विशेष लेख


Vol.29, 2017

प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना
 ‘‘सौभाग्य’’


प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘‘सौभाग्य’’ नामक नई स्कीम का शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 सितंबर सन् 2017 को किया गया. इसका उद्देश्य ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी देश में सभी घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चित करना है.
निम्नलिखित प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न यथा - इस योजना के उद्देश्यों, विशेषताओं, अपेक्षित परिणामों और क्रियान्वयन रणनीति की विस्तृत जानकारी देते हैं.
प्र १. इस नई योजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर ‘‘सौभाग्य’’ का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करते हुए सभी घरों में बिजलीपहुंचाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी शेष गैर विद्युतीकृत घरों में बिजली कनेक्शन सुलभ कराना है, ताकि देश में सभी घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया
जा सके.
प्र २. अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और घरों में बिजली कनेक्शन मुहैया कराने में क्या-क्या शामिल हैं?
उत्तर घरों में बिजली कनेक्शन देने के कार्य में संबंधित घर से निकटतम विद्युत खंबे से सर्विस केबल घर तक लाना, बिजली मीटर लगाना, एलईडी बल्ब और एक मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट के साथ एकल विद्युत प्वाइंट के लिए तार डालना शामिल है. यदि सर्विस केबल लाने के लिए संबंधित घर के निकट विद्युत खंबा उपलब्ध नहीं है तो कंडेक्टर एवं संबंधित उपकरणों के साथ अतिरिक्त खंबा लगाया जाना भी इस योजना में शामिल है.
प्र ३. क्या हर गैर विद्युतीकृत घर को पूरी तरह से मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा?
उत्तरजी हाँ. गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे. इस योजना के तहत सिर्फ 500 रुपये के भुगतान पर अन्य घरों को भी विद्युत कनेक्शन मुहैया कराए जाएंगे. इस राशि की वसूली बिजली बिलों के साथ दस (10) किस्तों में डिस्कॉम/विद्युत विभागों द्वारा की जाएगी.
प्र ४. क्या मुफ्त बिजली कनेक्शन में उपभोग या खपत के लिए मुफ्त बिजली भी शामिल है?
उत्तरइस योजना में किसी भी श्रेणी के उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मुहैया कराने का कोई प्रावधान नहीं है. संबंधित उपभोक्ताओं को खपत की गई बिजली की कीमत का भुगतान डिस्कॉम/विद्युत विभाग की तात्कालिक शुल्क दरों के अनुसार करना होगा.
प्र ५. भारत सरकार के पूर्ववर्ती कार्यक्रम ‘‘सभी के लिए 24&7 बिजली’’ का भी समान उद्देश्य है. अत: यह इस कार्यक्रम से किस तरह भिन्न है?
उत्तर‘‘सभी के लिए 24&7 बिजली’’ राज्यों के साथ एक संयुक्त पहल है जिसमें विशिष्ट राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के रोड मैप एवं कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए विद्युत क्षेत्र के सभी सेग्मेंटों  अर्थात विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, ऊर्जा दक्षता, डिस्कॉम की माली हालत इत्यादि को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर सभी को 24 घंटे बिजली सुलभ कराई जा सके. सभी के लिए बिजली से संबंधित दस्तावेजों में विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यु चेन के लिए आवश्यक विभिन्न कदमों का विवरण शामिल है.
सभी घरों को कनेक्टिविटी मुहैया कराना 24&7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. ‘‘सौभाग्य’’ बिजली मुहैया कराने के मसले का समाधान करने की दिशा में एक आवश्यक संरचनात्मक सहायता है.
प्र ६. वितरण क्षेत्र में दो प्रमुख योजनाएं यथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डीडीयूजीजेवाई और शहरी क्षेत्रों के लिए आईपीडीएस पर पहले से ही अमल किया जा रहा है, अत: एक नई योजना की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर.दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) के तहत गांवों/ घरों में बुनियादी विद्युत ढांचे का सृजन, मौजूदा बुनियादी ढांचे को मज़बूत एवं विस्तार करना,मौजूदा फीडरों/ वितरण ट्रांसफार्मरों/उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाना शामिल है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बेहतर की जा सके. इसके अलावा अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के साथ-साथ केवल उन बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन मुहैया कराए जाते हैं, जिसकी पहचान राज्यों द्वारा अपनी सूची के मुताबिक की जाती है. हालांकि ऐसे कई गांव हैं जहां काफी पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है लेकिन कई कारणों से अनेक घरों में बिजली कनेक्शन अब तक सुलभ नहीं हो पाए हैं. कई ऐसे गरीब परिवार हैं जिनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है, लेकिन ये परिवार आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं हंै. अनपढ़ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि विद्युत कनेक्शन कैसे लिया जाता है? दूसरे शब्दों में, अनपढ़ लोगों के लिए बिजली कनेक्शन लेने के मार्ग में बाधाएं आती हैं. कई जगहों पर आस-पास बिजली के खम्भे नहीं हैं. विद्युत कनेक्शन लेने के लिए संबंधित घरों से अतिरिक्त खंबे एवं कंडक्टर लगाने का प्रभार लिया जाता है.
इसी तरह शहरी क्षेत्रों में एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत बिजली सुविधा मुहैया कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाता है, लेकिन कुछ परिवारों को मुख्यत: उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अब तक विद्युत कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं क्योंकि वे आरंभिक कनेक्शन चार्ज अदा करने में समर्थ नहीं हैं.
                अत: इन सभी कमियों को दूर करने और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी गैर विद्युतीकृत परिवारों को बिजली कनेक्शन मुहैया कराने से संबंधित प्रवेश बाधा दूर करने और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी मुहैया कराने के मुद्दे को सुलझाने के लिए ही ‘‘सौभाग्य’’ का शुभारंभ किया गया है.
प्र ७. क्या ‘‘सौभाग्य’’ योजना की लागत डीडीयूजीजेवाई के तहत उपलब्ध परिव्यय से अलग है?
उत्तर.हां, सौभाग्य योजना पर आने वाली 16,320 करोड़ रुपये की लागत डीडीयूजीजेवाई के तहत किए जा रहे निवेश के अलावा है.
प्र ८. राज्यों को धनराशि के आबंटन का पैमाना क्या है?
उत्तर.योजना के तहत परियोजनाओं को मंजूरी राज्यों द्वारा पेश की जाने वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्टों (डीपीआर) के आधार पर दी जाएगी. इस योजना के तहत धनराशि का कुछ भी अग्रिम आवंटन नहीं किया जाता है.
प्र ९. योजना को पूरे देश में कैसे लागू किया जाएगा?
उत्तर.परियोजना से संबंधित प्रस्ताव राज्यों के डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा तैयार किए जाएंगे और भारत सरकार के सचिव (विद्युत) की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय निगरानी समिति द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे. मंजूर परियोजनाओं के तहत विद्युतीकरण कार्य संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग द्वारा पूरे किए जाएंगे. ये कार्य टर्नकी ठेकेदारों अथवा विभाग अथवा उन उपयुक्त एजेंसियों के ज़रिए पूरे किए जाएंगे जो मानकों के मुताबिक इस कार्य को पूरा करने में समर्थ है.
प्र १०. समयबद्ध ढंग से लक्ष्य प्राप्ति के लिए रणनीति क्या है?
उत्तर.घरों को बिजली कनेक्शन तेज़ी से मुहैया कराने के लिए गांवों/ग्रामीण कलस्टरों में लाभार्थियों की  पहचान के लिए शिविर लगाए जाएंगे. इसके तहत मोबाइल एप/ वेब पोर्टल के साथ अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा. बिजली कनेक्शन से संबंधित आवेदनों को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से भी पंजीकृत किया जाएगा और आवेदक की फोटो, पहचान कार्ड की प्रति और/अथवा विभिन्न विवरण जैसे की मोबाइल नंबर/आधार नंबर/बैंक खाता संख्या इत्यादि सहित समस्त दस्तावेजीकरण कार्य संबंधित शिविरों में ही मौके पर पूरे किए जाएंगे, ताकि जल्द से जल्द कनेक्शन दिए जा सकें.
                ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत/सार्वजनिक संस्थानों को भी आवेदन पत्र इक_ा करने एवं प्रलेखन कार्य पूरा करने के साथ-साथ बिजली बिलों के वितरण, राजस्व संग्रह और अन्य मान्य गतिविधियों के लिए भी अधिकृत किया जाएगा.
प्र ११.विद्युत नेटवर्क में 4 करोड़ घरों को शामिल करने पर बिजली की मांग में अनुमानित वृद्धि कितनी होगी?
उत्तर    प्रतिघर 1 किलोवाट के औसत लोड और प्रतिदिन 8 घंटे तक लोड के औसत उपयोग को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष लगभग 28000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली और लगभग 80000 मिलियन यूनिट अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होगी. यह एक परिवर्तनीय आंकड़ा है. आय के साथ-साथ बिजली उपयोग की आदत बढऩे पर बिजली की मांग में परिवर्तन होना तय है. इन अनुमानों के परिवर्तित होने पर भी इस आंकड़े में तब्दीली होगी.
प्र १२. उन घरों के लिए क्या प्रावधान है जहां ग्रिड लाइनें उपलब्ध कराना संभव नहीं है?
उत्तर    सुदुर एवं दूर-दराज के इलाकों में अवस्थित घरों को 200 से लेकर 300 वाट के सोलर पावर पैक और 5 एलईडी लाइट, 1 डीसी पंखा, 1 डीसी पावर प्लग के साथ बैटरी बैकिंग सुलभ कराई जाएगी. इसके साथ ही 5 वर्षों के लिए मरम्मत एवं रखरखाव सुविधा भी मुहैया
कराई जाएगी.
प्र १३.‘‘सौभाग्य’’ के तहत कितने गैर विद्युतीकृत घरों को कवर किया जाएगा?
उत्तर    देश में लगभग 4 करोड़ गैर विद्युतीकृत घर होने का अनुमान लगाया गया है, जिनमें से लगभग 1 करोड़ बीपीएल ग्रामीण परिवारों को डीडीयूजीजेवाई की मंज़ूर परियोजनाओं के तहत पहले भी कवर किया जा चुका है. अत: कुल 300 लाख घरों को इस योजना के तहत कवर किए जाने की आशा है जिनमें से 250 लाख घर ग्रामीण क्षेत्रों में और 50 लाख घर शहरी क्षेत्रों में है.
प्र १४.  क्या इस योजना में अवैध उपभोक्ताओं को माफ करते हुए इसमें उन्हें पंजीकृत कराने की सुविधा दी जाएगी? क्या स्कीम में कुछ इस तरह का भी लक्षित किया गया है?
उत्तर    अवैध कनेक्शनों की समस्या से संबंधित डिस्कॉम/विद्युत विभाग अपने-अपने नियमों/ नियमनों के अनुसार निपटेगा. हालांकि इस योजना में स्पष्ट शब्दों में यह उल्लेख किया गया है कि ऐसे डिफॉल्टरों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा जिनके कनेक्शन काटे जा चुके हैं.
प्र १५. यह योजना लोगों के लिए उनके दैनिक जीवन मे किस तरह उपयोगी साबित होगी?
उत्तर    बिजली सुविधा मुहैया कराई जाने से निश्चित तौर पर लोगों के जीवन की गुणवत्ता और मानव विकास पर  हर पहलु से सकारात्मक असर पड़ेगा. पहला, बिजली सुलभ होने से घर को रोशन करने के लिए केरोसिन का विकल्प मिल जाएगा और घर के अंदर केरोसिन से होने वाला प्रदूषण समाप्त हो जाएगा और इस तरह लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी. इसके अतिरिक्त बिजली सुविधा से देश के सभी हिस्सों में दक्ष एवं अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में मदद मिलेगी. सूर्यास्त के बाद घरों के रोशन होने से वहां रहने वाले लोगों विशेषकर महिलाओं को अधिक व्यक्तिगत सुरक्षा महसूस होगी. इसी तरह सूर्यास्त के बाद सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी. बिजली सुलभ होने से सभी क्षेत्रों में शिक्षा सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा और सुर्यास्त के बाद घरों में बेहतर रोशनी मिलने से बच्चे अपनी पढ़ाई पर और ज़्यादा समय दे सकेंगे और इस तरह भविष्य में अपने कॅरियर में ज़्यादा आगे बढ़ सकेंगे. घरों के रोशन होने से इस बात की भी संभावना बढ़ गई है कि महिलाएं पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा अध्ययन कर सकेंगी और आर्थिक रूप से भी अधिक आमदनी अर्जित कर सकेंगी.
प्र १६. इस योजना से आर्थिक विकास और रोजग़ार सृजन को कैसे बढ़ावा मिलेगा?
उत्तर    घरों को रोशन करने के लिए केरोसिन के बजाए बिजली का उपयोग होने पर केरोसिन पर वार्षिक सब्सिडी घट जाएगी. इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों का आयात घटाने में भी मदद मिलेगी. हर घर में बिजली सुलभ होने से संचार के सभी साधनों यथा रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि का कहीं अधिक उपयोग संभव हो पाएगा जिससे लोग इन संचार साधनों के ज़रिए सभी तरह की आवश्यक सूचनाएं प्राप्त कर सकेंगे. किसानों को नई एवं बेहतर कृषि तकनीकों, कृषि मशीनरी, गुणवत्ता पूर्ण बीजों इत्यादि के बारे में जानकारी मिल पाएगी जिससे कृषि उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव हो पाएगी. इसके अतिरिक्त किसान एवं युवा कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने की संभावनाएं भी तलाश सकेंगे.
                विश्वसनीय विद्युत सेवाएं उपलब्ध न होने से दैनिक उपयोग की वस्तुओं वाली नई दुकानें, विनिर्माण कार्यशालाएं, आटा मिलें, कुटीर उद्योग इत्यादि खोलने मे भी आसानी होगी. इस तरह की आर्थिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजग़ार भी सृजित होंगे. स्वयं इस योजना के क्रियान्वयन से भी रोजग़ार सृजित होंगे क्योंकि घरों में विद्युतीकरण कार्य के लिए अर्धकुशल/कुशल कामगारों की आवश्यकता पड़ेगी. इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान लगभग 1,000 लाख दैनिक श्रम दिवस
सृजित होंगे.
                16,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि व्यय होने से कुछ सकारात्मक बाह्य असर पड़ेंगे जिससे और अधिक रोजग़ार सृजन में मदद मिलेगी जिससे अर्थिक विकास की गति बढ़ेगी.
पीआईबी