विशेष लेख


volume-46, 16 - 22 February, 2019

 

आज के समय की मांग स्व-रोज़गार

विष्णु चौहान

आज का युवा शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ एक मानसिकता तैयार कर लेता है, कि उसे नौकरी करनी है और उसे मालिक नहीं नौकर बनना है. इस मानसिकता के कारण  उसे सदैव परेशानियों का सामना करना पड़ता है  क्योंकि  आज के दौर में  बढ़ती हुई आबादी के अनुसार  नौकरियां सीमित हैं, इसलिए जरूरी है कि युवाओं में शिक्षा के साथ-साथ कौशल का विकास भी किया जाए. जिससे  युवा  स्व-रोज़गार अपनाकर न केवल स्वयं स्वावलंबी बनें, बल्कि  और 4  साथियों को भी रोज़गार देने में सक्षम हों. आज के दौर में युवाओं को यह सोच अवश्य विकसित करनी चाहिए कि वह स्वयं मालिक बनेंगे और 10 लोगों को रोज़गार देंगे. इस सोच के साथ  शिक्षा के  सहित  स्व-रोज़गार  की तरफ ध्यान देना, आज के दौर की मांग है.  इसलिए  युवाओं को स्व-रोज़गार अपनाने के लिए  कौशल विकास केंद्र व  अन्य ऐसे केंद्र जो तकनीकी तौर पर  उनको स्वावलंबी, हाथ का दस्तकार बनाने में सक्षम हंै कि सहायता लें और  स्व-रोज़गार अपनाकर  स्वयं को वह अपने आस-पास रह रहे युवाओं को स्वावलंबी बनाने का  कार्य करें.  स्वावलंबन के  लिए  अनेक  ऐसे क्षेत्र हैं  जिनमें  रुचि अनुसार कौशल प्राप्त कर  अपने जीवन को सरल एवं सुखद बनाया जा सकता है. स्व-रोज़गार के लिए  जब बात शुरू की है  तो  ध्यान  कौशल विकास केंद्रों में  दी जाने वाली शिक्षा  पर भी अवश्य जाना चाहिए. हरियाणा व अन्य राज्यों में विशेषकर विश्वकर्मा कौशल विकास केंद्र में, विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग  कौशल सिखा कर युवाओं को स्वावलंबी  बनाया जा रहा है. ऐसे ही स्वावलंबन की सोच रखने वाले युवकों  को ध्यान में रखते हुए स्व-रोज़गार को  अपनाने के लिए स्व-रोज़गार के विभिन्न क्षेत्र हैं जैसे कपड़ों की डिजाइनिंग, भवन का निर्माण, भवन का अंतिम रूप व अन्य-अन्य. स्व-रोज़गार के विभिन्न क्षेत्रों में एक क्षेत्र लकड़ी से बने हुए फर्नीचर का भी है. लकड़ी से बना फर्नीचर  व उसको डिज़ाइन करने का कौशल  भी विशेष महत्व रखता है. आमतौर पर घरों में फर्नीचर को डिज़ाइन करने का काम बढ़ई को दिया जाता है, लेकिन अगर बड़े रेस्तरां, होटल्स या ऑफिस की बात हो, तो वहां पर फर्नीचर डिजाइनिंग को भी उतना ही महत्व दिया जाता है, जितना इंटीरियर डिजाइनिंग या अन्य चीजों को और यही कारण है कि आज के दौर में फर्नीचर डिजाइनिंग एक अलग क्षेत्र बनकर उभरा है. अगर आप चाहें तो इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं-

काम का स्वरूप

कौशल में निपुण एक व्यक्ति अगर कार्य करे तो उसका जहांं दायित्व उस क्षेत्र में निर्माण का है वही उसका दायित्व उस निर्माण के लिए अलग अलग तरीके से सुंदर डिजाइन तैयार करने का भी है. यह कार्य  उसको  विशेष प्रकार की ख्याति एवं व्यापार में उन्नति देने में सहायक सिद्ध  होगा. बात करें  फर्नीचर बनाने वाले की तो एक फर्नीचर डिजाइनर का काम सिर्फ फर्नीचर को डिज़ाइन करने तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि उसे अपनी कल्पनाशीलता का प्रयोग करके व क्लाइंट की जरूरत को समझ कर फर्नीचर तैयार करके देना होता है. मसलन, कुछ लोग लकड़ी तो कुछ लोग फर्नीचर में शीशे आदि का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. वहीं कुछ जगहों पर थीम बेस्ड फर्नीचर की डिमांड की जाती है. इसलिए एक फर्नीचर डिज़ाइनर का काम प्लानिंग से लेकर उसके एग्जीक्यूशन, आर्गेनाइजेशन व सुपरवाइजिंग तक होता है. सबसे पहले वह फर्नीचर को डिज़ाइन करने की प्लानिंग करता है, जिसमें बजट से लेकर फर्नीचर डिज़ाइन व क्वालिटी तक का ध्यान रखा जाता है और फिर वह उसका एग्जीक्यूशन करता है, जिसमें वह अन्य लोगों को नेतृत्व करते हुए बेहतरीन फर्नीचर तैयार करवाता है.

कौशल

वस्तुओं के निर्माता व डिज़ाइनर का काम काफी विस्तृत होता है. एक फर्नीचर डिजाइनर को अपने काम व उसमें इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की जानकारी तो होनी चाहिए ही, साथ ही उसका रचनात्मक व आर्टिस्टिक सेंस का होना बेहद जरूरी है. इसके अतिरिक्त एक फर्नीचर डिज़ाइनर को अपने काम के दौरान कई लोगों से संपर्क करना पड़ता है, इसलिए उसकी नेतृत्व क्षमता व कम्यूनिकेशन स्किल्स बेहतर होने चाहिए. अमूमन, फर्नीचर का डिजाइन पहले कंप्यूटर पर ही बनाया जाता है और क्लाइंट से अप्रूवल लिया जाता है, इसलिए उसे कंप्यूटर का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए. एक फर्नीचर डिजाइनर एक बेजान लकड़ी या धातु को एक आकर्षक रूप देता है, इसलिए उसमें वह सब गुण होने चाहिएं जो एक आम-सी लकड़ी को खास बना सके. इन सबसे अतिरिक्त एक फर्नीचर डिजाइनर में मार्केटिंग स्किल्स व बिजनेस की भी अच्छी समझ होनी आवश्यक है. साथ ही उसका मार्केट में चल रहे नए ट्रेंड से अवगत होना भी जरूरी है.

कोर्स

इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए छात्रों का दसवीं या बारहवीं पास होना जरूरी है. जहां कुछ संस्थान दसवीं पास छात्रों को फर्नीचर डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला देते हैं, वहीं कुछ संस्थानों में मिनिमम क्वालिफिकेशन 12वीं है. फर्नीचर डिजाइनर बनने के लिए छात्र फर्नीचर डिजाइनिंग का डिप्लोमा, सर्टिफिकेट या बैचलर डिग्री कोर्स कर सकते हैं. जो युवा बारहवीं कक्षा से कम पढ़े हैं वह कौशल विकास केंद्रों में अपनी रुचि अनुसार क्षेत्र में प्रशिक्षण ले स्व-रोज़गार अपना सकते हैं.

अवसर

आर्थिक तौर पर सशक्त समाज में चूंकि आजकल फर्नीचर को भी काफी तवज्जो मिलने लगी है, इसलिए छात्रों के पास अवसरों की कमी हो ऐसा नहीं कहा जा सकता है. फर्नीचर डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद छात्र किसी डिज़ाइनर के साथ काम कर सकते हैं या किसी फर्नीचर डिजाइनिंग कंपनी में जॉब कर सकते हैं. वहीं थोड़े अनुभव के बाद आप तीन चार मित्र जो एक ही क्षेत्र में कौशल  ज्ञान रखते हों मिलकर  बैंकों से ऋण लेकर आप खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं और विभिन्न ऑफिस, कॉरपोरेट कंपनियों, होटल्स या रेस्त्रां आदि के लिए फर्नीचर डिज़ाइन कर सकते हैं. देशभर में सरकार ने युवाओं को कौशल ज्ञान देने के लिये जहां एक तरफ कौशल विकास केंद्रों की स्थापना की है, वहीं दूसरी ओर देशभर में संचालित आई टी आई में विभिन्न क्षेत्रों में कोर्स चला युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दे शिक्षित करने का कार्य बखूबी शुरू किया हुआ है.

आय के संदर्भ में

अगर इस क्षेत्र में आमदनी की बात की जाए तो शुरुआती दौर में व्यक्ति न्यूनतम दस से पंद्रह हजार प्रतिमाह आसानी से कमा सकता है. वहीं थोड़े अनुभव के बाद आमदनी भी बढ़ती है. इसके अतिरिक्त अगर आप खुद का व्यवसाय शुरू करते हैं तो आमदनी आपको मिलने वाले आर्डर्स पर निर्भर करेगी. व्यापार में जहां एक और कौशल कार्य करता है वहीं दूसरी ओर व्यक्ति की शालीनता भी कार्य करती है, हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए

प्रमुख संस्थान

विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय, पलवल, हरियाणा.

इंडियन प्लायवुड इंडस्ट्रीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरू.

गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़.

एपीजे इंस्टीटयूट ऑफ डिज़ाइन, नई दिल्ली.

एक्स्टीरियर-इंटीरियर, विभिन्न केन्द्र.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद.

इंस्टीट्यूट ऑफ फर्नीचर डिजाइनिंग, पटियाला.