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विमान रख-रखाव में करिअर

 उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद 

यदि आप हवाई यात्रा कर रहे हैं और अपने गंतव्य-स्थान पर सुरक्षित पहुंच गए हैं तो आपको विमान रख-रखाव इंजीनियरों का आभारी होना चाहिए. ये ही वे व्यवसायी हैं जो एयरलाइन के इंजीनियरी तथा रख-रखाव विभाग में कार्य करते हैं और एयरलाइन के लिए सुरक्षित तथा उड़ान योग्य विमानों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं. हर तरह के विमानों को अत्यधिक सावधानीपूर्ण तथा निरंतर रख-रखाव और देखभाल की आवश्यकता होती है, ताकि उनकी सुरक्षा एवं उड़ान योग्यता को सुनिश्चित किया जा सके. किसी भी एयरलाइन को कार्यात्मक बनाए रखने के लिए भू-रखरखाव कर्मी उसके अत्यधिक अनिवार्य घटक होते हैं.

भारत विश्व में सबसे तीव्र गति से

विकासशील देश है. सरकार की उदारीकरण

नीतियों के कारण, नागर विमानन में शानदार विकास हुआ है. कई प्राइवेट एयरलाइन्स तथा निगम

जैसे एयर इंडिया, जेट एयरवेज़, इंडिगो

एयरलाइन्स, स्पाइस-जेट, विस्तारा एवं अन्य आज उड़ान भर रहे हैं और अच्छा उड़ान राजस्व प्राप्त

कर रहे हैं. यात्री एयरलाइन्स, मालवाहक विमानों, प्राइवेट हवाई टैक्सी ऑपरेटरों, व्यवसाय एवं कार्पोरेट जेट्स की बढ़ती हुए मांग को पूरा करने के लिए विमान रख-रखाव इंजीनियरों की तत्काल आवश्यकता है.

विमान रख-रखाव इंजीनियर, किसी विमान का निरीक्षण करने, उसमें समस्याओं का पता लगाने, पाई गई समस्याओं की रिपोर्ट करने और अंतत: उन्हें सुलझाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं. यह कार्य उन्हें परिष्कृत विमान प्रणालियों जैसे वाणिज्यिक जेटों, सैन्य लड़ाकू विमानों या हैलीकॉप्टरों तथा अन्य प्रकार के विमानों पर कार्य करने के अवसर देते हैं.

जबकि वैमानिक एवं एयरोस्पेस इंजीनियर मुख्य रूप से विमानों, इंजिनों तथा उपकरणों की डिजाइन, विनिर्माण तथा जांच के कार्यों से जुड़े होते हैं. विमान रख-रखाव इंजीनियर (ए.एम.ई.) विमान तथा उसके इंजिन, वैद्युत एवं विमान-संचालन प्रणालियों के रख-रखाव का कार्य करते हैं. किसी भी विमान के उड़ान भरने से पहले, विमान रख-रखाव इंजीनियर तथा विभिन्न विधाओं के इंजीनियरों का एक दल प्रमाणित करते हैं विमान उड़ान योग्य स्थिति में है, उसका उपयुक्त रख-रखाव किया गया है और वह उड़ान भरने में सक्षम है. रख-रखाव में हवाई अड्ड़ों, हैंगर्स एवं वर्कशॉप में खड़े विमानों की ओवरहालिंग, जहाज के कल-पुर्जों को बदलना, जंग हटाना तथा टायरों, उपस्करों, व्हील फ्लैप्स की जांच करने के कार्य शामिल हैं. विमान पर निरीक्षण तथा परिशोधन कार्य करने के अतिरिक्त, मरम्मत, रख-रखाव, ओवरहॉल तथा दोष-निवारण सहित  नैदानिक तथा यांत्रिक कार्य भी करने होते हैं.

विमान रख-रखाव इंजीनियरी एक तीन-वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है. यह पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को नागर विमानन महानिदेशालय (डी.जी.सी.ए.) लाइसेंस जारी करता है.

विमान रख-रखाव इंजीनियरी (ए.एम.ई.) की दो बड़ी विधाएं हैं:

यांत्रिक: इस विधा में जेट एवं पिस्टन इंजिन तथा हल्के एवं भारी विमान शामिल होते हैं.

विमानन: जिसमें रेडियो नेवीगेशन और वैद्युत तथा इंस्ट्रूमेंट प्रणालियां शामिल होती हैं.

यांत्रिक विधा किसी विमान के इंजिन, शरीर तथा अन्य यांत्रिक प्रणालियों से जुड़ी होती हैं, इसलिए यांत्रिक इंजीनियर इंजिनों की सविर्सिंग तथा ओवरहॉलिंग का कार्य देखते हैं. विमानन विधा वैद्युत तथा इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, उपकरणों, रेडियो प्रणालियों आदि से संबंधित होती हैं और विमानन इंजीनियर वैद्युत तथा इलेक्टॉनिक उपकरणों का हस्तन और रख-रखाव करते हैं.

ए.एम.ई. प्रशिक्षण के पहले वर्ष में विमान नियमों तथा विनियमों के बारे में बुनियादी सूचना दी जाती है. दूसरे वर्ष में, छात्र सामान्य इंजीनियर और रख-रखाव सीखते हैं. पढ़ाए जाने वाले विषयों में एयरोडायनामिक्स या उड़ान का सिद्धांत, धातुकर्म, इलेक्ट्रॉनिकी, परिष्कृत उपकरणों का हस्तन तथा मशीन रूम में तथा विमान इंजिनों पर व्यावहारिक कार्य शामिल होते हैं. तीसरे वर्ष में अध्ययन विशिष्ट क्षेत्रों जैसे

हल्के विमान, भारी विमान, पिस्टन इंजिन, जेट इंजिन अथवा हेलीकॉप्टर पर केंद्रित होता है.

परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को एक लाइसेंस दिया जाता है. कार्यक्रम के अंत में आपको विमान रख-रखाव बुनियादी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिया जाता है, इसके बाद नागर विमानन महानिदेशक (डी.जी.सी.ए.) द्वारा परीक्षा संचालित की जाती है और उसके बाद आपको विमान की सर्विस का या बी.ए.एम.ई.एल. लाइसेंस जारी किया जाता है. डी.जी.सी.ए. द्वारा संचालित की जाने वाली परीक्षा में विमान रख-रखाव इंजीनियरी लाइसेंस परीक्षा की वैमानिक विधा श्रेणी ए तथा श्रेणी सी शामिल होती है. विमानन में श्रेणी ई. (वैद्युत), आई. (इंस्ट्रूमेंटेशन) और आर. (रेडियो) शामिल होता है, डी.जी.सी.ए. - ए.एम.ई. लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किसी व्यक्ति को विमान के एक प्रकार पर विनियामक लाइसेंस अथवा अनुमोदन प्राप्त करना अपेक्षित होता है. यदि यह एयरबस या बोइंग है तो हमें उस विशेष प्रकार के विमान की सर्विस के लिए एक वैयक्तिक लाइसेंस प्राप्त करना होता है. विमान रख-रखाव इंजीनियर विमान का निरीक्षण करते हैं और इसकी उपयुक्तता प्रमाणित करने के लिए अधिकृत होते हैं.

ए.एम.ई. पाठ्यक्रम के छात्र ए.एम.ए.ईएस.आई. (एसोशिएट मैंबरशिप ऑफ  एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ  इंडिया) के लिए बैठ तथा इस रूप में उत्तीर्ण कर सकते हैं. इसे भारत सरकार द्वारा वैमानिक इंजीनियर में बी.ई. या बी.टेक. कार्यक्रम के समकक्ष माना जाता है.

पात्रता:

विमान रख-रखाव इंजीनियरी पाठ्यक्रम करने के इच्छुक उम्मीदवार भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा गणित में न्यूनतम 50त्न अंकों के साथ 10+2 उत्तीर्ण होना चाहिए. इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उच्च आयु-सीमा 23 वर्ष है. उच्च आयु-सीमा उन व्यक्तियों के लिए शिथिलनीय होती है जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान एवं गणित सहित 10+2 परीक्षा के बाद इंजीनियरी में (किसी भी विधा में) में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम या बी.एस.सी. पाठ्यक्रम पूरा किया हो.

संभावनाएं:

प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करके डी.जी.सी.ए. लाइसेंस प्राप्त करने वाले व्यक्ति हवाई अड्डों तथा विमान विनिर्माता या रख-रखाव फर्मों में एक आकर्षक वेतन वाला रोजग़ार प्राप्त करने के पात्र होते हैं. निजी क्षेत्र में जितनी अधिक एयरलाइन्स उड़ान भरना प्रारंभ करेंगी, विमान रख-रखाव इंजीनियरों तथा मैकेनिक्स की उतनी मांग बढ़ती जाएगी.

विमान रख-रखाव इंजीनियर या विमान मैकेनिक विमान विनिर्माता या रख-रखाव फर्मों और हवाई अड्डों पर तत्काल रोजग़ार तलाश सकते हैं. इंजीनियर के रूप में वे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच.ए.एल.), एयर इंडिया, संघ लोक सेवा आयोग, बी.एच.ई.एल., डी.आर.डी.ओ., इंडियन एयर फोर्स, तटरक्षक तथा एयरलाइन उद्योगों में रोजग़ार तलाश सकते हैं.

ए.एम.ए.ई.एस.आई. के रूप में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार भी बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची और मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान में, गेट के माध्यम से आई.आई.टी. में एम.टेक. में प्रवेश ले सकते हैं.

*कुछ महत्वपूर्ण ए.एम.ई. प्रशिक्षण संस्थान निम्नलिखित हैं:-

*विमानन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय, दिल्ली फ्लाइंग क्लब

*भारतीय एयरोनॉटिक्स संस्थान, दिल्ली

*एयरोनॉटिक्स विद्यालय एवं भारतीय एयरोनॉटिकल विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली

*हिंदुस्तान विमानन अकादमी, बंगलौर

*विमान रख-रखाव इंजीनियर संस्थान, हैदराबाद

*राजीव गांधी विमानन अकादमी, सिकंदराबाद

(विमान यातायात नियंत्रक)-ए.टी.सी.

दिल्ली का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत में सबसे अधिक व्यस्त हवाई अड्डा है. राजधानी के हवाई अड्डे पर 200-300 जहाज़ उतरते हैं या यहां से उड़ान भरते हैं, हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारी (ए.टी.सी.ओ.) विमानों की सुरक्षित उड़ान, उतरने तथा सही मार्ग संचालन का मार्गदर्शन करते हैं. वे न केवल भारत से उड़ान भरने वाले या भारत में उतरने वाले जहाजों की, बल्कि अन्य देशों के बीच ऐसी उड़ानों की भी सहायता करते हैं जो भारतीय हवाई मार्गों से गुजरते हैं. ए.टी.सी. विश्व भर में हवाई अड्डों से आने-जाने के पूर्व-निर्धारित मार्गों के समानांतर और हवाई मार्गों में हवाई यातायात की क्रमबद्धता तैयार करते हैं. इसमें सभी विमानों की जमीन पर आवाजाही, उड़ान तथा उतरान पर निगरानी रखना, सम्पर्क तथा प्रस्थान यातायात के लिए अप्रोच कंट्रोल मोनीटर्स का हस्तन करना और ए.टी.सी. टावर विंडो से तथा राडार के माध्यम से विजुअल आब्जर्वेशन द्वारा मार्ग नियंत्रण करना शामिल है. प्रत्येक पायलट, उड़ान की सही दिशा के लिए और यात्रा पूरी होने तक सभी युक्ति चालन के लिए जमीन पर भी हवाई यातायात नियंत्रकों (ए.टी.सी.) पर अत्यधिक निर्भर रहता है. किसी विमान की उड़ान में सहायता के लिए किसी ए.टी.सी. कर्मी-मंडल में पांच यूनिटें शामिल होती हैं ये इस प्रकार हैं:-

1. क्लीयारेंस डिलीवरी यूनिट (सी.डी.यू.): विमान इस यूनिट से सभी विवरण देने के लिए कहते हैं, जैसे विमान को किस मार्ग पर जाना है, ईंधन की आवश्यकता, विमान पर यात्रियों की संख्या आदि. सी.डी.यू. एरिया कंट्रोल यूनिट से समन्वय स्थापित करेंगे, जो विमान के लिए उड़ान-स्तर (ऊंचाई) की उपलब्धता के आधार पर जाने या अन्य विकल्प देता है.

2. सर्फेस मूवमेंट कंट्रोल (एस.एम.सी.): यह यूनिट विमानों के जमीनी आवागमन के लिए आगे चलने या पीछे जाने की अनुमति जारी करता है. यह रनवे के निकट होल्डिंग प्वाइंट, वेललिट, सुअंकित भाग तक जहाज के आवागमन और निगरानी के लिए जिम्मेदार होती है.

3. एयरोड्रोम या टावर कंट्रोलर: यह उड़ान के प्रस्थान या नीचे उतरने का ग्रीन सिग्नल देता है.

4. अप्रोच कंट्रोल (या राडार कंट्रोल): यह विमानों का हवाई अड्डे से 60 मील तक मार्गदर्शन करता है और उसके बाद एरिया कंट्रोल को सौंप देता है.

5. एरिया कंट्रोल यूनिट: एरिया कंट्रोल यूनिट विमान को आबंटित ऊंचाई देता है और निर्धारित मार्ग पर ले जाता है और अंत में उसे निकटवर्ती क्षेत्रीय नियंत्रण केन्द्र (दूसरे शहर में) को सौंप देता है. उसे विमानों के बीच मानक दूरी सुनिश्चित करनी होती है. कंट्रोलर्स में उच्च-दबाव स्थितियां समान होती हैं और उन्हें हेडफोन पहनने होते हैं, पायलट क्या संदेश प्रेषित कर रहा है इस पर ध्यान केंद्रित करना होता है और कंप्यूटर तथा राडार मशीन पर ध्यान देना होता है.

ए.टी.सी.ओ. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा सेवा में रखे जाते हैं, और इन्हें कनिष्ठ कार्यपालक या अधीक्षक कहा जाता है. इसके अतिरिक्त भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण केवल सफल भर्ती के बाद ही हवाई यातायात नियंत्रक प्रशिक्षण देता है.

पात्रता:

चूंकि ए.टी.सी. के लिए सभी कार्य भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के यहां हैं, इसलिए चयन ए.टी.सी. प्रवेश परीक्षा, एक चिकित्सा परीक्षा तथा एक अभिरुचि परीक्षा के आधार पर किया जाता है.

आप प्रवेश-परीक्षा के लिए, इंजीनियरी, इलेक्ट्रॉनिकी/दूरसंचार/रेडियो इंजी./वैद्युत में डिग्री अथवा इलेक्ट्रॉनिकी में या इलेक्ट्रॉनिकी, दूरसंचार रेडियो भौतिकी विशेषज्ञता के विषय सहित किसी भी विधा में मास्टर डिग्री अथवा भौतिकी, गणित या कंप्यूटर विज्ञान सहित प्रथम श्रेणी की मास्टर डिग्री के बाद आवेदन कर सकते हैं. हवाई यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में हो रहे औद्योगिकीय बदलाव को ध्यान में रखते हुए. कभी-कभी सी.पी.एल. धारकों/कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान रखने वाले उम्मीदवारों को वरीयता दी जाती है.

लिखित परीक्षा में संबंधित इंजीनियरी शाखा, सामान्य अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, तथा एक संख्यासत्मक अभिरुचि/तर्क आधारित परीक्षा वाले 4 प्रश्न-पत्र होते हैं. उम्मीदवारों को एक वॉइस टैस्ट भी उत्तीर्ण करना होता है तथा एक चिकित्सा जांच परीक्षा और एक व्यक्तिगत साक्षात्कार देना होता है.

चयनित उम्मीदवारों को हवाई यातायात सेवा, एयरोड्रॉम एवं ग्राउण्ड एड्स, हवाई संविधान, मौसम विज्ञान तथा ऐसे अन्य विषयों में एक वर्ष के प्रारंभिक प्रशिक्षण के लिए नागर विमानन प्रशिक्षण कॉलेज, इलाहाबाद में भेजा जाता है. भर्ती हो जाने के बाद प्रशिक्षण की सम्पूर्ण लागत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा वहन की जाती है.

एक सफल ए.टी.सी.ओ. के कौशल:

*अंग्रेजी भाषा में उच्च दक्षता

*शांत एवं व्यस्त स्थितियों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता

*तार्किक सोच एवं विश्लेषण क्षमता

*शीघ्र निर्णय लेने और लगातार घंटों तक ध्यान केंिद्रत रखने की क्षमता.

प्रशिक्षण संस्थान:

नागर विमानन प्रशिक्षण कॉलेज, इलाहाबाद तथा फाइनलिस्ट्स को हैदराबाद (एरिया कंट्रोल सेंटर प्रशिक्षण के लिए) भेजा जाता है.

संभावनाएं:

नागर विमानन के, एक विकासशील क्षेत्र होने के कारण भारत को नए तथा विस्तारशील हवाई अड्डों की सेवा के लिए अधिक ए.टी.सी. नियंत्रकों की आवश्यकता है. यद्यपि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण सिविलियन ए.टी.सीज़. का मुख्य नियोक्ता है, लेकिन भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियों तथा कुछ छोटे प्राइवेट हवाई अड्डों में भी कुछ रोजग़ार हैं. भारतीय वायु सेवा भी ऐसे हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारियों को भर्ती करती है जो सैन्य तथा सिविल विमानों के पायलटों को नियंत्रण तथा परामर्श-सेवाएं देते हैं.

(उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर्स स्मार्ट प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली में क्रमश: निदेशक तथा वरिष्ठ काउंसिलिंग सॉयकोलोजिस्ट हैं. ई-मेल: careerssmaronline@gmail.com)