विशेष लेख


ताज़ा अंक-16, 20 - 26 जुलाई 2019

बजट 2019-20: नए भारत की रूपरेखा

डॉ. एस.पी. शर्मा

केंद्रीय बजट 2019-20 भारत की दीर्घावधि विकास कवायद की रूपरेखा है, एक ऐसा विजऩ है, जो अगले

  5 वर्षों में 50 खरब अमरीकी डॉलर मूल्य की अर्थव्यवस्था के साथ करोड़ों लोगों की नए भारत की आकांक्षाओं का आधार है. विभिन्न सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों के लिए की गई घोषणाएं लोगों की आकांक्षाएं और प्रगति के लक्ष्य पूरा होने का संकेत देती हैं. बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, स्टार्ट-अप्स, विकास के ढांचे, ग्रामीण विकास, सस्ते मकान और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है ताकि देश में सर्व समावेशी विकास को प्रोत्साहित किया जा सके. बजट की मूलभूत धारणा अंतत: यह सुनिश्चित करना है कि नए भारत के निर्माण का मार्ग सीधा और स्पष्ट है.

केंद्रीय बजट 2019-20 (प्रमुख बातें)

क्र.सं.

 

आयाम

विवरण

 

1

बजट का आकार

रुपये 27.86  लाख करोड़

 

2

राजकोषीय घाटा 

रुपये 7.03 लाख करोड़

 

3

50 खरब अमरीकी डॉलर

मूल्य की अर्थव्यवस्था

हासिल करने की रूपरेखा

चालू वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 30 खरब अमरीकी

डॉलर मूल्य का होने जा रहा है, बुनियादी ढांचे में निवेश; डिजिटल अर्थव्यवस्था; लघु और मध्यम प्रतिष्ठानों में रोज़गार के अवसर सृजित करने के लिए निवेश की आवश्यकता को देखते हुए निवेश का  

सकारात्मक चक्र प्रारंभ करने के उपाय प्रस्तावित किए गए हैं.

 

 

4

अगले दशक के लिए लक्ष्य: 10 आयाम

भौतिक और सामाजिक ढांचा; डिजिटल इंडिया; प्रदूषण मुक्त भारत; 

ग्रामीण उद्योगीकरण; स्वच्छ नदियां; तटवर्ती और समुद्री जल; अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान; खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता; स्वस्थ भारत; न्यूनतम

सरकार  अधिकतम शासन.

 

5

कृषि, अनुषंगी गतिविधियां और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

अगले 5 वर्षों में 1,25,000 किलोमीटर सडक़ों के उन्नयन; और वित्तीय वर्ष 2020 के दौरान 100 नए क्लस्टरों की स्थापना के लिए 80,250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

 

6

उद्योग

400 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स 25 प्रतिशत तक कम किया गया है; 4 श्रम संहिताओं के समूह में समाहित करते हुए अधिसंख्य श्रम कानूनों को सुचारू बनाने का प्रस्ताव; जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत सभी लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों को नए या संवर्धित ऋणों पर ब्याज में 2 प्रतिशत की सब्सिडी; स्टार्टअप्स द्वारा जुटाए गए धन के मामले में आयकर विभाग से जांच की आवश्यकता समाप्त

7

बुनियादी ढांचा

अगले 5 वर्षों में बुनियादी ढांचे में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश

का प्रस्ताव; राज्य सडक़ नेटवर्क के विकास में सहायता के लिए भारत-

माला चरण-2 शुरू करना; भारतीय रेलवे में सरकारी-निजी-भागीदारी

के जरिए उच्चतर ढांचा निवेश.

 

8

बैंकिंग, वित्त एवं कराधान

बैंकों की पूंजी मेें 70,000 करोड़ रुपये का निवेश; 2 करोड़ रुपये से अधिक कर योग्य आय वाले व्यक्तियों पर अधिभार में वृद्धि; आयकर विवरणी दाखिल करने के लिए पैन और आधार में से किसी एक का  इस्तेमाल करने की सुविधा.

 

9

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की सशक्तिकरण स्थापना का प्रस्ताव; महिला स्वयं सहायता समूह ब्याज सब्सिडी कार्यक्रम का विस्तार सभी जिलों में करने का प्रस्ताव.

 

 

स्रोत: पीएचडी रिसर्च ब्यूरो, केंद्रीय बजट 2019-20 भाषण, भारत सरकार से संकलित.

मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य बातों  के अलावा न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन; प्रदूषण मुक्त भारत; प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटलीकरण; अत्याधुनिक भौतिक और सामाजिक ढांचा; अनाज, दालें, तिलहन, फल और सब्जियों में आत्मनिर्भरता और निर्यात; महिलाओं और बच्चों के पोषण के साथ स्वस्थ समाज; नागरिकों की सुरक्षा; और एमएसएमईज़, स्टार्टअप्स, रक्षा विनिर्माण, ऑटोमोबाइल पर बल सहित 10 सूत्री लक्ष्य अपनाने से भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में मजबूती आएगी और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक क्षेत्र में उसका प्रभाव बढ़ेगा, क्योंकि देश में विश्व अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी का इंजन बनने की क्षमता है.

ढांचागत विकास पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना जैसे रेलवे का आधुनिकीकरण, औद्योगिक गलियारों, भारतमाला आदि परियोजनाओं के जरिए औद्योगिक कनेक्टिविटी; पीएमएवाई-ग्रामीण के दूसरे चरण के अंतर्गत 1.95 करोड़ मकानों के निर्माण का लक्ष्य, पहली बार मकान खरीदने वाले व्यक्तियों को अतिरिक्त कर लाभ चालू वित्त वर्ष के दौरान 31 मार्च, 2020 तक मंजूर किए गए आवास ऋणों पर ब्याज में 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त कर छूट आदि ऐसे उपाय हैं, जो अल्पावधि में वृद्धि को बढ़ावा देने और मध्यम से दीर्घावधि में एक मजबूत और स्थिर आर्थिक वृद्धि का मार्ग प्रश्स्त करने वाले हैं.

इसके अतिरिक्त अगले 5 वर्षों में ढांचा क्षेत्र में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव उत्साहवर्धक है; इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज गति मिलेगी, ढांचागत निवेश के अधिसंख्य प्रभाव अर्थव्यवस्था की वृद्धि की संभावना वाले क्षेत्रों को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे बढ़ते युवा श्रमिक बल के लिए रोज़गार के लाखों नए अवसर सृजित होंगे.

वर्तमान बृहत्त आर्थिक मानदंडों को देखते हुए सरकार ने एयर इंडिया के अलावा चुने हुए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों के कार्यनीतिक विनिवेश को वरीयता देने का संकेत दिया है. वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए अंतरिम बजट में घोषित 90,000 करोड़ से सरकार के विनिवेश के लक्ष्य में थोड़ी बढ़ोतरी करते हुए इसे एक लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है. इससे सरकार को अपना राजस्व बढ़ाने और उसका इस्तेमाल ढांचागत विकास, जन कल्याण और समग्र अर्थव्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक विकास में करने में मदद मिलेगी.

सरकार द्वारा कॉर्पोरेट करों में चरणबद्ध कटौती जारी रखना, 400 करोड़ रुपये से कम वार्षिक कारोबार वाली कंपनियों के लिए कर की दरें 25 प्रतिशत तक कम करना, ऐसे उपाय हैं, जिनसे व्यापार के माहौल को बढ़ावा मिलेगा और एमएसएमईज़ की अधिक बढ़ोतरी होगी और उनके विस्तार एवं विकास सेे उनकी फैक्टरियों में अधिक लोगों को रोज़गार मिलेगा. उद्योग द्वारा पिछले अनेक वर्षों से इस कमी की मांग की जा रही थी. इससे देश की 99.3 प्रतिशत कंपनियां इस लाभ के दायरे में आ जाएंगी और व्यापार की भावनाओं और उत्पादन संभावनाओं में वृद्धि से अर्थव्यवस्था का विकास होगा.

भारत में श्रम कानून अपेक्षाकृत कड़े रहे हैं और वे उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी रुकावटों में से एक हैं. उद्योग जगत पिछले अनेक वर्षों से श्रम कानूनों में लचीलेपन की मांग करता रहा है. असंख्य श्रम कानूनों को 4 श्रम संहिताओं के समूह में सुचारू रूप प्रदान करने का प्रस्ताव प्रेरणादायक है, क्योंकि श्रम कानूनों को सरल बनाने से उद्योग जगत, विशेष रूप से एमएसएमईज़ द्वारा उनके अनुपालनों में रियायत दिए जाने से उनकी फैक्टरियों में मजदूरों के विकास का मार्ग प्रश्स्त होगा. इससे व्यापार का माहौल अधिक सुचारू होगा और व्यापार करने में आसानी से बढ़ावा मिलेगा.

बजट में पूंजी का प्रवाह बढ़ाने के लिए विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसके लिए एकल ब्रैंड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए स्थानीय स्रोत संबंधी मानदंड को सरल बनाया गया है और बिचोलिया बीमा कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है. अनिवासी भारतीय (एनआरआई) पोर्टफोलियो मार्ग का विदेश पोर्टफोलियो निवेश में विलय करने की घोषणा सराहनीय है, क्योंकि इससे भारत में अनिवासी भारतीय निवेश को आसान बनाने में मदद मिलेगी. इसके अतिरिक्त देश में वैश्विक निवेशक सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय निवेश में बढ़ोतरी को प्रेरित करेगा, क्योंकि इससे भारत में निवेश करने वाले वैश्विक निवेशकों का विस्तार होगा.

एमएसएमईज़ में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का इंजन बनने की क्षमता है. अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के महत्व को सरकार ने सही समझा है; जीएसटी के अंतर्गत सभी एमएसएमईज़ को नए और संवर्धित ऋणों पर 2 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की घोषणा और एमएसएमईज़ के लिए भुगतान मंच सृजित करने से ऋण तक उनकी पहुंच बढ़ाने और उन्हें अपनी व्यापार गतिविधियों के विस्तार में मदद मिलेगी.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुन: पूंजीकरण के लिए 70,000 करोड़ रुपये का आवंटन सरकारी बैंकों के स्वास्थ्य में सुधार लाएगा और इससे ऋण उपलब्धता में बढ़ोतरी के साथ अर्थव्यवस्था में ऋण की गति तेज होगी. बजट में कई सराहनीय घोषणाएं की गई हैं, जैसे ई-वैरिफिकेशन अर्थात् इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणन की व्यवस्था शुरू करते हुए एंजल टैक्सके मुद्दे का समाधान; स्टार्टअप्स का तीव्र मूल्यांकन और उनकी शिकायतों का शीघ्र निवारण तथा स्टार्टअप्स को घाटा अग्रेषित एवं समायोजित करने की शर्तों में रियायत दिए जाने से अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप अभियान को मजबूती मिलेगी. 

रेलवे में रेलमार्गों के विकास और उनका निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने, रेल डिब्बों के विनिर्माण और यात्री तथा माल भाड़ा सेवाओं में सार्वजनिक-निजी-भागीदारी प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित करने से न केवल औद्योगिक विकास प्रोत्साहित होगा, बल्कि जनता को बेहतर सेवाएं भी दी जा सकेंगी.

बजट में मुख्य रूप से सस्ते मकानों पर बल दिया गया है, क्योंकि सस्ते आवास की परिभाषा को आयकर अधिनियम में जीएसटी अधिनियम के अनुरूप बनाया गया है. सस्ते मकान की लागत सीमा 45 लाख रुपये निर्धारित करते हुए उसे जीएसटी अधिनियम की परिभाषा के समान बनाया गया है. इससे आवास क्षेत्र मेें मांग बढ़ेगी और निर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में इजाफा होगा.

इसके अतिरिक्त, देशभर में केंद्रीय मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों द्वारा धारित भूमि का उपयोग सार्वजनिक ढांचे और सस्ते मकानों के लिए किए जाने की अनुमति देना स्वागत योग्य है, जिससे विकास को बढ़ावा मिलेगा. इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दिए गए ऋण पर अदा किए गए ब्याज में 1.5 लाख रुपये तक आय कर कटौती और 45 लाख रुपये तक मूल्य के सस्ते मकानों के लिए 31 मार्च, 2020 तक लिए गए ऋणों पर अदा किए गए 1,50,000 रुपये तक के ब्याज पर आयकर में अतिरिक्त छूट के प्रस्ताव मध्यम वर्ग के लिए अत्यंत लाभदायक हैं.

बजट में नई शिक्षा नीति के प्रति सुदृढ़ समन्वय दिखाई देता है और शिक्षण के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ शिक्षा प्रणाली के रूपांतरण के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 400 करोड़ रुपये का व्यापक आवंटन किया गया है, जिससे मौजूदा शैक्षणिक स्तर में बदलाव लाने में अहम भूमिका अदा की जा सकेगी. इसके अतिरिक्त भारत में अध्ययन के सरकार के अभियान से मेक इन इंडिया में मदद मिलेगी और भारत को विदेशी विद्यार्थियों के लिए वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाया जा सकेगा, क्योंकि विद्यार्थियों को सस्ती दरों पर बेहतरीन शिक्षा हासिल करने के अवसर मिलेंगे. इससे देश के शीर्ष संस्थानों में ढांचागत विकास, शैक्षिक स्तर और उपलब्ध सुविधाओं में बढ़ोतरी में मदद मिलेगी.

महिला स्वयं सहायता समूह ब्याज सब्सिडी कार्यक्रम का विस्तार सभी जिलों में करने और प्रमाणित महिला स्वयं सहायता समूह सदस्य के लिए रु. 5,000 के ओवर ड्राफ्ट का प्रावधान करने की बजट घोषणा सराहनीय कदम है. इन उपायों से समाज में महिलाओं की भूमिका को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी.

कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने की नीति को जारी रखते हुए सरकार ने कृषि क्षेत्र के आवंटन में 75 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी करते हुए इसके लिए 1.5 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. इसके अतिरिक्त शून्य बजट खेतीको प्रोत्साहित और प्रेरित करने का सरकार का निर्णय अत्यंत सराहनीय है. शून्य बजट खेती को जड़ों की ओर वापस लौटनाभी कहा जाता है. शून्य बजट खेती का अर्थ है, बिना किसी ऋण का इस्तेमाल किए और उपकरणों पर बिना धन खर्च किए प्राकृतिक रूप में खेती करना. शून्य बजट खेती से कृषि लागत में कमी लाने, धरती की उर्वरता बढ़ाने, पर्यावरण क्षति रोकने में मदद मिलेगी और उसके लिए धन भी खर्च नहीं करना होगा. शून्य बजट खेती पहले ही लागू की जा चुकी है और कुछ राज्यों में इसे आजमाया जा चुका है. सरकार के अनुसार इस मॉडल को कुछ अन्य राज्यों और फिर समूचे देश में अपनाए जाने की आवश्यकता है. इससे कृषि असंतोष की समस्या को काफी हद तक मदद मिलेगी, क्योंकि  किसानों को उच्च लागत वाले उपकरण और अन्य कच्चा माल बाजार से खरीदने के लिए मंहगे ऋण नहीं लेने होंगे. शून्य बजट खेती से किसानों के बीच आत्म निर्भरता का माहौल पैदा करने में मदद मिलेगी. देश को आर्थिक विकास के मार्ग में अगले स्तर पर पहुंचाने के लिए आने वाले वर्षों में कुछ मुद्दों का समाधान करने की आवश्यकता होगी. इन मुद्दों में कृषि विपणन सुधार शुरू करना, गांवों की आसान पहुंच के भीतर, विशेषकर सीमांत किसानों के लिए समुचित और सक्षम गोदाम सहायता का प्रावधान करना; किसानों को यंत्रीकृत खेती अपनाने के बारे में शिक्षित करना; फसल बर्बादी का स्तर वर्तमान 30 से 35 प्रतिशत से कम करते हुए उसे 10 प्रतिशत पर लाना; कृषि क्षेत्र, खेती के आधुनिकीकरण और तकनीकी सुधारों के लिए सरकारी निवेश बढ़ाना और खाद्य प्रसंस्करण निर्यात को प्रोत्साहित करना आदि शामिल हैं.

संक्षेप में कहा जा सकता है कि सरकार चाहती है कि संकेंद्रित सुधारों और बुनियादी ढांचा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रोज़गार सृजन, व्यापार करने में सुगमता और निवेश के सकारात्मक चक्र के फिर से शुरू करने जैसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यनीतिक निवेश पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था को 50 खरब अमरीकी डॉलर का बनाया जाए. कुल मिला कर केंद्रीय बजट 2019-20 संतुलित, प्रगतिशील, कल्याण को प्रेरित करने वाला बजट है, जिससे नए भारत के निर्माण की दिशा में राष्ट्र के आर्थिक बढ़ोतरी के मार्ग को बल मिलेगा.

नए भारत में वृद्धि दर दो अंकों में होगी, विनिर्माण क्षेत्र वैश्विक रूप में प्रतिस्पर्धात्मक होगा, कृषि क्षेत्र बढ़ती जनसंख्या की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त होगा और राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए रोज़गार के लाखों अवसर पैदा होंगे, लोगों के आय के स्तरों में व्यापक बढ़ोतरी होगी, किसानों की आय दोगुनी होगी, कराधान प्रणाली सरल होगी, व्यापार में सही अर्थों में सुगमता आएगी और जीवन स्तर में सुधार होगा.

नया भारत ऐसे सपनों का भारत है, जिसमें सभी के लिए आवास, सभी के लिए शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. नया भारत प्रत्येक नागरिक को अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करने और स्वयं, परिवार और राष्ट्र के लिए योगदान करने का अवसर प्रदान करेगा. नया भारत सफलता की नई कहानियां लिखेगा जो विश्व को प्रेरित करेंगी.

(लेखक पीएचडी चैम्बर ऑफ  कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली से संबद्ध मुख्य अर्थशास्त्री हैं)

ई-मेल: spsharma@phdcci.in व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं