विशेष लेख


volume-45, 9 - 15 February, 2019

 

खेलो इंडिया  भारत को खेलकूद में अग्रणी देश बनाना

विधांशु कुमार

देश में खेलकूद को लेकर एक नई क्रांति का उदय हुआ है: जनवरी में जहां अधिकांश भारतीय खेल प्रेमी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारतीय क्रिकेट टीम की शानदार जीत का जश्न मना रहे थे, वहीं पुणे में खेलकूद का एक अन्य आयोजन हुआ, जिसका भारतीय खेलकूद पर दूरगामी असर पड़ेगा. 12 दिन के खेलो इंडिया युवा खेल-2019 की 9 जनवरी को शुरुआत हुई.

उद्घाटन समारोह दो बार के ओलिम्पिक पदक विजेता सुशील कुमार जैसे नामी गिरामी खिलाडिय़ों की उपस्थिति में संपन्न हुआ. खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आयोजन का शुभारंभ किया. खेल मंत्री राठौड़ ने खिलाडिय़ों के साथ शपथ लेकर आयोजन की पारंपरिक शुरुआत की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उद्घाटन आयोजन में प्रेरक संदेश भेजा. संदेश में उन्होंने युवा खेलों की थीम ‘‘# खेलो 5 मिनट और’’ पर जोर दिया.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज विश्व में हर व्यक्ति खेलकूद में भाग लेना चाहता है और इसके लिए उन्हें एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है.

खेलो इंडिया युवा खेल की यह दूसरी कड़ी है, पिछले वर्ष यह आयोजन खेलो इंडिया स्कूल खेलों के नाम से हुआ था, जिसे इस वर्ष खेलो इंडिया युवा खेल का नाम दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और खेलकूद मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में यह एक महत्वाकांक्षी अभियान है. खेल मंत्री स्वयं ओलिम्पिक विजेता हैं.

आइए देखें कि ये खेल दरअसल हैं क्या?

तथ्य

भारत एक युवा देश है, जिसकी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों की है. यदि हम 15 से 29 आयुवर्ग की बात करें, तो हमारी जनसंख्या का 27 दशमलव 5 प्रतिशत इसी श्रेणी में आएगा. यह संख्या भारत को विश्व के सबसे युवा देशों में एक बनाती है.

हालांकि जब हम ओलिम्पिक और एशियाई खेलों जैसे प्रमुख आयोजनों में भारतीय प्रदर्शन पर गौर करते हैं, तो हमें मिले पदकों की संख्या इस आबादी से मेल नहीं खाती. इसके अलावा देश में जीवनशैली से जुड़े रोगों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसका एक प्रमुख कारण व्यायाम और खेलकूद की कमी है.

खेलो इंडिया की शुरुआत जनवरी 2018 में खेलकूद में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी. 2018 से पहले खेलकूद से जुड़ी कई योजनाएं थीं, जैसे राजीव गांधी खेल अभियान, शहरी-बुनियादी खेल और राष्ट्रीय खेलकूद प्रतिभा खोज जैसी योजनाएं. ये सभी योजनाएं और कार्यक्रम अलग अलग लागू किए जा रहे थे, लेकिन अब इन सबको बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक साथ कर लिया गया है. इसी समग्र योजना को खेलो इंडिया नाम दिया गया है.

वास्तव में इस दिशा में गुजरात सरकार के एक समान प्रयास खेल महाकुंभ से प्रेरणा मिली है. इस आयोजन की व्यापकता और इसके राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि खेलो इंडिया युवा खेल आने वाले कल में भारत को खेलकूद महाशक्ति साबित करेगा.

खेलो इंडिया गेम्स का पहला संस्करण जनवरी 2018 में आयोजित किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शुभारंभ किया था. यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा की भारतीय संस्कृति को खेलकूद में आगे बढ़ाता है.

इस वर्ष पुणे में बेलावडी स्थित श्री शिव छत्रपति खेलकूद परिसर मुख्य रूप से इस आयोजन का केंद्र बना.

खेलो इंडिया के उद्देश्य

खेलो इंडिया का प्रमुख उद्देश्य भारत को खेलकूद में सफल और महान देश बनाना है. इसकी शुरुआत भारतीय खेलकूद में एक नया जीवन फूंकने और खेलकूद की संस्कृति में नयी चेतना लाने के उद्देश्य से की गई है. यह लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है, जब देश का हर व्यक्ति कम से कम एक खेल में भाग ले. खेलों में व्यापक जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए खेलो इंडिया कार्यक्रम का आरंभ किया गया है.

इसके उद्देश्य इस प्रकार हैं:

क)     एक सुगठित प्रतिस्पर्धा के माध्यम से वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं में व्यापक युवा भागीदारी.

ख)     बिल्कुल निचले स्तर पर प्रतिभा की पहचान.

ग)     मौजूदा खेलकूद अकादमियों के जरिए प्रतिभा को समुचित मार्गदर्शन और पोषण. केंद्र सरकार या राज्य सरकार या सार्वजनिक-निजी भागीदारी से नई संस्थाओं का गठन.

घ)     निचले स्तरों जैसे तहसील, जिला, राज्य स्तर पर खेलकूद के बुनियादी ढांचे का निर्माण.

खेलो इंडिया की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि यह पूरे देश में आसानी से लागू की जा सकती है. इसके तहत निर्धारित प्रतियोगिता व्यवस्था ब्लॉक स्तर तक पूरे देश को शामिल करती है.

प्रतियोगिता 5 आयु वर्गों में आयोजित की जाती है: 6 से 12, 18 से कम उम्र, 18 से 36, 36 से 50 और 50 से ऊपर का आयु वर्ग. यहां यह गौरतलब है कि न केवल बच्चों और युवाओं को बल्कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों को भी प्रतियोगिता कार्यक्रमों में प्रोत्साहित किया गया है. यह वास्तव में एक आमूल-चूल परिवर्तन है. अब तक जो कुछ हो रहा था, उससे एकदम अलग.

मैं पहले भी लिख चुका हूं और फिर उसकी याद दिलाना चाहूंगा जो देश में खेलकूद की संस्कृति लाने के बारे में महान खिलाड़ी कपिल देव ने कहा था. विश्व कप विजेता कपिल देव ने कहा था कि भारत तभी खेलकूद की संस्कृति वाला देश बनेगा, जब बच्चों के साथ उनके दादा-दादी भी खेलों में शामिल हों. उनके कहने का उद्देश्य था कि जब खेल को लेकर सभी आयु वर्ग के लोग समान रूप से उत्साही होंगे, तभी सच्चे अर्थों में देश में खेल संस्कृति स्थापित होगी.

अब खेलो इंडिया कार्यक्रम में सभी आयु वर्ग के लिए खेलों की शुरुआत ने हमें इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ा दिया है. 36 वर्ष से ऊपर के आयु वर्ग के लिए प्रतियोगिताओं के आयोजन का एक उद्देश्य देश की वयस्क आबादी को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित कर जीवनशैली से जुड़े रोगों से छुटकारा पाना है.

एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष को भी ध्यान में रखा जाना होगा  कि ये प्रतियोगिताएं पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं.

खेलकूद संघों और परिसंघों को प्रतियोगिताओं के संचालन में शामिल किया जा सकता है.

जहां महत्वपूर्ण लक्ष्य देश की आबादी को खेलकूद में शामिल करना और इस प्रकार उन्हें स्वस्थ बनाए रखना है, वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य ओलिम्पिक और एशियाई खेलों जैसे प्रमुख आयोजनों में भारत के लिए पदकों की संख्या बढ़ाना है.

खेलो इंडिया से जुड़ी एक प्रमुख योजना प्रतिभा खोज की है. इसके तहत बहुत छोटी उम्र में प्रतिभाओं की खोज कर उन्हें समुचित छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण देना है ताकि वे समय पर विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहें.

खेलोगे कूदोगे बनोगे लाजवाब - जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए खेलकूद.

हमारे घरों में बहुत पहले से एक आम कहावत इस्तेमाल होती रही है कि खेलोगे कूदोगे होगे खराब, पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब. खेलो इंडिया ने इस कथन को बिल्कुल पलट दिया है और खेलोगे कूदोगे बनोगे लाजवाब- जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए खेलो के प्रेरक उद्बोधन के साथ खेलकूद में बड़ी संख्या में भागीदारी का आह्वान किया है.

2019 के खेलो इंडिया युवा खेल में दो श्रेणियों - (अंडर 17) और (अंडर 21) में भागीदारी थी. इस वर्ष पुणे में बड़ी संख्या में खिलाडिय़ों ने भाग लिया. उनकी संख्या लगभग दोगुनी होकर 9000 तक पहुंच गई. सर्वश्रेष्ठ 1000 युवा खिलाडिय़ों/बच्चों को अगले 8 वर्ष तक 5 लाख रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति मिलेगी. इससे उन्हें बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों के लिए तैयारी करने में मदद मिलेगी.

2019 के खेलो इंडिया खेल काफी सफल रहे हैं. स्टार इंडिया से इसका सीधा प्रसारण और हॉट स्टार से ऑनलाइन प्रसारण किया गया.

# 5 मिनट और

हम बड़े उत्साह से स्वस्थ रहने की पिछले वर्ष दी गई प्रेरक चुनौती का स्मरण करते हैं. प्रधानमंत्री और खेलमंत्री दोनों ने अपनी फिटनेस फोटो और वीडियो जारी की और लोगों से भी अपने ऐसे चित्र और वीडियो भेजने का आग्रह किया. अपनी तरह का अनूठा और उत्साही यह अभियान ऑनलाइन हिट हो गया और कई महीनों तक वायरल बना रहा. इस अभियान ने लोगों को जीवन में स्वास्थ्य के महत्व के बारे में भी जागरूक किया और उन्हें इस दिशा में सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया.

इसी तरह का एक अभियान इस बार भी शुरू किया गया, जिसे #5 मिनट और नाम दिया गया, जिसका अर्थ है व्यायाम और खेलकूद के लिए 5 मिनट और दें. पुणे युवा खेलों के आधिकारिक प्रसारक और युवा तथा खेलकूद मंत्रालय ने देश के नागरिकों से बाहर निकल कर #5 मिनट और के तहत खेलने का आग्रह किया.

इस अभियान का उद्देश्य था, कि यदि प्रत्येक बच्चा खेलकूद को 5 मिनट अतिरिक्त देता है, तो यह कुल देशवासियों के हिसाब से करोड़ों मिनट हो जाएंगे. धीरे-धीरे यह अभियान गति पकड़ेगा और भारत बड़ी संख्या में पदक जीत कर खेलों में अपनी वास्तविक क्षमता की पहचान कर सकेगा.

खेलो इंडिया युवा खेल 2019 में 18 खेल प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन हुआ. ये थे-

·         तीरंदाजी   

·         एथलेटिक्स

·         बैडमिंटन

·         बास्केटबाल

·         मुक्केबाजी

·         फुटबाल

·         जिम्नास्टिक्स

·         हॉकी

·         जूडो

·         कबड्डी

·         खो-खो

·         निशानेबाजी

·         तैराकी

·         टेबल टेनिस

·         टेनिस

·         वॉलीबाल

·         भारोत्तोलन

·         कुश्ती

इस वर्ष से दो नए खेल टेबल टेनिस और टेनिस भी शुरू किए गए हैं.

29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों से 9000 से अधिक एथलीटों ने इन खेलों में भाग लिया तथा 1800 तकनीशियन, 1000 स्वयंसेवक और 1000 कर्मचारी इन खेलों के पीछे थे.

पदक तालिका में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के लिए राज्यों में कड़ी प्रतिस्पर्धा रही. इस बार यह सौभाग्य महाराष्ट्र को प्राप्त हुआ जिसने कुल 227 पदक हासिल किए, इनमें 85 स्वर्ण, 61 रजत और 81 कांस्य पदक शामिल हैं.

दूसरे स्थान पर हरियाणा आया जिसने 62 स्वर्ण, 56 रजत और 60 कांस्य पदकों के साथ कुल 178 पदक प्राप्त जीते.

136 पदकों के साथ दिल्ली तीसरे स्थान पर रही, जिसने 48 स्वर्ण, 37 रजत और 51 कांस्य पदक जीते.

2018 में हुए पहले खेलो इंडिया गेम्स की तुलना की जाए तो इस वर्ष महाराष्ट्र ने बाजी पलटते हुए हरियाणा को दूसरे स्थान पर धकेल दिया जबकि दिल्ली ने अपना तीसरा स्थान बनाए रखा.

स्टार खिलाड़ी

खेलो इंडिया युवा खेल 2019 ने बड़ी संख्या में नई प्रतिभाओं को सामने रखा. कुछ स्थापित खिलाडिय़ों ने भी शानदार प्रदर्शन किया. यहां बेहतर प्रदर्शन करने वाले कुछ खिलाडिय़ों के नाम दिए जा रहे हैं.

बवलीन कौर

दीपा कर्माकर के बाद भारत में जिम्नास्टिक्स में कई नई प्रतिभाएं सामने आई हैं. जम्मू कश्मीर की बवलीन कौर ने एक अलग मुकाम हासिल किया है. बवलीन ने तीन स्वर्ण पदकों के साथ कुल 5 पदक जीते.

धनुष श्रीकांत

तेलंगाना के इस 16 वर्षीय निशानेबाज ने क्वालिफिकेशन दौर में 629.7 की शानदार उपलब्धि हासिल की. फाइनल में 248.9 अंक के साथ उसने स्वर्ण पदक जीता. सुनने में अक्षम धनुष श्रीकांत ने केवल 2 वर्ष पहले निशानेबाजी की शुरुआत की थी, लेकिन उसने साबित कर दिया कि वह भविष्य की उभरती उम्मीद है.

साक्षी राजेन्द्र शिटोले

महाराष्ट्र  की तीरंदाज ने पदक तालिका में अपने राज्य के सबसे ऊपर बने रहने में योगदान किया. साक्षी ने अपनी प्रतिस्पर्धा का स्वर्ण जीता. उसने पश्चिम बंगाल की सुपर्णा सिंह को 6-0 से हराया. साक्षी तोक्यो ओलिम्पिक के लिए क्वालिफाई कर देश को गौरवान्वित करना चाहती हैं.

श्रीहरि नटराज

18 वर्षीय इस तैराक ने तैराकी प्रतिस्पर्धाओं में 7 स्वर्ण पदक जीते और पिछले वर्ष के अपने रिकॉर्ड में सुधार किया.

जर्मी लालरिननुंगा

मणिपुर के इस युवा ने भारोत्तोलन में 14 राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए. उन्होंने अंडर 17 और अंडर 19 श्रेणियों में भाग लिया और ये रिकॉर्ड बनाए. उसने स्नैच में 6, क्लीन एंड जर्क में 4 और ओवरऑल में 4 रिकार्ड बनाए. जर्मी ने 2 पदक जीते और भविष्य के लिए अपनी क्षमताओं का विश्वास दिलाया.

खेलो इंडिया गेम्स ने भारतीय समाज में एक नई आशा जागृत की है और देश को खेलकूद में सक्षम राष्ट्र बनने की ओर प्रेरित किया है.

लेखक एक वरिष्ठ खेल पत्रकार और शिक्षाविद हैं. ई-मेल आईडी: vidhanshu.kumar@gmail.com