विशेष लेख


Volume-12, 22 - 28 June 2019

 

बिम्सटेक और उसका महत्व

जाफरी मुदस्सर नोफिल

भारत के नेतृत्व में सात देशों का समूह बिम्सटेक धीरे-धीरे एक वैकल्पिक क्षेत्रीय जुड़ाव मंच के रूप में उभर रहा है.

बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक  सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’  (मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) अर्थात् बिम्सटेक के सदस्य राष्ट्रों में  बंगलादेशभारतम्यांमारश्रीलंका, थाईलैंडनेपाल और भूटान शामिल हैं. 1997 में स्थापित, बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है और यह 1.5 अरब से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो दुनिया की आबादी का लगभग 21 प्रतिशत हैं और इस क्षेत्र का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3.5 अरब अमरीकी डालर (लगभग 240 लाख करोड़ रु) का है.

भारत बिम्सटेक के तहत क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है क्योंकि सार्क अपने लक्ष्यों को पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाया है. 30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के लिए बिम्सटेक नेताओं को आमंत्रित करने का निर्णय इसी तथ्य को दर्शाता है.

बंगलादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना, म्यांमार के राष्ट्रपति यू विन म्यिंट, भूटान के प्रधानमंत्री लोटे त्शेरिंग, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और थाईलैंड के विशेष दूत और वहां की सरकार में मंत्री गिसाडा बूनराच नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने के अवसर पर मौजूद थे.

दिलचस्प बात यह है कि 2014 में, नरेंद्र मोदी ने पड़ोस को सम्मान प्रदान की एक बड़ी पहल करते हुए सार्क के सभी नेताओं को आमंत्रित किया था, जिसमें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल थे.

नवाज शरीफ की उपस्थिति ने बेहतर भारत-पाक संबंधों में बेहतरी की उम्मीद जगाई थी. दोनों नेताओं ने कई बार मुलाकात भी की, जिसमें 2015 में नरेंद्र मोदी की प्रसिद्ध लाहौर यात्रा भी शामिल थी. हालांकि, जम्मू-कश्मीर के उड़ी में भारतीय सेना के शिविर पर सितंबर 2016 के आतंकवादी हमले के बाद फिर से संबंध बढ़ गए.

हाल ही में, भारत यह कहता रहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में सार्क के अंतर्गत आगे बढऩा मुश्किल है, विशेष रूप से इस लिए कि पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को  निरंतर समर्थन दे रहा है.

पिछला सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) शिखर सम्मेलन 2014 में काठमांडू में आयोजित किया गया था, जिसमें नरेंद्र मोदी ने भाग लिया था.

2016 का सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में होना था. परन्तु उस वर्ष 18 सितंबर को उड़ी  में हमले के बाद, भारत ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने में असमर्थता व्यक्त की. बाद में बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी हिस्सा लेने से इनकार कर दिया और अंतत: सम्मेलन रद्द कर दिया गया.

बिम्सटेक अब पड़ोस नीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा जा रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पद का कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद, नई दिल्ली में एक सेमिनार में कहा कि पड़ोसी देशों और अन्य जगहों पर विकासात्मक परियोजनाओं का कार्यान्वयन उनके प्रमुख विषयों में से एक होगा. उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है और बिम्सटेक आर्थिक समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है. उनके अनुसार बिम्सटेक, सकारात्मक ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत दिखायी देता है और इसीलिए इसका लाभ उठाने और इस समूह के राष्ट्रों के नेताओं को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया.

जयशंकर ने कहा कि परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भारत के रिकॉर्ड में सुधार की बहुत गुंजाइश है और वेे उनका त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने की योजना बना रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे कम परस्पर जुड़े हुए क्षेत्रों में से एक है. उन्होंने कहा कि भारत को बिम्सटेक से इस क्षेत्र के विकास में योगदान की उम्मीद है. भारत को बिम्सटेक से जुडऩे का महत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा पद संभालने के बाद की गई पहली आधिकारिक यात्राओं से भी पता चल सकता है. मोदी ने मालदीव और श्रीलंका का दौरा किया, वहीं जयशंकर भूटान गए.  बिम्सटेक ने 14 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें  अलग-अलग सदस्य देश अग्रणी हैं. भारत परिवहन और संचार, पर्यटन, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन तथा आतंकवाद और सीमा पार से किए जाने वाले अपराधों की रोकथाम में अग्रणी भूमिका निभाता है.

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना 1985 में क्षेत्रीय सहकारी ढांचे को विकसित करने के क्षेत्र के सामूहिक निर्णय की अभिव्यक्ति के रूप में की गई थी. सार्क के आठ सदस्य देश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, मालदीव, पाकिस्तान और श्रीलंका हैं. इसके नौ पर्यवेक्षक भी हैं - चीन, यूरोपीय संघ, ईरान, कोरिया गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, जापान, मॉरीशस, म्यांमार और संयुक्त राज्य अमरीका.

जनवरी 2018 में, सरकार ने लोकसभा को सूचित किया था कि पाकिस्तान के रवैये और रूकावट डालने वाले दृष्टिकोण के कारण, सार्क संचार के प्रमुख क्षेत्र सहित, अपनी महत्वपूर्ण संभावनाओं को हासिल करने में असमर्थ रहा है.

भारत ने इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन में भले ही भाग नहीं लिया, परन्तु वह सार्क के अंतर्गत क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए, विषम जिम्मेदारियों सहित, अनेक उपाय करता रहा है.

भारत ने अपनी तरह केे पहलेे उपाय के रूप में मई 2017 में, दक्षिण एशिया उपग्रह प्रक्षेपित किया. इस परियोजना में स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान और संचार के व्यापक अनुप्रयोग शामिल थे.

बिम्सटेक के बारे में

समूह की वेबसाइट के अनुसार, बिम्सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है जिसमें बंगाल की खाड़ी के तटवर्ती और आस-पास के क्षेत्र में सात सदस्य राष्ट्र शामिल हैं, जो एक समीपस्थ क्षेत्रीय एकता दर्शाते हैं.

यह उप-क्षेत्रीय संगठन 6 जून, 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से अस्तित्व में आया. प्रारंभ में, आर्थिक ब्लॉक का गठन चार सदस्य राष्ट्रों-बिस्ट-ईसी (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के साथ किया गया था.

22 दिसंबर, 1997 को बैंकॉक में एक विशेष मंत्रिस्तरीय बैठक में म्यांमार को शामिल किए जाने के बाद, समूह का नाम बदलकर बिम्सट-ईसी’ (बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) कर दिया गया.

छठी मंत्रिस्तरीय बैठक (फरवरी 2004, थाईलैंड) में नेपाल और भूटान के प्रवेश के साथ, ग्रुपिंग का नाम बदलकर डब्ल्यूएएस बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) कर दिया गया.

क्षेत्रीय समूह दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच एक सेतु  बनाता है और इन देशों के बीच संबंधों के सुदृढ़ीकरण का प्रतिनिधित्व करता है. बिम्सटेक ने सार्क और आसियान सदस्यों के बीच अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक मंच भी स्थापित किया है.

इस तरह के गठजोड़ का उद्देश्य वैश्वीकरण के हमले को कम करने और क्षेत्रीय संसाधनों और भौगोलिक लाभों का उपयोग करके आम हितों के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग के माध्यम से साझा और त्वरित विकास को बढ़ावा देना था.

बिम्सटेक कई अन्य क्षेत्रीय समूहों से भिन्न एक सेक्टर-संचालित सहकारी संगठन है. छह क्षेत्रों- व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और मत्स्य पालन से शुरू करके, क्षेत्रीय सहयोग के लिए, इसने 2008 में नौ और क्षेत्रों - कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद-निरोध, पर्यावरण, संस्कृति, जनता के स्तर पर सहयोग और जलवायु परिवर्तन -में सहयोग का विस्तार किया.

यह संगठन बैंकाक घोषणा में दिए गए बिम्सटेक के संस्थापक सिद्धांतों और सदस्य देशों के नेताओं द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करता है.

बिम्सटेक के संस्थापक सिद्धांत इस प्रकार हैं:-

*             बिम्सटेक के भीतर सहयोग संप्रभुता समानता, क्षेत्रीय अखंडता, राजनीतिक स्वतंत्रता, आंतरिक मामलों में  अहस्तक्षेप, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत के लिए सम्मान पर आधारित होगा.

*             बिम्सटेक के भीतर सहयोग सदस्य राष्ट्रों को शामिल करने के लिए द्विपक्षीय, क्षेत्रीय या बहुपक्षीय सहयोग का विकल्प नहीं होगा.

 बिम्सटेक  की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच घूमती है. वर्तमान में, श्रीलंका बिम्सटेक का अध्यक्ष है. इसका प्रथम अध्यक्ष बांग्लादेश था जबकि भारत ने दो बार (2000, 2006-2008) इसका नेतृत्व किया है.

बिम्सटेक के देश विभिन्न स्तरों पर नियमित रूप से मिलते हैं. प्रत्येक स्तर की बैठक के लिए निर्दिष्ट जिम्मेदारियां तय की गईं हैं, लेकिन वे परस्पर संबद्ध हैं. बिम्सटेक की अध्यक्षता करने वाला देश बिम्सटेक शिखर सम्मेलन, मंत्रिस्तरीय बैठक, वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और बिम्सटेक कार्य समूह की बैठक सहित नियमित बैठकों के संचालन के लिए जिम्मेदार है.

बिम्सटेक शिखर सम्मेलन बिम्सटेक प्रक्रिया में उच्चतम नीति निर्धारण के लिए जिम्मेदार है. नियमों के अनुसार, शिखर सम्मेलन हर दो साल में आयोजित किया जाना चाहिए. पहला शिखर सम्मेलन बैंकाक में 2004 में आयोजित किया गया था जबकि पिछला शिखर सम्मेलन - क्रम से चौथा - 2018 में काठमांडू में आयोजित किया गया था.

मंत्रिस्तरीय बैठकें विदेशी मामलों और व्यापार तथा आर्थिक मामलों को कवर करती हैं. विदेश मंत्री स्तरीय बैठकें समग्र नीति का निर्धारण करने वाले प्रमुख प्रस्तावक के रूप में कार्य करती हैं, साथ ही नेताओं के शिखर सम्मेलन, व्यापार और आर्थिक मंत्रिस्तरीय बैठक के लिए सिफारिशें, व्यापार और निवेश क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ एफटीए नीति की निगरानी करती हैं.

2018 में काठमांडू में चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में, अन्य फैसलों के अलावा सदस्य देशों ने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से बंगाल की खाड़ी को शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ बनाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की. उन्होंने माना कि गरीबी उन्मूलन विकास के उद्देश्यों की प्राप्ति में सबसे बड़ी क्षेत्रीय चुनौती है और वे सतत विकास के लिए एजेंडा 2030 के कार्यान्वयन के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

उन्होंने बहुआयामी कनेक्टिविटी के महत्व को भी रेखांकित किया, जो क्षेत्र में साझा समृद्धि के लिए आर्थिक एकीकरण के वास्ते एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में कनेक्टिविटी ढांचे के बीच तालमेल को बढ़ावा देती है. सदस्यों ने बिम्सटेक देशों सहित दुनिया के सभी हिस्सों में आतंकवाद की कड़ी निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद की किसी भी तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं हो सकता है, चाहे उसे कोई भी अंजाम दे रहा हो या कोई भी उसके प्रति आमदा हो.

‘‘शिखर घोषणा में कहा गया कि संगठन’’ यह प्रमाणित करता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में न केवल आतंकवादियों, आतंकी संगठनों और नेटवर्क को निशाना बनाना चाहिए, बल्कि उसके लिए जिम्मेदार ऐसे देशों और गैर-सरकारी संस्थाओं की पहचान की जाए जो आतंकवाद को प्रोत्साहित, समर्थन या वित्त प्रदान करते हैं, आतंकवादियों और आतंकवादी गुटों को शरण प्रदान करते हैं और उनके गुणों का झूठा प्रचार करते हैं. संगठन आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराता है और सभी देशों से इस संबंध में एक व्यापक दृष्टिकोण तैयार करने का आग्रह करता है, जिसमें अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में आतंकवादियों और आतंकी गतिविधियों के लिए धन की आपूर्ति, आतंकवादियों  की भर्ती, और उनकी सीमा-पार आवाजाही पर रोक लगाना और कट्टरपंथ का मुकाबला करना, आतंकवाद के उद्देश्यों के लिए इंटरनेट का दुरुपयोग रोकना और आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना  शामिल है.’’

इस संबंध में, सदस्यों ने कहा कि वे आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर बिम्सटेक कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने के लिए तत्पर हैं और इसकी शीघ्र पुष्टि की जाएगी. उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि कई सदस्य राष्ट्रों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, पारम्परिक संगठित अपराध और अवैध ड्रग तस्करी से निपटने में सहयोग पर बिम्सटेक सम्मेलन की पुष्टि की है.

आतंकवाद-रोधी और अंतरर्राष्ट्रीय अपराध के तहत बिम्सटेक सहयोग को चार प्रमुख समूहों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं - खुफिया जानकारी साझा करना (श्रीलंका) आतंकवाद के लिए धन की आपूर्ति रोकना (थाईलैंड), वैधानिक और कानून प्रवर्तन मुद्दे (भारत) और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोकथाम (म्यांमार). 

विदेश मंत्रालय ने जनवरी 2013 में नई दिल्ली में कानूनी और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर पांचवें उप-समूह की मेजबानी की, जिसमें आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर कन्वेंशन का मसौदा तैयार किया गया था. सदस्यों ने दिसंबर 2009 में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, पारम्परिक संगठित अपराध और नशीली दवाओं की तस्करी से निपटने के बारे में बिम्सटेक कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए. भारत ने इसकी पुष्टि की है.

बिम्सटेक का उद्देश्य बंगाल की खाड़ी  क्षेत्र को शांतिपूर्ण, समृद्ध और सुदृढ़ बनाने  के लिए सार्थक सहयोग और गहन एकीकरण के माध्यम से एक गतिशील, प्रभावी और परिणाम-उन्मुख क्षेत्रीय संगठन बनाना है. इसके लिएएक निष्पक्षन्यायपूर्णनियम-आधारित, समान और पारदर्शी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षवाद में  विश्वास की पुष्टि  आवश्यक है, जिसके केंद्र में संयुक्त राष्ट्र और  नियमबद्ध अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली हो.

(लेखक दिल्ली स्थित एक वरिष्ठ पत्रकार हैं

ई-मेल: znofil@gmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

 

(छायाचित्र: गूगल के सौजन्य से)   उसका महत्व