मक बंधन होने चाहिए तथा जीवन को शांति एवं आनंद के साथ जीने के लिए उसकी वित्तीय पृष्ठभूमि अच्छी होनी चाहिए, भले ही उसका किसी विशेष शृंखला, टूर्नामेंट, चैंपियनशिप, या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय दौरे के लिए चयन नहीं हुआ हो.
आपको निम्नलिखित की जानकारी होनी चाहिए :
सभी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट - प्रारूपों को नीचे उल्लिखित तीन श्रेणियों में रखा गया है :-
१. अंतरराष्ट्रीय टैस्ट मैच
२. एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच, और
३. टी-२० अंतरराष्ट्रीय मैच
घेरलू क्रिकेट में क्रिकेट मैचों के निम्नलिखित प्रारूप शामिल हैं:-
१. प्रथम श्रेणी
२. लिस्ट-ए, और
३. टी-२० मैच.
आज जिस रूप में क्रिकेट मैच खेले जा रहे हैं और क्रिकेट खिलाडिय़ों को जो भुगतान किया जा रहा है में व्यापक परिवर्तन १९९० के दशक की वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के तीव्र गति से फैलने का परिणाम है.
वे दिन गए जब क्रिकेट खिलाडिय़ों को आकर्षक भुगतान नहीं किया जाता था तथा सुविधाएं इतनी शानदार नहीं थी. इस परिवर्तन के बाद, आज के युग में क्रिकेट खिलाडिय़ों ने सिद्ध कर दिया है कि वे किसी भी ऐसी विश्व-हस्ती से कम नहीं हैं जिसका सामाजिक स्टेटस तथा व्यक्तिगत प्रसिद्धि बॉलीवुड तथा हॉलीवुड के सुपरस्टार्स से कम हो.
बी.सी.सी.आई. ने वेतन-ढ़ांचे की दृष्टि से खिलाडिय़ों को ए, बी तथा सी की तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है जिसका मापदण्ड खिलाड़ी का अनुभव और उसके द्वारा पिछले वर्ष खेले गए मैचों में उसका प्रदर्शन निर्धारित करता है. खिलाडिय़ों की रैंकिंग एक वर्ष तक चलती है और यदि कोई नया खिलाड़ी वर्ष के बीच में क्रिकेट में प्रवेश करता है तो उसे ग्रेड-सी में रखा जाता है.
बी.सी.सी.आई. में चयनकर्ताओं की दो-श्रेणियां होती हैं :-
१. अखिल भारतीय वरिष्ठ चयन समिति :
इस समिति की जिम्मेदारियों में टैस्ट मैचों, एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय (ओ.डी.आई.) मैचों और टी-२० अंतरराष्ट्रीय मैचों जैसे सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए टीमों का चयन करना शामिल होता है. यह समिति इंडिया ए.टीम्स के लिए भी खिलाडिय़ों का चयन करती है. प्रेसिडेंट्स इलेवन या बी.सी.सी.आई. इलेवन जैसी टीमों के लिए खिलाडिय़ों का चयन यही समिति करती है. प्रेसिडेंट्स इलेवन की टीम राष्ट्र के दौरे पर आई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के साथ क्रिकेट मैच खेलती है.
२. अखिल भारतीय कनिष्ठ चयन समिति
यह समिति निम्नलिखित टीमें बनाने के लिए खिलाडिय़ों का चयन करती है :-
*अंडर-१९ क्रिकेट
*अंडर-१७ क्रिकेट
*अंडर-१५ क्रिकेट
बी.सी.सी.आई. में ५ सदस्य होते हैं, जो प्रत्येक जोन अर्थात् उत्तरी जोन, मध्य जोन, पश्चिमी जोन, पूर्वी जोन और दक्षिणी जोन से चुने जाते हैं.
एक सफल, बिगहिटर और स्टार क्रिकेटर कैसे बनें?
अन्य व्यवसायों के विपरीत क्रिकेट में कॅरिअर सहज उपलब्ध नहीं है - यह चुनौतियों से भरा है. महत्वाकांक्षी खिलाड़ी पूरी तरह से क्रिकेट को समर्पित होने चाहिए. वह खेल पर ही एकाग्र होने चाहिए. एक उदीयमान एवं प्रत्याशित क्रिकेट खिलाड़ी के लिए क्रिकेट ही उसका खाना, पीना, सोना और जीवन होना चाहिए.
क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई बल्लेबाज कई चौके या छक्के मारता है और एक शतक या दोहरे शतक के बड़े स्कोर के साथ पारी समाप्त करता है तो उसके इस जोश के पीछे क्या कैमिस्ट्री कार्य करती है? इसका उत्तर निश्चय ही आसान है - क्रिकेट मेें श्रेष्ठ होने के लिए कठोर तथा निरंतर परिश्रम, और कुछ नहीं.
कभी-कभी क्रिकेट जगत में प्रवेश करना तो आसान होता है, किन्तु उसमें बने रहना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि दर्शकों का क्रेज और आपके फैन की आशाएं आपसे में इतनी अधिक होती हैं कि यदि एक बार भी आप उनकी आशाओं पर खरा नहीं उतरते तो आपके प्रदर्शन की निंदा करने में वे ज्यादा समय नहीं लेंगे यह खेल आपको ऊपर भी उठा सकता है और जमीन पर भी ला सकता है. इसलिए किसी क्रिकेटर का कार्य इतना आसान नहीं होता, जितना आसान हम कई बार समझते हैं, इसलिए क्रिकेट जगत में बड़ी और चिर-वांछित सफलता प्राप्त करने एवं लंबे समय तक बने रहने के लिए किसी भी प्रत्याशित युवा खिलाड़ी को निम्नलिखित बातें बड़ी गंभीरता, निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ ध्यान में रखनी चाहिए:-
अवसर एक जैसे नहीं होते :
यह एक कटु सत्य है कि ग्रामीण बच्चों की तुलना में शहरी युवाओं को सफल क्रिकेटर बनने के अधिक अवसर मिलते हैं. कस्बों तथा शहरों के युवाओं को अधिक सुविधाएं और जानकारी प्राप्त होती हैं और इसके परिणामस्वरूप वे बड़ी आसानी से क्रिकेट एसोसिएशन में अपना पंजीकरण करा सकते हैं और उसके द्वारा चलाए जाने वाली अकादमी में प्रशिक्षण ले सकते हैं. इसके अतिरिक्त, शहरी उम्मीदवारों की कईं क्रिकेट क्लबों और प्राइवेट क्रिकेट कोचिंग संस्थानों तक पहुंच होती है. किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि एक स्टार क्रिकेटर बनने के लिए ग्रामीण व्यक्ति को कोई अवसर नहीं मिलता. ग्रामीण आकांक्षी व्यक्तियों के पास क्रिकेट को अपने पसंदीदा खेल को समय देने और उस पर एकाग्रता करने के लिए अधिक समय मिलता है.
स्वयं को किसी स्थान (पोजीशन) पर स्थापित करने के लिए आपको ऑलराउंडर होना चाहिए. पिछले दशक में क्रिकेट के विश्व-परिदृश्य में व्यापक परिवर्तन आया है. यह ऐसा जगत है जहां चाल्र्स डार्विन का. सर्वाइवल ऑफ द फिटनेस सिद्धांत सटीक रूप में लागू होता है. इतना ही नहीं, क्रिकेट का यह वर्तमान विश्व ऐसा विश्व भी है जहां एक ऑलराउंडर क्रिकेटर के बने रहने के अवसर कहीं अन्यत्र से अधिक विद्यमान हैं.
आपको क्रिकेट खेल की, गेंदबाजी, बल्लेबाजी और क्षेत्र-रक्षण जैसी सभी भूमिकाओं में स्वयं को फिट रखना जरूरी होगा. यदि आप एक बार पचास रन या शतक बनाने में सफल नहीं होते. ... तो कोई बात नहीं, आप बैट से तेज गति से निकलने वाले प्रत्येक चौके को सीमा पार करने से रोक कर अपनी टीम को विजय की ओर अग्रसर कर सकते हैं. किसी दिन हो सकता है आपको एक विकेट भी न मिले - आप अपनी टीम को जीतता देखने के लिए कुछ आवश्यक रन बना कर टीम में अपनी अनिवार्यता सिद्ध कर सकते हैं. इसलिए, क्रिकेट में अपनी सार्थकता को प्रमाणित करन के लिए आप क्रिकेट के हर क्षेत्र में कुशल बनें.
स्वयं में अमिट विश्वास रखें
क्रीज पर खड़े अपने स्टार क्रिकेट खिलाडिय़ों को, फेंकी गई कईं बालों पर जब एक भी रन नहीं बनाते हुए देखते हैं तो आप हक्के-बक्के और क्रोधित हो जाते हैं. किन्तु क्रीज पर वास्तविकता, स्टेडियम की उन सीटों से बहुत भिन्न होती है जहां से दर्शक अपने चहेते खिलाडिय़ों को खेलते हुए देखते हैं.
निष्कर्ष अथवा सार यह है कि क्रिकेट में स्टेडियम के अंदर या बाहर विपरीत परिस्थिति का सामना करने के लिए अत्यधिक उच्च स्तर का जोश एवं धैर्य बनाए रखना जरूरी है. इतना ही नहीं, कठोर परिश्रम, सच्चे प्रयास एवं सम्पूर्ण समर्पण के बावजूद खिलाडिय़ों की राष्ट्रीय सूची में अपना स्थान बनाने में असफल रहने पर भी आपको धैर्यवान होना जरूरी है. मैच खेलते रहें, जिससे आप अंतत: इसमें परफेक्ट बन जाएंगे. इसके अतिरिक्त मानसिक रूप से आपको मजबूत होना होगा. आप स्वयं को प्रतिकूल टिप्पणियों और ऐसी आलोचनाओं से दूर रखें, जो आपसे बहुत कुछ करने की आशा रखने वाले और आप जैसा बनने की आशा रखने वाले आपके फैंस से आपको मिलना स्वाभाविक होती हैं.
क्रिकेट कठोर परिश्रम, उपयुक्त कौशल, सम्पूर्ण समर्पण, अटल बचनबद्धता, असह्य पीड़ा और अत्यधिक पसीना बहाने वाला खेल है. यहां दर्द एवं पुरस्कार, स्वागत और आपके फैन्स का गुस्से, पैसे और भाग्य के चमत्कार, प्यार, संतुष्टि और खिलाडिय़ों के नियंत्रण से बाहर की अनेक अन्य स्थितियों का बराबर का हिस्सा है. निरंतर सफलता, प्रसिद्धि, नाम और भाग्य के इस खेल में सफलता प्राप्त करने और बने रहने का मार्ग आसान नहीं है.
यहां सफलता का अर्थ है बलिदान, जीवन भर का संघर्ष और कठोर परिश्रम. इसलिए कड़ी प्रतियोगिता तथा असीम सम्पदा वाले इस खेल में आपको आगे धक्का देने वाले किसी पितामह की प्रतीक्षा करने में समय खराब करना बुद्धिमानी नहीं है. अनिश्चितताओं के इस खेल में स्थापित रहने और स्थायित्व के लिए सफलता ही एक मात्र ऐसा मंत्र है जिसे किसी भी भावी क्रिकेटर को नहीं भूलना चाहिए. अपनी पिछली उपलब्धियों से संतुष्ट होकर बैठने के बजाय हमेशा अपनी श्रेष्ठता के प्रति सजग रहें.’’
(श्री प्रकाश शर्मा जवाहर नवोदय विद्यालय, बिदौली, जिला-समस्तीपुर (बिहार)-८४८११३ में अध्यापक हैं).

ई-मेल :spsharma.rishu@gmail.com व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं.

चित्र: गूगल के सौजन्य से