विशेष लेख


Volume-23

 
डिजिटल इंडिया की तेजीं से मांग

अरुण खुराना

डिजिटल इंडिया देश के इक्कीसवीं सदी में छलांग लगाने के लिये अपनायी गयी सबसे रोमांचक पहलकदमियों में से एक है. जो कभी एक अव्यावहारिक विचार लगता था वह अब सामान्य बात हो गया है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक मजबूत पहल है डिजिटल इंडिया. उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभालने से पहले ही उद्योग जगत के एक सम्मेलन में डिजिटल इंडिया के अपने सपने के बारे में बताया था. इसकी कल्पना तेज रफ्तार वाले एक ऐसे डिजिटल हाईवे के रूप में की गयी है जिसमें सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन के जरिये उपलब्ध होंगी और ताजा आंकड़ों को तत्काल मुहैया करा कर किसानों का सशक्तीकरण किया जायेगा. साइबर सुरक्षा और वित्तीय समावेशन भी डिजिटल इंडिया में शामिल होंगे. इन विचारों में से कई को पिछले तीन बरसों में वास्तविकता में तब्दील किया जा चुका है. लेकिन उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा फायदा देश में यह सहमति बनाना है कि डिजिटल सिर्र्फ  धनी बच्चों का खेल नहीं बल्कि विकास का जरूरी तत्व है. इस अभियान का मकसद इंटरनेट का दायरा बढ़ा कर जनता के लिये चीजों को सुविधाजनक और आसान बनाना है. इसे इसलिये बढ़ावा दिया जा रहा है कि चीजों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध करा कर जनता की मदद की जाये. इस कदम से प्रौद्योगिकी का वातान बढ़ाने के प्रयासों को काफी बल मिला है. इसकी शुरुआत देश में दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक इंटरनेट संपर्क बढ़ाने की योजना से होती है. इस अभियान का आरंभ एक जुलाई, 2015 को किया गया था और सशक्तीकरण के लिहाज से इसमें लगातार प्रगति हुई है. डिजिटल इंडिया पहलकदमी में ई-शासन और भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज में परिवर्तित करने पर जोर दिया गया है. इसे देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया है. डिजिटल इंडिया यह सुनिश्चित करेगा कि देश के नागरिकों को सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध हों.
डिजिटल इंडिया के तीन प्रयास हैं-
1.हर नागरिक के उपयोग के लिये डिजिटल ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराना,
2.मांग पर शासन और सेवाओं की व्यवस्था तथा
3.नागरिकों का डिजिटल सशक्तीकरण
भारत सरकार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के जरिये अनेक मोर्चों पर विकास हासिल करने की उम्मीद रखती है. वह डिजिटल इंडिया के नौ स्तंभों की पहचान कर उन्हें लक्ष्य बनाना चाहती है. ये स्तंभ हैं- ब्रॉडबैंड हाईवे, इंटरनेट तक सबकी पहुंच, सार्वजनिक इंटरनेट अभिगम कार्यक्रम, ई-शासन (प्रौद्योगिकी के जरिये सरकार में सुधार), ई-क्रांति (सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आपूर्ति), सबके लिये सूचना, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, रोजगार के लिये सूचना प्रौद्योगिकी तथा शीघ्र फसल कार्यक्रम.
बिचौलियों, निरक्षरता, अज्ञान, गरीबी, धन के अभाव तथा सूचना और निवेश से संबंधित बाधाओं और सीमाओं के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग जैसे सामाजिक क्षेत्र नागरिकों तक पहुंचने में अक्षम हैं. इन चुनौतियों की वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास में असंतुलन पैदा हुआ है. इन क्षेत्रों में जनता की आर्थिक और सामाजिक स्थितियों में काफी अंतर है. डिजिटल इंडिया परियोजना सरकार और जनता को जोड़ती है. इससे सरकारी सेवाएं एक बटन दबाते ही लोगों के दरवाजों तक पहुंच जायेंगी. यह पहलकदमी देश के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिये सबसे ज्यादा उपयोगी हंै. ये ग्रामीण तेज इंटरनेट सेवा मिलने से अपने काम सिर्र्फ  एक क्लिक के जरिये कर सकेंगे जिससे वे शहरी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचेंगे और उनके समय की भी बचत होगी. इस परियोजना के पीछे चिंतन ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी प्रौद्योगिकी से जोडऩा और दूरदराज के गांवों में ई-सेवाएं मुहैया कराना है. इसमें देश के सभी गांवों में ब्रॉडबैंड, दूर-चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा कर शासन को ज्यादा सहभागी बनाना शामिल है. सरकार देश के ढाई लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोडऩे के लिये एक राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रही है. देश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल प्रौद्योगिकी के जरिये दूर-चिकित्सा, शिक्षा और कौशल उपलब्ध कराने के लिये डिजिगांवयोजना चलायी गयी है. भारत नेट की महत्वाकांक्षी परियोजना के लिये आवंटित रकम को बढ़ा कर 2017-18 में 10000 करोड़ रुपये किया गया है. इस परियोजना से डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर पर हॉटस्पॉट सहित तेज रफ्तार वाला ब्रॉडबैंड उपलब्ध होगा. इसके जरिये इन ग्राम पंचायतों के निवासी कम कीमतों पर डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे.
डिजिटल इंडिया परियोजना शिक्षा मुहैया कराने में भी मददगार होगी. इसके जरिये शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों की कमी की चुनौती से स्मार्ट और आभासी कक्षाओं के माध्यम से आंशिक तौर पर निपटा जा सकता है. किसानों और मछुआरों को मोबाइल फोन के जरिये शिक्षित किया जा सकता है. तेज रफ्तार वाला नेटवर्क विशाल ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों (मूक) जैसे शिक्षा प्लेटफॉर्मों के लिये पर्याप्त ढांचागत सुविधाएं मुहैया करा सकता है. मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग से वित्तीय समावेशन में सुधार संभव है. इसके तहत अंतरसंचालनीय पर्यावरण और राजस्व में हिस्सेदारी के व्यावसायिक मॉडलों के निर्माण से मूल्य शृंखला में सभी पक्षों के लिये लाभकारी स्थिति बनेगी.
इस परियोजना के जरिये स्वास्थ्य सेवाओं और साक्षरता को ज्यादा सुलभ बनाया जायेगा. ई-अस्पताल सेवाओं के इस्तेमाल से चिकित्सा पंजीकरण, डॉक्टर से मुलाकात का समय और जांच रिपोर्टें हासिल करने के अलावा फीस का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा सकता है. इसके जरिये खून की उपलब्धता के बारे में जानकारी भी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है.
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का एक अनोखा मकसद सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े रोजगार मुहैया कराना है. इस कार्यक्रम में डिजिटल विकास पर जोर दिया गया है लिहाजा इससे युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार भी मिलेंगे.
इस अभियान के तहत कई सुविधाएं मुहैया करायी गयी हैं. हमारे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को ऑनलाइन रखने के लिये डिजिटल लॉकर की व्यवस्था है. इंटरनेट के जरिये दूर शिक्षा के लिये ई-शिक्षा है. ऑनलाइन स्वास्थ्य जांच और सूचना के लिये ई-स्वास्थ्य है. इसके अलावा एक राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल भी शुरू किया गया है. डिजिलॉकर भारतीय नागरिकों को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने में मदद करता है. इसमें किसी भी व्यक्ति की अपने दस्तावेजों तक पहुंच सुरक्षित होती है. ई-साइन सुविधा के इस्तेमाल से कोई भी व्यक्ति किसी दस्तावेज पर आधार कार्ड से प्रमाणित डिजिटल हस्ताक्षर कर सकता है. इन सेवाओं से नागरिकों को एक सुविधाजनक और सुगम जीवन जीने में सहायता मिलती है.
डिजिटल इंडिया अभियान ने नागरिकों को इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के जरिये नकदी रहित लेन-देन के लिये प्रेरित किया है. डिजिटल ढांचागत सुविधाओं से हमारा मतलब एक ऐसे स्थल की स्थापना है जहां सभी पंजीकृत नागरिकों की एक डिजिटल पहचान होगी. इस पहचान के जरिये उन्हें सरकारी सेवाएं आसानी और तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी. अभियान के तहत बैंक खाते का प्रबंधन और वित्तीय प्रबंध, सुरक्षित साइबर स्थल, शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा जैसी सभी सरकारी सेवाएं इस्तेमाल के लिये ज्यादा सरल बनायी जायेंगी.
भारत का शिक्षा क्षेत्र भी धीमे-धीमे डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ रहा है. एक समय भारतीय कक्षा का अर्थ ऐसे कमरे से था जहां छात्र घंटा भर बैठ कर अपने शिक्षक का एकालाप सुनते थे. प्रौद्योगिकी ने छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिये जिंदगी आसान बना दी है. स्कूल डिजिटल शिक्षण समाधानों को अपना रहे हैं. स्मार्ट क्लास वास्तव में पाठ्यक्रम आधारित मल्टीमीडिया और थ्री डी सामग्री का डिजिटल पुस्तकालय है. सूचना और संचार प्रणाली (आईसीटी) का हमारे शिक्षा तंत्र पर व्यापक प्रभाव हो सकता है. आईसीटी से शिक्षा की पहुंच बढऩे के साथ ही उसके खर्चों में भी कमी आयेगी. मोबाइल फोन और इंटरनेट गुमटियों की पहुंच बढऩे से शिक्षा की संभावना सचमुच व्यापक हो गयी है. सरकार मोबाइल शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षण, डिजिटल अधिगम संसाधनों और डिजिटल सामग्री प्रबंधन पर जोर दे रही है.
भारत ने संवहनीय विकास लक्ष्यों के घोषणापत्र पर हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को सक्रियता से शुरू किया है. इसमें मूल उपयोगिता के रूप में डिजिटल ढांचागत सुविधाएं और मांग पर डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने और सभी नागरिकों के डिजिटल सशक्तीकरण पर ध्यान केन्द्रित किया गया है. डिजिटल इंडिया के तहत सभी पहलकदमियों में विकास के लिये सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इनमें मिशन के अंदाज की परियोजनाओं के जरिये नागरिक केन्द्रित, व्यवसाय केन्द्रित और सरकार केन्द्रित सेवाएं प्रदान करने के लिये मोबाइल, सोशल मीडिया, क्लाउड और डाटा विश्लेषण का लाभ लिया जाता है. भारत एक डिजिटल क्रांति के उभार पर है और डिजिटल इंडिया इसका वाहक है. आधार (सार्वभौम डिजिटल पहचान), जन धन योजना (हर परिवार का वित्तीय समावेशन), लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (गरीबी रेखा से नीचे के और सभी अन्य योग्य परिवारों के लिये खाद्य सुरक्षा), सभी प्रमाणित लाभार्थियों को सीधे लाभ हस्तांतरण, डिजिटल साक्षरता अभियान, सरकारी ई-बाजार इत्यादि डिजिटल इंडिया के तहत किये जा रहे प्रमुख प्रयासों से भारत डिजिटल तौर पर सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में तब्दील हो रहा है. सरकारी ई-बाजार के जरिये उत्पादों के विक्रेता और सेवा प्रदाता सरकार की खरीद एजेंसियों से सीधे सौदा कर सकते हैं. जन धन, आधार और मोबाइल सरकारी लाभों के डिजिटल हस्तांतरण में सहयोगी हैं. देश में जन धन खातेदारों की संख्या 22 करोड़ तक पहुंच चुकी है.
संवहनीय विकास के लक्ष्य विस्तृत हैं और इनमें पांच पी’- पीपुल (जनता), प्लैनेट (धरती), प्रॉस्परिटी (संपन्नता), पीस (शांति) और पार्टनरशिप (सहभागिता) पर ध्यान केन्द्रित किया गया है. एजेंडा 2030 के तहत गरीबी उन्मूलन, भूख और कुपोषण निवारण, स्वास्थ्य और सेहत, शिक्षा, लैंगिक समानता, जल और स्वच्छता, ऊर्जा, विकास, ढांचागत सुविधाओं, असमानता घटाने, स्थाई उत्पादन और उपभोग, शहरीकरण और पर्यावास, जलवायु परिवर्तन, धरती पर जीवन, जल जीवन, शांति और न्याय तथा वैश्विक सहभागिता के संबंध में लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं. इन सभी लक्ष्यों को 2030 तक पूरा किया जाना है.  
भारत सरकार ने देश के डिजिटलीकरण के लिये कई योजनाएं शुरू की हैं. प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत 31 मार्च, 2019 तक ग्रामीण क्षेत्रों में छह करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षर बनाया जाना है. इसके दायरे में हर योग्य परिवार के एक सदस्य यानी लगभग 40 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को रखा गया है. विशाल ओपन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों (मूक) को भारत में लोकप्रियता मिल रही है. प्रौद्योगिकी के आगमन से ई-शिक्षा को तेजी से महत्व और गति प्राप्त हो रही है. प्रधानमंत्री ने पिछले साल ही स्वयंनामक एक मूकप्लेटफॉर्म की शुरुआत की है. द्व4द्दश1.द्बठ्ठ शासन में नागरिकों की भागीदारी के लिये एक प्लेटफॉर्म है.
डिजिटल कृषि सूचना और सेवाओं के समयबद्ध और लक्षित विकास तथा वितरण में मदद करने वाला एक आईसीटी और डाटा पर्यावरण तंत्र है. इसका मकसद सबको सुरक्षित, पोषक और किफायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय तौर पर लाभकारी और संवहनीय बनाना है. ग्रामीण कनेक्टिविटी किफायती डाटा और सूचना तक पहुंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण होगी. यह ग्रामीण युवाओं को अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनायेगी और किसानों को मूल्यवद्र्धित सेवाओं के लिये न्यायसंगत बाजारों और ग्रामीण व्यवसायों के जरिये अपना लाभ बढ़ाने का अवसर मुहैया करायेगी. किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्मों से अनुकूल फसलों, बीजों की किस्मों, मौसम, पौध संरक्षण और खेती की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों तथा बाजार मूल्यों, मांग और रणनीतियों से संबंधित जानकारियां हासिल करने में सहायता मिलती है.
भारत सरकार ने जून, 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरूआत की. इसका मकसद संवहनीय और समावेशी शहरों को बढ़ावा देना है जो बुनियादी ढांचागत सुविधाएं मुहैया करायें और अपने बाशिंदों को अच्छी गुणवत्ता वाला जीवन, स्वच्छ और संवहनीय पर्यावरण और स्मार्ट समाधान प्रदान करें. सौ स्मार्ट सिटी के विकास और 500 अन्य में सुविधाओं के विस्तार के लिये सरकार ने 98000 करोड़ रुपये (15 अरब अमेरिकी डॉलर) मंजूर किये हैं. सुधार, नवीकरण और विस्तार स्मार्ट सिटी में क्षेत्र आधारित विकास के रणनीतिक तत्व हैं. इस मिशन में एक समग्र पहलकदमी भी शामिल है जिसके जरिये शहर के बड़े हिस्सों में स्मार्ट समाधान लागू किये जाते हैं.
2 अक्टूबर, 2014 को समूचे देश में स्वच्छ भारत मिशन की एक राष्ट्रीय आंदोलन के तौर पर शुरुआत की गयी. इस अभियान का लक्ष्य 2 अक्टूबर, 2019 तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को हासिल करना है. अभियान में जनता की सक्रिय भागीदारी के लिये संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में नयी दिल्ली में स्वच्छ भारत ऐप की शुरुआत की.
कंपनियों के पास काफी आंकड़े होते हैं जिन्हें रणनीतिक तौर पर व्यवस्थित करने की जरूरत होती है. बिग डाटानामक एक संपूर्ण सूचना प्रबंध रणनीति में पारंपरिक के अलावा नयी तरह के आंकड़ों और आंकड़ा प्रबंधन को शामिल और समेकित किया जाता है. बिग डाटा को चार वी- वेलोसिटी (गति), वोल्यूम (परिमाण), वेराइटी (विविधता) और वैल्यू (मूल्य) से भी परिभाषित किया गया है. मौजूदा समय में विश्लेषणात्मक डाटा बेस की जरूरत बढ़ गयी है क्योंकि इसमें किसी संगठन के केन्द्रित बाजार में विकास के लिये जरूरी उपकरणों, विश्लेषणों, प्रोग्रामिंग, प्रशासन और सूचना प्रौद्योगिकी का मिश्रण होता है. व्यवसाय विश्लेषण हमें पिछले आंकड़ों को देख कर भविष्य के बारे में ज्ञान बढ़ाने में मदद करता है ताकि हम ग्राहक की बेहतर और उत्पादक ढंग से सेवा कर सकें.
सोशल मीडिया इंटरनेट के सबसे ज्यादा बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोगों में से एक है. सरकारी एजेंसियां ज्यादा तेज और प्रभावी ढंग से नागरिकों के साथ संवाद, सूचनाओं के आदान-प्रदान और सेवाएं मुहैया कराने के लिये सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रही हैं. देश में जागरूकता फैलाने तथा विभिन्न ई-शासन योजनाओं और कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के मकसद से जुलाई, 2014 में डिजिटल इंडिया सोशल मीडिया टीम का गठन किया गया. थोड़े ही समय में डिजिटल इंडिया के सोशल चैनलों (फेसबुक, ट्वीटर, गूगल प्लस, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन) को फॉलो करने वालों की संख्या विशाल रूप ले चुकी है. डिजिटल इंडिया की विषयवस्तु रणनीति में ऑनलाइन क्विज, समाचार अपडेट, दिन की सलाह और क्या आप जानते हैं जैसी अनेक दिलचस्प गतिविधियां शामिल हैं.
डिजिटल इंडिया पहलकदमी ने देश की डिजिटल पहचान पर जबर्दस्त असर डाला है. इसमें मोबाइल फोन और इंटरनेट की पहुंच, डिजिटल पहचान, डिजिटल सेवाओं और डिजिटल लेनदेन का कवरेज, ग्रामीण सशक्तीकरण, डिजिटल भुगतान, डिजिटल साक्षरता, ई-स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल कृषि, डिजिटल विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक और सिस्टम डिजाइन उद्योग और ई-कॉमर्स शामिल हैं. डिजिटल इंडिया ई-शासन को सबसे निचले स्तर तक ले जाकर तथा नागरिकों, सेवा प्रदाताओं और शासकीय संस्थानों को एक मंच पर लाते हुए नवाचार और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहा है. सबका साथ, सबका विकासके लक्ष्य को विश्लेषण (नीति, सरकारी प्रक्रिया का पुनर्समायोजन, बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म और कुशल निर्णय समर्थन प्रणाली), समर्थन (खुले मापदंड, खुला डाटा, शिकायत निवारण तथा सूचना, शिक्षा और संचार) तथा कार्यवाही (क्षमता और सामग्री का विकास, सफल ई-शासन परियोजनाओं को तेजी से लागू करना और दोहराव, बहुपक्षीय भागीदारी तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) की तीन पहलुओं वाली रणनीति अपना कर डिजिटल इंडिया के जरिये वैश्विक स्तर पर हासिल किया जा सकता है.
(लेखक सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी काउंसिल के संस्थापक / निदेशक हैं. लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं
ईमेल - khurana@arunkhurana.com)