विशेष लेख


volume-45, 9 - 15 February, 2019

अंतरिम बज़ट-समावेशी विकास की प्रतिबद्धता और प्रतिबिंब

श्री प्रकाश शर्मा

आम आदमी की ढेर सारी आकांक्षाओं के बीच वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 2019 का अंतरिम बज़ट पेश किया. यह बज़ट सामाजिक-आर्थिक विकास की यात्रा में एक मील का पत्थर है.

अंतरिम बज़ट इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसे संसद में उस वक्त पेश किया गया है जब देश 21वीं सदी में समग्र विकास और उन्नति की अपनी गति तेज़ करते हुए आगे बढ़ रहा है.

सभी क्षेत्रों में व्यापक व्यय प्रावधानों के साथ बजट में सरकार की समावेशी विकास की प्रतिबद्धता को दोहराया गया है. विकास-समर्थक, युवा-समर्थक, असंगठित क्षेत्र, अकुशल श्रमिक-समर्थक, किसान-समर्थक, गऱीब-समर्थक, व्यापारी-समर्थक और गऱीब, ग्रामीण तथा शहरी व्यक्ति-समर्थक देश का यह अंतरिम बज़ट एक ऐसी अर्थव्यवस्था का प्रतिबिंब है जो कि आने वाले दशकों में दुनिया की 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के पथ पर पूरे जोश के साथ अग्रसर हो रही है.

सरकार ने बज़ट में प्रमुख घोषणाएं की हैं जो कि समाज के अल्प आय वाले लोगों की जीवनचर्या और जीवन स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आयेंगे. किसान, देश के अन्नदाता, को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत तीन किस्तों में हर साल 6000 रु. अंतरण के वित्तीय सहायता पैकेज का प्रस्ताव किया गया है. प्रत्यक्ष वित्तीय सहयोग से उन परिवारों की मदद  होगी जिनकी आजीविका कृषि पर निर्भर करती है. इस योजना के तहत, ऐसे किसान लाभान्वित होंगे जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है. सरकार की इस महत्वाकांक्षी और नई योजना से 12 करोड़ छोटे और मझोले किसान तथा उनके परिवार लाभान्वित होंगे और इससे सरकारी खज़ाने पर 75,000 करोड़ का बोझ पड़ेगा. योजना के अधीन तीन किस्तों में दो-दो हजार रुपये सीधे किसान के बैंक खाते में अंतरित किये जायेंगे.

असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिये एक मेगा पेन्शन स्कीम देश में आर्थिक असमानता में कमी लाने और एक-समान सामाजिक व्यवस्था कायम करने के लिये एक अन्य ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन के तहत सरकार ऐसे लोगों को 3000 रु. की पेन्शन देगी जो सेवानिवृत्ति से पहले हर महीने 100 रु. का अंशदान जमा करायेंगे. जो श्रमिक 18 वर्ष की आयु के होंगे उन्हें केवल 55 रु. प्रति माह का अंशदान करना होगा और सरकार इतनी ही राशि इस पेन्शन योजना में जमा करायेगी. सरकार की इस योजना पर 500 करोड़ रु. की लागत आयेगी. इस योजना से समाज के ऐसे लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्राप्त होगी जिनकी न तो नियमित आय है और न ही कोई नियमित रोजग़ार है.

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन की इस कल्याण योजना से असंगठित क्षेत्र में 10 करोड़ अकुशल कामगारों को लाभ पहुंचेगा और आने वाले 5 वर्षों में इससे दुनिया की सबसे बड़ी स्कीम बनने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनने की संभावना है.

मध्यम आय और वेतन भोगी परिवारों के लिये सरकार की आयकर छूट की घोषणा उनके चेहरों पर मुस्कान और राहत लेकर आई है. यद्यपि कर की दरें यथावत रहेंगी लेकिन 5 लाख रु. तक की वाािर्षक आय अर्जित करने वाले व्यक्तियों को कर से पूरी तरह छूट मिल जायेगी. इससे पहले यह कर छूट सीमा 60 वर्ष से नीचे के व्यक्तियों के लिये केवल 2.5 लाख रु. थी. इसके अलावा करदाताओं के लिये एक और अच्छी ख़बर है. 6.5 लाख रु. की वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को किसी तरह के आयकर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा, जिसमें 5 लाख रु. तक की छूट की सीमा और 1.5 लाख रु. की छूट आयकर अधिनियम के अनुच्छेद 80 सी के तहत होगी. मानक कटौती में भी 10,000 रु. की वृद्धि की गई है और इसे 40,000 रु. से बढ़ाकर 50,000 रु. कर दिया गया है.

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गऱीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिये महत्वपूर्ण योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजग़ार गारंटी कार्यक्रम के लिये वित्तीय आबंटन में 5000 करोड़ रु. की वृद्धि की गई है और वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिये यह 60,000 करोड़ रु. कर दिया गया है.

गायों की उत्पादकता बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय कामधेनू आयोग की स्थापना करने की घोषणा की गई है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में रोजग़ार के अधिक अवसरों के सृजन का आधार खड़ा करने की पूर्ण क्षमता है. हरियाणा में 22वां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान खोलना आम आदमी के स्वास्थ्य की देखभाल के बारे में सरकार की चिंता को दर्शाता है. पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचा सुविधाओं के लिये आबंटन में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी से निश्चित तौर पर विकास की गति में तीव्रता आयेगी और रोजग़ार के अवसरों और प्रति व्यक्ति आय में व्यापक वृद्धि होगी.

पड़ौसी देशों से बढ़ते खतरों को देखते हुए अंतरिम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिये बहुत अधिक धन आबंटित किया गया है जो कि बढक़र तीन लाख करोड़ रु. का आंकड़ा पार कर गया है. अंतरिम बज़ट में डिजिटल इंडिया को काफी महत्व प्रदान किया गया है तथा एक लाख और गांवों को डिजिटल संपर्क से जोड़ा जायेगा. सरकार की मेक इन इंडिया स्कीम को भी अंतरिम बज़ट में प्रोत्साहन दिया गया है और इसके तहत सेमी स्पीड वंदे

भारत एक्सप्रेस ट्रेन का स्वदेश में ही विकास करने की योजना शामिल की गई है.

देश के वित्तीय घाटे पर अंकुश बाहरी ऋणों की वृद्धि के दायरा को सीमित होने के तौर पर देखा जाता है. अंतरिम बज़ट में वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत बनाये रखने का प्रस्ताव किया गया है.

देश का बज़ट किसी देश के समग्र विकास की कार्यसूची को चिन्हित करता है और इस दृष्टि से अंतरिम बज़ट में की गई प्रमुख घोषणाओं से निश्चित तौर पर आम आदमी के सपने पूरे होने में सहायता मिलेगी.

ई-मेल: spsharma.rish@gmail.com

आलेख में लेखक ने निजी विचार व्यक्त  किये हैं.