विशेष लेख


अंक 13, 29 जून - 5 जुलाई 2019

जब परीक्षा में न मिलें अच्छे अंक तो क्या करें-II

श्री प्रकाश शर्मा

तुलना नहीं करें, बल्कि अपने आपसे प्रतिस्पद्र्धा करें

पनी तुलना दूसरों के साथ करना एक मानवीय मनोविज्ञान है. परंतु दूसरों के साथ तुलना करते समय हम भूल जाते हैं कि होमो सेपियन्स के बुनियादी आनुवंशिकी तथ्यों में से एक यह है कि दुनिया की लगभग 8 अरब आबादी में से कोई भी दो व्यक्ति एकदम समान गुणसूत्र के नहीं होते हैं. सभी लोग आनुवंशिकता की मूल इकाई जीन में भिन्न होते हैं. इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता, बुद्धि और प्रकृति में सबसे अनूठा है. प्रत्येक को मानवीय लक्षणों और प्रतिभाओं की विशिष्ट विशेषज्ञता प्रदान की गई है तथा पृथ्वी पर कोई भी ऐसा नहीं कर सकता है. इस प्रकार हम परीक्षा के सामान्य पाठ्यक्रम पर दो परीक्षार्थियों के प्रदर्शन की तुलना कैसे कर सकते हैं? ऐसा करना न केवल बहुत तर्कहीन और बेहद अनुचित है बल्कि ख़तरों से भी भरा है.

अपनी प्रतिभा को पहचानें, अपने आपको अच्छी तरह से जानें और जन्मजात मतभेदों और अंतनिर्हिहत विशिष्टता का सम्मान करें जो केवल आपको इस धरती पर ईश्वर ने उपहार में दी है.

वास्तव में, वर्तमान परीक्षा प्रणाली जो किसी छात्र की स्मृति अवधारण क्षमता का परीक्षण करती है, स्मृति को याद करने के तरीके से अधिक कुछ नहीं है. प्रत्येक छात्र के पास डेटा, तथ्यों और आंकड़ों को समेटने की अपनी क्षमता होती है. प्रत्येक छात्र के पास अपनी बुद्धि का स्तर होता है और इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के दिमाग वाले लोग हैं. उत्कृष्टता के विभिन्न मापदंडों में इतने सारे अंतर हैं जैसे कि खु$िफया उद्धरण और छात्रों का झुकाव, क्या यह केवल कागज लिखने वाले सभी अंकों और ग्रेड के प्रतिशत के समान प्रक्षेपवक्र की उपलब्धि की उम्मीद करना अनुचित नहीं है? आपको प्रत्येक व्यक्ति में निहित प्राकृतिक अंतर का एहसास और सम्मान करना चाहिये और कुछ क्षेत्रों में जिनमें आप असमर्थ महसूस करते हैं और दूसरों में अपने से बेहतर को खोजने की प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिये.

शिक्षा का जीवन में गहरा अर्थ है

मानव जीवन हमारे नियंत्रण से बाहर की स्थितियों और ताक़तों का उपोत्पाद है, इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता है. इसका अर्थ यह होता है कि कभी-कभी हमें किये गये श्रम और संघर्ष के अनुपात में परिणाम नहीं मिलते हैं. जीवन के इस विरोधाभास की अलग-अलग लोगों द्वारा अलग-अलग व्याख्या की गई है-कुछ लोग इसे भाग्य का दिव्य खेल कहते हैं, कुछ इसे दु:ख और खुशी का प्राकृतिक चक्र कहते हैं और अब भी इसमें कई लोगों के लिये यह सबसे बड़ा रहस्य और सनक है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को अनदेखी और बेकाबू ताकतों के सामने सब कुछ छोड़ देना चाहिये और आत्मसमर्पण कर देना चाहिये.

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार कहा था कि वास्तविक शिक्षा वह नहीं है जो किसी पुस्तक के पन्नों पर लिखी गई है, क्योंकि कक्षाओं से बाहर आने के बाद आखिरकार हमारी स्मृति में क्या बाकी रह जाता है. यह स्मृति ही है जिसे भविष्य में हम बाद में बनने वाले कोने के पत्थर के रूप में जान सकते हैं. यह एक स्मृति है, जिसका हमें ध्यान रखना चाहिये और इससे चिंतित होना चाहिए. ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जीवन की विभिन्न चुनौतियों को हल करने और जीवन को बचाने वाले कौशल में महारत हासिल करने के लिये व्यावहारिक दृष्टिकोण को अपनाया जाता है.

हमारे देश में शिक्षा को पारंपरिक रूप से एक उज्जवल कॅरिअर के साथ आकर्षक रोजग़ार के अवसरों का माध्यम माना जाता है, लेकिन कभी-कभी ये धारणाएं सच नहीं होती हैं. नीचे कुछ महान हस्तियों के बारे में बताया गया है, जिन्हें आप विभिन्न पुस्तकों और पत्रिकाओं में उनके बारे में पढ़ते हैं या कहीं न कहीं सुना होगा, जो अपने पेशेवर कॅरिअर के शीर्ष पर पहुंच गये, जिसे उन्होंने बिना किसी मार्गदर्शन के चुना था. उनके चारों ओर कॅरिअर काउंसलर और उच्च अंक तथा उत्कृष्ट ग्रेड का कोई प्रमाण-पत्र नहीं है:-

वे मानव जाति की भलाई के लिये युगांतकारी परिवर्तन और ऐतिहासिक योगदान देने वाले अकेले थे. वे स्व:निर्मित लोग थे, वे स्व:शिक्षित लोग थे, स्व: प्रेरित लोग थे और सबसे महत्वपूर्ण बात, वे असाधारण रूप से आत्म विश्वास वाले लोग थे, जिन्होंने प्रसिद्धि और भाग्य की अविरल धारा को प्राप्त किया था, जो उन्होंने कभी सपने में भी सोचा नहीं था.

सदैव याद रखें दौड़ की गणना नहीं होती .....अंतिम पड़ाव मायने रखता है

एक बहुत ही प्रेरक किस्सा है. एक दौड़ प्रतियोगिता में एक एथलीट अपने प्रतिद्वंद्विंयों की तुलना में तेज़ी से दौड़ता रहा और बाकी स्प्रिंटरों से खुद को अच्छी तरह से आगे रखा. लेकिन अंतिम दौर में वह दुर्भाग्य से कैमरे में कहीं नहीं था. कैमरामैन ने कथित धावक को आश्चर्यजनक रूप से कैमरे में कैप्चर कर लिया जो कि उस वक्त कई प्रतियोगियों के पीछे हो चुका था. इसलिये प्रतियोगिता के लिये महत्वपूर्ण यह होता है कि न केवल प्रारंभिक चरणों में सबसे अच्छा हो बल्कि गंतव्य तक पहुंचने तक नेतृत्व बनाए रखा जाये, विशेषकर तब तक जब परिणाम आपके पक्ष में न हो और समापन विजेता के रूप में आपके नाम की घोषणा नहीं हो जाती. 

गौतमबुद्ध ने एक बार कहा था कि एक हजार लड़ाइयां जीतने के बजाय खुद पर विजय प्राप्त करना बेहतर था. स्वयं को जीतने का अर्थ है किसी को अपनी कमियों पर काबू पाना और स्वयं को लगातार मज़बूत करना. इसका अर्थ प्रबुद्धता और अनुभव प्राप्त करना भी है. इसका अर्थ यह भी है कि जीवन के अनुभवों और उतार चढ़ावों के साथ मानव को सीखते रहना चाहिए और समृद्ध बनना है.

अक्सर कहा जाता है कि दुनिया आपकी शुक्ति है. शाब्दिक रूप से इसका मतलब है कि आप वह कुछ भी हासिल कर सकते हैं जिसके लिये जिज्ञासु हैं और जिसका आप अपने जीवन में सपना देखते हैं. यह भी कहा जाता है कि इस पृथ्वी के सभी लोगों की नियति उनके द्वारा अपने बारे में सोचने के आकार की है, इसलिए अपने नकारात्मक विचारों, प्रतिगामी, निराशावादी और निराशाजनक विचारों से बचना भी आवश्यक है, जो एक बार असफल होने पर उत्पन्न होते हैं. यदि आप अपनी प्रगति को रोकते हैं और अपने जीवन की पहली असफलता के साथ अपने रास्ते पर आगे बढऩा बंद कर देते हैं, तो इसका मतलब है कि आप अपने स्वयं के हाथों से अपने शानदार उज्ज्वल भविष्य का गला घोंट रहे हैं, जिसका उपयोग आपके जीवन को अप्रत्याशित रूप से अधिक सार्थक और सफल करने के वास्ते किया जा सकता है.   

विभिन्न राष्ट्रों में सभी धर्मों के महाकाव्यों का कहना है कि जब लगता है कि चीजें सुचारू रूप से नहीं चल रही हैं या अपेक्षित लाइनों पर आगे नहीं बढ़ रही हैं, तो हमें उन्हें सर्वशक्तिमान ईश्वर तक छोडऩे की बेहतर आवश्यकता है. जीवन एक पहेली रहा है और इसे अपनी व्याख्या और सुविधा के अनुसार जानने की कोशिश न करें. जीवन की चुनौतियों को बहादुरी के साथ-साथ धैर्यपूर्वक स्वीकार करें और अपनी आंखों में जो कुछ भी निर्धारित किया है उसे पाने की कोशिश करते रहें. शुरुआती झटकों से परेशान न हों. अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते पर किसी भी तरह की कठिनाई और बाधाएं न डालें. जीवन की चुनौतियों और भविष्यवाणियों को ऐसी कलाबाजिय़ों के महासागरों में बदलने की कोशिश के रूप में लें, जिसे हम जीवन के रत्न, जीवन के सपने और जीवन का पसंदीदा गंतव्य कह सकते हैं.

(समाप्त)

(लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रधानाचार्य हैं. ई-मेल आईडी:spsharma. rishu@gmail.com)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.

(छायाचित्र: गूगल से साभार)