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Issue no 37, 11 -17 December 2021

सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2021  सामान्य अध्ययन-I की तैयारी

एस बी सिंह

यू  पीएससी ने 29 अक्टूबर, 2021 को प्रारंंभिक परीक्षा परिणाम प्रकाशित करने के बाद आईएएस मुख्य परीक्षा कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य परीक्षा 7 जनवरी, 2022 से शुरू होगी और 16 जनवरी को समाप्त होगी. उपलब्ध सीमित समय में, उम्मीदवारों को अपनी तैयारी तेज करने की आवश्यकता है. इस लेख में, मुख्य परीक्षा के जीएस पेपर-ढ्ढ पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया गया है. एक स्मार्ट रणनीति के बिना, इस परीक्षा में अपने प्रदर्शन को अधिकतम करना असंभव है, चाहे आपने कितनी भी मेहनत की हो या कितना भी अध्ययन किया हो.

व्यवहार में, मुख्य परीक्षा की तैयारी वास्तव में पूरी तैयारी के बारे में नहीं है; यह पर्याप्त तैयारी के बारे में अधिक है. यदि कोई पाठ्यक्रम को शाब्दिक रूप से लेता है, तो यह एक विशाल महासागर को पार करने जैसा मुश्किल है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि पाठ्यक्रम में निहित विषयों को दिमाग के प्रयोग के साथ तैयार किया जाए और ऐसे सबसे संभावित क्षेत्रों के करीब रहें जहां से प्रश्न पूछे जा सकते हैं. साथ ही, पाठ्यक्रम के किसी भी भाग की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पाठ्यक्रम के हर क्षेत्र से प्रश्न पूछे जाते हैं. हालांकि, किसी विशेष पेपर में उनके महत्व के अनुपात में प्रश्नों का जोर और संख्या स्वाभाविक रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होगी. उदाहरण के लिए, जीएस पेपर एक में, तीन क्षेत्र हैं जैसे; इतिहास, भूगोल और समाज. इन क्षेत्रों को यूपीएससी द्वारा विषयों की कवरेज के संदर्भ में समझाया गया है. इस प्रकार, इतिहास आधुनिक भारत, उत्तर-आधुनिक भारत, कला और संस्कृति और विश्व इतिहास को कवर करेगा. पुन:, आधुनिक भारत में या विश्व इतिहास में क्या शामिल किया जाएगा, यह स्पष्ट रूप से जीएस पेपर-ढ्ढ के पाठ्यक्रम में वर्णित किया गया है. इससे काम आसान हो जाता है, लेकिन सटीक तैयारी के लिए पाठ्यक्रम को और समझने की जरूरत होती है. यहां पर इसी पाठ्यक्रम को समझाने का प्रयास किया गया है.

इतिहास

यह जीएस पेपर-ढ्ढ पाठ्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा है. आधुनिक भारत, उत्तर-आधुनिक भारत, कला और संस्कृति और विश्व इतिहास को मिलाकर, कवर करने के लिए यह एक विशाल क्षेत्र है. कुल बीस प्रश्नों में से कम से कम सात से आठ प्रश्न अकेले इसी भाग से पूछे जाते हैं. दूसरे शब्दों में, यह पूरे पाठ्यक्रम के एक-तिहाई से अधिक भाग को कवर करता है और इसलिए, इसे उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

आधुनिक भारत : इसके लिए 1857-1947 के बीच की घटनाओं की अच्छी समझ की आवश्यकता है. इसमें निम्नलिखित क्षेत्रों को तैयार करने की आवश्यकता है :

आंदोलन : आदिवासी, किसान, निचली जाति और ट्रेड यूनियन आंदोलन. उनकी शिकायतें, विरोध के रूप, औपनिवेशिक सरकार द्वारा ऐसे आंदोलनों पर प्रतिक्रिया और अनुक्रिया, इन आंदोलनों की नेतृत्व शैली को कवर किया जाना चाहिए. सामाजिक-धार्मिक आंदोलनों, उनकी प्रकृति और राजा राममोहन राय, एनी बेसेंट, पंडिता रमाबाई, आदि जैसे समाज सुधारकों के प्रोफाइल पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए.

औपनिवेशिक नीतियां : सामाजिक सुधारों पर नीतियां, प्रशासनिक नीतियां, कृषि नीतियां, औद्योगिक नीतियां, सिविल सेवाएं, शैक्षिक नीतियां, प्रेस नीतियां.

आधुनिक भारत के निर्माता : सभी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं और उनके विचारों और दर्शन को इस भाग में तैयार किया जाना चाहिए. इसके अलावा, आपको महत्वपूर्ण गवर्नर-जनरल और उनके योगदान के बारे में भी ज्ञान होना चाहिए. उदाहरण के लिए, पिछले वर्षों में डलहौजी और कर्जन पर प्रश्न पूछे जा चुके हैं. कवर करने के लिए महत्वपूर्ण रिपन, मिंटो, इरविन, वेवेल और माउंटबेटन हैं.

राष्ट्रीय आंदोलन : कारण, प्रकृति, 1857 के विद्रोह के परिणाम, कांग्रेस का गठन, नरमपंथी बनाम चरमपंथी, क्रांतिकारी आतंकवाद, गांधीवादी चरण: असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, भारत को सत्ता का हस्तांतरण, विभाजन.

(पुस्तकें : 1. बिपन चंद्र : स्वतंत्रता के लिए भारत का संघर्ष 2. ए आर देसाई : भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि 3. आर सी प्रधान : राज से स्वराज)

उत्तर आधुनिक भारत : इस भाग में आमतौर पर एक या दो प्रश्न पूछे जाते हैं. स्वतंत्रता के बाद आई चुनौतियों और विकास की जानकारी होनी चाहिए. उदाहरण के लिए, भूमि सुधार, हरित क्रांति, भारतीय राज्यों का एकीकरण, भाषाई पुनर्गठन, चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध, कोरियाई संकट, स्वेज संकट, आदि जैसे अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत का रुख, अर्थव्यवस्था में समाजवाद और विदेश नीति, संस्था और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया। (पुस्तकें: 1. बिपन चंद्र : इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस 2. पॉल आर ब्रास : पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस 3. एनसीईआरटी : पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस)

कला और संस्कृति : इस पाठ्यक्रम के दायरे को पूछे जाने वाले प्रश्नों की श्रेणी निर्धारित करने के संदर्भ में बढ़ाया गया है. इसलिए, पारंपरिक कला रूप का सिर्फ एक पारंपरिक पठन पर्याप्त नहीं होगा. प्राचीन काल से ही भारतीय परंपरा के विकास की संकल्पना करनी चाहिए. ऐसा इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में वर्णित सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान से पढ़कर किया जा सकता है. (पुस्तकें : 1. .एल. बाशम : द वंडर दैट वाज़ इंडिया 2. स्टीफन हे : भारतीय परंपरा के स्रोत 3. एनसीईआरटी : भारतीय कला - एक परिचय 4. एसएए रिज़वी : द वंडर दैट वाज़ इंडिया, वॉल्यूम II)

विश्व इतिहास : यद्यपि इस खंड का निर्धारित पाठ्यक्रम विस्तृत है, किंतु पिछले कुछ वर्षों में इस भाग से केवल एक ही प्रश्न पूछा जा रहा है. इसलिए, आप विश्व इतिहास के कुछ विषयों को चुनने में चयनात्मक हो सकते हैं और कम से कम एक प्रश्न आने की उम्मीद कर सकते हैं. दो विश्व युद्ध, रूसी, फ्रांसीसी और चीनी क्रांतियां, औपनिवेशिक संघर्ष और उपनिवेशवाद के बाद का एकीकरण, ऐसे विषय हैं जिन पर सभी  को ध्यान देना चाहिए. (पुस्तकें: 1. एनसीईआरटी : वर्ल्ड हिस्ट्री 2. एल मुखर्जी: ए हिस्ट्री ऑफ यूरोप 3. एल मुखर्जी : ए हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड. 4. अर्जुन देव: हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड)

भूगोल

इतिहास के बाद, भूगोल पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें भौतिकीय भूगोल, आर्थिक और सामाजिक भूगोल शामिल हैं. कृषि, जलवायु परिवर्तन, उद्योग, वन, बाढ़, मरुस्थलीकरण, वायु, जल प्रदूषण आदि जैसे गतिशील पहलुओं पर बल दिया जाता है. इसलिए, भूगोल पर सभी एनसीईआरटी पुस्तकों का एक बुनियादी अध्ययन आवश्यक है. इसके अलावा, बाढ़, गर्मी, चक्रवात आदि जैसे पहलुओं पर संसूचित लेख के लिए नियमित रूप से समाचार पत्रों को पढ़ना चाहिए. इस वर्ष के लिए, चेन्नई में बाढ़ विषय पर एक प्रश्न हो सकता है. इसी तरह, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों में चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है. उन्हें पैदा करने वाले कारक, शमन उपाय आदि के बारे में पूछा जा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण है वायु प्रदूषण का विषय. इस वर्ष पूरा उत्तर भारत अत्यधिक प्रदूषित वातावरण से घिरा हुआ है. विशेष रूप से, दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र एक गैस चैंबर में बदल गया जो स्कूलों, सरकारी कार्यालयों, निर्माण गतिविधियों आदि को प्रभावित कर रहा है. प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों कारक इसका कारण हैं. इसलिए, इस वर्ष इस विषय पर प्रश्न की सबसे अधिक संभावना है. जल तनाव एक अन्य क्षेत्र है जिसे तैयार करना महत्वपूर्ण है. भारत एक अत्यधिक जल-तनावग्रस्त देश है. जलवायु परिवर्तन इसे और बढ़ा रहा है. इसलिए, इस मुद्दे का अच्छा ज्ञान वांछनीय है. यूके के ग्लासगो में आयोजित सीओपी 26 में भारत की भागीदारी को देखते हुए, कोयले और जंगल को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के भारत के रुख की जांच की जानी चाहिए क्योंकि इस पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं. भारत ने कोयले को पूरी तरह चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध क्यों नहीं किया है? आने वाले दशकों में भारत की कोयले पर निर्भर मजबूरियों की पृष्ठभूमि में इसे अच्छी तरह से समझने की जरूरत है. इसी तरह, 2030 तक वनों की कटाई को पूरी तरह से रोकने के लिए राष्ट्रों के सौ से अधिक गठबंधन में शामिल होने से भारत के इनकार का बचाव अच्छे तर्क और ठोस तर्क देकर किया जाना चाहिए. भौगोलिक घटना, जिसे 'हीट डोम्सÓ के रूप में जाना जाता है, जिसने इस वर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भीषण गर्मी की स्थिति पैदा की है पर्याप्त ध्यान देने योग्य है. (पुस्तकें: 1. भूगोल की एनसीईआरटी पुस्तकें, 11वीं और 12वीं कक्षा 2. गोह चेह लिओंग: सर्टिफिकेट फिजिकल एंड इकोनॉमिक ज्योग्राफी).

समाज

इस भाग में, भारतीय समाज की विविधता, गरीबी, जनसंख्या, महिला सशक्तिकरण, शहरीकरण, धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता, और वैश्वीकरण से संबंधित मुद्दे फोकस क्षेत्र हैं. इन विषयों में वैश्वीकरण एक ऐसा विषय है जिस पर हमेशा एक प्रश्न आता है. दुर्भाग्य से, अधिकांश उम्मीदवार पाठ्यक्रम के इस भाग की उपेक्षा करते हैं. समाज पर पाठ्यक्रम में निर्धारित विभिन्न क्षेत्रों के पर्याप्त ज्ञान के बिना, विशिष्ट उत्तर तैयार नहीं किए जा सकते हैं. इसलिए, जरूरत इस बात की है कि महिलाओं, गरीबी, आबादी पर सरकारी स्रोतों, यानी संबंधित मंत्रालयों की रिपोर्ट से मुद्दों को उठाया जाए और इन मुद्दों को हल करने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों पर ध्यान दिया जाए. समाचार पत्र भी क्षेत्र के विशेषज्ञों के माध्यम से सामाजिक विषयों को भी कवर करते हैं, और समाचार पत्रों को नियमित रूप से पढ़ने से भी मदद मिल सकती है.

 

इस वर्ष की परीक्षा की दृष्टि से, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 5 (एनएफएचएस 5) की हाल ही में प्रकाशित सर्वेक्षण रिपोर्ट एक दिलचस्प दस्तावेज है जो जनसंख्या प्रवृत्तियों, प्रजनन दर, पोषण आदि के बारे में बहुत कुछ बताता है. भारतीय समाज के लिए रिपोर्ट और इसके प्रभावों को समझे बिना आप परीक्षा हॉल में नहीं जा सकते हैं. साथ ही, महामारी बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को प्रभावित कर रही है. यही हाल महिलाओं का भी है. महामारी के दौरान बच्चों की तस्करी में वृद्धि दर्ज की गई है. उनमें से हजारों बच्चे अनाथ हो गए हैं. ये वास्तविक सामाजिक मुद्दे हैं जिनका भारत वर्तमान में सामना कर रहा है. आपको ऐसे विषयों से भी जुड़ना चाहिए. (पुस्तकें :1. एनसीईआरटी : भारतीय समाज 2. विनीता पांडे: भारतीय समाज और संस्कृति).

प्रश्नों का अनुमान कैसे लगाएं : ऊपर बताए गए क्षेत्रवार विषय सबसे अच्छी तरह से तैयार किए जा सकते हैं आप उपयुक्त प्रामाणिक स्रोत ढूंढ़ सकते हैं और यूपीएससी प्रकार के प्रश्नों को तैयार कर सकते हैं. जहां तक स्रोतों का संबंध है, पुस्तकों, समाचार पत्रों, सरकारी रिपोर्टों जैसे मूल स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए. ऑनलाइन और कोचिंग बाजारों में संकलित सामग्री की बाढ़ से बचें, क्योंकि मुद्दों की गहन, वैचारिक समझ के बिना, आप संकलित सामग्री के आधार पर एक अच्छा उत्तर तैयार नहीं कर सकते. मूल स्रोतों को पढ़ना बहुत बेहतर है क्योंकि यह आपको विषय को उसके सभी आयामों में समझने में मदद करता है. प्रश्न तैयार करने के लिए, पिछले वर्षों के प्रश्नों से एक उदाहरण लें. एक बार जब आप सामान्य प्रश्नों को तैयार कर लेते हैं, तो उनके उत्तरों की एक अस्थायी संरचना बनाएं. फिर, उस संरचना के आधार पर समाधान लिखने का प्रयास करें. यह आपके उत्तर लेखन कौशल में निखार लाएगा. याद रखें, जब तक आप पहले से उत्तर लिखने का अभ्यास नहीं करेंगे, आपके उत्तर अपरिपक्व रहेंगे. इसलिए, कभी भी अपने उत्तर पहली बार केवल परीक्षा हॉल में लिखने का लक्ष्य न रखें. उनका पहले से अभ्यास करें.

(एस बी सिंह शिक्षाविद और आईएएस मेंटोर हैं. उनसे  sb_singh2003@yahoo.com पर संपर्क किया जा सकता है)

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