नौकरी फोकस


Volume-38, 18-24 November, 2017

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विशेषज्ञ
अधिकारी के रूप में कॅरिअर

विजय प्रकाश श्रीवास्तव

 कई बार एक प्रश्न उठाया जाता है कि क्या किसी सामान्यज्ञ की तुलना में कोई विशेषज्ञ होना बेहतर है? इस प्रश्न का कोई सटीक उत्तर नहीं है. यह स्थितियों और अवसरों की उपलब्धता पर निर्भर है. जहां तक कोई कॅरिअर चुनने का संबंध है, सामान्यज्ञ को व्यापक विकल्प होते हैं. तथापि, सामान्यज्ञ के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले उम्मीदवारों की संख्या हमेशा अधिक होती है. विशेषज्ञ कार्य-पदों की संख्या कम होती है और ऐसे पदों के लिए आवेदन करने की योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी तुलनात्मक रूप से कम होते हैं. आप एक सामान्यज्ञ बना रहना चाहते हैं या एक विशेषज्ञत के रूप में आगे बढऩा चाहते हैं यह भी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है.
हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में रोज़गार तलाशने वालों की संख्या, उपलब्ध रोज़गार से कहीं अधिक है. ऐसी स्थिति में, अपनी पसंद का रोज़गार प्राप्त करना एक चुनौती बन गया है. तथापि, अपनी अभिवृत्ति की वस्तुनिष्ठ समझ, अपनी कॅरिअर-वरीयता के बारे में स्पष्ट धारणा तथा पर्याप्त तैयारी के साथ इस चुनौती को पूरा किया जा सकता है. प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए आपको यथार्थवादी होना होगा और पर्याप्त परिश्रम करना होगा.
बैंकिंग एक ऐसा उद्योग है जिसमें कर्मचारियों के रूप में व्यक्तियों की निरंतर मांग होती है. पिछले ५-६ वर्षों में देश में रोज़गार अवसरों की अधिकतम संख्या बैंकों से आई है. इस संबंध में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अग्रणी रहे हैं. हमारे देश में अनेक युवक कार्य सुरक्षा, उचित वेतन और लाभों तथा उन्नति के अवसरों जैसे स्पष्ट कारणों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों में कार्य की आकांक्षा रखते हैं.
रोज़गार तलाशने वाले अधिकांश व्यक्तियों के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लिपिकों और परिवीक्षाधीन अधिकारियों के पदों वाले माने जाते हैं. ये सामान्यज्ञ पद होते हैं, जो सभी विषयों के स्नातकों के लिए खुले होते हैं. यद्यपि, इन बैंकों में विशेषज्ञ के पद भी उपलब्ध होते हैं, किंतु इन पदों की संख्या सामान्य बैंकिंग पदों की तुलना में बहुत कम हो सकती है. ऐसी स्थितियां भी हो सकती हैं कि कोई व्यक्ति अपनी योग्यता के आधार पर सामान्यज्ञ और विशेषज्ञ-दोनों पदों के लिए हों, हाल ही के वर्षों के आंकड़ें दर्शाते हैं कि बी.ई. एवं बी.टेक जैसी डिग्री रखने वाले अर्हताप्राप्त इंजीनियरों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों में लिपिकों और परिवीक्षाधीन अधिकारियों के रूप में कार्य ग्रहण किया है, हालांकि, ऐसी योग्यताएं आपको विशेषज्ञ पदों के लिए भी पात्र बनाती हैं.
यदि आपने अपनी विश्वविद्यालय डिग्री के रूप में विशेषज्ञता प्राप्त कर ली है तो अब आप सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में संबंधित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिनके लिए बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान ने हाल ही में अधिसूचना जारी की है. आई.बी.पी.एस., सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों- जिनमें इलाहाबाद बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, सिंडिकेट बैंक, आंध्र बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया,इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कार्पोरेशन बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आई.डी.बी.आई. बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक तथा विजया बैंक शामिल हैं, में लिपिकों और अधिकारियों के एंट्री लेवल रिक्तियों को भरने के लिए केन्द्रीकृत भर्ती-प्रक्रिया संचालित करने वाला चयनित निकाय है. इन बैंकों को वर्तमान में निम्नलिखित श्रेणियों के विशेषज्ञ अधिकारियों की आवश्यकता है :-
कृषि क्षेत्र अधिकारी :-सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं को सभी प्रकार के कृषि कार्यकलापों को समर्थन देने का अधिदेश दिया गया है. इनमें प्रत्यक्ष, परोक्ष एवं हाई टेक कृषि शामिल हैं. ग्रामीण केन्द्रों में बैंक शाखाओं द्वारा वित्तपोषण के अधिकांश भाग में कृषि क्षेत्र को ऋण देना शामिल है. कृषि अधिकारी मुख्य रूप से किसानों और कृषि उद्यमियों की बैंकिंग आवश्यकताओं और प्रक्रिया संबंधी ऋण-प्रस्तावों के कार्यों को देखते हैं. उन्हें क्षेत्रों के दौरे करने तथाभूमि एवं भवनों आदि के रूप में वास्तविक सम्पत्ति का निरीक्षण कार्य तथा आवेदकों की ऋण आवश्यकताओं का निर्धारण करना होता है वे वसूली-प्रयासों में भी योगदान करते हैं. कुछ अनुभव प्राप्त करने के बाद उन्हें किसी ग्रामीण शाखा में शाखा प्रबंधक के रूप में तैनात किया जा सकता है.
कृषि अधिकारी के पद के लिए आवेदन करने के लिए आपको कृषि/बागवानी/पशु पालन/पशु चिकित्सा विज्ञान/डेयरी विज्ञान/मात्स्यिकी विज्ञान/ पेसिकल्चर/कृषि विपणन एवं कोऑपरेशन/कोऑपरेशन तथा बैंकिंग/कृषि वानिकी/वानिकी/कृषि जैव प्रौद्योगिकी/खाद्य विज्ञान/कृषि व्यवसाय प्रबंधन/खाद्य प्रौद्योगिकी/डेयरी प्रौद्योगिकी/कृषि इंजीनियरी आदि में से किसी विषय में ४ वर्षीय स्नातक डिग्रीधारी होना चाहिए.
सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी :-पिछले दशक के दौरान बैंकिंग क्षेत्र ने प्रौद्योगिकी को व्यापक पैमाने पर अंगीकार किया है. यदि आप किसी बैंक की शाखा में जाएं तो देखेंगे कि वहां लगभग प्रत्येक व्यक्ति कम्प्यूटर पर कार्य कर रहा है. मोटे-मोटे बड़े लेजर्स का स्थान डिजिटल फाइलों ने ले लिया है. कोर बैंकिंग प्लेटफार्मों की स्थापना से बैंक अपने कार्य-परिचालन को एकीकृत करने में सक्षम हुए हैं. अब निधियों को एक शाखा से दूसरी शाखा में तथा एक बैंक से दूसरे बैंक में इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्थानांतरित करना संभव हो गया है. बैंक, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग तथा डिजिटल बैंकिंग संव्यवहार के अन्य रूपों को लोकप्रिय बनाने के प्रत्येक प्रयास कर रहे हैं. बैंकों ने प्रौद्योगिक अवसंरचना में बड़ा निवेश किया है. इस अवसंरचना में डाटा-केन्द्र, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सूचना सुरक्षा और अन्य साधन शामिल हैं.
अर्हताप्राप्त सूचना प्रौद्योगिकी व्यवसायियों से ऐसी अवसंरचना का ध्यान रखने, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में कर्मचारियों की सहायता करने और उनका मार्गदर्शन करने तथा एक समर्थन कार्य के रूप में प्रौद्योगिकी से सुचारू बैंकिंग कार्य परिचालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा होती है.
सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी के पद के लिए, उम्मीदवारों को कम्प्यूटर विज्ञान/कम्प्यूटर अनुप्रयोग/ सूचना प्रौद्योगिकी/इलेक्ट्रॉनिकी/इलेक्ट्रॉनिकी एवं संचार/इलेक्ट्रॉनिकी एवं दूरसंचार/इलेक्ट्रॉनिकी तथा इंस्ट्रूमेंटेशन में बी.टेक. या बी.ई. (४ वर्षीय पाठ्यक्रम) अथवा इलेक्ट्रॉनिकी/इलेक्ट्रॉनिकी एवं दूरसंचार/ इलेक्ट्रॉनिकी एवं संचार/इलेक्ट्रॉनिकी और इंस्ट्रूमेंटेशन/ कम्प्यूटर विज्ञान/सूचना प्रौद्योगिकी/कम्प्यूटर अनुप्रयोग में स्नातकोत्तर डिग्रीधारी होना अपेक्षित है.
डी.ओ.ई.ए.सी.सी. बीलेवल उत्तीर्ण स्नातक भी पात्र माने जाते हैं. इंजीनियरी में डिप्लोमा होना इस पद के लिए पर्याप्त नहीं है.
मानव संसाधन/कार्मिक अधिकारी :-सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों में, उनके कार्य-परिचालन प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात किए जाते हैं. सभी यूनिटें (शाखाएं/प्रशासनिक कार्यालय) सुचारू रूप में कार्य कर रही हैं यह सुनिश्चित करने के लिए जनशक्ति नियोजन तथा मानव संसाधन विकास नीति होना जरूरी है. प्रत्येक प्रगतिशील संगठन की तरह, बैंकों को भी अपनी प्रगति और विकास के लिए उपयुक्त व्यवस्ािा-तंत्र के साथ अपने मानव संसाधन का सर्वोत्कृष्ट उपयेाग सुनिश्चित करना होता है. इस कार्य में मानव संसाधन या कार्मिक अधिकारी की भूमिका होती है. प्रत्येक बैंक का अपने मुख्यालय में और आंचलिक, जोनल या परिमंडल कार्यालय जैसे अन्य नियंत्रक कार्यालय में एक मानव संसाधन विभाग होता है. वहां तैनाती किए जाने पर मानव संसाधन अधिकारियों को एक या अधिक विभिन्न मा.स. कार्य जैसे भर्ती, पदोन्नति, स्थानांतरण एवं तैनाती, प्रतिपूति एवं लाभ, प्रशिक्षण तथा विकास, कर्मचारी संबंध, अनुशासनात्मक मामले और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली आदि कार्य देखने होते हैं.
मा.सं./कार्मिक अधिकारी के लिए पात्रता-मानदंड साधारण हैं. उम्मीदवार कार्मिक प्रबंधन/औद्योगिक संबंध/मा.सं./मा.सं. विकास/सामाजिक कार्य/श्रमिक विधि में स्नातकोत्तर डिग्री या दो वर्षीय पूर्णकालिक स्नातकोत्तर डिप्लोमाधारी होना चाहिए.
विधि स्नातक :बैंकिग व्यवसाय बैंकिंग की विधियों, नियमों, विनियमों और पद्धतियों पर कार्य करता है. बैंकों और उनके कार्य-परिचालन को विनियमित करने के लिए विधि में विभिन्न प्रावधान हैं. इनमें अन्यों के साथ-साथ परक्राम्प लिखित अधिनियम, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, दिवालियापन कोड शामिल हैं. विवाद के विभिन्न मामलों में बैंकों को मुकदमें आदि दर्ज करके विधिक सहारा लेना पड़ता है. इसके अतिरिक्त, विधिक निर्वचन की भी आवश्यकता होती है. बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि उनके सभी फार्म तथा प्रलेख विधि के प्रावधान के अनुसार हैं और वे उनके हित के हैं.
विधि अधिकारी कानूनी राय देने, प्रलेखों की ड्राफ्ंटग करने और सूचना का अधिकार अधिनियम के मामलों के निपटान कार्य में शामिल होते हैं. वे, विधिक मामलों में शाखाओं और वरिष्ठ प्रबंधकों का मार्गदर्शन भी करते हैं. विधि में स्नातक डिग्री (एल.एल.बी.) तथा बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में पंजीकरण होना विधि-अधिकारी के एंट्री लेवल पद के लिए निर्धारित मानदंड है.
विपणन अधिकारी :-सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वाणिज्यिक संस्थाएं होती हैं, इसीलिए उन्हें वाणिज्यिक बैंकों के रूप में माना जाता है. किसी भी अन्य वाणिज्यिक संगठन की तरह इन बैंकों को भी व्यवसाय विकास, लाभ तथा शेयर धारियों के मूल को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित करना होता है. इन प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए विपणन अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं. इनका कार्य मार्गदर्शन करना, व्यवसाय संघटन और बैंक के बजट प्राप्ति में सहायता करना है. विपणन अधिकारी विपणन योजना का विकास करने, विपणन नीति बनाने, विपणन अनुसंधान, संवर्धन तथा प्रचार करने आदि कार्यों में भी शामिल होते हैं. उनके कौशल तथा सेवाएं विपणन, अभियानों में अत्यधिक सहायता वाली होती हैं. विपणन अधिकारी अपने संगठन को व्यवसाय में उक्त प्रतिस्पर्धा में खड़ा रखने में पर्याप्त रूप में योगदान दे सकते हैं.
विपणन अधिकारी के पद के लिए उम्मीदवारों के पास दो वर्षीय पूर्णकालिक प्रबंधन डिग्री के साथ विपणन में विशेषज्ञता होनी चाहिए. इन विशेषज्ञताओं में एम.एम.एस. (विपणन), एम.बी.ए. (विपणन), पी.जी.डी.बी.ए./ पी.जी.डी.बी.एम./पी.जी.पी.एम./ पी.जी.डी.एम. आदि शामिल हैं.
राजभाषा अधिकारी :-हमारे संविधान की धारा ३४३(१) में निर्दिष्ट है कि हिंदी भारत संघ की राजभाषा होगी. तद्नुसार सभी केन्द्र सरकारी विभागों और उपक्रमों को अपने आंतरिक कार्य तथा अन्य पत्र-व्यवहार में हिंदी का प्रयोग करना अपेक्षित होता है. इन सभी निकायों को राजभाषा अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों को कार्यान्वित करना होता है. प्राय: हिंदी अधिकारी या राजभाषा अधिकारी को, संगठन एवं उसके कर्मचारियों द्वारा इन प्रावधानों को कार्यान्वित करने और हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में सहायता करने के लिए नियुक्त किया जाता है.
हिंदी अधिकारी के कार्यों में परिपत्रों, मैनुअल्स आदि का अनुवाद करना, प्रशिक्षण तथा प्रचार सामग्री के रूप में हिंदी विषय वस्तु तैयार करना, हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन करना, हिंदी प्रकाशनों को प्रकाशित करना, प्रशिक्षण सत्र संचालित करना आदि शामिल हैं. उन्हें आवधिकबैठकें संचालित करने और विभिन्न मंचों पर अपने संगठन का प्रतिनिधित्व करने के कार्य भी करने होते हैं.
हिंदी में स्नातकोत्तर डिग्री के साथ अंग्रेजी स्नातक स्तर पर एक विषय के रूप में होने पर आप हिंदी अधिकारी के पद के लिए पात्र होंगे. यदि आपके पास संस्कृत में मास्टर डिग्री होने के साथ अंग्रेजी तथा हिंदी डिग्री स्तर पर विषयों के रूप में रही हो तो आप इस पद के लिए पात्र हैं.
अपनी डिग्री पत्राचार या अंशकालिक पाठ्यक्रम के माध्यम से करने वाले व्यक्ति पात्र नहीं होते हैं.
चयन-प्रक्रिया :-
विशेषज्ञता वाले उक्त पदों के लिए चयन-प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं, यथा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार.
आई.टी. ऑफिसर, कृषि क्षेत्र अधिकारी, मा.सं. अधिकारी और विपणन अधिकारी के पद के लिए प्रारंभिक परीक्षा में अंग्रेजी भाषा, तर्क संगतता तथा मात्राात्मक अभिवृत्ति के प्रश्न होंगे, जबकि विधि अधिकारी और हिंदी अधिकारी के लिए अंग्रेजी भाषा, तर्क संगतता एवं बैंकिंग उद्योग के विशेष संदर्भ में सामान्य जानकारी के प्रश्न होंगे. कुल २ घंटों की अधिकतम समय अवधि में कुल १२५ प्रश्नों का उत्तर देना होगा. प्रारंभिक परीक्षा में अर्हताप्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा.
मुख्य परीक्षा का उद्देश्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में व्यावसायिक ज्ञान की परीक्षा (परख) करना है. हिंदी अधिकारी के पद के लिए परीक्षा वस्तुनिष्ठ एवं विषयनिष्ठ प्रश्नों के दो भागों में होगी और कुल समय-सीमा १ (एक) घंटे की होगी. अन्य पदों के लिए केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्नों वाली ४५ मिनट की परीक्षा ली जाएगी.
उक्त सभी परीक्षाएं ऑनलाइन पद्धति के माध्यम से ली जाएंगी.
साक्षात्कार के लिए अल्प सूची केवल मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर बनाई जाएगी.
तैयारी :-
प्रारंभिक परीक्षा में अर्हता प्राप्त करना अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है, जिसके बिना आप पर आगे की प्रक्रिया के लिए विचार नहीं किया जाएगा. आप अपनी तैयारी निम्नलिखित तरीके से कर सकते हैं:-
तर्कसंगतता और मात्रात्मक अभिवृत्ति परीक्षा के लिए :-
तर्कसंगतता के प्रश्न वर्बल स्टेटमेंट, डायग्राम, शृंखला आदि से संबंधित हो सकते हैं. मात्रात्मक अभिवृत्ति के प्रश्न अंकों तथा अंक गणित से जुड़े होंगे. दोनों विषयों के लिए प्रारंभ में आपको, यह समझने के लिए कि निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा जाए, उत्तर वाले नमूना प्रश्नों की तैयारी करनी चाहिए. उसके बाद मॉडल प्रश्नों को स्वयं हल करने के प्रयास करें और अपने उत्तरों की जांच करें. आपने जहां कहीं भी गलती की है उन प्रश्नों की पुन: तैयारी करें. जब आप अपनी तैयारी करना प्रारंभ करें आप प्रश्नों के समाधान के लिए जितना समय आवश्यक समझे लगा सकते हैं. किंतु बाद के चरण में आप मॉडल प्रश्न-पत्रों का उत्तर निर्धारित समय-सीमा में ही दें. परिशुद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी समयबद्धता. ऐसी परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए गहन अभ्यास करना अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है.
सामान्य जानकारी की परीक्षा के लिए :-
यहां आपकी तैयारी के लिए सामान्य ज्ञान की कोई अच्छी पुस्तक आपके लिए सहायक होगी. समाचारपत्रों को नियमित रूप से पढऩा और वर्तमान घटनाओं पर ध्यान देना भी आवश्यक होगा. बैंकिंग और वित्त से संबंधित विकास की जानकारी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. विमुद्रीकरण, विदेश मुद्रा रिजव्र्स, जी.डी.पी. विकास दर, सामग्री तथा सेवा कर एवं अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों/पहलुओं से संबंधित प्रश्न की आशा रखें. अपनी तैयारी के दौरान इनका अवलोकन करने के लिए महत्वपूर्ण विकास को ध्यान में रखने के लिए इन्हें एक डायरी में लिख लें.
व्यावसायिक ज्ञान की परीक्षा के लिए :-
इस परीक्षा के प्रश्न विधि, विपणन, मानव संसाधन आदि जैसे आपकी विशेषज्ञता क्षेत्रों से होंगे. बुनियादी संकल्पनाओं के अपने ज्ञान (उदाहरण के लिए विपणन के मामले में बाजार सेगमेंट या मानव संसाधन के मामले में निष्पादन-मूल्यांकन) को ताजा कर लें. हिंदी अधिकारी के पद के लिए उम्मीदवार शब्दावली, शब्दों के अर्थ एवं अनुवाद पर ध्यान केन्द्रित करें.
बाजार में गाइड तथा वर्कबुक्स उपलब्ध होती हैं. यदि आप ऑनलाइन तलाश करें तो आपको अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त संसाधन मिलेंगे और ये सभी संसाधन नि:शुल्क प्राप्त कर सकते हैं. ऐसी सामग्रियों का भरपूर उपयोग करें. ऐसे किसी या अनेक व्यक्तियों के अनुभव से सीख लेना अत्यधिक उपयोगी होगा जो पिछले वर्षों में इन परीक्षाओं में बैठ चुके हैं.
भले ही आप किसी बैंक में विशेषज्ञ अधिकारी के रूप में अपना कॅरिअर प्रारंभ करें, आप बैंक विशेष में प्रचलित शर्तों के अनुसार सामान्य बैंकिंग में जा सकते हैं. ऐसा आप उपयुक्त समय पर अपनी पसंद के अनुसार कर सकते हैं.
(लेखक मुंबई में एक बैंक अधिकारी और कॅरिअर कॉउंसलर है. ई-मेल : v2j252yahoo.com
लेख में व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.
चित्र: गूगल के सौजन्य से