विशेष लेख


volume-37,15-21 December 2018

 

कैसे कार्य करता है जी-20?

जी-20 की वार्षिक कार्यसूची में मंत्रियों, विदेश मंत्रालयों के गुप्तचरों (जिन्हें शेरपा कहा जाता है), केंद्रीय बैंक गवर्नरों और विश्व नेताओं की 50 बैठकें शामिल होती हैं. प्रत्येक वर्ष कार्य सूची लीडर्स सम्मेलन यानी नेताओं के सम्मेलन में समाप्त होती है, जिसमें राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष हिस्सा लेते हैं. सम्मेलन में वे वर्षभर हुई जी-20 बैठकों में की गई नीतिगत अनुशंसाओं के आधार पर एक संयुक्त घोषणा जारी करते हैं. उदाहरण के लिए:

.  हेम्बर्ग 2017 जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व के नेताओं ने संरक्षणवाद को सीमित करने, नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली का अनुपालन करने और वैश्वीकरण के लाभ साझा करने के लक्ष्य से अत्याधुनिक नीतियां अपनाने पर सहमति व्यक्त की थी.

.  हांगझू 2016 जी-20 शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं ने जी-20 की भूमिका का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की थी ताकि कर चोरी के खिलाफ  कार्रवाई और हरित बांडों में अंतर्राष्ट्रीय निवेश के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने हेतु वैश्विक सहयोग का विस्तार किया जा सके.

जी-20 का कामकाज मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित होता है:

.  वित्तीय भाग के अंतर्गत जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों और उनके अधीनस्थ अधिकारियों की सभी बैठकें शामिल हैं. वर्षभर आयोजित होने वाली इन बैठकों में वे वित्तीय और आर्थिक मुद्दों, जैसे मौद्रिक, राजकोषीय और विनिमय दर नीतियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं.

.  शेरपा या गुप्तचर भाग के अंतर्गत सीमावर्ती मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिनमें अन्य मुद्दों के अलावा राजनीतिक संबंध, भ्रष्टाचार के खिलाफ  संघर्ष, विकास, व्यापार, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन, स्त्री-पुरुष समानता जैसे मुद्दे शामिल होते हैं. इन बैठकों में जी-20 देशों का प्रतिनिधित्व उनके सम्बद्ध मंत्री और निर्दिष्ट शेरपा या गुप्तचर द्वारा किया जाता है. शेरपा आयोजना, वार्ता और कार्यान्वयन में सम्बद्ध देश के नेता की ओर से हिस्सा लेता है. प्रत्येक शेरपा तद्नुरूप अपने मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष का जी-20 की प्रगति, और प्रतिनिधि वार्ता एवं कार्य दलों के लिए प्रासंगिक विषयों के अनुरूप मार्गदर्शन करता है.

हर वर्ष एक नया देश अध्यक्षता (यहां पर अर्जेंटीना) ग्रहण करता है और वह पिछले अध्यक्ष (यहां पर जर्मनी) और आगामी अध्यक्ष (जापान) के साथ मिल कर काम करता है. इन तीनों देशों को ट्रोइका कहा जाता है. समूह की कार्यसूची में संगतता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

जी-20 की अध्यक्षता समूह के 20 सदस्यों के बीच हर वर्ष बारी बारी से बदलती रहती है. जी-20 का कोई मुख्यालय अथवा स्थायी स्टाफ  नहीं है इसलिए अध्यक्ष राष्ट्र बैठकों का आयोजन करता है और कार्य सूची तथा सदस्यों के बीच आम सहमति तय करने में प्रमुख भूमिका निभाता है.

जी-20 का क्षेत्र और प्रभाव व्यापक करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह सही अर्थों में वैश्विक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन, जैसे संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक इसकी कार्यवाहियों में हिस्सा लेते हैं.

जी-20 अपनी कार्यसूची और निर्णय करने की प्रक्रिया को समृद्ध बनाने के लिए सदस्य राष्ट्रों से परे विशेषज्ञता और परिदृश्य को अपने में समाहित करता है. अत: यह कई प्रतिभागी समूहों को आमंत्रित करता है, जैसे जी-20 देशों से सिविल सोसायटी संगठन, जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, प्रत्येक प्रतिभागी समूह स्वतंत्र होता है और उनके राष्ट्रीय सदस्यों में से कोई एक उनका अध्यक्ष होता है. यह नीतिगत अनुशंसाओं का एक समूह विकसित करता है, जिन्हें आगामी जी-20 सम्मेलन को औपचारिक रूप से सौंपा जाता है.

जी-20 के वर्तमान प्रतिभागी समूहों में निम्नाकित शामिल हैं: व्यापार 20 (बी 20), सिविल 20 (सी 20), श्रम 20 (एल 20), विज्ञान 20 (एस 20), महिला 20 (डब्ल्यू 20) और युवा 20 (वाई 20).

रोज़गार समाचार डेस्क द्वारा संकलित