नौकरी फोकस


Volume-39, 23-29 December, 2017

एयरोस्पेस इंजीनियरी में अनंत अवसर

उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद

क्या आपने कभी बड़े अंतरिक्षयान और रॉकेट देखें हैं और यह कल्पना की है कि इनका निर्माण किस तरह किया गया है? क्या आप उड़ान और अंतरिक्ष के बारे में आकर्षित रहते हैं? क्या विज्ञान के अध्ययन और सभी प्रकार के नव प्रवर्तन की अभिरुचि रखते हैं?
यदि हां, तो एयरोस्पेस इंजीनियरी आपके लिए सही क्षेत्र हो सकता है.
एयरोस्पेस इंजीनियरी उडऩे वाली मशीनों की डिजाइन और निर्माण से संबंधित है यह अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है और रुचिकर कॅरिअर विकल्प है तथा विमान एवं संबंधित प्रणालियों जैसे मिसाइलों, रॉकेट प्रोपल्सन प्रणालियों, स्पेस शटल आदि के डिजाइन, विकास, परीक्षण और निर्माण से जुड़ा है. एयरोस्पेस इंजीनियरों को सम्पूर्ण विमान की डिजाइन पर कार्य करना अपेक्षित हो सकता है अथवा मिसाइल मार्ग निदेश प्रणालियों, प्रोपल्सन तथा गाइडेंस नियंत्रण प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते है. वाणिज्यिक या सैन्य उपयोग के विमान या अंतरिक्षयान की डिजाइन तथा विनिर्माण एक अत्यधिक  तकनीकी क्षेत्र है और इस क्षेत्र के लिए एयरोस्पेस, वैमानिकी, इलेक्ट्रॉनिकी, कम्प्यूटर विज्ञान, रोबोटिक्स, मौसम विज्ञान तथा भौतिकी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले अत्यधिक प्रशिक्षित इंजीनियरों, वैज्ञानिकों तथा तकनीशियनों की आवश्यकता होती है.
एयरोस्पेस इंजीनियरी भारत में आज भी अपने विकास चरण पर है, किन्तु पश्चिम देशों में इसकी उन्नति एवं विकास ने कल्पना चावला जेसे अनेक प्रतिभावान इंजीनियर तैयार किए हैं. नासा में कार्य कर रहे लगभग ३०-४०' तकनीशियन तथा एयरोस्पेस इंजीनियर भारत से हैं.
एयरोस्पेस इंजीनियरी क्या है?
एयरोस्पेस एक व्यापक शब्द है. एयरोस्पेस इंजीनियरी को दो शाखाओं में वर्गीकृत किया जाता है एयरो नॉटिकल इंजीनियरी, एस्ट्रो नॉटिकल इंजीनियरी एयरोनॉटिकल (वैमानिक) इंजीनियरी विमानों मिसाइलों और हेलीकॉप्टर में विशेषज्ञता वाली होती है, जबकि इसके विपरीत, एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरी में स्पेस शटल, रॉकेट तथा स्पेस स्टेशन जैसे क्षेत्र निहित होते हैं. एयरोस्पेस इंजीनियर न केवल विनिर्माण पर कार्य करते हैं बल्कि इन विमानों की डिजाइन एवं कनेक्टिविटी पर भी कार्य करते हैं.
इंजीनियरी का एक अत्यधिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र, एयरोस्पेस इंजीनियरी विमानन, अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी के विकास से संबंधित होती है. एयरोस्पेस इंजीनियरी में हाईटेक प्रणालियों का डिजाइन एवं विनिर्माण निहित है, इसलिए इंजीनियरों मैनुअल, तकनीकी और यांत्रिक क्षमता रखने की आवश्यकता होती है.
इस क्षेत्र में एयरो डायनामिक्स, प्रोपल्सन एविऑनिक्स, सामग्री विज्ञान, संरचनात्मक विश्लेषण तथा विनिर्माण जैसी कई विधाएं होती हैं.
एयरोस्पेस इंजीनियर क्या करते हैं?
किसी एयरोस्पेस इंजीनियर के कार्य प्रोफाइल या दायित्वों में विमानों एवं अंतरिक्ष यानों का अनुसंधान डिजाइन निर्माण और रखरखाव विशिष्ट रूप से शामिल होता है. किसी एयरोस्पेस इंजीनियर से निम्नलिखित कार्यों को करने की प्रत्याशा की जाती है
*सिविल एवं सैन्य विमानों, मिसाइलों, उपग्रहों, अंतरिक्ष वाहनों के निष्पादन का विकास, रखरखाव एवं जांच करना, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये ग्राहकों की अपेक्षाओं को पूरा करते हैं.
*कुछ नए कार्यों में निर्माण के लिए डिजाइन में संशोधन करना और सुरक्षा विशेषज्ञाताओं में सुधार लाना.
*प्रोटोटाइप पर भू एवं उड़ान परीक्षण कार्यक्रम करना.
किसी एयरोस्पेस वाहन की संभाव्यता निर्माण योग्यता, लागत एवं निर्माण समय का अनुमान लगाना.
तकनीकी रिपोर्ट लेखन एवं समीक्षा.
पात्रता :-
एयरोस्पेस इंजीनियरी में स्नातक या मास्टर डिग्रीधारी और एयरोस्पेस इंजीनियरी में विशेषज्ञ व्यक्ति एयरोस्पेस इंजीनियर कहलाता है.
एयरोस्पेस इंजीनियरी स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर दी जाती है और बी.टेक तथा एम.टेक डिग्री प्रदान की जाती है. स्नातक डिग्री में प्रवेश के लिए उम्मीदवार भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित सहित विज्ञापन विधा में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण होने चाहिएं. इस पाठ्यक्रम में प्रवेश, प्रवेश-परीक्षाओं के आधार पर दिया जाता है. इन परीक्षाओं में जी.ई.ई., मेन्स एवं एडवान्स्ड, वी.आई.टी.ई.ई.ई, एस.आर.एम.जे. ई.ई., गेट आदि अत्यधिक प्रसिद्ध है.
यह विधा वाणिज्यिक तथा सैन्य विमानों और अंतरिक्षयानों के डिजाइन, निर्माण, विकास, परीक्षण तथा रखरखाव में विशेषज्ञता दिलाती है. यह पाठ्यक्रम विमानन, रक्षा प्रणालियों तथा अंतरिक्ष खोजों में नई प्रौद्योगिकियों पर भी संकेद्रित होता है.
मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए उम्मीदवार बी.ई./बी.टेक में स्नातक डिग्रीधारी होना चाहिए.
एयरोस्पेस इंजीनियरी क्षेत्र के विभिन्न पाठ्यक्रमों की सूची निम्नानुसार है:-
*स्नातक पाठ्यक्रम : चार वर्ष की अवधि की बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक.) डिग्री.
*मास्टर पाठ्यक्रम : तीन वर्ष की अवधि की मास्टर ऑफ एयरोस्पेस इंजीनियरी (एम.ए.ई.) डिग्री.
*एयरोनॉटिक्स एवं एस्ट्रोनॉटिक्स में मास्टर ऑफ साइंस.
*एम.एस.सी.- एयरोस्पेस इंजीनियरी.
*एयरोस्पेस इंजीनियरी में पी.एच.डी.
एयरोस्पेस इंजीनियरी के लिए अपेक्षित कौशल :
*सशक्त गणित कौशल
*मनोवैज्ञानिक एवं भावात्मक शाक्ति
*डिजाइन कौशल
*कम्प्यूटर कौशल
*बुद्धिमता
*तार्किक सोच एवं विश्लेषिक सोच.
*समस्या समाधान
*दबाव में कार्य करने की क्षमता
संभावनाएं और अवसर:-
एक एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में आपके लिए यह निर्णय लेना महत्वपूर्ण है कि आप एयरोनॉटिकल इंजीनियरी (वायुमंडल में) को वरीयता देते हैं अथवा एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरी (पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर) को, क्योंकि ये दोनों क्षेत्र ही रोज़गार के अवसर देते हैं. दोनों शाखाओं में रोज़गार के उत्कृष्ट अवसर हैं. भारत में यह अभी भी उभरता हुआ क्षेत्र है, जहां हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकल लि. और नेशनल एयरोनॉटिकल लि. जैसी कंपनियां तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विमानों की डिजाइन एवं विनिर्माण क्षेत्र में अथवा सैन्य विमानों के परीक्षण एवं विनिर्माण के लिए रक्षा सेवाओं, मिसाइल प्रौद्योगिकी और विकास के लिए र.अ.वि.सं. में इस अंतरिक्ष अनुसंधान प्रयोगशालाओं जैसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में रोज़गार के अवसर हैं जिसने मंगलयान की सफलता और एक ही रॉकेट से १०४ उपग्रहों के प्रक्षेपण ने भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान मानचित्र पर को ला खड़ा किया है तथापि, एयरोस्पेस उद्योग विदेशों में अत्यधिक उन्नत हैं. जहां, एयरोस्पेस विज्ञान एविऑनिक्स, विमानन विज्ञान, एयरोस्पेस डिजाइन तथा ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर विमान एवं अंतरिक्षयान विनिर्माताओं, हवाई यातायात प्रबंधन एवं नासा जैसे संगठनों में होते हैं, जिन्हें मास्टर और यहां तक कि पीएच.डी स्तर पर भी विशेषज्ञताओं की आवश्यकता होती है.
*इन इंजीनियरों के लिए एयर लाइन्स, वायु सेना, कार्पोरेट अनुसंधान कंपनियों, रक्षा मंत्रालय, हेलिकॉप्टर कंपनियों, विमानन कंपनियों, नासा तथा नई अन्य कंपनियों में रोज़गार के अवसर उपलब्ध होते हंै.
*हवाई यात्रा की लोकप्रियता बढ़ाने एवं अंतरिक्ष खोज के लिए डिजाइन एवं रखरखाव सुधार में विशेषज्ञता अपेक्षित होती है. इस क्षेत्र की विकास दर को देखते हुए योग्य एवं सृजनशील एयरोस्पेस इंजीनियरों की मांग निकट भविष्य में बढ़ेगी.
*कुछ प्रमुख भर्तीकर्ता इस प्रकार हैं- हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एच.ए.एल.), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (र.अ.वि.सं.), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (भा.अ.अनु.सं.), नागर विमानन विभाग, एयर इंडिया, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (भा.अ.अनु.सं.) तथा अन्य इन संगठनों को सामान्यत: एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक व्यक्तियों की और कभी-कभी यांत्रिकी, वैद्युत या कम्प्यूटर विज्ञान में बी.टेक व्यक्तियों की भी आवश्यकता होती है. जो किसी उच्च कॉलेज के छात्र होते हैं और गेट अंक (स्नातक योग्यता के बाद दी जाने वाली प्रवेश परीक्षा) धारी होते हैं.
अधिक तकनीकी जानकारी देने वाली कोई एम.टेक या एम.एस. डिग्री रखने वाले उम्मीदवारों को निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र में अधिक अवसर मिलते हैं. इसरों में एक व्योमयात्री के रूप में प्रवेश लेने के इच्छुक व्यक्ति के लिए रक्षा सेवा, अधिकांशत: वायु सेना एक लोकप्रिय पंसद है. व्योमयात्री नाम ऐसे भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दिया गया है जो अमेरिका में नासा के माध्यम से एस्ट्रोनॉट के रूप में और रशियन स्पेस एजेंसी के माध्यम से कोस्मोनॉट्स के रूप में अंतरिक्ष में जाते है.
एयरोनॉटिकल इंजीनियरी :
वैमानिकी (एयरोनॉटिक्स) के क्षेत्र में निम्नलिखित में अधिक वैविध्यपूर्ण विकल्पों वाले रोज़गार के साथ व्यापक प्रगति आई है.
१.     एयरलाइन्स
२.     वायु सेना
३.     सरकारी अनुसंधान
४.     कार्पोरेट अनुसंधान
५.     हेलिकॉप्टर कंपनियां
६.     फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट
७.     रक्षा मंत्रालय
८.     मिजाइल
९.     एयरशिप
१०.    विमानन कंपनियां
एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरी
भारत में, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी एक सशक्त प्रवर्तन रूप में हैं और इसलिए अनुसंधान एवं खोज के क्षेत्रों में अधिक अवसर हैं प्राय: एस्ट्रोनॉटिकल इंजीनियरों को अंतरिक्ष में यात्रा के लिए प्राथमिकता दी जाती है.
१. अनुसंधान
२. उपग्रह
३. स्पेस शटल
४. अंतरिक्षयान
५. अंतरिक्ष यात्री
एयरोस्पेस इंजीनियरों को प्राय: निम्नलिखित रूप में नियुक्त किया जाता है.
*सलाहकार
*थर्मल डिजाइन इंजीनियर
*यांत्रिक डिजाइन इंजीनियर
*एयरोस्पेस प्रौद्योगिकीविद
*विमानन उत्पादन प्रबंधक
*सहायक तकनीकी अधिकारी
*एयरो स्पेस चैकर
*स्नातक इंजीनियर प्रशिक्षणार्थी
कुछ प्रतिष्ठित भर्तीकर्ता इस प्रकार हैं:-
अत्यधिक योग्य आवेदकों, विशेष रूप से ऐसे आवेदकों जो भारत में प्रौद्योगिकी में नवीनतम विकास की जानकारी रखते हैं, के लिए अत्यधिक अवसर होते हैं. एयरोस्पेस इंजीनियरी के क्षेत्र में रोज़गार प्रदान करने वाली कुछ कंपनियां निम्नलिखित हैं:-
*हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एच.ए.एल.)
*रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाएं (र.अ.वि.सं.)
*भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (भा.अ.अ.सं.)
*नागर विमानन विभाग
*एयर इंडिया
*भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (भा.अ.अ.सं.)
*टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स
*महिंद्रा एयरो स्पेस
*तनेजा एयरो स्पेस
*एल एंड टी
*सम्टेल एविऑनिक्स
*पवन हंस हेलिकॉप्टर
*वैमानिक विकास एजेंसी (ए.डी.ए)
*वैमानिक विकास स्थापना (ए.डी.ई.)
*नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज़ (एन.ए.एल.)
अध्ययन- संस्थानों की सूची
स्नातक संस्थान
*आई.आई.एस.टी:भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनतंपुरम www.iist.ac.in आई.आई.एस.टी. अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोग पर बल देते हुए नियमित इंजीनियरी स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम चलाता है. इनके अलावा एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक, एविऑनिक्स में बी.टेक तथा बी.टेक-एम.एस./एम.टेक एकीकृत पाठ्यक्रम भी चलाए जाते हैं.
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बंबई-एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक.
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खडग़पुर-एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक.
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर- एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक,
*पी.ई.सी. प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ - एयरोस्पेस इंजीनियरी में बी.टेक.
स्नातकोत्तर संस्थान
*भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर- एयरोस्पेस में एम.ई./एयरोस्पेस में एम.एस.सी. (इंजी.)
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बंबई- एयरोस्पेस इंजीनियरी में एम.टेक.
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास- एयरोस्पेस इंजीनियरी में एम.एस./ एम.टेक
*मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास- एम.ई.- वैमानिक इंजीनियरी/एम.ई- एयरोस्पेस इंजीनियरी.
*भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम- एयरोडायनामिक्स एवं फ्लाइट मैकेनिक्स में एम.टेक.
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर- एयरोस्पेस इंजीनियरी में एम.टेक.
(उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर्स स्मार्ट प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली में क्रमश: निदेशक और सीनियर काउंसिलिंग सायकोलोजिस्ट हैं)
ई-मेल: (careerssmartonline@gmail.com) इस लेख में व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं.
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