विशेष लेख


ताज़ा अंक-15, 13 - 19 जुलाई 2019

 

 

बजट 2019-2020 और भारतीय युवा

विवेक ओझा

आईटी+आईटी = आईटी, इसका अर्थ है कि भारतीय प्रतिभा+सूचना प्रौद्योगिकी = कल का भारत, ‘आकांक्षा+ स्थिरता = संकल्पऔर हमें एक्टस की नहीं, बल्कि एक्शन की जरूरत है. यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनसांख्यिकी लाभांश की उस भारतीय संकल्पना का प्रतीक था, जब वे सत्ता में आये थे. नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता विकास, स्टार्ट अप बिजनेस, सामाजिक संव्यवहार, सामाजिक और मानवीय पूंजी का बदलाव, व्यवसायिक प्रशिक्षण देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के बारे में मोदी सरकार के मुख्य प्रतिनिधि शब्द थे. भारतीय युवाओं के सपनों को ध्यान में रखते हुए बज़ट 2019-2020 में ज्ञान आधारित समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के परिणाम प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी पहलों का प्रस्ताव किया गया है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019-20 के लिये केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते समय यह कहते हुए भारत की प्रगति की प्रशंसा की कि देश के रोजग़ार सृजक ही राष्ट्र के पूंजी निर्माता हैं. वित्त मंत्री ने नई शिक्षा नीति के बारे में भी चर्चा की. यह प्रस्ताव किया गया है कि नेशनल रिसर्च फाउंडेशन विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रदान किये जाने वाले अनुसंधान संबंधी अनुदानों को एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से आत्मसात करेगा और नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देगा. स्वयं के माध्यम से बड़े पैमाने पर मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम सफल रहे हैं और डिजिटल विभाजन को कम कर रहे हैं. वित्त मंत्री ने विदेशी छात्रों को भारत में अध्ययन कार्यक्रम के लिये लाये जाने का प्रस्ताव किया.

बज़ट में उल्लेख किया गया है कि उच्चतर शिक्षा आयोग की स्थापना के लिये विधेयक इस वर्ष बाद में प्रस्तुत किया जायेगा. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अधीन 10 मिलियन युवा उद्योग-संगत कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. देश में बिजऩेस करना आसान बनाने के लिये अनेक श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में लाकर सुव्यवस्थित किया जायेगा.

इस वर्ष के बजट में केवल स्टार्ट-अप्स के लिये दूरदर्शन के चैनल बुके के भीतर एक विशेष टीवी चैनल शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है. बज़ट में स्टार्ट अप और स्टैंड अप योजनाओं का भी उल्लेख किया गया कि ये योजनाएं मानवीय प्रतिष्ठा की संरक्षा और उद्यमशीलता की अनुभूति के प्रति महान कार्य कर रही हैं. भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय को मानव मैला ढोने से बचने और उद्यमी बनने के लिये वित्तीय सहायता प्रदान की है.

वित्त मंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि भारतीय युवाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी, कुशल और नवचार संचालित बनाने के लिये आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा, वर्चुअल रियल्टी और रोबोटिक्स जैसे कुछ और क्षेत्रों की पहचान करनी होगी. वित्त मंत्री ने एक समतावादी तरीके से कौशल विकास के लिये भगवान बसवेश्वरा द्वारा दिखाये गये मार्ग का उल्लेख करके देश की युवा आकांक्षाओं को एक सांस्कृतिक स्वर प्रदान किया.

इस वर्ष के बज़ट में युवाओं से सबंधित इमप्रिंट, ज्ञान, हेफा, एनएडी आदि जैसी पहलों के महत्व पर प्रकाश डाला गया जो कि हाल के वर्षों के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शुरू की गई हैं. सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये प्रतिबद्ध है और यह एक निरंतर जारी रहने वाली प्रक्रिया है. भारत सरकार का दृष्टिकोण भारत की मानव संसाधन क्षमता का समानता और समावेशन के साथ शिक्षा के क्षेत्र में पूर्ण सदुपयोग करना है. सरकार समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ‘‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’’ (सब को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के उद्देश्य से शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा में एक कदम बढ़ाया है. ‘‘सब के लिये शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’’ से निर्देशित नीतिगत कार्यों और परिवर्तन को सक्षम करने वाले निर्णयों में शिक्षा को उपलब्ध, सुलभ, किफायती और जवाबदेह बनाने पर ज़ोर दिया गया है. सबके लिये शिक्षा के अंतर्गत नये शैक्षणिक संस्थानों (केवीएस, एनवीएस) की स्थापना, नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिये बच्चों का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) कार्यक्रम जैसी पहलें, जिनका उद्देश्य स्कूल अवसंरचना में और शिक्षण तथा पढ़ाई में सुधार  लाना है, स्वच्छ विद्यालय और ई-गवर्नेंस पहलें जैसे कि शगुन पोर्टल, ई-पाठशाला, शाला सिद्धि, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), स्कूलों में आईसीटी, अध्यापक शिक्षा पर केंद्रीय प्रायोजित योजना (सीएसएसटीई), माध्यमिक शिक्षा और उच्चतर शिक्षा में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान, आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटीज, आईआईएसईआर आदि की स्थापना से शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार हुआ है और शिक्षण कार्यक्रमों के लिये 24&7 आधार पर स्वयं प्रभा-डीटीएच चैनलों जैसी सांस्थानिक क्षमता निर्माण पहलें, अधिक समावेशी बनाने के लिये आईआईटी शिक्षा का पुनर्गठन, यूजीसी अधिनियम में अधिक लिंग संवेदी बनाने के लिये संशोधन, स्वयं-एमओओसी आदि संचालित किये गये.

 दूसरी तरफ अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन दिये जाने और प्रभावकारी अनुसंधान नवाचार प्रौद्योगिकी (आईएमपीआरआईएनटी), ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क (जीआईएएन), राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी, नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ), हायर एजुकेशनल फाइनेंसिंग एजेंसी (एचईएफए), डिजिटल आईएसबीएन, नेशनल एकेडमी डिपाजिटरी (एनएडी), सीमा दर्शन, कला उत्सव, प्रशिक्षक पोर्टल आदि जैसी पहलों पर अधिक ध्यान दिये जाने पर ज़ोर दिया गया है.  

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) की शुरुआत की है. पीएमकेवीवाई 1.0 के अधीन अनेक बड़ी परियोजनाएं शुरू की गईं, जिसका 2015 में शुभारंभ किया गया था. पीएमकेवीवाई 2.0 (2016-2020) के लिये देश भर में फैले 15,042 से अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में संचालित दस्तकार प्रशिक्षण योजनापर फोकस किया गया है. इस योजना के अधीन लोगों को 138 ट्रेडों में उद्योग हेतु कुशल कार्यबल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 6 माह, 1 वर्ष और 2 वर्ष की अवधि के प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया जाता है.

इन परियोजनाओं का दायित्व प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) को दिया गया है. पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार, डीजीटी ने रोजग़ार के बेहतर अवसरों के लिये कौशलों की गुणवत्ता में सुधार के लिये नीचे वर्णित पहलें की हैं.

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि युवाओं का विकास उनकी सरकार की नीति का केंद्र बिंदु है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस देश के युवाओं की मदद के लिये, उनकी सरकार का फ़ोकस ज-एजुकेशन (शिक्षा), एम्पलॉयमेंट (रोजग़ार), आंत्रप्रोन्योरशिप (उद्यमिता) और एक्सीलेंस (उत्कृष्टता) पर है. प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को बताया कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने सात आईआईटी, सात आईआईएम, एक एनआईटी, 14 आईआईआईटी, 103 केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना की है. स्नातकपूर्व सीटों की संख्या 2013-14 में 50,000 की अपेक्षा अब बढ़ाकर 70,000 की जा चुकी है. स्नातकोत्तर सीटों की संख्या 2013-14 में 25,000 से बढ़ाकर अब 33,000 की जा चुकी है. नवाचार में तेज़ी लाने के लिये 2400 अटल टिंकरिंग सेंटरों का सृजन किया गया.

भारतीय युवाओं की आकांक्षाएं और इसके मार्ग में बाधाएं

भारतीय युवाओं की आकांक्षाएं बाधाओं से मुक्त नहीं हैं. भारतीय युवा बेरोजग़ारी, उच्चतर शिक्षण सुविधाओं की कमी, बिजनेस शुरू करने के लिये ऋण के अभाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. सिलिकॉन वैली स्थित ई-लर्निंग फर्म कोरसेरा के 2019 में जारी वैश्विक कौशल सूचकांक में भारत को भविष्य के तीन कौशल मूल्यांकनों-प्रौद्योगिकी, व्यवसाय और डाटा साइंस के तीन में से दो में पीछे दर्शाया गया है. भारत 60 देशों में से प्रौद्योगिकी विषयक्षेत्र में 44वें स्थान पर, व्यवसाय कौशलों में 50वें स्थान पर और डेटा साइंस में 51वें स्थान पर उभरकर आया है. यहां यह उल्लेख करना समीचीन होगा कि विश्व की दो तिहाई जनसंख्या, 90 प्रतिशत विकासशील अर्थव्यवस्थाओं सहित, महत्वपूर्ण कौशलों में पीछे चल रही है.

भारतीय युवा और जनसांख्यिकीय लाभांश

भारत में दुनिया के विभिन्न देशों की जनसंख्या की अपेक्षा सर्वाधिक युवा हैं. 2020 तक, भारत में औसत आयु, चीन और अमरीका में 37, पश्चिमी यूरोप में 45 और जापान में 49 की तुलना में, मात्र 28 होगी. जनसांख्यिकी आर्थिक विकास की गति और पद्धति को बदल सकती है. जब कि चीन वहां दिखाई देने वाले विकास जनसांख्यिकी लाभांश से पहले ही लाभान्वित हो चुका है, भारत को अभी इसका लाभ उठाना है.

भारत के जनसांख्यिकी लाभांश की क्षमता का उल्लेख करते हुए श्रीलंका में भारत के दूत तारनजीत सिंह संधू ने श्रीलंका में स्पष्ट किया कि प्रति व्यक्ति 29 वर्ष की औसत आयु के साथ, भारत 2020 तक दुनिया का सबसे युवा देश बन जायेगा. 2020 तक भारत की चौंसठ प्रतिशत जनसंख्या कामकाजी आयु वर्ग में होगी. यह उल्लेखनीय है कि ऐसे समय में जब यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया, जापान जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं बूढ़ी हो रही हैं, भारत में कामकाजी आबादी बढऩे का फायदा है, जिसे 15 से 59 वर्ष के आयु वर्ग की कार्यशील आबादी के रूप में जाना जाता है. पश्चिमी यूरोप, अमरीका, दक्षिण कोरिया, जापान और यहां तक कि चीन की अर्थव्यवस्थाएं प्रौढ़ हो रही हैं, भारत में यह जनसांख्यिकी क्षमता एक अभूतपूर्व बढ़त के लिये अग्रसर है जो सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में योगदान कर सकती है. भारत की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य इसकी 1 अरब 30 करोड़ लोगों की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करना है. 

भारत सरकार को देश को आंतरिक और बाह्य रूप से मज़बूत, समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिये स्वामी विवेकानंद के युवा जागृति आह्वान को उत्प्रेरित करना होगा.

लेखक दिल्ली स्थित शैक्षिकविद् हैं.

ईमेल आईडी: peerlesstreasure@gmail.com

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं