विशेष लेख


volume-3, 20 -26 April, 2019

कड़ी मेहनत और पिछली गलतियों से सीख का मिलता है लाभ

सिविल सेवा के सफल अधिकारी सौरभ सुमन यादव

सौरभ सुमन यादव ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा - 2018 के हाल में घोषित नतीजों में 55वां स्थान हासिल किया है.

सौरभ ने रोज़गार समाचार के सवालों के जवाब में कहा कि हालात अनुकूल नहीं होने पर भी हमें हौसला बनाये रखते हुए लगातार मेहनत करनी चाहिये. उन्होंने कहा कि उनकी यह सफलता लगन और कड़ी मेहनत का नतीजा है. रोजगार समाचार के सवालों पर उनके जवाब-

प्रश्न: आपकी बेहतरीन उपलब्धि पर हम आपको दिल से बधाई देते हैं. हमें खुशी है कि आपकी कड़ी मेहनत रंग लायी. आपको यह पता लगने पर कैसा लगा कि भारत की सबसे कठिन परीक्षा में सफल रहने के अलावा आपने अच्छा दर्जा भी हासिल किया है? खुशी के उन पलों को क्या आप हमारे पाठकों के साथ बांटेंगे?

मेरा तो सपना सच हो गया. मैंने इसके लिये वर्षों तक कड़ी मेहनत की थी. इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मैंने अपने परिवार के लिये खुशी महसूस की. मेरे परिवार ने मेरी तैयारी की समूची प्रक्रिया में मदद करने के लिये अनगिनत कुर्बानियां दी हैं.

प्रश्न: आपकी सफलता का राज क्या है?

राज कुछ नहीं है. मेरे विचार से मामला सिर्फ लगे रहने और प्रतिकूल हालात में हार नहीं मानने का है. मैंने हार मानने के बजाय मजबूत बने रहने, नाकामियों से सबक लेने तथा अगली बार और कड़ी मेहनत करने की कोशिश की. मैंने उन चीजों के बारे में चिंता को मन से निकाल देने की कोशिश की जिन पर मेरा अख्तियार नहीं है.

प्रश्न: इस परीक्षा के लिये आपने किस तरह से तैयारी की? प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं तथा साक्षात्कार के लिये आम तौर पर आपकी रणनीति क्या थी?

पहला कदम परीक्षा के लिये पाठ्यक्रम का अध्ययन और उसे पूरी तरह आत्मसात करने का था. इसके बाद मैंने परीक्षा के बारे में जानने के मकसद से पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को देखा. मैंने विभिन्न विषयों के लिये अपने स्रोतों को सीमित रखने की कोशिश की ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो और उसे दोहराने के लिये वक्त मिल जाये. मैंने अपनी पहली कुछ कोशिशों से सीखा था कि इस परीक्षा में कामयाबी के लिये लिखने का काफी अभ्यास जरूरी है. इसलिये मैंने अपना कम-से-कम आधा समय लिखने के अभ्यास को दिया. मैंने एक टेस्ट शृंखला भी खरीदी ताकि अपनी तैयारी का जायजा लेकर प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं के लिये उसमें सुधार कर सकूं.

साक्षात्कार के लिये मैंने अपने विस्तृत आवेदन पत्र (डीएएफ) के हरेक बिंदु की पूरी तैयारी की. मैंने दो अभ्यास साक्षात्कारों में हिस्सा लेने के अलावा सहयोगियों और वरिष्ठों का भी दिशानिर्देश हासिल किया.

प्रश्न: प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं के लिये सामान्य अध्ययन के लंबे-चौड़े पाठ्यक्रम पर आपकी रणनीतियां क्या थीं?

प्रारंभिक परीक्षा - सामान्य अध्ययन के पर्चे के लिये मैंने बुनियादी पाठ्य पुस्तकों को अच्छी तरह पढ़ने पर ध्यान केन्द्रित किया. मैंने प्रयास किया कि समसामयिक घटनाओं पर मेरी अच्छी पकड़ हो. इसके बाद अपनी तैयारी का जायजा लेने के लिये मैंने एक पूरी टेस्ट शृंखला को हल करने की रणनीति अपनायी.

मुख्य परीक्षा- सामान्य अध्ययन 1: अपरिवर्तनशील विषयों के लिये मैंने सामान्य पाठ्य पुस्तकों को पढ़ा. भारतीय समाज पर खंड कुछ हद तक परिवर्तनशील है. इसलिये मैंने विषयों से संबंधित समसामयिक घटनाओं का भी अध्ययन किया.

सामान्य अध्ययन 2 और सामान्य अध्ययन 3: मैंने सामान्य पाठ्य पुस्तकों के अलावा विषय से संबंधित समसामयिक घटनाओं का भी अध्ययन किया. मैंने अपरिवर्तनशील और समसामयिक घटनाओं को जोड़ने की कोशिश की. समाचारपत्र इन दो पर्चों के लिये सूचना के बहुत अच्छे स्रोत हैं. मैं 'इंडियन एक्सप्रेसÓ और 'मिंटÓ हर रोज पढ़ता था.

सामान्य अध्ययन 4: इस पर्चे के लिये मैंने पाठ्यक्रम के हर शब्द और मुहावरे की स्पष्ट समझ विकसित करने की कोशिश की. इसके बाद मैंने इन सिद्धांतों पर विभिन्न स्थितियों में अमल की ओर ध्यान केन्द्रित किया. मैंने विभिन्न स्रोतों से संकेत शब्दों और उदाहरणों की एक सूची भी बनायी ताकि मेरे पास एक तैयार संदर्भ रहे.

विभिन्न विषयों की तैयारी के लिये मैंने इन किताबों का सहारा लिया -

सामान्य अध्ययन 1:

1. भूगोल - एनसीईआरटी की कक्षा 11 और 12 की किताबें https://www. pmfias.com/

से नोट्स

2.            इतिहास/संस्कृति - प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत पर एनसीईआरटी की पुरानी किताबों का चुनिंदा अध्ययन और ऐन इंट्रोडक्शन टू इंडियन आर्ट (एनसीईआरटी कक्षा 11)

3.            भारतीय समाज - इंडियन सोसायटी एंड सोशल चेंजेज इन इंडिया (एनसीईआरटी कक्षा 12)

4.            इंडियन स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस (विपिन चंद्रा)

5.            मॉडर्न वर्ल्ड हिस्ट्री (नॉर्मन लोव)

 

 

प्रोफाइल

नाम: सौरभ सुमन यादव

उम्र: 31 वर्ष

सिविल सेवा परीक्षा 2018 में दर्जा: 55

वैकल्पिक विषय: प्रबंधन

माध्यम: अंग्रेजी

शैक्षिक पृष्ठभूमि: बी.टेक, एमबीए (आईआईएम लखनऊ)

दसवीं कक्षा में अंकों का प्रतिशत: 93

बारहवीं कक्षा में अंकों का प्रतिशत: 91

स्नातक (महाविद्यालय का नाम और अंक): बी.टेक, हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ  टेक्नोलॉजी, कोलकाता, सीजीपीए 8.4/10

स्नातकोत्तर (महाविद्यालय का नाम और अंक): एमबीए, आईआईएम लखनऊ, सीजीपीए 7.24/10

सामान्य अध्ययन 2:

1.            इंडियन पॉलिटी (एम लक्ष्मीकांत)

2.            दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट

3.            विभिन्न स्रोतों/इंटरनेट से समसामयिक विषयों का अध्ययन

सामान्य अध्ययन 3:

1.            मैंने किसी पुस्तक विशेष का सहारा नहीं लिया. इस पर्चे के लिये मैं नोट्स, मिंट समाचारपत्र और विभिन्न स्रोतों से समसामयिक विषयों के अध्ययन पर निर्भर था.

सामान्य अध्ययन 4:

लेक्सीकॉन/एथिक्स, इंटीग्रिटी एंड एप्टीट्यूड (मैक्ग्रॉहिल)

प्रश्न: क्या आपने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की तैयारियों को आपस में जोड़ा या फिर ये अलग-अलग थीं?

प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं में काफी कुछ समान है इसलिये मैंने एक मिलाजुला नजरिया अपनाया. प्रारंभिक परीक्षा के पहले पर्चे में सामान्य अध्ययन के पहले, दूसरे और तीसरे पर्चों के कई विषय हैं. लेकिन प्रारंभिक परीक्षा से महीना भर पहले मैंने खास तौर से इस पर ही ध्यान केन्द्रित किया.

प्रश्न: आपने निबंध के लिये कैसे तैयारी की?

निबंध की तैयारी के सिलसिले में मैंने लिखने का काफी अभ्यास किया. मैंने तीन से चार महीनों तक हर हफ्ते कम-से-कम दो निबंध लिखने और अपने दोस्तों से इनकी समीक्षा कराने की कोशिश की. मैंने निबंध की टेस्ट शृंखला भी ली. सामान्य अध्ययन का ज्ञान निबंध लेखन में काफी काम आता है. मैंने इंटरनेट पर मौजूद टॉपर्स के नमूना निबंधों से सीखने का भी प्रयास किया. सिविल सेवा परीक्षा 2018 में मैंने निबंध के जिन विषयों को चुना वे हैं -

1.            गरीबी कहीं भी हो यह हर जगह संपन्नता के लिये खतरा है.

2.            रस्मी नैतिकता आधुनिक जीवन को निर्देशित नहीं कर सकती.

प्रश्न: तैयारी के दौरान आपने समय का प्रबंधन कैसे किया?

मैंने कार्यालय के समय से पहले और बाद में ज्यादा-से-ज्यादा घंटों का इस्तेमाल करने का प्रयास किया. इसके अलावा मैंने सप्ताहांतों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की कोशिश की. मैंने यह भी सुनिश्चित किया कि पाठ्यक्रम के हर खंड - निबंध, सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक को समुचित तरजीह दी जाये.

प्रश्न: आपने अपनी तैयारी की लय कैसे बरकरार रखी? तैयारी की एकरसता को तोड़ने के लिये आपने क्या किया?

मैंने कोशिश की कि अपने ध्यान को लक्ष्य पर केन्द्रित रखूं. एकरसता तोड़ने के लिये मैं अध्ययन के विषयों को बदलता रहा. खुद को उत्साहित रखने के लिये मैं खेलों और दौड़ जैसी आउटडोर गतिविधियों में भी हिस्सा लेता रहा.

प्रश्न: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों को आपकी सलाह?

मेरी पृष्ठभूमि बहुत मामूली है. मैं महसूस करता हूं कि मैंने जो कुछ भी कामयाबी हासिल की वह मेरी लगन, कड़ी मेहनत और पिछली गलतियों से सबक का परिणाम है. आप इन सिद्धांतों को अपने जीवन में अपना लें तो अपना लक्ष्य हासिल करने की आपकी संभावनाएं अच्छी होंगी.