नौकरी फोकस


Edition-17

लेखापरीक्षक (ऑडिटर) के रूप में कॅरिअर

उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद

लेखापरीक्षक परीक्षक का अर्थ है लेखा का परीक्षण करने वाला, लेखापरीक्षक अंग्रेजी शब्द ऑडिटर का हिन्दी पर्याय है. ऑडिटर शब्द लैटिन शब्द ऑडायर से व्युत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है सुनना. प्राचीन समय में ऑडिटर (लेखापरीक्षक) लेखा की जांच करने के लिए किसी लेखाकार द्वारा पढ़े जाने वाले लेखा को सुनता था. लेखापरीक्षण भी उतना ही पुराना है जितना लेखाकरण. यह सभी प्राचीन देशों जैसे मेसोपोटामिया, ग्रीस, इजिप्ट, रोम, यू.के. तथा भारत में प्रयोग में था. वेदों में लेखा एवं लेखापरीक्षक के संदर्भ हैं. कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र में सार्वजनिक वित्त के लेखाकरण तथा लेखापरीक्षण के विस्तृत नियम हैं.
यदि आप किसी कंपनी के प्राय: किसी भी पहलू की आंतरिक कार्यप्रणाली का विश्लेषण करने में रुचि रखते हैं तो आप लेखापरीक्षक का कॅरिअर चुन सकते हैं. वित्तीय विवरणों एवं व्यय रिपोर्टों का परिशीलन करने से लेकर सरकारी विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने, लेखापरीक्षण करने के कार्य इस क्षेत्र में संभावित कॅरिअर के व्यापक विविध अवसर देते हैं.
लेखापरीक्षण का मूल उद्देश्य गलतियों तथा धोखेबाजी का पता लगाना एवं उनका निवारण करना है.
लेखापरीक्षा, किसी लेखापरीक्षक द्वारा विभिन्न लेखा-बहियों की परीक्षा या निरीक्षण करने का कार्य है. लेखापरीक्षा, इन्वेंटरी की वास्तविक जांच करके यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि सभी विभाग लेन-देन का रिकॉर्ड रखने की प्रलेखित प्रणाली का अनुसरण कर रहे हैं. लेखापरीक्षा, संगठन द्वारा प्रदान की गई वित्तीय विवरणिका की परिशुद्धता का पता लगाने के लिए की जाती है.
प्रत्येक सोसायटी में आर्थिक निर्णय, निर्णय लिए जाने के समय उपलब्ध सूचना पर आधारित होने चाहिएं. उदाहरण के लिए, किसी व्यवसाय को ऋण देने का बैंक का निर्णय उस व्यवसाय के साथ पिछले वित्तीय संबंध, उस कंपनी के वित्तीय विवरणों से प्रदर्शित होने वाली उसकी वित्तीय स्थिति तथा अन्य तथ्यों पर आधारित होता है. यदि निर्णय, निर्णय-कर्ताओं के उद्देश्य के अनुकूल लिए जाने हैं तो निर्णय-प्रक्रिया में प्रयोग में लाई गई सूचना विश्वसनीय होनी चाहिए.
ऐसी विश्वसनीय सूचना प्राप्त करने का एक आम तरीका यह है कि किसी स्वतंत्र व्यक्ति द्वारा कुछ प्रकार के सत्यापन (लेखापरीक्षा) कराए जाएं. इसके बाद लेखापरीक्षित सूचना का प्रयोग, निर्णय लेने की प्रक्रिया में इस धारणा के साथ किया जाता है कि सूचना पर्याप्त रूप में पूर्ण, परिशुद्ध तथा निष्पक्ष है.
किसी विभाग की लेखापरीक्षा आंतरिक रूप से उसके कर्मचारियों अथवा प्रमुखों द्वारा की जा सकती है और बाह्य रूप में किसी बाहरी फर्म अथवा किसी स्वतंत्र लेखापरीक्षक से कराई जा सकती है. किसी स्वतंत्र प्राधिकारी द्वारा लेखा की जांच एवं सत्यापन करने का ध्येय यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी लेखा-बहियों में प्रविष्टियां उचित रूप में की जाती हैं और उसमें कोई अयथार्थ विवरण नहीं दिए जा रहे हैं या धोखेबाजी नहीं की जा रही है.
सभी सार्वजनिक सूचीबद्ध संस्थाओं को, किसी भी तिमाही के लिए अपने परिणाम घोषित करने से पहले अपने लेखा की लेखापरीक्षा करानी चाहिए. लेखापरीक्षा कौन कर सकता है? भारत में आई.सी.ए.आई. अथवा इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के चार्टरित लेखाकार किसी भी संगठन की स्वतंत्र लेखापरीक्षा कर सकते हैं.
लेखापरीक्षण एक मिश्रित कॅरिअर है, जिसमें कई विभिन्न कार्य-दायित्व निहित होते हैं :-
*लेखापरीक्षण में प्रक्रियाओं, उत्पादों, सेवाओं, प्रणालियों, संगठनों और कर्मचारियों की समीक्षा विश्लेषण तथा मूल्यांकन करना शामिल होता है.
*लेखापरीक्षक संगठन की सूचना की परिशुद्धता, वैधता, विश्वसनीयता, सत्यापनीयता एवं समयबद्धता का और उस स्रोत तथा प्रक्रिया का मूल्यांकन करते हैं जिस से वह सूचना प्रस्तुत की गई है. यह एक महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि प्रबंध-तंत्र एवं बाहरी पक्ष उसके द्वारा किसी संगठन का, उनके प्रबंधन के अधीन एक परिशुद्ध मूल्यांकन प्राप्त करते हैं.
*लेखा परीक्षक किसी संगठन के आंतरिक नियंत्रण एवं संगठन के जोखिम प्रभाव को इन नियंत्रणों द्वारा किस सीमा तक नियंत्रित किया जाता है, उसका भी निरीक्षण करते हैं. आंतरिक नियंत्रण किसी कंपनी की परिसम्पत्तियों की चोरी को रोकने और यदि यह नियंत्रण उपयुक्त रूप में तैयार एवं निष्पादित किया गया हो तो, कर्मचारियों द्वारा डाटा में धोखेबाजी को रोकने में सहायता करता है.
*लेखापरीक्षक सुनिश्चित करते हैं कि वित्तीय एवं परिचालन रिपोर्टिंग की प्रभावकारिता की सहायता के सभी जांच- बिंदु विद्यमान हैं. वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि किसी संगठन की परिसम्पत्तियों की रक्षा के सभी नियंत्रण उपाय विद्यमान हैं.
लेखापरीक्षकों के प्रकार
आंतरिक लेखापरीक्षक : निगमों, सरकारी निकायों तथा अन्य बड़ी हस्तियों द्वारा आंतरिक लेखापरीक्षक रखे जाते हैं. आंतरिक लेखापरीक्षक उस संगठन के लिए कार्य करते हैं जिसकी वे लेखापरीक्षा करते हैं. उनका कार्य यह सुनिश्चित करना होता है कि संगठन सुचारू एवं प्रभावी रूप से चल रहा है. वे नियोक्ता के लिए वित्तीय, आंतरिक नियंत्रण एवं अनुपालन लेखापरीक्षा करते हैं. आंतरिक लेखापरीक्षक अपने संगठन में गलत विवरण, क्षति या धोखेबाजी पर संगठन के आंतरिक नियंत्रण एवं जांच बिंदुओं की प्रभावकारिता का सत्यापन करते हैं. कभी-कभी वे वित्तीय विवरिणका लेखापरीक्षा के साथ बाह्य लेखापरीक्षकों की भी सहायता करते हैं.
बाह्य लेखापरीक्षक : बाह्य लेखापरीक्षक, सार्वजनिक प्रैक्टिस में लगे एक स्वतंत्र लेखापरीक्षक या व्यावसायिक लेखाकार के रूप में भी जाने जाते हैं. बाह्य लेखापरीक्षक कंपनियों एवं अन्य संगठनों के वित्तीय विवरणों की लेखापरीक्षा करते हैं. वे आयकर रिटर्न तैयार करने में परामर्श भी देते हैं और कर्मचारियों के लिए मुआवजे तथा स्वास्थ्य-परिचर्या लाभों से जुड़े मामलों पर मार्गदर्शन भी करते हैं. वे सामान्यत: स्व-रोज़गार वाले होते हैं.
सरकारी लेखापरीक्षक: सरकारी लेखापरीक्षक सार्वजनिक क्षेत्र में कार्य करते हैं, स्थानीय एवं राज्य सरकार उन्हें सेवा में रखती हैं. सरकारी लेखापरीक्षक, सरकारी एजेंसियों के रिकॉर्ड का रखरखाव तथा जांच करते हैं और निजी व्यवसायों तथा संस्थाओं की लेखापरीक्षा करते हैं जिनका कार्य सरकारी विनियमों या काराधान के अधीन होते हैं. सरकारी लेखापरीक्षक का मुख्य कार्य अनुपालन लेखापरीक्षा एवं परिचालन लेखा परीक्षा पर आश्वासन के रूप में कार्य करना है.
न्यायिक लेखापरीक्षक : लेखापरीक्षक न्यायिक लेखाकरण में विशेषज्ञता कर सकते हैं. न्यायिक लेखापरीक्षक प्राय: ऐसी सूचना का पता लगाते हैं जो मुकदमें के समर्थन में उपयोग में लाई जाती है. न्यायिक लेखापरीक्षक का ध्येय धोखेबाजी, चोरी-छिपे किए जाने वाले अपराधों का पता लगाना, जांच करना एवं उन्हें रोकना है. न्यायिक लेखापरीक्षक प्राय: निगमों, लेखा परीक्षा फर्मों, सरकारी एजेंसियों तथा अन्वेषक एवं परामर्श फर्मों द्वारा सेवा में रखे जाते हैं.
पात्रता :
एक लेखापरीक्षक बनने के लिए वाणिज्य में या लेखाकरण में कम से कम स्नातक डिग्री होनी चाहिए. कुछ नियोक्ता, लेखाकरण में मास्टर डिग्री रखने वालों को वरीयता देते हैं. एम.बी.ए. के साथ वित्त में विशेषज्ञता भी एक सही विषय का चयन हो सकता है. अर्थशास्त्र, वाणिज्य एवं सांख्यिकी के पाठ्यक्रम भी सहायक होते हैं.
कुछ विश्वविद्यालय लेखाकरण में विशेषज्ञता पूर्ण पाठ्यक्रम चलाते हैं. विषय विशेषज्ञता के साथ, कम्प्यूटर साक्षरता भी अनिवार्य है. कम्प्यूटर लेखाकरण सॉफ्टवेयर जैसे टैली में कोई पाठ्यक्रम अथवा कोई अन्य संबंधित डिप्लोमा करना लाभप्रद होता है. आप आई.सी.डब्ल्यू.ए., सी.ए., कंपनी सेक्रेटरीशिप आदि जैसे अधिक उच्च पाठ्यक्रम भी कर सकते हैं.
उपलब्ध पाठ्यक्रम :
भारत में लेखापरीक्षण एवं कराधान के क्षेत्र में अनेक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, विश्वविद्यालय इन क्षेत्रों में डिप्लोमा से लेकर मास्टर डिग्री स्तर तक के पाठ्यक्रम चलाते हैं. लेखापरीक्षण एवं कराधान के क्षेत्र में अत्यधिक वांछित पाठ्यक्रम निम्नलिखित हैं :-
डिप्लोमा पाठ्यक्रम :
*लेखापरीक्षण में डिप्लोमा.
*लेखाकरण एवं लेखापरीक्षण में डिप्लोमा.
*आई.आर.सी.ए. (निवेश सूचना एवं क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) प्रमाणित पाठ्यक्रम.
*साइबर सुरक्षा, लेखापरीक्षा एवं अनुपालन में उच्च कार्यपालक कार्यक्रम.
*कराधान में डिप्लोमा.
*कर एवं कंपनी विधि में डिप्लोमा.
अपेक्षित कौशल :
*लेखापरीक्षक मामलों (या प्रत्याशित मामलों) पर एक मजबूत नीतिपरक ढांचा एवं रिपोर्ट रखते हों, क्योंकि उन्हें इसका सामना करना होता है.
*अच्छा संचार कौशल विभिन्न कर्मचारियों, प्रबंधकों, निदेशकों तथा बाहरी पक्षों के साथ सम्पर्क बनाने में सहायक होता है. यद्यपि लेखापरीक्षक अनेक व्यक्तियों से अच्छे संबंध स्थापित करते हैं, किन्तु उन्हें लेखापरीक्षा के लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए (उदाहरण के लिए सूचना की विश्वसनीयता, सत्यापनीयता, परिशुद्धता तथा समयबद्धता) क्योंकि उन्हें कई बार पता लगाए गए मामलों पर रिपोर्ट नहीं देने के लिए प्रभावित किया जाता है.
*विभिन्न स्रोतों से अपेक्षित सूचना संबंधी अनुरोध होने और प्राय: उन अनुरोधों का प्रतिरोध होने के कारण, सशक्त अंतर-वैयक्तिक कौशल होना महत्वपूर्ण है. सम्पन्न एवं उच्चाकांक्षी प्रकृति के व्यक्ति लेखापरीक्षकोंं को, प्रतिकूल निष्कर्ष वाली रिपोर्ट प्रकाशित करने में बाधा डालते हैं.
*लेखापरीक्षकों को टीम प्लेयर होना चाहिए क्योंकि लेखापरीक्षा का कार्य-क्षेत्र व्यापक हो सकता है, इसलिए जब संसाधन अड़चने इसे प्रभावित करें तो किसी लेखापरीक्षा के अन्य क्षेत्रों में सहायता करना लाभदायी हो सकता है.
*डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस युग में, लेखापरीक्षकों को सांख्यिकी का अच्छा ज्ञान, एवं नई प्रौद्योगिकियों का लाभ लेने का कौशल तथा पारम्परिक लेखापरीक्षा प्रणालियों से आगे बढऩे का कौशल होना आवश्यक है.
*अंत में, व्यावसायिक रूप से स्केप्टिसिज्म होना एक महत्वपूर्ण गुण है, विशेष रूप से तब, जब किसी कंपनी के आंतरिक नियंत्रण की समीक्षा की जाती है. किसी को भी यह मूल्यांकन करना आवश्यक होता है कि धोखा करने वाले किस तरह कंपनी के नियंत्रक को मात कर सकते हैं और लेखापरीक्षक को ऐसी प्रणाली तैयार एवं कार्यान्वित करने की आवश्यकता होती है जो कंपनी की परिसम्पत्तियों की प्रभावी रूप से रक्षा कर सके.
संभावना
अर्थव्यवस्था के विकास और अनेक व्यावसायिक संस्थाओं की  दिन-प्रतिदिन की बढ़ती संख्या के साथ ही लेखा परीक्षकों की मांग, वित्तीय लेखाकरण डाटा और वित्तीय विवरणों की निजी क्षेत्रों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शाखा को सुनिश्चित करने के लिए बढ़ती जा रही है.
यदि किसी व्यक्ति का सांख्यिकीय के प्रति लगाव एवं गणित में अभिरुचि न हो तो उसे मात्र इसलिए कि यह एक आकर्षक क्षेत्र है लेखाकरण को कॅरिअर के रूप में नहीं चुनना चाहिए. कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियों को वार्षिक रूप में लेखापरीक्षा करानी होती है. इसने लेखापरीक्षण के क्षेत्र को एक अस्थायी कॅरिअर क्षेत्र बना दिया है.
तीव्रता से परिवर्तित हो रही प्रौद्योगिकी और नए सॉफ्टवेयर पैकेजों में लेखापरीक्षकों का कार्य अत्यधिक सरल बना दिया है. रिकॉर्ड कीपिंग और डाटा प्रबंधन जो पहले बोझिल कार्य हुआ करता था अब समस्या मुक्त बन गया है. लेखापरीक्षक विशेष रूप से कॅरिअर परिवर्तन का लाभ ले सकते हैं अर्थात वे आंतरिक लेखापरीक्षण और लोक लेखाकरण के बीच या प्रबंधन लेखाकरण से आंतरिक लेखापरीक्षण में कॅरिअर बदल सकते हैं. आंतरिक लेखापरीक्षक उच्च स्तर के प्रबंधक बनने के लिए आवश्यक कौशल भी जानते हैं ऐसा वे अपने कार्य, व्यवसाय इकाइयों के आंतरिक नियंत्रण की समीक्षा द्वारा कर सकते हैं.
प्रारंभ में अधिकांश लेखापरीक्षक किसी प्रतिष्ठित लेखापरीक्षक के पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं. अनुभव प्राप्त करने के बाद वे स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं.
एक अर्हता प्राप्त लेखापरीक्षक के पास सरकारी सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में कार्य ग्रहण करने या निजी क्षेत्र अथवा कार्पोरेट क्षेत्र में आकर्षक कार्य स्वीकार करने के विकल्प होते हैं. कुछ लेखापरीक्षक कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में अध्यापन स्टाफ के रूप में कार्य करते हैं. लेखापरीक्षण व्यवसायी स्व-रोज़गार वाले भी हो सकते हैं और विशेष ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं अर्थात लेखापरीक्षण व्यवसायियों की वास्तव में प्रत्येक कंपनी, गैर-लाभकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों में आवश्यकता होती है. बड़ी फर्मों में सेवारत लेखापरीक्षक किसी संगठन की वित्तीय स्थिति के लिए जिम्मेदार होते हैं. गैर-लाभकारी संगठन भी निरंतर शोधक्षमता के लिए लेखापरीक्षकों पर अत्यधिक निर्भर होते हैं.
भारत में लेखपरीक्षकों को निम्नलिखित रूप में कॅरिअर के अनेक अवसर हैं :-
*आंतरिक लेखापरीक्षक
*बाह्य लेखापरीक्षक
*सरकरी लेखापरीक्षक
*न्यायिक लेखापरीक्षक
विनिर्माण क्षेत्र, बीमा कंपनियों, बैंकिंग क्षेत्र, पिक्यूनियरी संस्थाओं, कार्पोरेट, वित्तीय फर्मों, सरकारी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र, अध्यापन स्टाफ, गैर-लाभकारी संगठन एवं सरकारी एंजेसी आदि में ऐसे कार्य उपलब्ध होते हैं. अनेक लेखापरीक्षक अपनी निजी प्रैक्टिस करते हैं.
भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा (आईए एवं एएस) एक भारतीय केन्द्रीय सरकारी सेवा, किसी भी अधिशासी प्राधिकरण के नियंत्रण से मुक्त है, जो भारत के महानियंत्रक एवं लेखापरीक्षक के अधीन कार्यरत है. भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा के अधिकारी भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग में एक लेखा परीक्षा प्रबंध के क्षमता में कार्य करते हैं. आईए एवं एएस, केन्द्र एवं राज्य सरकारों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के लेखापरीक्षा करने और राज्य सरकारों के लेखा के रखरखाव के लिए जिम्मेदार है. इसकी भूमिका यूएस जीएओ और नेशनल ऑडिट ऑफिस (यूनाइटेड किंगडम) के समतुल्य है.
सेवाएं केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों तथा विभाग के मुख्यालयों से संबंधित लेखाकरण एवं लेखा परीक्षा के मामलों को देखने वाले अधिकारियों के बीच विभाजित की जा सकती हैं. राज्य लेखा एवं लेखापरीक्षा कार्यालय के अध्यक्ष महालेखाकार या प्रधान महालेखाकार होते हैं. कार्य रूप में वे समकक्ष होते हैं, केवल पदनाम ही भिन्न होते हैं. डिप्टी सीएजी सेवा में उच्चतम रैंक प्राप्त अधिकारी होते हैं.
प्रशिक्षण के बाद अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को सहायक महालेखाकार या सहायक निदेशक - एक कनिष्ठ ग्रेड समूह में तैनात किया जा सकता है बाद में उन्हें उपमहालेखाकार या उपनिदेशक - एक वरिष्ठ समय मान में पदोन्न्नत किया जाता है. उनकी पदोन्नति के बाद वे वरिष्ठ उपमहालेखाकार या निदेशक बनते हैं. एजी/पीडी के रैंक से नीचे के सभी अधिकारी भी समूह अधिकारी कहे जाते हैं क्योंकि वे सामान्यत: कार्यालय में एक समूह के प्रभारी होते हैं.
संस्थान
*भारतीय चार्टरित लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) - 222.द्बष्ड्डद्ब.शह्म्द्द- आंतरिक लेखा परीक्षा में प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम चलाता है.
*आंतरिक लेखापरीक्षक संस्थान (आईआईए) - 222.द्बद्बड्डद्बठ्ठस्रद्बड्ड.शह्म्द्द.
*आंतरिक लेखापरीक्षक संस्थान प्रमाणित आंतरिक लेखापरीक्षक (सीआईए) पदनाम देता है और आईएसएसीए प्रमाणित सूचना प्रणाली लेखापरीक्षक (सीआईएसए) प्रमाणन देता है. सीआईएस योग्यता प्राप्त लेखापरीक्षकों को भारतीय रिज़र्व बैंक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, भारत के महानियंत्रक एवं लेखापरीक्षक द्वारा प्रणाली लेखा परीक्षा करने के लिए योग्यता प्राप्त रूप में मान्यता दी जाती है.
लेखापरीक्षकों को रखने वाली उच्च कार्पोरेट फर्में
*डिलॉइट
*प्राइस वाटर हाउस कूपर्स
*एर्नस्ट एंड यंग
*केपीएमजी
लेखा परीक्षण एक विकासशील क्षेत्र है, सरकारी विनियमों के सख्त होने के कारण किसी कंपनी के परिचालन के विवरण देखने के प्रति लगाव रखने वालों के लिए कार्यदायित्वों के आकर्षक विविध अवसर प्रदान करता है. यदि कंपनी प्रबंधन से संपर्क और विविध व्यवसायों तथा वित्तीय प्रक्रियाओं के विनियमन के प्रति आकर्षित हैं तो एक लेखापरीक्षक के रूप में कॅरिअर चुनने पर विचार करें.
(उषा अल्बुकर्क कॅरिअर्स स्मार्ट प्रा. लि. में निदेशक और निधि प्रसाद सीनियर काउंसलिंग साइकोलोजिस्ट हैं. ई-मेल: careerssmartonline@gmail.com) व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं.
चित्र: गूगल के सौजन्य से