विशेष लेख


volume-45, 9 - 15 February, 2019

 

मन की बातकी 52वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ (27.01.2019)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार. इस महीने की 21 तारीख को देश को एक गहरे शोक का समाचार मिला. कर्नाटक में टुमकुर जिले के श्री सिद्धगंगा मठ के डॉक्टर श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामी जी हमारे बीच नहीं रहे. शिवकुमार स्वामी जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज-सेवा में समर्पित कर दिया. भगवान बसवेश्वर ने हमें सिखाया है - कायकवे कैलास’ - अर्थात् कठिन परिश्रम करते हुए अपना दायित्व निभाते जाना, भगवान शिव के निवास-स्थान, कैलाश धाम में होने के समान है. शिवकुमार स्वामी जी इसी दर्शन के अनुयायी थे और उन्होंने अपने 111 वर्षों के जीवन काल में हज़ारों लोगों के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए कार्य किया. उनकी ख्याति एक ऐसे विद्वान के रूप में थी, जिनकी अंग्रेज़ी, संस्कृत और कन्नड़ भाषाओं पर अद्भुत पकड़ थी. वह एक समाज सुधारक थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन इस बात में लगा दिया कि लोगों को भोजन, आश्रय, शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान मिले. किसानों का हर तरह से कल्याण हो, ये स्वामी जी के जीवन में प्राथमिकता रहती थी. सिद्धगंगा मठ नियमित रूप से पशु और कृषि मेलों का आयोजन करता था. मुझे कई बार परम पूज्य स्वामी जी का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है. वर्ष 2007 में, श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामी जी के शताब्दी वर्ष उत्सव समारोह के अवसर पर हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टुमकुर गए थे. कलाम साहब ने इस मौके पर पूज्य स्वामी जी के लिए एक कविता सुनाई थी. उन्होंने कहा:

"O my Fellow Citizens - In giving, you receive happiness,

In Body and Soul- You have everything to give,

If you have knowledge - share it,

If you have resources - share them with the needy,

You, your mind and heart.

To remove the pain and suffering, and cheer the sad hearts.

In giving, you receive happiness Almighty will bless, all your actions"

डॉक्टर कलाम साहब की यह कविता श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामी जी के जीवन और सिद्धगंगा मठ के mission को सुन्दर ढंग से प्रस्तुत करती है. एक बार फिर, मैं ऐसे महापुरुष को अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूं.

मेरे प्यारे देशवासियो. 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ और उस दिन हमारा देश गणतंत्र बना और कल ही हमने आन-बान-शान के साथ गणतंत्र दिवस भी मनाया लेकिन मैं, आज कुछ और बात करना चाहता हूं. हमारे देश में एक बहुत ही महत्वपूर्ण संस्था है, जो हमारे लोकतंत्र का तो अभिन्न अंग है ही और हमारे गणतंत्र से भी पुरानी है - मैं भारत के चुनाव आयोग के बारे में बात कर रहा हूं. 25 जनवरी को चुनाव आयोग का स्थापना दिवस था, जिसे राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, National Voters Day के रूप में मनाया जाता है. भारत में जिस ह्यष्ड्डद्यद्ग पर चुनाव का आयोजन होता है उसे देखकर दुनिया के लोगों को आश्चर्य होता है और हमारा चुनाव आयोग जिस बखूबी से इसका आयोजन करता है इसे देखकर प्रत्येक देशवासी को चुनाव आयोग पर गर्व होना स्वाभाविक है. हमारे देश में यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो एक पंजीकृत मतदाता है, Registered मतदाता है - उसे मतदान करने का अवसर मिले.

जब हम सुनते हैं कि हिमाचल प्रदेश में समुद्र तल से 15,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी मतदान केंद्र स्थापित किया जाता है, तो अंडमान और निकोबार के द्वीप समूह में दूर-दराज के द्वीपों में भी वोटिंग की व्यवस्था की जाती है. और आपने गुजरात के विषय में तो जरूर सुना होगा कि गिर के जंगल में, एक सुदूर क्षेत्र में, एक पोलिंग बूथ, जो सिर्फ केवल 1 मतदाता के लिए है. कल्पना कीजिए... केवल एक मतदाता के लिए. जब इन बातों को सुनते हैं तो चुनाव आयोग पर गर्व होना बहुत स्वाभाविक है. उस एक मतदाता का ध्यान रखते हुए, उस मतदाता को उसके मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिले, इसके लिए, चुनाव आयोग के कर्मचारियों की पूरी टीम दूर-दराज़ क्षेत्र में जाती है और वोटिंग की व्यवस्था करते हैं- और यही तो हमारे लोकतंत्र की ख़ूबसूरती है.

मैं, हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने का निरंतर प्रयास करने के लिए चुनाव आयोग की सराहना करता हूं. मैं सभी राज्यों के चुनाव आयोग की, सभी सुरक्षा कर्मियों, अन्य कर्मचारियों की भी सराहना करता हंू जो मतदान प्रक्रिया में भाग लेते हैं और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करते हैं.

इस साल हमारे देश में लोकसभा के चुनाव होंगे, यह पहला अवसर होगा जहां 21वीं सदी में जन्मे युवा लोकसभा चुनावों में अपने मत का उपयोग करेंगे. उनके लिए देश की जि़म्मेदारी अपने कन्धों पर लेने का अवसर आ गया है. अब वो देश में निर्णय प्रक्रिया के हिस्सेदार बनने जा रहे हैं. ख़ुद के सपनों को, देश के सपनों के साथ जोडऩे का समय आ चुका है. मैं युवा-पीढ़ी से आग्रह करता हूं कि अगर वे मतदान करने के लिए पात्र हैं तो खुद को ज़रुर मतदाता के  रूप में Register करवाएं. हम में से प्रत्येक को अहसास होना चाहिए कि देश में मतदाता बनना, मत के अधिकार को प्राप्त करना, वो जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. साथ-साथ मतदान करना ये मेरा कत्र्तव्य है - ये भाव हमारे भीतर पनपना चाहिये. जीवन में कभी किसी भी कारण से, अगर मतदान नहीं कर पाए तो बड़ी पीड़ा होनी चाहिए. कभी कहीं देश में कुछ ग़लत होता हुए देखें तो दु:ख होना चाहिए. हां! मैंने वोट नहीं दिया था, उस दिन मैं वोट देने नहीं गया था - इसका ही ख़ामियाजा आज मेरा देश भुगत रहा है. हमें इस जि़म्मेदारी का अहसास होना चाहिए. ये हमारी वृत्ति, ये हमारी प्रवृत्ति बननी चाहिये. ये हमारे संस्कार होने चाहिएं. मैं देश की जानी-मानी हस्तियों से आग्रह करता हूं कि हम सब मिलकर voter registration हो, या फिर मतदान के दिन वोट देना हो, इस बारे में अभियान चलाकर के लोगों को जागरूक करें. मुझे उम्मीद है कि भारी संख्या में युवा मतदाता के रूप में पंजीकृत होंगे और अपनी भागीदारी से हमारे लोकतंत्र को और मजबूती प्रदान करेंगे.

मेरे प्यारे देशवासियो, भारत की इस महान धरती ने कई सारे महापुरुषों को जन्म दिया है और उन महापुरुषों ने मानवता के लिए कुछ अद्भुत, अविस्मरणीय कार्य किये हैं. हमारा देश बहुरत्ना-वसुंधरा है. ऐसे महापुरुषों में से एक थे - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस. 23 जनवरी को पूरे देश ने एक अलग अंदाज में उनकी जन्म जयन्ती मनाई. नेताजी की जन्म जयन्ती पर मुझे भारत की आजादी के संघर्ष में अपना योगदान देने वाले वीरों को समर्पित एक museum संग्रहालय का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. आप जानते हैं कि लाल किले के भीतर आज़ादी से अब तक कई ऐसे कमरे, इमारतें बंद पड़ी थी. उन बंद पड़े लाल किले के कमरों को बहुत सुन्दर संग्रहालयों में बदला गया है, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और Indian National Army को समर्पित संग्रहालय; ‘याद-ए-जलियां’; और 1857 –Eighteen Fifty Seven, India’s First War Of Independence  को समर्पित संग्रहालय और इस पूरे परिसर को क्रान्ति मन्दिरके रूप में देश को समर्पित किया गया है. इन संग्रहालयों की एक-एक ईंट में, हमारे गौरवशाली इतिहास की खुशबू बसी है. संग्रहालय के चप्पे-चप्पे पर हमारे स्वाधीनता संग्राम के वीरों की गाथाओं को बयां करने वाली बातें, हमें इतिहास के भीतर जाने के लिए प्रेरित करती हैं. इसी स्थान पर, भारत मां के वीर बेटों - कर्नल प्रेम सहगल, कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लो और मेजर जनरल शाहनवाज़ खां पर अंग्रेज हुकूमत ने मुकदमा चलाया था.

जब मैं लाल किले में, क्रान्ति मंदिर में, वहां नेताजी से जुड़ी यादों के दर्शन कर रहा था तब मुझे नेताजी के परिवार के सदस्यों ने एक बहुत ही ख़ास कैप, टोपी भेंट की. कभी नेताजी उसी टोपी को पहना करते थे. मैंने संग्रहालय में ही, उस टोपी को रखवा दिया, जिससे वहां आने वाले लोग भी उस टोपी को देखें और उससे देशभक्ति की प्रेरणा लें. दरअसल अपने नायकों के शौर्य और देशभक्ति को नई पीढ़ी तक बार बार अलग अलग रूप से निरंतर पहुंचाने की आवश्यकता होती है. अभी महीने भर पहले ही 30 दिसंबर को मैं अंडमान और निकोबार द्वीप गया था. एक कार्यक्रम में ठीक उसी स्थान पर तिरंगा फहराया गया, जहां नेताजी सुभाष बोस ने 75 साल पहले तिरंगा फहराया था. इसी तरह से अक्टूबर 2018 में लाल किले पर जब तिरंगा फहराया गया तो सबको आश्चर्य हुआ, क्योंकि वहां तो 15 अगस्त को ही यह परम्परा है. यह अवसर था आजाद हिन्द सरकार के गठन के 75 वर्ष पूरे होने का.

सुभाष बाबू को हमेशा एक वीर सैनिक और कुशल संगठनकर्ता के रूप में याद किया जाएगा. एक ऐसा वीर सैनिक जिसने आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई. दिल्ली चलो’,‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा’, जैसे ओजस्वी नारों से नेताजी ने हर भारतीय के दिल में जगह बनाई. कई वर्षों तक यह मांग रही कि नेता जी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किया जाए और मुझे इस बात की खुशी है, यह काम हम लोग कर पाए. मुझे वो दिन याद है, जब नेताजी का सारा परिवार प्रधानमंत्री निवास आया था. हमने मिलकर नेताजी से जुड़ी बहुत सारी बातें की और नेताजी सुभाष बोस को श्रद्धांजलि अर्पित की.

मुझे खुशी है कि भारत के महान नायकों से जुड़े कई स्थानों को दिल्ली में विकसित करने का प्रयास हुआ है. चाहे वो बाबा साहेब आंबेडकर से जुड़ा 26, अलीपुर रोड हो या फिर सरदार पटेल संग्रहालय हो या वो क्रांति मंदिर हो. अगर आप दिल्ली आएं तो इन स्थानों को ज़रूर देखने जाएं.

मेरे प्यारे देशवासियो, आज जब हम नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के बारे में चर्चा कर रहे हैं, और वो भी मन की बात’, में, तो मैं आपके साथ नेताजी की जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा साझा करना चाहता हूं. मैंने हमेशा से रेडियो को लोगों के साथ जुडऩे का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना है उसी तरह नेताजी का भी रेडियो के साथ काफी गहरा नाता था और उन्होंने भी देशवासियों से संवाद करने के लिए रेडियो को चुना था.

1942 में सुभाष बाबू ने आजाद हिन्द रेडियो की शुरुआत की थी और रेडियो के माध्यम से वो आजाद हिन्द फौजके सैनिकों से और देश के लोगों से सवांद किया करते थे. सुभाष बाबू का रेडियो पर बातचीत शुरू करने का एक अलग ही अंदाज़ था. वो बातचीत शुरू करते हुए सबसे पहले कहते थे - -This Is Subhash Chandra Bose Speaking To You Over The Azad Hindi Radio द और इतना सुनते ही श्रोताओं में मानो एक नए जोश, एक नई ऊर्जा का संचार हो उठता.

मुझे बताया गया कि ये रेडियो स्टेशन, साप्ताहिक समाचार बुलेटिन भी प्रसारित करता था, जो अंग्रेज़ी, हिंदी, तमिल, बांग्ला, मराठी, पंजाबी, पश्तो और उर्दू आदि भाषाओं में होते थे. इस रेडियो स्टेशन के संचालन में गुजरात के रहने वाले एम.आर. व्यास जी ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई. आजाद हिन्द रेडियो पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सामान्य जन के बीच काफी लोकप्रिय थे और उनके कार्यक्रमों से हमारे स्वाधीनता संग्राम के योद्धाओं को भी बहुत ताकत मिली.इसी क्रांति मंदिर में एक दृश्यकला संग्रहालय भी बनाया गया है. भारतीय कला और संस्कृति बहुत ही आकर्षक तरीके से बताने का प्रयास यह हुआ है. संग्रहालय में 4 ऐतिहासिक Exhibition हैं और वहां तीन सदियों पुरानी 450 से अधिक पेंटिंग्स और Art Work मौजूद हैं. संग्रहालय में अमृता शेरगिल, राजा रवि वर्मा, अवनींद्र नाथ टैगोर, गगनेंद्र नाथ टैगोर, नंदलाल बोस, जामिनी राय, सैलोज़ मुखर्जी जैसे महान कलाकारों के उत्कृष्ट कार्यों का बखूबी प्रदर्शन किया गया है. और मैं आप सबसे विशेष रूप से आग्रह करूंगा कि आप वहां जाएं और गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर जी के कार्यों को अवश्य देखें.

अब आप सोच रहे होंगे कि यहां बात कला की हो रही है और मैं आपसे गुरुदेव टैगोर के उत्कृष्ट कार्यों को देखने की बात कर रहा हूं. आपने अभी तक गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर को एक लेखक और एक संगीतकार के रूप में जाना होगा. लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि गुरुदेव एक चित्रकार भी थे. उन्होंने कई विषयों पर पेंटिंग्स बनाई हैं. उन्होंने पशु पक्षियों के भी चित्र बनाए हैं, उन्होंने कई सारे सुंदर परिदृश्यों के भी चित्र बनाए हैं और इतना ही नहीं उन्होंने human characters को भी कला के माध्यम से canvas पर उकेरने का काम किया है. और खास बात ये है कि गुरुदेव टैगोर ने अपने अधिकांश कार्यों को कोई नाम ही नहीं दिया. उनका मानना था कि उनकी पेंटिंग देखने वाला खुद ही उस पेंटिंग को समझे, पेंटिंग में उनके द्वारा दिए गए संदेश को अपने नजरिए से जाने. उनकी पेंटिंग्स को यूरोपीय देशों में, रूस में और अमेरिका में भी प्रदर्शित किया गया है.मुझे उम्मीद है कि आप क्रांति मंदिर में उनकी पेंटिंग्स को जरुर देखने जाएंगे.

मेरे प्यारे देशवासियो, भारत संतों की भूमि है. हमारे संतों ने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से सद्भाव, समानता और सामाजिक सशक्तिकरण का सन्देश दिया है. ऐसे ही एक संत थे - संत रविदास. 19 फरवरी को रविदास जयंती है. संत रविदास जी के दोहे बहुत प्रसिद्ध हैं. संत रविदास जी कुछ ही पंक्तियों के माध्यम से बड़ा से बड़ा सन्देश देते थे. उन्होंने कहा था –

जाति-जाति में जाति है,

जो केतन के पात,

रैदास मनुष ना जुड़ सके

जब तक जाति न जात

जिस प्रकार केले के तने को छिला जाए तो पत्ते के नीचे पत्ता फिर पत्ते के नीचे पत्ता और अंत में कुछ नही निकलता है, लेकिन पूरा पेड़ खत्म हो जाता है, ठीक उसी प्रकार इंसान को भी जातियों में बांट दिया गया है और इंसान रहा ही नहीं है. वे कहा करते थे कि अगर वास्तव में भगवान हर इंसान में होते हैं, तो उन्हें जाति, पंथ और अन्य सामाजिक आधारों पर बांटना उचित नहीं है.

गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी की पवित्र भूमि पर हुआ था. संत रविदास जी ने अपने संदेशों के माध्यम से अपने पूरे जीवनकाल में श्रम और श्रमिक की अहमियत को समझाने का प्रयास किया. ये कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि उन्होंने दुनिया को श्रम की प्रतिष्ठा का वास्तविक अर्थ समझाया है. वो कहते थे -

मन चंगा तो कठौती में गंगा

अर्थात यदि आपका मन और हृदय पवित्र है तो साक्षात् ईश्वर आपके हृदय में निवास करते हैं. संत रविदास जी के संदेशों ने हर तबके, हर वर्ग के लोगों को प्रभावित किया है. चाहे चित्तौड़ के महाराजा और रानी हों या फिर मीराबाई हों, सभी उनके अनुयायी थे.

मैं एक बार फिर संत रविदास जी को नमन करता हूं.

मेरे प्यारे देशवासियो, किरण सिदर ने रू4त्रश1 पर लिखा है कि मैं भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और उसके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डालूं. वो मुझसे ये भी चाहते हैं कि मैं विद्यार्थियों से अंतरिक्ष कार्यक्रमों में रूचि लेने और कुछ अलग हटकर, आसमान से भी आगे जाकर सोचने का आग्रह करूं - किरण जी, मैं आपके इस विचार और विशेष रूप से हमारे बच्चों के लिए दिए गए संदेश की सराहना करता हूं.

कुछ दिन पहले, मैं अहमदाबाद में था, जहां मुझे डॉक्टर विक्रम साराभाई की प्रतिमा के अनावरण का सौभाग्य मिला. डॉक्टर विक्रम साराभाई का भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है. हमारे space programme में देश के असंख्य युवा वैज्ञानिकों का योगदान है. हम इस बात का गर्व करते हैं कि आज हमारे Students द्वारा Develop किए गए सैटेलाइट्स और Sounding Rockets  अंतरिक्ष तक पहुंच रहे हैं. इसी 24 जनवरी को हमारे विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया कलाम - सेटLaunch किया गया है. ओडिशा में यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए Sounding Rockets ने भी कई कीर्तिमान बनाए हैं. देश आज़ाद होने से लेकर 2014 तक जितने Space Mission हुए हैं, लगभग उतने ही Space Mission की शुरुआत बीते चार वर्षों में हुई हैं. हमने एक ही अंतरिक्ष यान से एक साथ 104 satellites लॉन्च करने का वल्र्ड रिकॉर्ड भी बनाया है. हम जल्द ही chandrayaan -2 अभियान के माध्यम से चांद पर भारत की मौजूदगी दर्ज कराने वाले हैं.

हमारा देश, स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग जानमाल की रक्षा में भी बखूबी कर रहा है. चाहे साइक्लोन हो, या फिर रेल और सडक़ सुरक्षा, इन सब में स्पेस टेक्नोलॉजी से काफी सहायता मिल रही है. हमारे मछुआरे भाइयों के बीच NAVIC Devices  बांटे गए हैं, जो उनकी सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक तरक्की में भी सहायक हैं. हम स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं की Delivery और Accountability को और बेहतर करने के लिए कर रहे हैं. " Housing For All" यानि सबके लिए घर’ - इस योजना में 23 राज्यों के करीब 40 लाख घरों को जिओ-टैग किया गया है. इसके साथ ही मनरेगा के तहत करीब साढ़े तीन करोड़ संपत्तियों को भी जिओ-टैग किया गया. हमारे सैटेलाइट्स आज देश की बढ़ती शक्ति का प्रतीक हैं. दुनिया के कई देशों के साथ हमारे बेहतर संबंध में इसका बड़ा योगदान है. साउथ एशिया सैटेलाइटस तो एक अनूठी पहल रही है, जिसने हमारे पड़ोसी मित्र राष्ट्रों को भी विकास का उपहार दिया है. अपनी बेहद Competitive Launch Services के माध्यम से भारत आज न केवल विकासशील देशों के, बल्कि विकसित देशों के सैटेलाइटस को भी Launch करता है. बच्चों के लिए आसमान और सितारे हमेशा बड़े आकर्षक होते हैं. हमारा Space Programme बच्चों को बड़ा सोचने और उन सीमाओं से आगे बढऩे का अवसर देता है, जो अब तक असंभव माने जाते थे. यह हमारे बच्चों के लिए सितारों को निहारते रहने के साथ-साथ, नए-नए सितारों की खोज करने की ओर प्रेरित करने का vision है.

मेरे प्यारे देशवासियों,मै हमेशा कहता हूं, जो खेले वो खिले और  इस बार के खेलो इंडिया में ढ़ेर सारे तरुण और युवा खिलाड़ी खिल के सामने आए हैं. जनवरी महीने में पुणे में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 18 गेम्स में करीब 6,000 खिलाडिय़ों ने भाग लिया. जब हमारा Sports  का Local Eco System मजबूत होगा यानी जब हमारा Base मजबूत होगा तब ही हमारे युवा देश और दुनिया भर में अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन कर पाएंगे. जब Local Level पर खिलाड़ी Best प्रदर्शन करेगा तब ही वो Global Level पर भी Best प्रदर्शन करेगा. इस बार खेलो इंडियामें हर राज्य के खिलाडिय़ों ने अपने-अपने स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है. मेडल जीतने वाले कई खिलाडिय़ों का जीवन ज़बर्दस्त प्रेरणा देने वाला है.

मुक्केबाज़ी में युवा खिलाड़ी आकाश गोरखा ने सिल्वर मेडल जीता. मैं पढ़ रहा था आकाश के पिता रमेश जी, पुणे में एक कॉम्प्लेक्स में बतौर Watchman का काम करते हैं. वे अपने परिवार के साथ एक Parking Shed में रहते हैं. वहीं महाराष्ट्र की अंडर-21 महिला कबड्डी टीम की कप्तान सोनाली हेलवी सतारा की रहने वाली है. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने पिता को खो दिया और उनके भाई और उनकी मां ने सोनाली के हुनर को बढ़ावा दिया. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कबड्डी जैसे खेलों में बेटियों को इतना बढ़ावा नहीं मिलता है. इसके बावजूद सोनाली ने कबड्डी को चुना और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. आसनसोल के 10 साल के अभिनवशॉ, खेलो इंडिया यूथ गेम्स में सबसे कम उम्र के स्वर्ण पदक विजेता हैं. कर्नाटक से एक किसान की बेटी अक्षता बासवानी कमती ने weightlifting में स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने अपनी जीत का श्रेय अपने पिता को दिया. उनके पिता बेलगाम में एक किसान हैं. जब हम इंडिया के निर्माण की बात कर रहे हैं तो वो युवा शक्ति के संकल्प का ही तो न्यू इंडिया है. खेलो इंडिया की ये कहानियां बता रही है कि न्यू इंडिया के निर्माण में सिर्फ बड़े शहरों के लोगों का योगदान नहीं है  बल्कि छोटे शहरों, गांव, कस्बों से आने वाले युवाओं-बच्चों, Young Sporting Talents , उनका भी बहुत बड़ा योगदान है.

मेरे प्यारे देशवासियो, आपने कई सारे प्रतिष्ठित ब्यूटी contest के बारे में सुना होगा. पर क्या आपने toilet चमकाने के कॉन्टेस्ट के बारे में सुना है? अरे पिछले लगभग एक महीने से चल रहे इस अनोखे कॉन्टेस्ट में 50 लाख से अधिक शौचालयों ने हिस्सा ले भी लिया है. इस अनोखे contest का नाम है स्वच्छ सुन्दर शौचालय’. लोग अपने शौचालय को स्वच्छ रखने के साथ-साथ उसे रंग-रौगन करके, कुछ पेंटिंग्स बना कर सुन्दर भी बना रहे हैं. आपको कश्मीर से कन्याकुमारी कच्छ से कामरूप तक की स्वच्छ सुन्दर शौचालयकी ढ़ेर सारी photo social media पर भी देखने को मिल जायेंगी. मैं सभी सरपंचों और ग्राम प्रधानों से अपनी पंचायत में इस अभियान का नेतृत्व करने का आवाह्न करता हूं. अपने स्वच्छ सुन्दर शौचालयकी फ़ोटो को #mylzzatghat के साथ सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करें.

साथियों, 2 अक्टूबर, 2014 को हमने अपने देश को स्वच्छ बनाने और खुले में शौच से मुक्त करने के लिए एक साथ मिलकर एक चिर-स्मरणीय यात्रा शुरू की थी. भारत के जन-जन के सहयोग से आज भारत 2 अक्टूबर, 2019 से काफी पहले ही खुले में शौच मुक्त होने की ओर अग्रसर है जिससे कि बापू को उनकी 150वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा सके.

स्वच्छ भारत के इस चिर-स्मरणीय यात्रा में मन की बातके श्रोताओं का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है और इसीलिए तो आप सबसे यह बात साझा करते हुए खुशी हो रही है कि पांच लाख पचास हज़ार से अधिक गांवों ने और 600 जिलों ने स्वयं को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया है और ग्रामीण भारत में स्वच्छता converge 98%को पार कर गया है और कऱीब नौ करोड़ परिवारों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

मेरे नन्हें-मुन्ने साथियो, परीक्षाओं के दिन आने वाले हैं. हिमाचल प्रदेश के निवासी अंशुल शर्मा ने Mygov पर लिखा है कि  मुझे परीक्षाओं और Exam Warriors के बारे में बात करनी चाहिए. अंशुल जी, यह मुद्दा उठाने के लिए आपको धन्यवाद. हां, कई परिवारों के लिए साल का पहला हिस्सा Exam Season होता है. विद्यार्थी, उनके माता-पिता से लेकर शिक्षक तक, सारे लोग परीक्षाओं से सम्बंधित कार्यों में व्यस्त रहते हैं.

प्रधानमंत्री ने छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों के साथ दूसरी बार परीक्षा पे चर्चा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में छात्रों, अध्यापकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा पे चर्चा के तहत दूसरी बार बातचीत की. बातचीत का दौर करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान छात्र, अध्यापक और अभिभावक निश्चित  दिखाई दिए. प्रधानमंत्री की हाजिऱजवाबी और हास्य पर वे कई बार हंसे और तालियां बजाईं.

इस बार इस कार्यक्रम में देश भर से आए छात्रों, और विदेशों में रहने वाले भारतीय छात्रों ने भी हिस्सा लिया.

बातचीत के लिए माहौल तैयार करते हुए उन्होंने परीक्षा पे चर्चा को लघु भारत का रूप बताया. उन्होंने कहा कि यह भारत के भविष्य का प्रतीक है. उन्हों ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि अभिभावक और अध्यापक दोनों ही इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं.

एक अध्यापक ने प्रधानमंत्री से प्रश्न किया कि अध्यापकों को उन अभिभावकों को क्या कहना चाहिए, जो अपने बच्चों की परीक्षाओं को लेकर तनाव में रहते हैं और बेवजह उम्मीदें लगा बैठते हैं. यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने भी इसी प्रकार का एक प्रश्न पूछा. इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि वे किसी को भी यह सलाह नहीं देंगे कि वह परीक्षा से किसी प्रकार प्रभावित न हो, परीक्षा का सार समझना जरूरी है. प्रधानमंत्री ने उपस्थित जन समूह से सवाल किया कि क्या परीक्षा जीवन की कोई परीक्षा है, अथवा वह किसी विशेष ग्रेड जैसे दसवीं अथवा बारहवीं कक्षा की परीक्षा है. उन्होंने कहा, जब एक बार इस संदर्भ को समझ लिया जाएगा, तो तनाव कम हो जाएगा.

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अभिभावकों को कभी भी अपने बच्चों से अपने अधूरे सपनों को पूरा करने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. हर बच्चे की अपनी क्षमता और शक्ति होती है और हर बच्चे के सकारात्मक पहलू को समझना जरूरी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अपेक्षाएं रखना आवश्यक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हम निराशा और दु:ख के माहौल में नहीं रह सकते.

अभिभावकों के तनाव, और अभिभावकों के दबाव को लेकर अनेक सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चे का प्रदर्शन अभिभावकों के लिए परिचय कार्ड नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोजन बन जाएगा, तो अपेक्षाएं बेमतलब हो जाएंगी. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में उम्मीदें बढ़ा दीं. उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि 1.25 अरब भारतीयों की 1.25 अरब अपेक्षाएं होनी चाहिएं. इन अपेक्षाओं को अभिव्यक्त किया जाना चाहिए और इन्हें पूरा करने के लिए हमें अपनी क्षमता को मिलकर बढ़ाना चाहिए.

एक अभिभावक ने आशंका जताई कि उनका बेटा पहले पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन ऑनलाइन गेम्स की वजह से अब वह पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहा है. इसके उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं नहीं समझता कि प्रौद्योगिकी से छात्रों का परिचय बुरी बात है, बल्कि यह अच्छीं बात है, परन्तु प्रौद्योगिकी से सोचने- विचारने का विस्तार होना चाहिए. प्ले  स्टेशन अच्छा  है, लेकिन इस कारण हमें खेल के मैदान को भूलना नहीं चाहिए.

समय प्रबंधन तथा थकान से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सभी 125 करोड़ लोग मेरे परिवार के सदस्य हैं. जब कोई व्यक्त अपने परिवार के लिए कार्य करता है, तो वह थकान का अनुभव कैसे कर सकता है? उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिन वह अपना कार्य नई ऊर्जा के साथ शुरू करते हैं.

छात्रों ने प्रधानमंत्री से पूछा कि अध्ययन को आनंददायक कैसे बनाया जा सकता है और परीक्षाएं किस तरह व्यक्तित्व को बेहतर बना सकती हंै? प्रधानमंत्री ने कहा कि सही भावना के साथ परीक्षाएं देना महत्वतपूर्ण है. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं से व्यक्ति मजबूत बनता है और इसे नापसंद नहीं किया जाना चाहिए.

छात्रों ने विषय व भविष्य चयन के संदर्भ में प्रधानमंत्री से सलाह पाने की इच्छा व्यक्त की. छात्रों ने कहा कि प्रत्येक छात्र में पृथक योग्यता होती है. इसलिए यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक छात्र गणित और विज्ञान में अच्छा हो. इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि विचारों की स्पष्टता और आत्मविश्वास आवश्यक तत्व है. विज्ञान और गणित आवश्यक है, परन्तु अन्य विषयों में भी बहुत संभावनाएं हैं. बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अवसर उपलब्ध हैं.

एक छात्र ने पिछले वर्ष आयोजित हुए टाउन हॉल कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि अब उसके माता-पिता परीक्षा और भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त हो गये हैं. छात्र ने कहा कि माता-पिता का सकारात्मक दृष्टिकोण बच्चों के जीवन में महत्वगपूर्ण योगदान देता है.

छात्रों ने बच्चों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता के संबंध में प्रश्न किये. उत्तर में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिस्पर्धा दूसरों के साथ नहीं, बल्कि अपने पिछले प्रदर्शन के साथ ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कोई अपने पिछले प्रदर्शन से ही प्रतिस्पर्धा करता है, तो निराशावाद और नकारात्मकता को आसानी से पराजित किया जा सकता है.

छात्रों ने शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षाओं को केवल रटने की विद्या पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि इस बात का आकलन किया जाना चाहिए कि छात्र ने क्या सीखा है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी ज्ञान प्राप्ति को केवल परीक्षाओं तक ही सीमित नहीं किया जा सकता. हमारी शिक्षा प्रणाली को हमें इस तरह सक्षम बनाना चाहिए कि हम जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकें.

अवसाद या निराशा के संबंध में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे राष्ट्र के लिए यह चिंता का विषय है. भारतीय संस्कृति में इसका सामना करने और इसे दूर करने के उपाय हंै. हम अवसाद तथा मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मामलों के बारे में जितनी अधिक बातचीत करेंगे, उतना ही बेहतर होगा.

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अचानक अवसाद की स्थिति में नहीं पहुंच जाता. ऐसे संकेत स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं कि व्यक्ति अवसाद की स्थिति में जा रहा है. इन संकेतों को नजरअंदाज करना अच्छी बात नहीं है. इसके विपरीत हमें इस संबंध में अधिक बातचीत करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परामर्श देना सहायक हो सकता है, क्योंकि इससे व्यक्ति अपनी समस्याओं के बारे में अधिक बातचीत करता है.

मैं सभी विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और शिक्षकों को शुभकामनाएं देता हूं. मैं इस विषय पर आज मन की बातके इस कार्यक्रम में चर्चा करना ज़रूर पसंद करता, लेकिन आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मैं दो दिन बाद ही 29 जनवरी को सवेरे 11 बजे परीक्षा पे चर्चाकार्यक्रम में देश भर के विद्यार्थियों के साथ बातचीत करने वाला हूं. इस बार Students के साथ-साथ Parents  और Teachers  भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले हैं. और इस बार कई अन्य देशों के student भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे. इस परीक्षा पे चर्चामें परीक्षाओं से जुड़े सभी पहलुओं, विशेष रूप से stress free exam यानी तनाव-रहित परीक्षा के संबंध में अपने नौजवान मित्रों के साथ बहुत सारी बातें करूंगा. मैंने इसके लिए लोगों से input और idea भेजने का आग्रह किया था; और मुझे बहुत खुशी है कि Mygov पर बड़ी संख्या में लोग अपने विचार साझा कर रहे हैं. इनमें से कुछ विचारों और सुझावों को मैं निश्चित तौर पर टाउन हॉल प्रोग्राम के दौरान आपके सामने रखूंगा. आप जरुर इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें......सोशल मीडिया और नमो ऐप के माध्यम से आप इसका लाइव telecast भी देख सकते हैं.

मेरे प्यारे देशवासियो. 30 जनवरी पूज्य बापू की पुण्यतिथि है. 11 बजे पूरा देश शहीदों को श्रद्धांजलि देता है. हम भी जहां हों दो मिनट शहीदों को जरुर श्रद्धांजलि दें. पूज्य बापू का पुण्य स्मरण करें और पूज्य बापू के सपनों को साकार करना, नये भारत का निर्माण करना, नागरिक के नाते अपने कत्र्तव्यों का निर्वाह करना - इस संकल्प के साथ, आओ हम आगे बढें. 2019 की इस यात्रा को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाएं. मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद.  - पसूका