नौकरी फोकस


Volume-12

योग के क्षेत्र में रोजग़ार के अवसर

उषा अल्बुकर्क एवं
निधि प्रसाद

इन दिनों हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां लोग स्वास्थ्य के प्रति इतना अधिक जागरूक हैं जितना पहले कभी नहीं होते थे. किसी रोजग़ार में बने रहना मंदी, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष ने और अधिक कठिन और तनावपूर्ण बना दिया है. ये सभी किसी व्यक्ति की भलाई, शांति और धैर्य का माध्यम खोजने में अग्रणी हैं. आज की दुनिया में फिटनेस बहुत ज़रूरी है और बहुत से लोग योग की तरफ  मुड़ रहे हैं जिसका अभ्यास करने वाले लोगों की संख्या दुनियाभर में लाखों में हैं.
परंपरागत रूप से योग स्वस्थ जीवन जीने की एक कला है. प्राचीन भारत में यह एक प्रमुख आरोग्यसाधक रहा है. चाहे कोई शारीरिक बीमारी हो अथवा मानसिक-सब का योग में इलाज पाया गया है. पूर्व में जीवन के दार्शनिक मार्ग की जो शुरूआत हुई, पश्चिम में यह जंगल की आग की तरह फैल गया और भारत में भी इसे नव-यौवन के साथ देखा गया है, जो कि योग की जन्म भूमि है.
योग संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ है संघ. यह 5000 वर्ष पुराना भारतीय दर्शन है जो कि व्यायाम, श्वसन, खुराक, आराम और ध्यान का संयोजन है. यह शारीरिक और मानसिक विषयक्षेत्रों का संयोजन है जो कि शरीर को मज़बूत और स्वस्थ तथा मन को शांत और अधिक नियंत्रित बनाता है और यह आत्मज्ञान के प्रति सहायक होता है. योग के अनेक अर्थ हैं. कुछ इसे शारीरिक मुद्राएं कहते हैं तो कुछ श्वसन तथा कुछ मानसिक तकनीक. योग थेरेपी में मुख्यत: व्यापक रेंज के मानसिक/शारीरिक व्यायाम शामिल होते हैं जिनमें सकारात्मक स्वास्थ्य और भलाई के साथ-साथ विशेष चिकित्सकीय स्थितियों के प्रोत्साहन के लिये शारीरिक मुद्राओं और श्वसन अभ्यासों तक गहन आराम और ध्यान सम्मिलित होता है. इन दिनों योग को सभी प्रकार के व्यायामों से अधिक श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि योग में केवल व्यायामों पर ही नहीं बल्कि मन के नियंत्रण और संतुलित खानपान पर भी ज़ोर होता है.
इस बात की व्यापक स्वीकार्यता है कि योग ने मधुमेह, अस्थमा, अर्थराइटिस, हृदय रोग और कई अन्य बीमारियों के लिये इलाज उपलब्ध कराया है. योग ने नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले नशेडिय़ों को भी पुन: सामान्य जीवन में लौटने और कुछेक प्रकार के कैन्सर के फैलने पर रोक लगाने में योगदान किया है. योग थेरेपिस्ट के कार्य में अपने ग्राहकों को इस प्रकार से ऊर्जावान बनाना शामिल होता है कि वे ऐसे लक्षणों को कम करने, हटाने या व्यवस्थित करने में सक्षम हो सकें जो उनके शरीर में बेचैनी, चोट या बीमारी का कारण बनते हैं. योग थेरेपिस्ट ग्राहकों की अपने शरीर को अपने वातावरण के साथ जोडऩे में सुधार करने में भी मदद कर सकता है.
योग इन दिनों हिमालय के महर्षियों अथवा पश्चिम के विलक्षण व्यक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि इसने दुनिया भर में लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है जो कि स्वास्थ्य, समग्र और वैकल्पिक चिकित्सा देखभाल अथवा जीवन के मार्ग की तलाश में हैं. पश्चिमी दुनिया में ज्यादा से ज्यादा लोगों के वैकल्पिक थेरेपियों की तरफ मुडऩे से योग शिक्षकों को बड़ा सम्मान और महत्व प्राप्त हो रहा है. दिसंबर 2014 में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र द्वारा योग दिवस घोषित करने के साथ ही लोगों में योग सीखने और अभ्यास करने के प्रति रुचि बढ़ी है और योग अनुदेशकों के लिये मांग में काफी वृद्धि हुई है.
यद्यपि योग थेरेपी हजारों वर्षों से प्रचलन में है, योग जिसे हम देख रहे हैं और वर्तमान में अभ्यास कर रहे हैं-आधुनिक चिकित्सा के साथ परंपरागत योग के जुडऩे की संतति-वह मात्र 80 वर्ष पुराना है. अत: व्यावसायिक योग कई प्रकार के रोजग़ार विकल्प प्रदान करता है. दो प्रमुख क्षेत्र हैं: व्यायाम और शारीरिक फिटनेस के लिये योग का शिक्षण और  बीमारियों से संबंधित शोध और इलाज में योग.
योग शिक्षक में योग के प्रशिक्षण के साथ-साथ बीमारियों के बारे में और आसन या व्यायाम तथा ध्यान, और प्राणायाम, अथवा श्वसन और ध्यान से जुड़े अभ्यासों की जानकारी होनी चाहिये जो कि बीमारियों के इलाज अथवा रोकथाम में सहायता करते हैं. योग में प्रशिक्षण अनिवार्य है क्योंकि यदि अभ्यास सही प्रकार से नहीं किये गये तो यह उतना ही नुकसानदायक हो सकते हैं. उचित प्रशिक्षण में योग से जुड़े सभी सिद्धांतों की जानकारी रखना शामिल है.
योग से जुड़े अनेक ग्रंथ हैं और इनमें योग के संबंध में काफी कुछ लिखा गया है. योग के बहुत से स्कूल, ‘‘हठ, अयेंगर, अष्टांग, विन्यास ऐसे कुछेक स्टाइल्स हैं जिनके लिये अलग प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है. योग अभ्यास करने की सही तकनीकें समझने के लिये काफी शोध कार्य भी हुए हैं.
पात्रता
योग के क्षेत्र में व्यवसायिक शिक्षा स्नातक और स्नातकोत्तर, दोनों स्तरों पर संचालित की जाती है. स्नातक पूर्व कार्यक्रम में प्रवेश के लिये किसी ने भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण की होनी चाहिये. स्न्नातकोत्तर अर्हता कार्यकम के लिये न्यूनतम अर्हता मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषयक्षेत्र में न्यूनतम बैचलर डिग्री होनी चाहिये, यद्यपि दर्शनशास्त्र में स्नातकों को वरीयता दी जायेगी. पाठ्यक्रम डिग्री/डिप्लोमा और प्रमाणपत्र स्तरों में उपलब्ध हैं. इसके लिये विनिर्दिष्ट अर्हता की आवश्यकता नहीं होती है. इसके अलावा इस क्षेत्र में अनुभव की गणना की जाती है. योग संबंधी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये कोई आयु सीमा नहीं होती है.
योग सिद्धांत के प्रमुख विषयों में शरीर रचना विज्ञान, दर्शनशास्त्र, व्यायाम, ध्यान और योग तथा ध्यान के मत और सिद्धांत आदि शामिल होते हैं. प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा प्रेक्टिकल है जिसमें विभिन्न आसन जैसे कि शटक्रम, योगासन, सूर्यनमस्कार, प्राणायाम, ध्यान आदि शामिल होता है. चूंकि योग का अधिकतर साहित्य संस्कृत में है इसके लिये संस्कृत का ज्ञान रखना हितकर है.
इस क्षेत्र में अनेक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं जिनमें छात्र अपना कॅरिअर बना सकते हैं. कुछेक पाठ्यक्रम, जिनकी अधिक मांग है-बैचलर ऑफ आर्टस (योग), मास्टर्स इन आर्टस (योग), पीजी डिप्लोमा इन योग थेरेपी और योग में प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है.
यदि आप नेचुरोपैथ अथवा योग विशेषज्ञ के तौर पर अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं, आप बैचलर ऑफ नेचुरोपैथ एंड योगिक साइंसिस का विकल्प चुन सकते हैं, जो कि साढ़े पांच वर्ष का डिग्री पाठ्यक्रम. इस पाठ्यक्रम के लिये जीवविज्ञान के साथ विज्ञान वरीयतन विकल्प है और प्रवेश परीक्षा में प्राप्तांकों के आधार पर चयन होता है.
अपेक्षित कौशल
*अच्छा सम्प्रेषण कौशल
*अंतर-वैयक्तिक कौशल
*योग में विश्वास के प्रति अन्य लोगों को प्रेरित करना
*मज़बूत दृढ़ संकल्प
*सर्वाधिक कठिन ‘‘आसन‘‘ या योग मुद्राओं में अभ्यास करने की इच्छा शक्ति व्यावसायिक स्तर पर, किसी के लिये भी निम्नलिखित में विशेषज्ञ होने की आवश्यकता है:-
*शारीरिक फिटनेस के लिये योग अभ्यास
*आध्यात्मिक योग
*योग थेरेपी
*विशेष रूप से बच्चों के लिये डिजाइन किया गया योग
*जोड़ों के लिये योग
*कार्पोरेट योग
*प्रसव पूर्व और/अथवा प्रसव उपरांत योग
*योग के निजी पाठ
*रिट्रीट्स अथवा कार्यशालाएं
संभावना
योग दुनिया भर में इसकी सरलता के कारण मशहूर है. इसके अलावा उपचार के रूप में इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है. योग प्रशिक्षण के आधार पर कोई भी एक योग थेरेपिस्ट के तौर पर शोध, प्रशिक्षण के क्षेत्र में विकल्प चुन सकता है अथवा कार्य कर सकता है. कोई भी निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य तलाश सकता है:
*शोध
*अकादमिक
*हेल्थ रिसॉर्ट
*अस्पताल
*जिम
*स्कूल
*स्वास्थ्य केंद्र
*हाउसिंग सोसाइटियां
*कार्पोरेट घराने
टेलीविजन चैनल भी योग प्रशिक्षक हायर करते हैं और सुप्रसिद्ध व्यक्ति निजी योग अनुदेशक हायर करने को वरीयता देते हैं. स्वरोजगार भी एक विकल्प होता है जिसे कई लोग चुनते हैं. एक महान तनाव मुक्तिकारक योग विदेशी पर्यटकों के बीच भी बहुत लोकप्रिय आधार बनता जा रहा है जो कि शांतिपूर्वक छुट्टियां बिताना चाहते हैं, इससे योग विशेषज्ञों की मांग में इज़ाफा हुआ है. इस महान व्यवसाय में लोगों के लिये संभावनाओं की कोई कमी नहीं है.
रोजग़ार भूमिकाएं
*योग एरोबिक्स अनुदेशक
*योग थेरेपिस्ट
*योग अनुदेश
*योग शिक्षक
*थेरेपिस्ट्स और नेचुरोपैथस
*प्रशिक्षक/अनुदेश स्वास्थ्य क्लब
*अनुसंधान अधिकारी-योग और प्राकृतिक चिकित्सा
कार्पोरेट सेक्टर में भी कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर तनाव के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता आई है और उसने अपनी संस्कृति में योग को बड़े पैमाने पर अपनाया है. अत: योग अनुदेशों की इन क्षेत्रों में बहुत मांग है. व्यक्तिश: कक्षाएं लेना भी एक लोकप्रिय विकल्प है.
चहुं ओर बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा होने के कारण किसी के लिये भी अपने को स्थापित करना और तुरंत इस क्षेत्र में लाभ अर्जित करना आसान नहीं है. शुरूआत में हो सकता है उद्योग में बहुत ज्यादा आमदनी नहीं हो परंतु जैसे जैसे अनुभव होता है तो एक मज़बूत ग्राहक आधार खड़ा हो जाता है जिसके जरिए लोकप्रियता हो जाती है. विभिन्न हस्तियों के बीच योग की लोकप्रियता ने भी योग शिक्षण को एक लाभदायक व्यवसाय बना दिया है. जितने घण्टे आप योग की शिक्षा देंगे इससे सीधे आपकी आय अर्जित करने पर असर होगा.
यह समय आध्यात्मिकता के साथ आगे बढऩे का है! कमल के समान मुद्रा सीखने के लिये एक योग चटाई उठा लीजिए और अपने सपने को पूरा कीजिए !
ऊषा अल्बुक्वेरक्यू कैरियर्स स्मार्ट प्रा. लिमि. में निदेशक और निधि प्रसाद सीनियर काउंसलिंग मनोविज्ञानी हैं.
ई-मेल:careerssmartonline@gmail.com