विशेष लेख


Edition-19

आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में रोजग़ार के सुनहरे अवसर

डॉ आनंद कुमार त्रिपाठी

वैश्वीकरण के युग में आजकल जहाँ चुनौतियां आसान हुई है वहीं हमारे सामने खतरे भी पैदा हुए हैं. सबसे ज्यादा खतरा आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में हो गया है. इस चुनौती से निपटने के लिए हमें दक्ष और कुशल मानवीय स्रोत की आवश्यकता पड़ती है जो आपराधिक न्याय पद्धति में एक प्रमुख भूमिका निभा सके. भारत सरकार ने वर्तमान में रोजगारपरक शिक्षा पर बल दिया है. इस बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने  भारत की प्रथम आंतरिक सुरक्षा यूनिवर्सिटी के रूप में रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी की स्थापना अहमदाबाद में की. जिसका उद्देश्य सुरक्षा के क्षेत्र में अध्ययन और अध्यापन तथा शोध शिक्षा पर विशेष बल देना है. आजकल भारत में सुरक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में रोजग़ार की बेहतर संभावनाएं हैं. राज्य के पुलिस बल अथवा अर्ध सैनिक बल के क्षेत्र में कॅरिअर के इच्छुक प्रतियोगी विभिन्न विषयों में पढ़ाई कर अपना भविष्य संवार सकते हैं. निजी और सरकारी क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं. निजी क्षेत्रो में कुशल व्यक्ति द्वारा सुरक्षा सेवाएं प्रदान करना अब ज्यादा सहज हो गया है. पुलिस सम्बंधित विषयों पर जब छात्र गहन अध्ययन करके आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देंगे तो इससे न केवल रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी बल्कि सुरक्षा के उच्च मानकों का सम्मान होगा. सामान्य जन मानस को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है. भारत के संविधान के अनुसार देश की सुरक्षा में हम समस्त नागरिकों का कर्तव्य है. इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव होगी जब हम सभी नागरिक अपने-अपने  उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेंगे. भारत में अलगाववादी, आतंकवादी एवं विघटनवादी ताकतें आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में कड़ी चुनौतियां बनकर उभरी  हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए योग्य एवं प्रशिक्षित उपाधिधारकों को शिक्षा प्रदान कर काफी हद तक इस समस्या से निपटा जा सकता है.
कानून के क्षेत्र में भी यदि कोई अपराध विधि में शिक्षा का इच्छुक है तो उनके लिए भी कुछ ऐसे विशेष रोजगार हैं जो न्यायालय में अभियोजन अधिकारी, आपराधिक जगत में अधिवक्ता के रूप में अथवा अध्यापक के रूप में अपना कॅरिअर बना सकते है. विशेषतया उन प्रतियोगियों के लिए जो सुरक्षा शिक्षा एवं सेवा  को अपना प्राणाधार बनाना चाहते हैं उनके लिए यह एक सुनहरा अवसर है.
किन विषयों में पढ़ाई करें ?:
*फ़ोटोग्राफी प्रमाणपत्र (फोरेंसिक )
*डिप्लोमा इन पुलिस विज्ञान,
*बी.ए. (सुरक्षा प्रबंधन),
*पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन पुलिस विज्ञान,
*पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल सिक्यूरिटी,
*एल. एल. एम. ( अपराध और सुरक्षा विधि ),
*एम. ए. (पुलिस प्रशासन ),
*एम. ए. (अपराधशास्त्र),
*एम. फिल. (अपराधशास्त्र),
*पी.एच.डी. ( विधि ),
*पी.एच.डी. (फॉरेंसिक )
*पी. एच. डी. (अपराधशास्त्र),
*पी. एच. डी.(आंतरिक सुरक्षा),
इत्यादि विषयों  से सम्बंधित पाठ्यक्रम भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में संचालित किये जा रहे हैं. जिनमें रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, अहमदाबाद इन विषयों में शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर है जो यू जी सी द्वारा अनुमोदित एवं मान्यता प्राप्त  है .
कहाँ से पढ़ाई करें ?
आने वाले  समय में आपराधिक न्याय के क्षेत्र विषय विशेषज्ञ की आवश्यकता का युग है जहाँ इच्छुक व्यक्ति निम्नलिखित विश्वविद्यालयों में अपनी अभिरुचि के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं.
1.रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, अहमदाबाद, गुजरात
2.सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा और आपराधिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान
3.झारखण्ड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, खूंटी (रांची ), झारखण्ड
4.पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, पुलिस प्रशासन विभाग
5.मदुरै कामराज विश्वविद्यालय, मदुरै, तमिलनाडु
6.मनोनमनियम सुन्दरानर विश्वविद्यालय, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु 
7.वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा, राजस्थान
8.लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराधशास्त्र एव विधि विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
किन-किन क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर ?
1.पुलिस विभाग ( देश के विभिन्न प्रान्तों में राज्य स्तरीय परीक्षा मंडल का गठन किया गया है जिसमें पुलिस या सुरक्षा प्रबंधन से सम्बंधित विषयों के उपाधि धारकों को वरीयता मिलना अवश्यम्भावी है. गुजरात में स्थापित रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रो को पुलिस भर्ती  में अतिरिक्त अंक प्रदान किये जाते हैं. पुलिस सेवा की परीक्षाओं में भी भविष्य में  पुलिस प्रशासन विषय में विशेषज्ञता प्राप्त लोगों को भी साक्षात्कार में सरकार कुछ विशेष नियम बना सकती है. इसके पीछे तर्क यह है कि विद्यार्थी अपने अध्ययन के दौरान कानून, फॉरेंसिक, संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, अपराधशास्त्र, सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रायोगिक और  लिखित ज्ञान हासिल करते हैं.)  
2.प्रवर्तन निदेशालय ( आर्थिक अपराध के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने का उचित अवसर इस प्रकार के कई विश्वविद्यालयों में दिया जाता है जिसमें मनी लांड्रिंग, फेमा जैसे विषयों का ज्ञान प्राप्त कर प्रवर्तन विभाग में रोजग़ार के अवसर का सृजन अधिकारपूर्वक  किया जा सकता है.)
3.फोरेंसिक विभाग (अपराध जगत में साक्ष्य एकत्रित करना सुरक्षा एजेंसी के सामने एक कठिन चुनौती होती है. क्योंकि अपराध करने के उपरांत अपराधी या तो साक्ष्य मिटा देता है या फिर पुलिस की पहुँच से दूर हो जाता है. फॉरेंसिक विज्ञान इन समस्याओं से निपटने के लिए सक्षम है और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस प्रकार  पीडि़त एव अभियुक्त दोनों को न्याय दिलाने में इस विषय की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है. इसीलिए इस प्रकार की शिक्षा आजकल सुरक्षा के क्षेत्र में रोजग़ार के प्रमुख अवसर प्रदान करती है)
4.विश्वविद्यालय शिक्षक (पुलिस सुरक्षा एवं आपराधिक न्याय के क्षेत्र में आजकल भारत में विभिन्न विश्वविद्यालय संचालित हैं जिसमें विश्वविद्यालयों में शिक्षक बनने की अपार संभावनाएं है. इच्छुक अभ्यर्थी अपना कॅरिअर इस क्षेत्र में चुन सकते हैं.)
5.अपराधशास्त्री (समाज में दिन प्रतिदिन नित नए अपराध के तरीके देखने में आ रहे हैं. अपराध के कारणों, अपराधी की मन:स्थिति, सामाजिक परिप्रेक्ष्य इत्यादि विषय पर विशेषज्ञता प्राप्त कर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है. इसके लिए अपराध शास्त्र  विषय का अध्ययन कारगर हो सकता है. 
6.मनोवैज्ञानिक विभाग  (मानसिक तनाव के कारणों, हताशा, निराशा एवं जीवन के प्रति निरुत्साह सुरक्षा कर्मचारियों में आजकल आम बात  हो गयी है. मनोविज्ञान की शिक्षा, सुरक्षा के क्षेत्र का अभिन्न अंग बन गया है. सरकार एंव निजी क्षेत्र में इस विषय की भारी मांग है.)
7.निजी सुरक्षा प्रबंधन (स्वयं सेवा संगठन, सरकारी संस्थान सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयत्नसाध्य हैं. आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की शिक्षा निश्चित ही रोज़गार के नए आयाम खोलेगी) 
8.वैमानिकी सेवा के क्षेत्र में (हवाई सुरक्षा काफी अहम् है जहां हम इस भाग दौड़ की दुनिया में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या काफी अधिक है. इसलिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए इस विषय के विशेषज्ञ की आवश्यकता पड़ती हैं. यू जी सी द्वारा मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालय जो इस क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कर रहे है, यहाँ से अध्ययन प्राप्त कर इस क्षेत्र में रोजगार का बेहतर भविष्य तलाशा जा सकता है.
9.आपदा प्रबंधन (बी ए (सुरक्षा प्रबंधन) में उपाधि हासिल करने के बाद आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में रोजगार का बेहतर भविष्य है. यह शिक्षा भारत के एकमात्र विश्विद्यालय रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में अभी तक उपलब्ध है. यहां से इस विषय में अध्ययन कर ना केवल आपदा प्रबंधन बल्कि सुरक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में निजी और सरकारी प्रतिष्ठानों में सेवायोजन के बहुलक्षी अवसर उपलब्ध हैं. यहां तक की गुजरात सरकार पुलिस सेवा की भत्ती में पुलिस डिप्लोमाधारी एवं सुरक्षा प्रबंधन डिग्री उपधिधारको को साक्षात्कार में अतिरिक्त अंक प्रदान करती है.
10.अभियोजन विभाग (आपराधिक एंव सुरक्षा विधि में विशेषज्ञता हासिल करना किसी रोमांच से कम नहीं है. यू जी सी ने जब इस विषय में एल एल एम का प्रस्ताव सुझाया उसके पीछे मानस यह था कि अभियोजन के क्षेत्र में कुशल मानवीय स्रोत का सृजन किया जा सके. आजकल एल एल एम (आपराधिक एव सुरक्षा विधि) विधि शिक्षा का बेहतर विकल्प है. इसे ना केवल अभियोजन बल्कि अपराध के क्षेत्र में अधिवक्ता, क्राइम मीडिया एवं शिक्षक के रूप में भी कॅरिअर के रूप में चुना जा सकता है.
11.साइबर सुरक्षा (जीवन में संास के लिए जितनी आवश्यकता होती है उतनी आवश्यकता सुरक्षा की भी होती है. आज के इस वैज्ञानिक युग में सुदूर बैठकर खरीदारी का लुत्फ़ लिया जा सकता है. किन्तु यह शौक एक मंहगा मनोरंजन हो सकता है यदि लेन देन की सुरक्षा की बारीकियों को ना समझा जाय. सायबर सुरक्षा एक चुनौती है पर आजकल इस क्षेत्र में शिक्षा हासिल कर इस क्षेत्र में ना केवल निजी बल्कि सरकारी क्षेत्रों में अपना उज्ज्वल भविष्य तलाशा जा सकता है. सोशल नेटवर्किंग, ई -लेन देन, ऑन लाइन शापिंग, हैकिंग, जीपीएस इत्यादि क्षेत्रों में पर्याप्त अवसर हैं.)
12.सूचना प्रौद्योगिकी (इसके बिना सुरक्षा की कल्पना मुश्किल है. यह अपराधी को पकडऩे में वैज्ञानिक और त्वरित तरीके उपलब्ध कराती है)
13.साइबर पुलिस स्टेशन (गुजरात में अभी हाल में साइबर स्टेशन की स्थापना का संकल्प राज्य सरकार ने लिया है. निकट भविष्य में ना केवल इस प्रान्त में बल्कि भारत के अन्य प्रान्तों में भी इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं है ; विशेषतया सुरक्षा के क्षेत्रों में.)
14.निजी क्षेत्र में तटरक्षक (निजी क्षेत्र की तेल कम्पनियों को सुरक्षा की विशेष आवश्यकता होती है. अत: इस क्षेत्र में भी पुलिस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर निजी क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त किया जा
सकता है)
15.यातायात सुरक्षा (ट्रैफिक पुलिस के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं)
16.पुलिस संचार (अपराधी को पकडऩे के लिए  संचार तकनीक एक बेहतर वैज्ञानिक विकल्प है. संचार के क्षेत्र में अध्ययन, साइबर सुरक्षा, जीपीएस सभी की दक्षता प्राप्त कर इसे कॅरिअर का बेहतर विकल्प बनाया जा सकता है.
17.होटल सुरक्षा (ऐसे संस्थानों से अध्ययन करने के बाद भारत के विभिन्न शहरों में खास कर जहां पर्यटन की संभावनाएं हैं सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर विकल्प हैं)
18.अस्पताल सुरक्षा (निजी क्षेत्र में आजकल सुरक्षा एजेंसी आउट सोर्सिंग के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवाती है. इस क्षेत्र में अपना भविष्य देखा जा सकता है.
19.शौपिंग सेंटर (बिग बाज़ार, शॉपिंग मॉल, बाज़ार हब की इस दुनिया में सुरक्षा कर्मचारियों की बेहतर मांग है, इस क्षेत्र में अपना कॅरिअर बनाने के लिए औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में स्नातत्कोत्तर डिप्लोमा  जैसी उपाधि की खूब मांग है.)
20.बैंकिंग सेक्टर (बैंकिंग का क्षेत्र इससे अछूता नहीं है इस क्षेत्र में सेवायोजन की अपार संभावनाएं हैं.)
21.निजी औद्योगिक क्षेत्र (इस क्षेत्र में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं)
22.विश्वविद्यालय परिसर में भी सुरक्षा के सुनहरे अवसर तलाशे जा सकते हैं.
प्रवेश प्रक्रिया एव समय :
ज्यादातर विश्वविद्यालयों में मैरिट के आधार पर प्रवेश सुनिश्चित किया जाता है. कुछ विश्वविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से भी सुनिश्चित किया जाता है. प्रवेश के लिए सुझाये गए विश्वविद्यालयों की वेब साइट समय-समय पर देखते रहे. वैसे प्रवेश प्रक्रिया अप्रैल से प्रारंभ हो जाती है जो जून माह तक चलती है.
(लेखक राष्ट्रीय रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद, गुजरात में सहायक प्रोफेसर (विधि) है इसके अतिरिक्त वे पूर्व में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर (विधि) भी रह चुके है.)