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In Depth Job Focus

औषधीय क्षेत्र में करिअर

डॉ.पूर्वी प्रकाश

भारत में भेषज अथवा औषधीय उद्योग देश का एक सबसे विकसित तथा विश्व में तीसरा सबसे बड़ा उद्योग है. यह टेक्नोलॉजी की दृष्टि से सशक्त तथा पूर्णत: आत्म निर्भर है. भारत को इसके निर्माण की कम लागत और अनुसंधान तथा विकास का लाभ होने के साथ-साथ हमारे पास विश्व श्रेणी की प्रयोगशालाएं तथा नव-प्रवर्तित वैज्ञानिक भी हैं. आज, हम सिर-दर्द की सामान्य गोली से लेकर जटिल हृदय रोग तक की देश में प्रतिपादित हर तरह की दवाइयां और औषधियां बनाते हैं.

२००५ में उत्पाद एकस्व प्रणाली लागू होने के बाद से भारत उच्च कोटि की जेनेरिक दवाइयों के एक विश्वव्यापी निर्यातक के रूप में उभरा है. भारत विश्व को एड्स की दवाइयों की सप्लाई करने वाला एक अग्रणी देश भी है. भारत से दवाइयां आयात करने वाले कुछ देशों में जर्मनी, रूस, फ्रांस, यू.के., ब्राजील और अमरीका शामिल हैं.

इस उद्योग के विकास को बढ़ावा देने में भारत सरकार का रुख पर्याप्त सकारात्मक है. औषध नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित अधिकांश दवाइयों तथा औषधीय उत्पादों के लिए विनिर्माताओं को औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होती है. सरकार, ऑटोमेटिक रूट के अंतर्गत इस क्षेत्र में १०० प्रतिशत एफ.डी.आई. (फोरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) की भी अनुमति देती है.

देशभर में औषध-क्षेत्र के लिए विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में जवाहरलाल नेहरू फार्मा सिटी (जे.एन.पी.सी.), गुजरात में जाइड्स इन्फ्रास्ट्रक्चर्स फार्मेज तथा गुजरात में केडिला फार्माज फेज

पार्क सहित कुल १९ विशेष आर्थिक जोन (एस.ई.जेड.) हैं.

एक मेककिन्से रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि २०२० तक भारतीय औषधीय क्षेत्र के ५५ विलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.

फार्मा विजन 2020 :

भारत में लगभग १०,५०० औषध विनिर्माणी इकाइयां और ३००० से अधिक औषधीय कंपनियां हैं. अमरीका में दर्ज स्वास्थ्य उद्योग से जुड़े सबसे अधिक उत्पाद एकस्वों (पेटेंट्स) की संख्या अमरीका के बाद भारत की है. अनुसंधान तथा विकास पर सबसे अधिक राशि व्यय करने के लिए प्रसिद्ध भारत जेनेरिक दवाइयों का निर्माण करने वाला एक बड़ा स्थान बन गया है. अब वे उत्पाद एकस्व भारत में प्रारंभ किए गए हैं और आशा है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां (एम.एन.सीज.) अपनी एकस्व दवाइयां भारत में भी प्रारंभ करेंगी.

ऐसा माना जाता है कि औषध निर्माण की लागत कम होने का भारत को लाभ है. यहां औषधियों की लागत अमरीका में बनने वाली औषधियों की लागत से ३५-४० प्रतिशत कम है. पिछले दशक में औषधियों का निर्यात ६८ प्रतिशत के कम्पाउण्ड वार्षिक विकास दर (सी.ए.जी.आर.) पर पहुंच गया है. फार्मा विजन २०२०में भारत सरकार ने कहा है कि इसका लक्ष्य २०२० तक भारत को दवाई बनाने वाला विश्व का सबसे अग्रणी देश बनाने का है. माना जाता है कि विश्व बाजार की मांग को पूरा करने के लिए भारतीय औषधीय क्षेत्र को २०२० तक लगभग २.१५ करोड़ कर्मचारियों को सेवाओं की आवश्यकता होगी.

भारत को २०२० तक पांच में से एक सबसे बड़ा औषध इनोवेशन हब बनाने के लिए सरकार एक सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी.पी.पी.) मॉडल के माध्यम से एक बड़ी बहु बिलियन डॉलर पहल भी प्रारंभ कर रही है. इसने औषधीय क्षेत्र के लिए कर कम करने और अनुसंधान तथा विकास व्यय के लिए १५० प्रतिशत पर भारित कर कटौती की भी घोषणा की है. दवाइयों तथा औषधियों के अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने दो बड़ी योजनाओं की घोषणा की है.

*नई सहस्राब्दि (मिलेनियम) भारत प्रौद्योगिकी की नेतृत्व पहल; और

*औषध एवं भेषजीय अनुसंधान कार्यक्रम.

आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध तथा होम्योपैथी (आयुष) के समर्थन के लिए एक फार्माकोपियल आयोग भी स्थापित किया जाएगा.

भेषज (औषधीय) उद्योग में उपलब्ध रोज़गार की किस्में.

भेषज उद्योग में कॅरिअर का भविष्य उज्ज्वल है. फार्मेसी स्नातक तथा स्नातकोत्तर अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और भेषज कंपनियों में रोज़गार तलाश सकते हैं.

इस क्षेत्र में अधिकांश रोज़गार विनिर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण (गुणवत्ता आश्वासन सहित) तथा वितरण (विपणन) से संबंधित हैं और इनके लिए विशेष कौशल होना आवश्यक है. इस क्षेत्र में उपलब्ध कुछ रोज़गार इस प्रकार हैं :

*विनिर्माण रसायनज्ञ: कम से कम १८ महीनों का कार्य अनुभव रखने वाले फार्मेसी स्नातक इस कार्य के लिए आवेदक कर सकते हैं. इसमें तकनीकी विशेषज्ञता होनी चाहिए, क्योंकि ये रसायनज्ञ दवाइयों के निर्माण की प्रक्रिया का स्वयं पर्यवेक्षण करते हैं और निदेश देते हैं. बाद में विनिर्माण रसायनज्ञों को फैक्टरी प्रबंधक जैसे पदों पर पदोन्नत कर दिया जाता है.

इस क्षेत्र में स्नातकों का भविष्य सुरक्षित है, क्योंकि किसी भी भेषज कंपनी औषध तथा सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत विनिर्माण लाइसेंस प्राप्त करने के लिए ऐसे व्यक्तियों की आवश्यकता होती है.

*गुणवत्ता नियंत्रण या गुणवत्ता आश्वासन रसायनज्ञ: औषध या भेषज विश्लेषण तथा परिष्कृत उपस्कर हस्तन करने की अभिरुचि रखने वाले स्नातक इस रोज़गार में जा सकते हैं. गुणवत्ता नियंत्रण या गुणवत्ता आश्वासन रसायनज्ञ दवाइयों और भेषज उत्पादों की विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान तथा अंत में उनकी गुणवत्ता की जांच करते हैं और उसे बनाए रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि ये दवाइयां राष्ट्रीय या अन्य अनुमोदित फार्माकोपियल्स में निर्दिष्ट मानकों के अनुरूप हैं.

निजी तथा स्वतंत्र औषध परीक्षण प्रयोगशालाएं भी गुणवत्ता नियंत्रण रसायनज्ञों को रोज़गार पर रखती हैं.

*अस्पताल फार्मासिस्ट : किसी भी अस्पताल फार्मेसी, में फार्मासिस्ट विविध कार्य करते हैं. दवाइयां ग्राहकों में वितरित करने के लिए अस्पतालों में दवाइयां प्राप्त करने से लेकर उनको भंडारण और प्रबंधन के कार्य.

फार्मेसी में कोई डिप्लोमा आपको यह रोज़गार दिला सकता है. किंतु सरकारी क्षेत्र एवं कार्पोरेट अस्पतालों में केवल फार्मेसी स्नातक ही रखे जाते हैं. हालांकि, इस क्षेत्र कॅरिअर की उन्नति सीमित है.

*कम्यूनिटी फार्मासिस्ट : अपोलो फार्मेसी, मेडप्लस या फै्रंक रोस फार्मेसी जैसी रिटेल फार्मेसियों एवं औषध भंडारों को भी फार्मासिस्ट्स की आवश्यकता होती है. फार्मेसी में कोई डिप्लोमा आपको ऐसा कोई रोज़गार आसानी से दिला सकता है.

कोई भी कम्यूनिटी फार्मासिस्ट अमरीका तथा यू.के. जैसे पश्चिमी देशों में बेहतर वेतन वाला कोई रोज़गार प्राप्त कर सकता है. कई स्नातक फार्मासिस्ट उद्यमी के रूप में रिटेल व्यवसाय में जाते हैं.

*सरकारी विश्लेषक: सरकारी प्रयोगशालाओं में भेषज स्नातक विश्लेषक के रूप में विनिर्माणी इकाइयों या रिटेल औषध भंडारों से नमूनों की जांच करते हैं. इसके लिए उन्हें पहले अनुमोदित प्रयोगशालाओं में औषधियों की जांच पर प्रशिक्षण लेना होता है.

*औषध निरीक्षक: भेषज स्नातक लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करके औषध निरीक्षक बन सकते हैं. एक औषध निरीक्षक के रूप में वे विनिर्माणी इकाइयों से लेकर विक्रय केंद्रों तक हर जगह दवाइयों की सुरक्षा, क्षमता तथा गुणवत्ता पर निगरानी रखते हैं.

भविष्य में औषध निरीक्षक औषध नियंत्रक तक बन सकते हैं.

*अनुसंधान विश्लेषक: अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा विनिर्माणी इकाइयों में यह एक अत्यधिक वांछित रोज़गार है. यहां अनुसंधान विश्लेषक औषध प्रवर्तन में शामिल होते हैं. ये नई औषधियों का विकास करने या वर्तमान औषधियों में सुधार लाने का कार्य करते हैं.

इस रोज़गार के लिए आवेदन करने हेतु कम से कम कोई एम.फार्म या उच्च डिग्री होनी आवश्यक है.

*विपणन: भेषज विपणन एक विशेषज्ञतापूर्ण कार्य है, क्योंकि इस कार्य में व्यावसायिक रसायनज्ञों एवं अत्यधिक योग्य डाक्टारों से सम्पर्क करना रखना शामिल होता है. इस क्षेत्र में एक प्रारंभिक  प्रशिक्षण के बाद कोई भी व्यक्ति एक मेडिकल रिप्रजेंटेटिव के रूप में कार्य ग्रहण करके भविष्य में महाप्रबंधक भी बन सकता है. इस रोज़गार में रिक्तियां पर्याप्त होती हैं.

कॅरिअर के उक्त उल्लिखित अवसरों के अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति अध्यापन कार्य अथवा औषध अन्वेषण का कार्य भी कर सकता है. भेषज क्षेत्रों में उभर रहे कुछ क्षेत्रों में अनुबंध अनुसंधान, नई औषध विकास एवं डिलीवरी प्रणालियां तथा क्लीनिकल ट्रायल्स आदि शामिल हैं.

शैक्षिक योग्यताएं तथा पात्रता अपेक्षाएं:

स्कूल उत्तीर्ण करने के बाद कोई फार्मेसी पाठ्यक्रम चुनने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा गणित या जीव विज्ञान विषयों के साथ १०+२ परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है. इंटरमीडिएट व्यवसाय पाठ्यक्रम करने वाले व्यक्ति एक ब्रिज पाठ्यक्रम की सहायता से फार्मेसी में स्नातक भी बन सकते हैं.

बुनियादी योग्यता फार्मेसी में २ वर्षीय डिप्लोमा (डी-फार्मा) और उसके बाद किसी अस्पताल से प्रशिक्षण के साथ प्रारंभ होती है. छात्र एक ४ वर्षीय फार्मेसी स्नातक (बी.फार्मा) डिग्री पाठ्यक्रम भी कर सकते हैं.

अधिकांश फार्मेसी कॉलेज अपने फार्मेसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक कट-ऑफ की घोषणा करते हैं या एक प्रवेश परीक्षा लेते हैं.

बी.फार्मा करने के बाद छात्र एक २ वर्ष का स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम एम.फार्मा कर सकते हैं और उसके बाद कोई पी.एचडी. (यदि कोई मुख्य रूप से अनुसंधान में रुचि रखता है) की जा सकती है.

यदि छात्रों ने केवल किसी भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) अनुमोदित कॉलेज या संस्था से अध्ययन किया है और फार्मेसी अधिनियम, १९४८ के अंतर्गत फार्मासिस्ट के रूप में अपना पंजीकरण करवा रखा है तो वे रोजगार के लिए पात्र माने जाते हैं.

इस क्षेत्र में अधिकांश रोजगारों के लिए विशेषज्ञतापूर्ण प्रशिक्षण भी आवश्यक होता है. आजकल भेषज उद्योग काफी प्रतिस्पर्धी बन गया है, और कोई भी उच्च डिग्री इस क्षेत्र में बेहतर अवसर दिला सकती है.

अध्ययन कहां करें? : भारत में उच्च दरिता कुछ फार्मेसी कॉलेज निम्नलिखित हैं:-

राजकीय कॉलेज:

*आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम

*दिल्ली भेषज विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली

*भेषज विज्ञान विभाग, आई.आई.टी., बी.एच.यू., वाराणासी

*डिबूगढ विश्वविद्यालय, डिब्रूगढ

*डॉ हरि सिंह गौड़ विश्वविद्यालय, सागर

*राजकीय फार्मेसी महाविद्यालय, बंगलुरू

*रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई

*जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता

*जामिया हमदर्द, नई दिल्ली

*महाराजा सायाजीराव बड़ौदा विश्वविद्यालय, बड़ोदरा

*महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक

*राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, अहमदाबाद

*राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद

*राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता

*राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली

*राष्ट्रीय भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, रायबरेली

*राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर

*फार्मेसी स्कूल, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर

*विश्वविद्यालय भेषज विज्ञान कॉलेज, काकतिया विश्वविद्यालय, वरंगल

*विश्वविद्यालय भेषज विज्ञान संस्थान, चंडीगढ़

प्राइवेट संस्थान

*अल अमीन फार्मेसी कॉलेज, बंगलौर

*अमृता फार्मेसी स्कूल, कोच्चि.

*बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी

*बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा

*बंबई फार्मेसी कॉलेज, मुंबई

*चित्कारा विश्वविद्यालय, पटियाला

*जेएसएस फार्मेसी कॉलेज, मैसूर

*जेएसएस फार्मेसी कॉलेज, ऊटी

*केएलई विश्वविद्यालय फार्मेसी कॉलेज बेलगाम

*मणिपाल भेषज विज्ञान कॉलेज, मणिपाल

*निरमा विश्वविद्यालय, अहमदाबाद

*पूना फार्मेसी कॉलेज, भारतीय विद्यापीठ विश्वविद्यालय, पुणे

*पीएसजी फार्मेसी कॉलेज, कोयम्बत्तूर

*आरसी पटेल भेषज शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, सिरपुर

*सीमांत भेषज विज्ञान संस्थान, झारपोखरिया

*सिंहगड फार्मेसी कॉलेज, पुणे

*एसएलटी भेषज विज्ञान संस्थान, बिलासपुर

*सोनिया शिक्षा न्याय फार्मेसी कॉलेज, धारवाड़

*श्री रामचन्द्र विश्वविद्यालय, चेन्नै

*एसआरएम विश्वविद्यालय, चेन्नै

कार्य कहां करें?

तीव्र गति से विकासशील भारतीय भेषज उद्योग में भेषज विज्ञान स्नातकों तथा विशेषज्ञों के लिए व्यापक अवसर हैं. पूरे भारत में अधिकाधिक अस्पताल, नर्सिग होम और भेषज कंपनियां उभरकर सामने आ रही हैं. इसलिए उन्हें अपना व्यावसाय चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता है. यदि आप अपना निजी व्यवसाय चलाना चाहते हैं तो आजकल भेषज उद्योग नवोद्यमियों की एक सबसे बड़ी पसंद है.

फार्मेसी शिक्षा अपने लिए सरकारी क्षेत्र, विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संस्थानों में भी रोजगार के अवसर खोल सकती है. अनुसंधान एवं विकास संगठन भी अब विस्तार कर रहे हैं और यहां अनुसंधान विश्लेषकों की मांग भी काफी है.

फार्मा उद्योग में व्यक्तियों को नैदानिक उपयोग के लिए नई तथा वर्तमान औषधियों का विकास करने, तैयार करने उत्पादन करने बेचने तथा बाजार में विपणन का कार्य करना अपेक्षित होता है. औषध नियंत्रण प्रशासन तथा सशस्त्र बल भी समय समय पर फार्मासिस्ट की रिक्तियां विज्ञापित करते हैं सरकारी विभागों में औषध निरीक्षकों या सरकारी विश्लेषकों को यह सुनिश्चित करना अपेक्षित होता है कि निर्मित या बेची गई औषधियां मानक कोटि की है. ऐसे फार्मासिस्ट्स की भी नियुक्तियां की जाती है जो विनिर्दिष्टियों के अनुसार सभी संबंधित कार्यों का उपयुक्त रिकॉर्ड रख सकें.

खाद्य एवं सौंदर्य प्रसाधन उद्योग तथा अन्य स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र भी यह सुनिश्चित करने के लिए फार्मासिस्ट्स रखते हैं कि उनके उत्पाद सुरक्षित तथा प्रभावी हैं.

हाल ही के एक विकास में कार्य समर्पित ई-ड्रग स्पोर्ट ने दवाइयां ऑन लाइन बेचना प्रारंभ किया है. ई-फार्मेसी, ग्रहकों को डायपर्स से लेकर गोलियों तक सब कुछ बेचती है. अधिकांश ऑनलाइन ई-फार्मेसीज अपने सहायक रिटेलर्स के साथ कार्य करती हंै, जो दवाइयां घरों पर पहुंचाते हैं, जबकि मेडिडार्ट और बाइड्रग जैसे कुछ संगठन दवाइयां सीधे भेजते हैं. बाइड्रग फिजिकल फार्मेसी आउटलेट्स भी चलाता है. १द्वद्दद्व.ष्शद्व के प्रशान्त टंडन बताते हैं कि  ‘‘औषध एवं सौदर्य प्रसाधन अधिनियम के अनुसार ऑनलाइन फार्मेसीज के लिए अब तक कोई पृथक लाइसेंस नहीं हैं हम केवल एक ऐसा प्लेटफार्म है जो लाइसेंसधारी ऑफलाइन फार्मेसीज को जोड़ता है.’’

विशेषज्ञों का विश्वास है कि इस क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं और जो दवाइयों के ऑनलाइन विक्रय बाजार में अब प्रवेश कर रहे हैं उनकी यह पहल उनके नहीं लाभकारी हो सकती है.

(लेखिका एक सलाहकार एवं स्तंभकार हैं. ईमेल: purviprakash@gmail.com