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ब्रेक्जि़ट और उसके बाद

जाफरी मुदस्सर नोफिल

ब्रेक्जि़ट शब्द इन दिनों प्रचलन में है. यह ब्रिटेनऔर एक्सिटका मिश्रित शब्द है, जिसका आशय ब्रिटेन का यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर जाना है. समझा जाता है कि यह शब्द 2012 में ग्रेक्जि़ट’ (यूरोपीय क्षेत्र से ग्रीस के बाहर जाने की संभावना) की तर्ज पर गढ़ा गया था.

23 जून, 2016 को एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने चार दशक तक यूरोपीय संघ का सदस्य बने रहने के बाद इससे बाहर जाने के पक्ष में मत दिया. दुनिया दम साधे इंतजार कर रही थी, जब 24 जून 2016 को ब्रिटेन के निर्वाचन आयोग में प्रमुख गणना अधिकारी जेनी वॉटसन ने मेनचेस्टर हाल में यह घोषणा की कि 51.9 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर जाने के पक्ष में मत दिया है, जबकि 48.1 प्रतिशत लोगों ने यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में वोट दिया है.

ब्रिटेन में 30 मिलियन से ज्यादा लोगों ने मतदान किया और मतदान का प्रतिशत 72.2 प्रतिशत रहा. जर्मनी के बाद यूरोप की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन, ग्रीनलैंड के बाद इस ब्लॉक से बाहर जाने वाला दूसरा देश बन गया है. ग्रीनलैंड 1982 में यूरोपीय संघ से बाहर चला गया था, जब इस संघ को यूरोपीय आर्थिक समुदाय के नाम से जाना जाता था.

यूरोपीय संघ से बाहर जाने को अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया के तौर पर देखा गया, जबकि ब्रिटेन के सबसे बड़े कारोबारी भागीदार के साथ लाभदायक कारोबारी सौदे के बारे में नए सिरे से बातचीत करने और स्वीकार्य शुल्क और अवरोध लगाने को सबसे कठिन और सबसे अनिश्चित पहलू के तौर पर देखा गया.

यूरोपीय संघ से बाहर जाने पर ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के निर्बाध एकल बाजार से वंचित होना पड़ सकता है, जिसका आशय है कि उसे दुनिया भर के देशों के साथ नये कारोबारी समझौते करने होंगे. जनमत संग्रह के नतीजों ने अप्रवासन और यूरोप भर में दक्षिणपंथ बढऩे के बारे में भी ताजा बहस छेड़ दी है. इस मतदान का तात्कालिक परिणाम यह हुआ है कि अपने देश के यूरोपीय संघ में बने रहने के बारे में प्रचार करने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को यह कहते हुए त्याग पत्र देने की घोषणा करनी पड़ी कि नये प्रधानमंत्री अक्टूबर में 28 देशों वाले इस ब्लॉक को छोडऩे की प्रक्रिया का दायित्व संभालेंगे.

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर जाने की प्रक्रिया में 2009 की लिस्बन संधि का अनुच्छेद 50 का उपयोग होना शामिल होगा, जो किसी भी सदस्य देश के संघ से बाहर जाने से संबंधित है. अनुच्छेद 50 में सभी संबद्ध पक्षों के सहमत होने की स्थिति में बातचीत की अवधि को बढ़ाने की संभावना सहित बातचीत के लिए दो साल की समय-सीमा का प्रावधान है. हालांकि यूरोपीय नेता ब्लॉक के अन्य 27 सदस्य देशों के बीच और संभावित विभाजक जनमत संग्रहों को टालने के लिए कथित तौर पर ब्रिटेन के हटने की कार्यवाही को जल्द से जल्द से निपटाने के इच्छुक हैं.

रिर्पोट्स के अनुसार संघ से बाहर जाने की शर्तों के बारे में यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा और उनमें से प्रत्येक इन शर्तों को वीटो कर सकेगा.

यह राष्ट्रीय संसदों में पुष्टि पर भी निर्भर करेगा, जिसका आशय है कि सदस्य देशों के सांसद अपनी-अपनी संसद में दृष्टिकोणों को धराशायी सकते हैं.

वार्ता के लिए दो दल बनाए जाएंगे, यूरोपीय संघ के पक्ष की अगुवाई वर्तमान आयुक्तों में से कोई एक करेगा और ब्रिटेन के पक्ष की अगुवाई उसके नए प्रधानमंत्री द्वारा किए जाने की संभावना है.

यूरोपीय संघ के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने जनमत संग्रह के परिणाम के बाद कहा कि संघ किसी भी नकारात्मक परिदृश्य के लिए तैयार था.

उन्होंने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘इसमें कोई गोपनीय बात नहीं है कि हम कल के जनमत संग्रह का कुछ अलग परिणाम देखना चाहते थे. मैं इस बात से पूरी तरह अवगत हूं कि राजनीतिक तौर पर यह पल कितना गंभीर या फिर नाटकीय है. इस घटना के समस्त राजनीतिक निष्कर्षों का अनुमान लगाने का कोई जरिया नहीं है, विशेषकर ब्रिटेन के लिए. यह एक ऐतिहासिक पल है, लेकिन यकीनन अनियंत्रित प्रतिक्रियाएं देने का पल नहीं है. मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम इस नकारात्मक परिदृश्य के लिए भी तैयार हैं. जैसा कि आप जानते हैं कि यूरोपीय संघ सिर्फ खुशहाली के दौर में ही वफादार रहने वाली परियोजना नहीं है.’’

उन्होंने शेष सदस्य देशों के बीच एकता का भी संकल्प लिया. उन्होंने कहा, ‘‘आज, 27 नेताओं की ओर से मैं कह सकता हूं कि हम 27 सदस्यों के

रूप में अपनी एकता कायम रखने के लिए संकल्पबद्ध हैं. हम सभी के लिए, संघ हमारे समान भविष्य की रूपरेखा है. मैं आपको यह भी यकीन दिलाना चाहता हूं कि यहां कोई शून्य नहीं उत्पन्न होगा. जब तक ब्रिटेन औपचारिक तौर पर यूरोपीय संघ को छोड़ नहीं देता, यूरोपीय संघ के कानून ब्रिटेन के लिए और उसके भीतर लागू होते रहेंगे. इससे मेरा आशय अधिकारों और उत्तरदायित्वों से है.’’

यूरोपीय संघ का ढांचा:

यूरोपीय संघ स्वयं को 28 (अब 27) यूरोपीय सदस्य देशों के बीच एक विलक्षण आर्थिक एवं राजनीतिक संघ के रूप में वर्णित करता है, जो मिलकर महाद्वीप के अधिकांश हिस्से को कवर करते हैं. इसका गठन दूसरे विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप हुआ था. इसके शुरूआती कदम आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहन देना थे : इसके पीछे यह विचार था कि जो देश एक-दूसरे के साथ कारोबार करते हैं, वे एक-दूसरे पर आर्थिक तौर पर निर्भर हो जाते हैं और इससे टकराव टलने की संभावना बढ़ जाती है.

इसका परिणाम सन् 1958 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (ईईसी) का गठन था और आरंभ में छह देशों :  बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, इटली, लक्जमबर्ग और नीदरलैंड्स के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ते देखा गया. उसके बाद से विशाल एकल बाजार का सृजन हुआ और उसका अपनी पूर्ण क्षमता के साथ विकसित होना जारी रहा.

जिस संघ की शुरूआत विशुद्ध आर्थिक संघ के रूप में हुई थी, वह एक संगठन के रूप में विकसित होता गया, जिसका दायरा जलवायु, पर्यावरण और स्वास्थ्य से लेकर विदेशों के साथ संबंधों और सुरक्षा, न्याय और अप्रवासन जैसे नीतिगत क्षेत्रों तक फैल गया. 1993 में इसका नाम यूरोपीय आर्थिक समुदाय (ईईसी) से बदलकर यूरोपीय संघ किया जाना इसी को परिलक्षित करता है.

यूरोपीय संघ कानून के शासन पर आधारित है : यह जो भी करता है वह संधियों और इसके सदस्य देशों की स्वेच्छा और लोकतांत्रिक रूप से सहमति पर आधारित होता है. यह प्रतिनिधि लोकतंत्र के सिद्धांत द्वारा भी शासित है, नागरिकों को यूरोपीय संसद में संघ के स्तर पर प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व प्राप्त है और सदस्य देशों को यूरोपीय परिषद और यूरोपीय संघ की परिषद में प्रतिनिधित्व प्राप्त है.

वैश्विक प्रभाव :

ब्रेक्जि़ट ने अपने प्रभाव को लेकर विश्व समुदाय में आशंकाएं उत्पन्न कर दी हैं. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि ब्रिटेन के जनमत संग्रह ने अनिश्चितता उत्पन्न कर दी है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है.

आईएमएफ के प्रवक्ता गैरी राइस ने कहा, ‘’हम इस समय अनिश्चितता देख रहे हैं, जो संभवत: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है.‘’ उन्होंने यूरोपीय नेताओं से आह्वान किया कि वे इस खतरे को कम करने वाले निर्णायककदम उठाएं.

राइस ने कहा, ‘’ ब्रेक्जि़ट ने काफी अनिश्चितता उत्पन्न कर दी है और हमारा मानना है कि आने वाले समय में यह वृद्धि में कमी ला सकता है, विशेष कर ब्रिटेन में, लेकिन इसका प्रभाव यूरोप और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘’हमें, हम सभी नीति निर्माताओं को ऐसे निर्णायक कदमों के साथ तैयार रहना होगा, जो जहां तक हो सके इसके प्रभावों को कम कर सकें.‘’ अंग्रेजी भाषा भी ब्रेक्जि़ट का एक कारण हो सकती है, क्योंकि ऐसा देखा गया कि ब्रिटेन के अलावा और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में से किसी ने भी  अंग्रेजी को अपनी प्राथमिक भाषा के रूप में पंजीकृत नहीं कराया. अंग्रेजी यूरोपीय संघ की संस्थाओं की पहली पसंद रही है, लेकिन ब्रिटेन का जनमत संग्रह इसके उपयोग पर प्रतिबंध का सबब बन सकता है.

 यूरोपीय संसद में पोलैंड के सदस्य और यूरोपीय संघ के संवैधानिक मामलों से संबंधित समिति के अध्यक्ष दानुता हब्नर का कहना है, ‘’हमारे यहां कानून है, जिसके तहत यूरोपीय संघ के प्रत्येक सदस्य देश को एक राजभाषा अधिसूचित करने का अधिकार है.‘’

‘’ आयरिश ने गेलिक और माल्टीज ने माल्टीज को अधिसूचित किया है, इस तरह केवल यूके ने ही अंग्रेजी को अधिसूचित किया है.‘’ 24 जून को जनमत संग्रह के नतीजे आने के बाद दुनिया भर के शेयर बाजार औंधे मुंह जा गिरे और कारोबारियों ने कहा कि उन्हें ब्रिटेन में अपने कारोबार की समीक्षा करनी होगी, जिससे हजारों नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी. इस परिणाम ने स्टॄलग की कीमत 10 प्रतिशत कम करते हुए उसे 31 वर्ष के न्यूनतम स्तर 1.3229 डॉलर तक पहुंचा दिया. यूरोपीय शेयर बाजार खुलते ही करीब 8 प्रतिशत लुढक़ गये. ब्रिटिश बैंकिंग शेयरों ने भी सुबह के कारोबार में अपना एक चौथाई मूल्य खो दिया.

हालांकि, ब्रिटेन के व्यापार सचिव साजिद जावेद ने ब्रिटेन के कारोबारियों से नहीं घबराने की अपील करते हुए कहा है कि देश की आर्थिक बुनियाद इतनी मजबूत है कि वह बाजार की इस अल्पकालिक अस्थिरता का सामना कर सकती है.

(लेखक नयी दिल्ली में वरिष्ठ पत्रकार हैं)