नौकरी फोकस


Volume-8

दसवीं कक्षा के बाद कॅरिअर के विकल्प: एक अवलोकन 

रुचि

इस वर्ष 16 लाख से अधिक छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए हैं, जिनके परिणाम जून में घोषित किये जाने की संभावना है. यह वह समय है जब छात्र बेचैन और चिंतित महसूस करते हैं, जो कि स्वाभाविक भी है, क्योंकि कक्षा 10वीं अथवा मैट्रिकुलेशन किसी के भी कॅरिअर का आधार-स्तम्भ होता है. यह उस आधार का काम करता है जिस पर शैक्षिक और व्यावसायिक कॅरिअर्स का निर्माण होता है. इस महत्वपूर्ण मोड़ पर किसी को भी आगे अध्ययन के लिये एक ठोस योजना अवश्य तैयार करनी चाहिये जो कि उसके पेशेवर जीवन के पाठ्यक्रम का निर्धारण करेगी. इस बिंदु पर छात्रों के मन में उत्पन्न होने वाला सबसे महत्वपूर्ण सवाल होता है, ‘‘10वीं के बाद क्या?‘‘ इन दिनों छात्रों के लिये आगे अध्ययन के अनेक अवसर मौजूद हैं और साथ ही बेहतर रोजग़ार विकल्प भी हैं. प्रत्येक विकल्प की अपनी क्षमता और लाभ हैं. उदाहरण के लिये, +2 में कॉमर्स विषयक्षेत्र को चुनने से चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सचिव, स्टॉक ब्रोकिंग और निवेश विश्लेषक आदि क्षेत्रों में अच्छे रोजग़ार के सृजन में मदद मिलेगी. इसी प्रकार विज्ञान विषय क्षेत्र में भी रोजग़ार के उत्कृष्ट अवसर मौजूद होते हैं. अत: मैट्रिकुलेशन के उपरांत सही विषयक्षेत्र का चुनाव किसी के जीवन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक हो जाता है. यद्यपि बहुत सा बाहरी दबाव और अपेक्षाओं से बहुत असमंजस भी बना रहता है. विकल्प इस बात को ध्यान में रखते हुए चुनना चाहिये कि आपको क्या पसंद है और आपके लिये क्या अच्छा है. छात्र को अपनी क्षमता को मन में रखकर बुद्धिमानी के साथ निर्णय करना चाहिये. अपनी पसंद, अभिरुचि और मैट्रिकुलेशन में प्राप्त अंक विषयक्षेत्र के चयन का मापदंड होना चाहिये. यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि अंक किसी की क्षमताओं का प्रतिबिंब होते हैं, परंतु वे विषयक्षेत्र को चुनने का एकमात्र कारण नहीं होना चाहिये. इस आलेख मेें कक्षा 10वीं के उपरांत सही विषयक्षेत्र चुनने के लिये मापदंड पर फ़ोकस करने का प्रयास किया जायेगा ताकि छात्र बेहतर कॅरिअर निर्णय करने में बेहतर स्थिति में हों. सही विषयक्षेत्र को चुनने की प्रक्रिया एक कला है. यहां पर कुछ बुनियादी उपाय दिये गये हैं जिनका छात्रों को एक निष्कर्ष पर पहुंचने और विषयक्षेत्र का चुनाव करने से पहले पालन करना चाहिये.
1. अभिरुचि और रुचि: यह विषयक्षेत्र को चुनने का पहला कदम है. इसमें किसी के लिये अपनी रुचि और अभिरुचि, शक्तियों और व्यक्तित्व की पहचान करना शामिल होता है. बहुत से छात्र इस उपाय के महत्व पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते हैं. हालांकि अपनी पसंद और अभिरुचि के आधार पर विषयक्षेत्र का चयन करना शिक्षण को मनोरंजक और बाधारहित बना देता है. आपको 10वीं के बाद विषयक्षेत्र के संबंध में चुनाव करते समय वास्तविक अवश्य हो जाना चाहिये. यदि आप अर्थशास्त्र में अच्छे हैं तो आपके लिये विज्ञान की बजाए कॉमर्स को चुनना फायदेमंद होगा. विषयक्षेत्र में आपकी वास्तविक रुचि से शिक्षण प्रक्रिया आनंद दायक हो जायेगी और आपको अपना व्यवसायिक जीवन उत्साहवद्र्धक लगेगा. अपनी रुचि के अनुरूप कार्य करने से यह सुनिश्चित होगा कि आप कभी ऊबेंगे नहीं और सही बात तो यह है कि आप ऐसी स्थिति में बेहतर काम कर सकेंगे. यद्यपि आपकी अभिरुचि और शक्तियों के बारे में विवरण जानने मात्र का कोई उपयोग नहीं होगा जब तक कि दूसरे कदम का अनुपालन नहीं करें.
2. विषयक्षेत्रों के बारे में गहराई से पता लगाना और जानना: आपकी अभिरुचि, व्यक्तित्व और ताकत के बारे में जान लेना पर्याप्त नहीं है. आपको विषयक्षेत्र के बारे में विवरणों को जानना चाहिये जो आपके लिये सर्वाधिक अनुकूल हैं. विषयक्षेत्र का पता लगाते समय आपको महत्वपूर्ण विषयों, शिक्षा बोर्डों, उपलब्ध रोजग़ार मार्ग, संभावना और कठिनता स्तर जैसे ब्यौरों का भी पता लगाना चाहिये. उदाहरण के लिये विज्ञान विषयक्षेत्र को लीजिए-महत्वपूर्ण विवरणों की सूची बनायें, जैसे कि वर्तमान विषय, विषयक्षेत्र के भीतर समूह (गणित और जीव विज्ञान समूह, विज्ञान विषयक्षेत्र के मामले में), कठिनता का स्तर, परीक्षाओं की प्रकृति (व्यावहारिक के साथ-साथ लिखित, प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाएं आदि) और अन्य. आप अपने अध्यापकों अथवा वरिष्ठ छात्रों की सहायता ले सकते हैं जो कि उस विषयक्षेत्र में अध्ययन कर रहे होते हैं.
3. रोजग़ार की संभावनाओं का पता लगायें: विषय क्षेत्र के चुनाव के लिये पाठ्यक्रम के बारे में आपका उत्साह ही एकमात्र मापदंड नहीं होना चाहिये. किसी पाठ्यक्रम विशेष से जुड़ी रोजग़ार की संभावनाओं का पता लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. आप ऑनलाइन रिसर्च, अपने अध्यापकों, कॅरिअर काउंसलरों के साथ विचारविमर्श, अपने वरिष्ठों की सहायता के जरिये और फील्ड दौरे करके यह काम कर सकते हैं. यदि रोजग़ार के अवसर अधिक उदीयमान नहीं हैं, उस पाठ्यक्रम और उससे संबद्ध विषयक्षेत्रों को छोड़ देना ही बेहतर विचार होगा. इस मामले में आपको अन्य रुचि पर ध्यान देना होगा और समान तरह का पाठ्यक्रम ढूंढना होगा और शोध प्रक्रिया पुन: करनी होगी और मैट्रिकुलेशन के उपरांत उचित विषयक्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं.
प्रत्येक छात्र में गुणों, कौशलों, शक्तियों और कमजोरियों का एक विशिष्ट सेट मौजूद होता है और इस प्रकार प्रत्येक छात्र के लिये विशिष्ट निर्णय लेना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. आइए अब प्रमुख विषयक्षेत्रों पर एक नजऱ डाल लेते हैं जो कि 10वीं कक्षा के उपरांत उपलब्ध हैं. इनमें से प्रत्येक भिन्न कॅरिअर की संभावनाएं लिये हुए हैं. आइए इनका एक - एक करके विश्लेषण कर लेते हैं.
कॉमर्स: अर्थव्यवस्था में तेज़ी से हो रहे विकास के साथ ही वित्त और लेखा में रोजग़ार के अवसरों को व्यापक लोकप्रियता हासिल हुई है और इस तरह कॉमर्स विषयक्षेत्र भारत में छात्रों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय विकल्पों में से एक के तौर पर उभरा है. कॉमर्स विषयक्षेत्र में पढ़ाये जाने वाले प्रमुख विषय अर्थशास्त्र, एकाउंटेंसी और बिजनेस स्टडी हैं. छात्र प्रमुख विषयों के साथ-साथ गणित, इन्फॅारमेटिक्स प्रैक्टिस, शारीरिक शिक्षा आदि ले सकते हैं. कॉमर्स विषयक्षेत्र में छात्र को एक अनिवार्य भाषा विषय सहित 6 विषयों का चयन करना होता है. इस विषयक्षेत्र में अच्छे वेतन पैकेज और सम्मानजनक रोजग़ार अवसरों के साथ आकर्षक रोजग़ार अवसर उपलब्ध होते हैं, जैसे कि चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सचिव, बिजनेस मैनेजमेंट, बैंकिंग, लेखाकार और वित्तीय सलाहकार आदि.
विज्ञान: विज्ञान भारतीय छात्रों के लिये सर्वाधिक लोकप्रिय विषयक्षेत्र है. यह सैंकड़ों विषयक्षेत्रों के लिये एक मंच के तौर पर कार्य करता है, जैसे कि चिकित्सा, कम्प्यूटर विज्ञान, रक्षा, इंजीनियरिंग और कृषि विज्ञान, प्लांट पैथोलॉजी, इवोल्यूशनरी बायोलॉजी और कई अन्य. विज्ञान विषयक्षेत्रों को मुख्यत: दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- क) इंजीनियरिंग (पीसीएम) और ख) मेडिकल (पीसीबी).
क) इंजीनियरिंग (पीसीएम) अथवा नॉन मेडिकल लाइन: जो कि इंजीनियरिंग अथवा नॉन मेडिकल लाइन में रुचि रखते हैं वे पीसीएम (भौतिकी, रसायनशास्त्र और गणित) को अपने प्रमुख विषयों के तौर पर और 2 अन्य अपनी पसंद के विषयों का चयन कर सकते हैं. कक्षा 11वीं और 12वीं में गणित रखने से इंजीनियरी कालेजों जैसे कि आईआईटी, एनआईटी और देश भर में अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने के लिये आपका मार्ग प्रशस्त होगा. देश में यह प्रवृत्ति रही है कि बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को यह सोचकर कि इंजीनियरिंग उनके लिये बेहतर कॅरिअर विकल्प होगा, नॉन-मेडिकल विषयक्षेत्र चुनने के लिये मज़बूर करते हैं. इससे प्रतीत होता है कि इन दिनों इंजीनियरिंग करना एक फैशन बन गया है और हर कोई बगैर अपनी क्षमताओं का विश्लेषण किये इस गाड़ी में सवार होना चाहता है. लेकिन यह नोट कर लिया जाना चाहिये कि अन्य कॅरिअर विकल्प भी हैं जो कि इंजीनियरिंग की तरह समान कॅरिअर विकास और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण है कि इस बात की परवाह किये बिना कि दूसरे लोगों का झुंड क्या कर रहा है, अपनी क्षमताओं का विश्लेषण करें और तद्नुसार आगे बढ़ें.
ख) मेडिकल (पीसीबी): विज्ञान विषयक्षेत्र उन्हें उत्कृष्ट कॅरिअर विकल्प प्रदान करता है जो कि जीवन विज्ञान के क्षेत्र में जाने के इच्छुक होते हैं और जो कुछ नई या मानवीय जीवन के बारे में कुछ खोज़ करने के प्रति वास्तव में उत्सुक होते हैं. पीसीबी (भौतिकी, रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान) आपको मेडिकल के क्षेत्र में उन्नत अवसर प्रदान करता है. इस क्षेत्र के लिये काफी यथार्थता और कठोर परिश्रम अपेक्षित होता है. +2 में पीसीबी लेने के बाद आप विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उपस्थित हो सकते हैं और अपनी रुचि और प्रतिशतता के आधार पर अनेक पाठ्यक्रमों का चुनाव कर सकते हैं. स्नातक स्तर पर आप एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग, जैव प्रौद्योगिकी, पशुचिकित्सा विज्ञान अध्ययन, फॅारेंसिक विज्ञानों के साथ मानव शरीर और मनुष्य से जुड़े अनेक पाठ्यक्रमों का विकल्प चुना जा सकता है.
कला/मानविकी: कला या मानविकी का विषयक्षेत्र आकर्षक अवसरों के साथ कॅरिअर की व्यापक संभावनाओं का प्रस्ताव करता है. इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, मनोविज्ञान, मानवशास्त्र, मानव संसाधन, पत्रकारिता, साहित्य, धर्म, अभिनय कलाओं जैसे विषयों सहित अनेक विषय इससे संबंधित हैं. छात्रों को दो भाषा विषयों को चुनना होगा जिनमें अंग्रेजी अनिवार्य भाषा विषय है. हिंदी और संस्कृत वैकल्पिक भाषा विषय होते हैं. छात्र को इनमें से किसी एक को चुनना होगा.
यह विषयक्षेत्र ज्ञान का एक महान सागर है जिससे छात्र सभी तरह से लाभान्वित हो रहे हैं. कला विषयक्षेत्र के छात्रों के लिये अपना कॅरिअर शुरू करने के भी व्यापक विकल्प होते हैं. इससे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारी बनने के लिये महत्वपूर्ण सिविल सेवाएं परीक्षाओं के लिये द्वार भी खुलते हैं. इस विषयक्षेत्र में शैक्षणिक के साथ-साथ विभिन्न पद्धतियों पर आधारित मानवीय स्थिति का विश्लेषणात्मक, व्यवहार्य अध्ययन शामिल होता है.
10वीं के बाद कुछ अन्य कॅरिअर विकल्प हैं:
डिप्लोमा पाठ्यक्रम: मैट्रिकुलेशन के उपरांत तेज़ी से रोजग़ार चाहने वाले छात्रों के लिये डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक अच्छा विकल्प होते हैं. किफायती, लघु अवधि के दौरान रोजग़ार, उच्चतर शिक्षा और रोजग़ार आदि के लिये संभावना आदि डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुछेक फायदे हैं. डिप्लोमा धारकों को रेलवे, केंद्रीय/राज्य सरकारों अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कनिष्ठ अभियंताओं के तौर पर भी नियुक्त किया जाता है. कार्यानुभव बढऩे से उच्चतर रोजग़ार पदों पर पदोन्नति आसान हो जाती है. इन पाठ्यक्रमों में सिद्धांत की बजाए व्यावहारिक सत्रों पर अधिक ज़ोर दिया जाता है. ये छात्रों के लिये औद्योगिक रोजग़ारों के लिये अपनी सक्षमता को प्रमाणित करने के लिये बहुत उपयुक्त हैं. डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की अवधि तीन वर्ष है. वे इंजीनियरी पाठ्यक्रम के दूसरे वर्ष में शामिल होने का अवसर प्रदान करते हुए इंजीनियरी पाठ्यक्रमों के गेटवे के तौर पर भी काम करते हैं और इससे एक शैक्षणिक वर्ष बच जाता है. 12वीं से इंजीनियरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की बजाए डिप्लोमा से डिग्री के लिये प्रतिस्पर्धा का स्तर कम कठिन है. ये बहुतकनीकी पाठ्यक्रम विभिन्न विषयों में हो सकते हैं. कुछेक पाठ्यक्रम हैं:-
ऑटोमोबाइल इंजीनियरी में डिप्लोमा 
कृषि इंजीनियरी में डिप्लोमा
वास्तुकला सहायक डिप्लोमा
जैवचिकित्सा-जैव प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
बिजनेस प्रशासन में डिप्लोमा
सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा
रासायनिक इंजीनियरी में डिप्लोमा
कम्प्यूटर इंजीनियरी में डिप्लोमा
एरोनॉटिकल इंजीनियरी में डिप्लोमा
एपैरल डिजाइन में डिप्लोमा
सिरेमिक टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरी में डिप्लोमा
इलेक्ट्रॅानिक्स एवं संचार इंजीनियरी में डिप्लोमा
इलेक्ट्रिकल एवं दूरसंचार इंजीनियरी में डिप्लोमा
फैशन डिजाइन में डिप्लोमा
चमड़ा प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
गारमेंट प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
हैंडलूम प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
सूचना प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
इंटीरियर डेकोरेशन में डिप्लोमा
इंस्ट्रूमेंटेशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा
उत्पादन और औद्योगिक इंजीनियरी में डिप्लोमा
चमड़ा प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में डिप्लोमा
यांत्रिक इंजीनियरी में डिप्लोमा
मैकेट्रानिक्स में डिप्लोमा
समुद्री इंजीनियरी में डिप्लोमा
यांत्रिक इंजीनियरी में डिप्लोमा
मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा
प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा
वस्त्र प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा (बुनाई/कढ़ाई/कताई)
वस्त्र डिजाइन में डिप्लोमा
टेक्सटाइल प्रोसेसिंग में डिप्लोमा
इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॅानिक्स इंजीनियरी में डिप्लोमा
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरी में डिप्लोमा
कम्प्यूटर विज्ञान और इंजीनियरी में डिप्लोमा
आईटीआई पाठ्यक्रम: हमारे देश में आईटीआई अथवा औद्योगिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम मैट्रिकुलेशन के बाद सर्वाधिक मांग वाले पाठ्यक्रमों में से एक हो गये हैं क्योंकि इनसे आकर्षक रोजग़ार अवसर उपलब्ध होते हैं. आईटीआई 130 से अधिक भिन्न-भिन्न विशेषज्ञताओं में प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल होते हैं. पाठ्यक्रमों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है जिससे विनिर्दिष्ट ट्रेड में बुनियादी कौशल प्रदान किये जा सकें. विभिन्न आईटीआई पाठ्यक्रमों के लिये न्यूनतम अवधि छह माह से दो वर्ष की होती है. प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रशिक्षुओं अखिल भारतीय ट्रेड परीक्षा देनी होती है और सफल उम्मीदवारों को राष्ट्रीय ट्रेड प्रमाणपत्र प्राप्त होता है. कुछेक प्रमुख आईटीआई पाठ्यक्रम हैं:
वास्तुकलात्मक ड्राफ्ट्समैनशिप
बेकर और कन्फेक्शनर
कम्प्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग सहायक
इलेक्ट्रिशियन इंटीरियर डेकोरेशन और डिजाइनिंग
मैकेनिक (डीजल)
मैकेनिक कम्प्यूटर हार्डवेयर
मैकेनिकल फिटर्स
मैकेनिक (मोटर वाहन)
नेटवर्क तकनीशियन
सर्वेयर
टर्नर
रक्षा सेवाएं: मैट्रिकुलेशन के पश्चात छात्र लिखित परीक्षाओं जैसे कि भारतीय सेना सैनिक तकनीकी (एम.ई.आर) परीक्षा, भारतीय सेना सैनिक लिपिकीय परीक्षा, भारतीय सेना सामान्य ड्यूटी (एन.ई.आर) परीक्षा आदि के जरिये सैनिक के पद पर भारतीय सेना में शामिल हो सकते हैं. भारतीय नौसेना भी छात्रों को डॉक यार्ड प्रशिक्षुओं, नाविकों आदि जैसे रोजग़ार के अवसर प्रदान करती है.
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी): कर्मचारी चयन आयोग दसवीं में सफल होने वाले छात्रों के लिये लिपिक ग्रेड परीक्षा आयोजित करता है.
(लेखक एक कॅरिअर काउंसलर और जीवन कौशल प्रशिक्षक हैं. ई-मेल: ruchiupadhyay.careercounsellor@gmail.com)
चित्र: गूगल के सौजन्य से