नौकरी फोकस


Volume-35, 25 November-1 December, 2017

 
रोजग़ार के अवसर बढ़ाने के लिए बुनियादी
ढांचा क्षेत्र में निवेश

डॉ. राजेन्द्र मेहता और
सुश्री महालक्ष्मी विश्वनाथ

बुनियादी ढांचा क्षेत्र एक प्रमुख क्षेत्र है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास को गति प्रदान करता है. भारत की अर्थव्यवस्था अत्यंत विशाल है और इसका आकार निरंतर बढ़ रहा है. अनुमान है कि 2050 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. स्थायी आर्थिक विकास के लिए बुनियादी सुविधाओं का महत्व सर्वविदित है. अपर्याप्त और अक्षम ढांचे के कारण आने वाली ऊंची कारोबार लागत अर्थव्यवस्था को पूर्ण वृद्धि क्षमता हासिल करने से रोक सकती है, भले ही, अन्य मोर्चों पर कितनी ही प्रगति क्यों न हो जाए. परिवहन, विद्युत और संचार सहित भौतिक ढांचा अपने पश्चवर्ती और अग्रवर्ती संपर्कों के साथ विकास, जलापूर्ति, स्वच्छता, जल-मल निपटान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली प्राथमिक सेवाओं सहित सामाजिक ढांचे का विस्तार करने में मदद करता है. ढांचागत निष्पादन अर्थव्यवस्था के कार्य निष्पादन को व्यक्त करता है. ढांचागत उद्योगों का मूल्यांकन 6 महत्वपूर्ण सुविधाओं और मूलभूत उद्योगों (यानी विद्युत, खनिज तेल, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, कोयला, इस्पात और सीमेंट) के जरिए किया जाता है.
भारत सरकार ने राजकीय विनियमों का उदारीकरण किया है और बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहित करने के लिए एक सोची समझी कार्यनीति अपनाई है, जिससे सभी के लिए व्यापक अवसर पैदा हुए हैं. लगभग सभी बुनियादी ढांचा क्षेत्र उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं, जिनमें सडक़ और राजमार्ग बंदरगाह और हवाई अड्डे, रेलवे और विद्युत विशेष रूप से उज्ज्वल क्षेत्र हैं, जिनमें चौंकाने वाला निवेश किया गया है. भारत के सडक़ क्षेत्र में नई परियोजनाएं अवार्ड किए जाने और अवरुद्ध परिसंपत्तियों की मात्रा कम होने को देखते हुए, इस क्षेत्र की संभावनाएं विशेष रूप से उज्ज्वल हो गई हैं. नियामक बदलाव और अधिक सरकारी खर्च की बदौलत पिछले  3 वर्षों में इस क्षेत्र को बहाल करने में मदद मिली है. मई 2014 में सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने, विवादों का शीघ्र निपटान करने, अंतिम छोर तक वित्त व्यवस्था करने तथा कंपनियों को बाहर निकलने का मार्ग आसान बनाने जैसे अनेक उपाय किए हैं, जिनसे इस क्षेत्र को व्यापक मदद मिली है. सरकार द्वारा सडक़ क्षेत्र में शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दिए जाने से कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ भागीदारी कायम की है, जिससे इस क्षेत्र के विकास में भारी वृद्धि हुई है. भारतीय बुनियादी ढांचा क्षेत्र आने वाले वर्षों में करीब 28.2 ट्रिलियन रुपये के व्यापक निवेश अवसर प्रदान करेगा. सरकार ने अनेक परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है और धन की कमी से बंद पड़ी परियोजनाओं को बहाल करने के लिए हाइब्रिड एन्युटी मॉडल सहित एक बारगी पूंजी निवेश का प्रस्ताव किया है, जिनमें सरकार ने प्रस्तावित लागत का 40 प्रतिशत तक देने का वायदा किया है.
भारतमाला और अन्य ढांचागत परियोजनाएं
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 अक्तूबर, 2017 को अगले 5 वर्षों में 83,677 किलोमीटर के सडक़ नेटवर्क के निर्माण के लिए 6.92 ट्रिलियन रुपये के परिव्यय का अनुमोदन किया. सडक़ निर्माण के लिए मंजूर किया गया यह अब तक सर्वाधिक परिव्यय है, जो मोदी सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने की पृष्ठभूमि में किया गया है, जिसका लक्ष्य अंतर-राज्य शुल्क अड़चनों को समाप्त करते हुए एक साझा बाजार विकसित करना है. एक सुदृढ़ सडक़ ढांचा इस दिशा में मदद पहुंचाएगा.
सडक़ निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों में भारतमाला परियोजना भी शामिल है, जिसके अंतर्गत 5.35 ट्रिलियन रुपये के निवेश से 34,800 किलोमीटर लंबी सडक़ों का निर्माण किया जाना है. इसके अतिरिक्त भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा 1.57 ट्रिलियन रुपये की लागत से 48,877 किलोमीटर लंबी सडक़ें बनाई जाएंगी.
भारतमाला के अंतर्गत करीब 9000 किलोमीटर के आर्थिक कॉरिडोर, करीब 6000 किलोमीटर के इंटर-कॉरिडोर और फीडर मार्ग, राष्ट्रीय कॉरिडोर सक्षमता कार्यक्रम  के अंतर्गत 5000 किलोमीटर लंबी सडक़ें, करीब 2000 किलोमीटर लंबी सीमावर्ती और अंतर्राष्ट्रीय सम्पर्क सडक़ें, करीब 2000 किलोमीटर लंबी तटवर्ती और बंदरगाह सम्पर्क सडक़ें, करीब 800 किलोमीटर एक्सप्रेस राजमार्ग और 10,000 किलोमीटर एनएचडीपी सडक़ें शामिल हैं. इस तरह कुल मिलाकर पहले चरण के अंतर्गत करीब 34,800 किलोमीटर लंबी सडक़ों का निर्माण किया जाएगा.
भारतमाला परियोजना गुजरात और राजस्थान से प्रारंभ होगी और उसके बाद पंजाब को कवर किया जाएगा. इसके पश्चात् जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और फिर मिजोरम तक हिमालयी क्षेत्र में सडक़ संपर्क स्थापित किया जाएगा. इस परियोजना में पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार भी इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है.
उम्मीद की जा रही है कि भारतमाला परियोजना से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, जिसका निर्यात और निवेश पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा. सरकार के प्रमुख कार्यक्रम भारतमाला के निर्माण चरण के दौरान दस करोड़ कार्यदिवसों के लिए दिहाड़ी रोजग़ार और उससे आर्थिक गतिविधियों में होने वाली बढ़ोतरी से 2.2 करोड़ स्थायी रोजग़ार के अवसर उपलब्ध होंगे. सरकार को उम्मीद है कि भारतमाला सहित जो भी सडक़ निर्माण कार्यक्रम फिलहाल जारी हैं, उनसे करीब 14.2 करोड़ कार्यदिवसों के लिए दिहाड़ी रोजग़ार के अवसर पैदा होंगे. बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा. उम्मीद की जा रही है कि इन उपायों से ढांचागत क्षेत्र पर निवेश में भारी बढ़ोतरी होगी.
भारतमाला से न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में भी कमी आएगी. सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मानवीय भूल, सडक़ की खराबियों, वाहनों में विनिर्माण त्रुटियों और यातायात गतिरोध की बिगड़ती स्थिति जैसे मिले-जुले घटकों के कारण दुर्घटनाओं में जन-हानि की आशंका बढ़ जाती है. भारतमाला के अतिरिक्त की गई कुछ अन्य महत्वपूर्ण घोषणाओं का ब्यौरा नीचे दिया गया है, जिनसे बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, निवेश बढ़ेगा और निर्माण क्षेत्र में रोजग़ार के अधिक अवसर पैदा होंगे:-
* 2017-18 के दौरान करीब 25 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य आवंटित किए जाने की संभावना है. दूसरी तरफ 500 स्टेशनों को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया जाएगा, जिनमें एलीवेटर और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी.
*करीब 7000 रेलवे स्टेशनों को मध्यम अवधि के दौरान सौर विद्युत प्रदान की जाएगी. 300 स्टेशनों पर इस बारे में पहले से ही काम शुरू हो चुका है.
*एक नई मेट्रो रेल नीति घोषित की जाएगी, जिसमें कार्यान्वयन और वित्त पोषण के नए मॉडलों पर ध्यान केंंद्रित किया जाएगा और साथ ही हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के मानकीकरण और स्वदेशीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे निर्माण और प्रचालन के क्षेत्र में अधिक निजी भागीदारी और निवेश जुटाने में मदद मिलेगी.
*राजमार्गों के लिए बजट आवंटन 2016-17 के 57,976 करोड़ रुपये से बढक़र 2017-18 के दौरान रु. 64,900 करोड़ रुपये हो गया.
*बंदरगाहों और दूर-दराज के गांवों के साथ बेहतर संपर्क कायम करने के लिए तटवर्ती इलाकों में 2000 किलोमीटर संपर्क सडक़ों की पहचान की गई है, जिनका निर्माण और विकास किया जाना है.
*वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के विकास के लिए एक खास कार्यक्रम तैयार किया गया है.
*टियर-2 शहरों में चुने हुए हवाई अड्डों का प्रचालन और रख-रखाव पीपीपी यानी सरकारी-निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत करने का प्रस्ताव है. भूमि से प्रभावकारी मुद्रा अर्जित करने के लिए भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन किया जाएगा, और इससे अर्जित संसाधनों का उपयोग हवाई अड्डे को उन्नत बनाने के लिए किया जाएगा.
*वित्त मंत्री ने 2017-18 में परिवहन क्षेत्र के लिए रुपये 2,41,387 करोड़ का अनुदान देने की घोषणा की है. इतने बड़े निवेश से देशभर में अनेक आर्थिक गतिविधियां उत्पन्न होंगी और रोजग़ार के नए अवसर पैदा होंगे.
उपरोक्त सभी ऐसे उपाय हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में रचनात्मक बदलाव आएगा. इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए भारी मात्रा में अपेक्षित धन जुटाना, विशेषकर निजी क्षेत्र को इसमें शामिल करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है. बुनियादी ढांचे का यह कार्यक्रम सकल घरेलू उत्पाद में 2 से 3 प्रतिशत तक योगदान करेगा. भारत के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम भारतमाला के अंतर्गत जो सडक़ें बनेंगी, उनसे वाहनों की गति में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा होगा. इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी. केंद्रीय  सडक़ परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी के अनुसार ये सभी उपाय भारत की आपूर्ति चेन लागत को वर्तमान 18 प्रतिशत से कम करके 6 प्रतिशत पर लाने में मदद करेंगे और रोजग़ार के दो लाख अवसर पैदा होंगे.
सरकार ने इस दिशा में कार्रवाई करते हुए एकीकृत नीति अपनाने, क्षमता निर्माण, भागीदारी, जानकारी साझा करने और बुनियादी ढांचा संबंधी आंकड़े जुटाने तथा सम्बद्ध हितभागियों को शामिल करने जैसे उपाय किए हैं. अनेक हितभागियों को समाहित करने की नीति को इस बात से बल मिला है कि सरकार विकास बैंकों और निजी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है. सहायता नीति मूल्यांकन में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा. भारत सरकार स्थायी, समावेशी और समानता पर आधारित ढांचे का निर्माण और स्थायी विकास के तीन आयामों - आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए उद्योगीकरण कर रही है. इन उपायों से भारत में एक समुत्थानशील ढांचे का निर्माण करने की दिशा में वास्तविक प्रगति होगी.
(डॉ. रंजीत  मेहता नई दिल्ली स्थित पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में प्रधान निदेशक हैं और सुश्री महालक्ष्मी विश्वनाथ, माउंट कार्मेल कॉलेज, बंगलौर में पब्लिक पॉलिसी विभाग में स्नातकोत्तर विद्यार्थी हैं. ईमेल: ranjeetmehta@gmail.com) इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. 
चित्र: गूगल के सौजन्य से