विशेष लेख


volume-48, 2- 8 March, 2019

 

ट्राई के नये नियमों से उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के चैनल चुनने का अधिकार मिला

डॉ. शीतल कपूर

प्रसारण बाज़ार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के वास्ते भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने केबल और डीटीएच ऑपरेटर्स के लिये नए टैरिफ प्लान जारी किए हैं. नये नियमों में उपभोक्ताओं को अपनी पसंद के टीवी चैनल चुनने का अधिकार देने का प्रयास किया गया है और कोई भी ऑपरेटर उन्हें ऐसे चैनलों/पैकेज बुके देखने के लिये मज़बूर नहीं कर सकता, जिसकी विषयवस्तु उन्हें पसंद नहीं है. इस पृष्ठभूमि में ट्राई की नई व्यवस्था 29 दिसंबर, 2018 से लागू हो गई, परंतु चैनलों का चयन करने के लिये ग्राहकों को पर्याप्त समय देने के लिये समय-सीमा फिर से 31 जनवरी, 2019 तक बढ़ा दी. इसके अलावा, दिनांक 12 फरवरी की  प्रेस विज्ञप्ति के तहत प्राधिकरण ने उन उपभोक्ताओं के लिये, जो अपने विकल्प नहीं चुन पाये थे, समय सीमा 31 मार्च, 2019 तक बढ़ा दी है. यह विश्वास किया जाता है कि यदि उपभोक्ता बुद्धिमानी से अपने विकल्प चुनें और विषयवस्तु की गुणवत्ता के आधार पर अपने चैनलों का चयन करें तो वे अपनी राशि का सही मूल्य प्राप्त करेंगे तथा टीवी देखने का उनका मौजूदा बिल भी कम हो जायेगा. चैम्बरलिन ने भी अपनी पुस्तक ‘‘दि थ्योरि ऑफ मोनोपोलिस्टिक कम्पीटिशन’’ में  बाज़ारों के बारे में लिखा है जहां भिन्न-भिन्न उत्पादों की बिक्री करने वाले विके्रता बड़े पैमाने पर होते हैं, उपभोक्ताओं का अधिकतम फायदा होता है’. यद्यपि यह प्रसारण के इतिहास में पहली बार हुआ है कि भारतीय उपभोक्ता को उन टीवी चैनलों को देखने की आज़ादी दी गई है जिन्हें वे पसंद करते हैं और तद्नुसार वे भुगतान कर सकेंगे. ऐसा विश्वास किया जाता है कि विक्रेताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिये फायदेमंद स्थिति होगी.

12 फरवरी, 2019 तक दजऱ् सूचना के अनुसार कऱीब 100 मिलियन केबल सर्विस टीवी होम्स और 67 मिलियन डीटीएच टीवी होम्स हैं, जिनमें से लगभग 65 प्रतिशत केबल सेवा ग्राहकों ने और 35 प्रतिशत डीटीएच ग्राहकों ने अपने चैनलों के विकल्प दे दिये हैं. अनेक उपभोक्ताओं ने ट्राई से संपर्क करते हुए कहा है कि उन्हें चैनल चुनने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि चैनल चुनने की प्रणाली देश में पहली बार शुरू की गई है.

एक बयान में ट्राई ने कहा है कि कुछ मामलों में, स्थानीय केबल ऑपरेटर (एलसीओज) ग्राहकों से उनके मध्य जागरूकता पैदा करने और विकल्प प्राप्त करने के लिये उनसे संपर्क नहीं कर पाये हैं. कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें उनके ऑपरेटर्स ने नई व्यवस्था में शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और उनके पास आईटी सुविधा नहीं है अथवा अपने विकल्प दायर करने के लिये आईटी सिस्टम का प्रयोग करने में सक्षम नहीं हैं. हाल में कुछ ऐसे मामलों का पता चला है कि जिन उपभोक्ताओं ने अपने विकल्प नहीं चुने थे उनके पे चैनलों को निष्क्रिय कर दिया गया है. ऐसी घटनाएं उपभोक्ताओं के लिये परेशानी पैदा कर रही हैं.

ट्राई ने सभी डीपीओज को अपने ऐसे उपभोक्ताओं के लिये एक बेस्ट फिट प्लानतैयार करने को कहा है, जिन्होंने अभी तक अपने विकल्प नहीं चुने हैं और इसकी समयावधि 31 मार्च, 2019 तक बढ़ा दी है.  प्लान उपभोक्ताओं की उपयोग पद्धति, भाषा और चैनलों की लोकप्रियता के आधार पर तैयार की जायेगी. प्लान तैयार करते समय, डीपीओज को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनका मासिक भुगतान वर्तमान टैरिफ प्लान के तहत निर्धारित भुगतान से अधिक न हो.

ट्राई ने 10 जनवरी को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि ग्राहकों को 100 फ्री चैनल (एसडी रेज्योल्यूशन) चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता है, जिन्हें 130 रु. के बेस पैक (करों सहित) में पेश किया जायेगा. चुने गये चैनल ए-लॉ-कार्टे, फ्री टू एअर चैनलों, या पे चैनलों या पे चैनलों के बुके अथवा इनमें से किसी भी संयोजन में हो सकते हैं. उपभोक्ता इनमें से विकल्प चुन सकते हैं. ट्राई के आदेश के बाद, सभी प्रसारकों जैसे सोनी, ज़ी, स्टार, डिस्कवरी, सन, टर्नर और वायकॉम ने अपने व्यक्तिश: पे चैनलों के साथ-साथ चैनलों के बुके के लिये मूल्य घोषित कर दिये हैं. अत: अब एक प्रमुख बदलाव यह आया है कि ग्राहकों को ए-ला कार्टे और बुके टीवी चैनल्स के बीच से चैनल चुनने का अधिकार हो गया है. ट्राई ने आगे स्पष्ट किया है कि एक ही घर अथवा

स्थान पर दूसरे टेलीविजन/ अतिरिक्त टेलीविजन के लिये नेटवर्क कैपिसिटी फीस अनिवार्य नहीं है. ऑपरेटर्स छूट देने का प्रस्ताव करने या समूची फीस को माफ  करने के लिये स्वतंत्र हैं परंतु यही एकसमान छूट किसी खास लक्षित क्षेत्र के लिये आवास में दूसरे/अतिरिक्त टीवी कनेक्शनों पर नेटवर्क कैपिसिटी फीस के संबंध में होगी. नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं को, यदि वे महसूस करते हैं कि कोई पैकेज/ प्लान विशेष काम नहीं कर रहा है, अपना प्लान बदलने की भी अनुमति प्रदान की गई है. कस्टमाइज़्ड पैकेज और ए-ला-कार्टे कुछेक नई चीज़ें हैं जो ग्राहकों के अनुभव में योगदान करेंगे. ट्राई ने यहां तक स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च, 2019 तक उन ग्राहकों के लिये कोई लॉक-इन अवधिनहीं होगी जो ऑपरेटर्स के बेस्ट फिट प्लानमें परिवर्तित हो चुके हैं. अत:, ऑपरेटर्स ग्राहकों को, यदि वे अपनी स्वयं की कस्टमाइज्ड़ प्लान चुन चुके हैं, बेस्ट फिट प्लान जारी रखने के लिये मज़बूर नहीं कर सकते. यद्यपि, यह एक शुरुआत है और ऐसी स्थिति हो सकती है प्रसारकों और ऑपरेटर्स द्वारा वसूले जाने वाले प्रभारों में कुछ  कमी आ सकती है जो कि बाज़ार व्यवस्थाओं, दर्शकों और प्रतिस्पर्धा की गंभीरता पर निर्भर करता है, लेकिन उचित मूल्य प्राप्त करते हुए उपभोक्ताओं को फायदा ज़रूर पहुंचेगा.

(लेखक कमला नेहरू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक हैं. ईमेल: sheetal_kpr@ hotmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.