नौकरी फोकस


Volume-32, Dated 4-10 November, 2017

सामाजिक कार्य में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

  
युवा व्यक्ति अपने लिए सही कॅरिअर खोजने के बारे में हमेशा चिंतित रहते हैं.
तथापि, इस सही कॅरिअर का निर्धारण करना कोई आसान कार्य नहीं है. कुछ मामलों में व्यक्ति अपने कॅरिअर लक्ष्यों के बारे में स्पष्ट नहीं होते हैं. कुछ अन्य मामलों में उनके समकक्ष उपलब्ध कॅरिअर विकल्पों के बारे में सूचना का अभाव होता है. सामाजिक कार्य एक ऐसा क्षेत्र है जिसके बारे में जागरूकता कम है. कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं जो यह सोचते हैं कि सामाजिक कार्य समाज के प्रति ऐसी सेवा है जिसे लोग अपने फालतू समय में करते हैं. बहुत कम लोगों, विशेष रूप से छात्रों को यह पता है कि सामाजिक कार्य भी कॅरिअर का एक विषय है और यह एक पूर्णकालिक कॅरिअर बन सकता है. कई कारणों से पिछले कुछ वर्षों से इस कॅरिअर की मांग और संभावना बढ़ रही है.
सामाजिक कार्य सामाजिकी से अलग है. ये दोनों अध्ययन की स्वतंत्र विधाएं हैं. तथापि कुछ विषय इन दोनों विधाओं के लिए समान हो सकते हैं.
अध्ययन/प्रशिक्षण के विषय :-
सामाजिक कार्य के अध्ययन का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक मामलों की व्यापक समझ का विकास करने पर होता है. इस विधा के छात्रों को, व्यक्तियों एवं उनके परिवेश के बीच सामान्य तथा जटिल संव्यवहार से अवगत कराया जाता है. सामाजिक कार्य के अंतर्गत पढ़ाए जाने वाले विषयों में मानव मनोविज्ञान, संचार, विकास, शारीरिक, मानसिक और सामुदायिक स्वास्थ्य, सामाजिक नीति, गैर-सरकारी तथा स्वयंसेवी संगठनों का प्रबंधन आदि शामिल होते हैं. पाठ्यक्रम  में अत्यधिक क्षेत्रगत कार्य निहित होता है जो छात्रों को यह ज्ञान देता है जो उन्हें क्षेत्र में करना होता है. प्रकृति से सामाजिक कार्य एक व्यावसायिक विधा है जहां अध्यापन अभ्यास द्वारा कराया जाता है.
उपलब्ध पाठ्यक्रम :
व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकत्र्ताओं की हमेशा मांग रहती है. इस मांग को पूरा करने के लिए कई विश्वविद्यालय वर्षों पहले इस विषय में अध्ययन पाठ्यक्रम प्रारंभ कर चुके हैं और कुछ विश्वविद्यालयों ने यह पाठ्यक्रम हाल ही में प्रारंभ किया है. कुछ संस्थाओं में सामाजिक कार्य स्नातक स्तर पर एक विषय के रूप में चलाया जाता है. पाठ्यक्रम की अवधि 3 वर्ष होती है. कुछ मामलों में, इस विषय में स्नातक डिग्री करके सामाजिक कार्य में रोजगार प्राप्त करना संभव हो सकता है. तथापि, एक अच्छा कॅरिअर बनाने और कॅरिअर की उन्नति सुनिश्चित करने के लिए सलाह दी जाती है कि मनोविज्ञान आदि जैसे अनेक अन्य विषयों की तरह ही इस विषय में भी स्नातकोत्तर योग्यता प्राप्त की जाए. सामाजिक  कार्य में ऐसी स्नातकोत्तर योग्यताएं सामान्यत: दो विभिन्न पारिभाषिक शब्दावली के साथ आती हैं. टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान एक मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय जैसे शैक्षिक निकाय सामाजिक कार्य में एम.ए. चलाते हैं, जबकि अधिकांश विश्वविद्यालयों के लिए यह सामाजिक कार्य में मास्टर, संक्षिप्त रूप में एमएसडब्ल्यू के रूप में प्रसिद्ध, की डिग्री होती है.
कोई भी स्नातक उक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकता है. अधिकांश मामलों में स्नातक स्तर पर सामाजिक कार्य का अध्ययन करना आवश्यक नहीं होता है. कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश मैरिट के आधार पर सीधे दिया जाता है. कुछ संस्थान, प्रवेश लिखित परीक्षा और/या साक्षात्कार वाली चयन प्रक्रिया के आधार पर देते हैं. ऐसी परीक्षाओं का उद्देश्य, पाठ्यक्रम के लिए उम्मीदवारों की अभिरुचि और उपयुक्तता को समझना होता है.
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम दो वर्ष की अवधि का होता है, जिसमें उम्मीदवार उपलब्ध विशेषज्ञाओं में से किसी विशेषज्ञा को चुन सकता है. कुछ सामान्य विशेषज्ञता क्षेत्र निम्नानुसार हैं:-
*अपराध विज्ञान एवं न्याय
*सामुदायिक स्वास्थ्य
*मानसिक स्वास्थ्य
*शहरी विकास
*मनश्चिकित्सा सामाजिक कार्य
*सामुदायिक विकास
*सुधारात्मक प्रशासन
*आदिवासी अध्ययन एवं कार्य
*दिव्यांगता अध्ययन एवं कार्य
*जीविका एवं नवोद्दमता
*बाल एवं परिवार अध्ययन
*वैविध्य एवं समावेशन
 विशेषज्ञताओं के संबंध में कोई मानकीकरण नहीं है. विभिन्न संस्थान विभिन्न विशेषज्ञताएं करा सकते हैं. किसी विशेष विशेषज्ञता तलाशने वालों को पहले जांच कर लेनी चाहिए और केवल उस संस्थान को आवेदन करना चाहिए जहां वह विशेषज्ञता उपलब्ध होती है.
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (सामाजिक कार्य में एम.ए./एम.एस.डब्ल्यू.) कराने वाले संस्थानों की एक उदाहरण सूची नीचे दी गई है:-
*टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टी.आई.एस.एस.)- कैंपस मुंबई, तुल्जापुर, गुवाहाटी और हैदराबाद में है.
*दिल्ली सामाजिक कार्य विद्यालय (डी.एस.एस.डब्ल्यू.)
*मद्रास सामाजिक कार्य विद्यालय, चेन्नै
*राजगिरि सामाजिक कार्य विद्यालय, कोच्चि
*सामाजिक कार्य संकाय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
*इंदौर सामाजिक कार्य विद्यालय (आई.एस.एस.डब्ल्यू.)
*गुलबर्ग विश्वविद्यालय, कनार्टक
*अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
*उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
*बंगलौर विश्वविद्यालय
*कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़
*एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली
*कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, हरियाणा
*कालीकट विश्वविद्यालय, केरल
*मेंगलौर विश्वविद्यालय
*मैसूर विश्वविद्यालय
*मदुरै कामराज विश्वविद्यालय
*अमरावती विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र
*विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांति निकेतन
*पुणे विश्वविद्यालय
*लोयोला सामाजिक विज्ञान महाविद्यालय, तिरुवनंतपुरम
उक्त पाठ्यक्रमों में से, टीआईएसएस द्वारा संचालित पाठ्यक्रम अधिक मांग में हंै. पिछले वर्षों के आंकड़े दर्शाते हैं कि पूरे देश में इसके परिसरों में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपलब्ध लगभग 1250 सीटों के लिए लगभग, 50,000 उम्मीदवार उपस्थित हुए.
सामाजिक कार्य, अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं देता है, जो स्नातकोत्तर योग्यता के बाद किया जा सकता है. टी.आई.एस.एस. में सामाजिक कार्य में एक एकीकृत एम.फिल-पीएच.डी कार्यक्रम है. स्नातकोतर योग्यता के बाद कई अन्य विश्वविद्यालयों में पीएच.डी की जा सकती है.
कार्य अवसर :
किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता के कार्यों में सामुदायिक कार्य, स्वयंसेवी, फंडरेजर, संचार व्यवसायी अनुसंधानकत्र्ता कार्य, विभिन्न संचार मचों के माध्यम से जन भागीदारी को बढ़ाने, सामाजिक मामलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, संबद्ध विषय विकास आदि कार्य शामिल होंगे.
एक कॅरिअर के रूप में सामाजिक कार्य उन व्यक्तियों के लिए नहीं है जो विशाल धनराशि एवं पूर्वापेक्षा के साथ किसी लुभावने कॅरिअर में जाना चाहते हैं. सामाजिक कार्य से जुड़े किसी कॅरिअर के प्रारंभिक चरण में वेतन कम हो सकता है. अनुभव और प्रमाणित टै्रक रिकॉर्ड के साथ ऐसे अग्रणी कॉर्पोरेट तथा प्रसिद्ध संगठनों के साथ कार्य करना संभव होगा जो आकर्षक वेतन देते हैं. ऐसे संगठनों में निम्नलिखित को शामिल किया जा सकता है:-
*अज़ीम पे्रमीजी फाउंडेशन
*इन्फोसिस फाउंडेशन
*ओक्सफाम
*एक्शन एड
*चाइल्ड रिलीफ एंड यू (क्राई)
*सेव द चिल्ड्रन
*बिल एंड बेलिंडा गेट्स फाउंडेशन
संयुक्त राष्ट्र की यूनिसेफ, यूएनडीपी जैसी विभिन्न एजेंसियां भी सामाजिक कार्य में अनुभवी व्यवसायियों को रोजग़ार पर रखती हैं. कई मामलों में ऐसी नियुक्तियां परियोजना आधारित और कई नियुक्तियां एक निश्चित अवधि की होती हैं.
वरीयत: कुछ अनुभव प्राप्त करने के बाद अपना निजी कार्य करने का अवसर भी लाभकारी हो सकता है. आप चुने हुए क्षेत्र में सलाहकार के रूप में कार्य कर सकते हैं, अनुसंधान कर सकते हैं या कोई पुनस्र्थापन केंद्र चला सकते हैं. अनुभव सामाजिक कार्य व्यवसायियों द्वारा गैर-सरकारी संगठन स्थापित किए जाने के भी कई उदारण हैं. ये संगठन अपनी निजी परियोजनाओं पर कार्य करते हैं तथा अन्य संगठनों द्वारा परिकल्पित विशेष परियोजनाओं के लिए भी कार्य कर सकते हैं.
कई मामलों में सरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजी संगठन मानव संसाधन कॅरिअर के लिए सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तरों पर विचार करते हैं. मानव संसाधन व्यवसायी के रूप में आपको महत्वपूर्ण मानव संसाधन क्षेत्र में या एक श्रमिक कल्याण अधिकारी के रूप में कार्य करना अपेक्षित होता है.
कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व :
सामाजिक कार्य में कॅरिअर के अवसर तलाशने वाले तथा अन्य व्यक्तियों के लिए भी कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) भी कुछ समय लाभदायी होगी. जैसा की यह शब्द संकेत करता है यह समाज के प्रति सेवा के लिए उत्तरदायी होता है. हम सभी जानते हैं कि कंपनियां अपने उन उत्पादों तथा सेवाओं से लाभ कमाती हैं जिन पर समाज अपनी धनराशि व्यय करता है. सामाजिक हितों का ध्यान रखने के लिए ऐसी कंपनियों का कुछ दायित्व होना अनिवार्य है. संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) ने सीएसआर की परिभाषा एक ऐसी प्रबंधन संकल्पना के रूप में की है जिसके द्वारा कंपनियां सामाजिक तथा पर्यावरणीय हितों का अपने व्यवसाय संचालन में एकीकरण करती हैं और अपने स्टेक होल्डर्स के साथ अन्योन्य कार्य करती हंै. यह एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा कोई कंपनी आर्थिक पर्यावरणीय और सामाजिक अत्यावश्यकताओं का एक संतुलन स्थापित करती है. हमारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार किसी वित्त वर्ष के दौरान देश में पांच सौ करोड़ रु. या अधिक के निवल मूल्य वाली या एक हजार करोड़ रु. या अधिक के टर्नओवर या पांच करोड़ रु. या अधिक के निवल लाभ वाली प्रत्येक कंपनी को अपने निदेशक बोर्ड के सदस्यों से एक कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व समिति गठित करनी होगी. ऐसी कंपनियों को अपने निवल लाभ की कम से कम 2 प्रतिशत राशि कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व परियोजनाओं पर व्यय करनी होगी.
इसे लागू करने के लिए कई संगठन सामाजिक कार्य में प्रशिक्षित व्यवसायियों को नियुक्त करते हैं. तथ्यात्मक रूप में यह आवश्यकता, सामाजिक कार्य में कॅरिअर अवसरों के लिए एक समर्थक बन कर सामने आई है. निजी क्षेत्र में टाटा स्टील और तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) जैसी कंपनियां समाज कल्याण कार्यों के लिए एक पर्याप्त बजट रखती हैं.
सहायक व्यक्तिगत विशेषता/गुण
सामाजिक कार्य में कॅरिअर उन व्यक्तियों  के लिए उपयुक्त होता है जो विश्व को रहने योग्य बेहतर स्थान बनाने में उच्च अभिरुचि रखते हैं. ऐसे कॅरिअर में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत विशेषताओं/गुणों में सहानुभूति, दृढ़-निश्चय, अनुकूलशीलता, अन्यों के हितों पर विचार करने की क्षमता, दृढ़ता आदि शामिल होती है. जिन व्यक्तियों के जीवन को आप सुधारना चाहते हैं, उनसे जुडऩे के लिए अंतर-वैयक्तिक कौशन होना अपेक्षित होता है. आपको अपना संचार संव्यवहार सामान्य और प्रभावी बनाना आना चाहिए. अत्यधिक जरूरतमंद लोगों की सहायता करके सकारात्मक परिवर्तन लाने की उमंग सामाजिक कार्य में कोई कॅरिअर चुनने की पे्ररणा शक्ति है.
(लेखक मुंबई में एक कॅरिअर सलाहकार हैं) ई-मेल: v2j25@yahoo.in
व्यक्त विचार निजी हैं.
चित्र : गूगल के सौजन्य से