विशेष लेख


Special article vol.31

सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अपने कौशल कार्यक्रम को आगे बढ़ाया

सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय चालकों और राजमार्ग निर्माण कामगारों के प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन के लिये अपने कार्यक्रम को तेज़ी के साथ आगे बढ़ा रहा है। पिछले तीन महीनों के दौरान योजना के दिशानिर्देशों पर प्रकाश डालते हुए केंद्र तथा राज्यों में संबंधित प्राधिकारियों और एजेंसियों को दिशानिर्देश जारी करते हुए कई परिपत्र जारी किये गये हैं।

चालकों के मामले में राज्य सडक़ परिवहन निगमों द्वारा संचालित मौजूदा चालक प्रशिक्षण केंद्रों पर कौशल प्रशिक्षण/कौशल उन्नयन प्रदान किया जायेगा। इसके अलावा प्राइवेट प्रमोटर्स को भी प्रशिक्षण सुविधाएं स्थापित करने के लिये आमंत्रित किया जा रहा है। सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय प्रत्येक राज्य सडक़ परिवहन निगम को अपने प्रशिक्षण ढांचे के विस्तार के लिये एक करोड़ का अनुदान देगा। इसी प्रकार मंत्रालय प्रत्येक निजी प्रमोटर को भी प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिये, एनएसडीसी अथवा किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थान से उनकी परियोजना रिपोर्ट के विधिवत मूल्यांकन और स्वीकृति के पश्चात, एक करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान करेगा।

मंत्रालय प्रशिक्षण अवधि के दौरान आय की क्षति की प्रतिपूर्ति के लिये प्रत्येक प्रशिक्षु को दैनिक न्यूनतम दिहाड़ी के आधार पर सरकारी और निजी संचालित प्रशिक्षण केंद्रों, दोनों में प्रत्येक प्रशिक्षु को वृत्तिका भी प्रदान करेगा। इस राशि को मंत्रालय के सडक़ संरक्षा कोष से वहन किया जायेगा। सरकारी और निजी संचालित प्रशिक्षण केंद्रों, दोनों पर प्रशिक्षण की लागत को कौशल विकास मंत्रालय की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से पूरा किया जायेगा।

राज्य सडक़ परिवहन निगमों से अपने प्रशिक्षण केंद्रों को आम जनता के लिये खोलने को कहा गया है। वर्तमान में केवल एसआरटीसी द्वारा नियुक्त किये गये चालकों को ही इन प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। कौशल विकास मंत्रालय की स्वचालित कौशल विकास परिषद (एएसडीसी) ने अपने राष्ट्रीय कौशल अर्हता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अधीन चालकों के प्रशिक्षण के लिये एक पाठयक्रम तैयार किया है। सभी प्रशिक्षण केंद्रों को एनएसक्यूएफ के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इस संबंध में मंत्रालय अगस्त में सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के परिवहन आयुक्तों/सचिवों तथा एसआरटीसी के प्रबंध निदेशकों को निर्देश जारी किये थे। अब तक योजना के कार्यान्वयन के लिये नौ एसआरटीसी से 55 प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

मंत्रालय के राजमार्ग निर्माण क्षेत्र में कामगारों के कौशल विकास के लिये संसाधनों के अभिसरण का सहारा लिया है। यह प्रशिक्षण कसेसनेअर्स/ठेकेदारों द्वारा परियोजना स्थलों, आईटीआईज और इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स पर संचालित किये जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, 100 करोड़ या अधिक के सिविल कार्यों की परियोजनाओं के लिये इस सप्ताह जारी किये गये एक परिपत्र के अनुसार प्रशिक्षण महानिदेशालय के अधिकृत प्रशिक्षण केंद्रों के जरिये संबंधित परियोजना की देखरेख कर रहे परियोजना प्रमुख द्वारा संचालित किया जायेगा। परियोजना स्थल के निकट स्थित संस्थानों को वरीयता दी जायेगी। परियोजना प्रमुख/कार्यपालक अभियंता को यह सुनिश्चित करना होगा कि कामगारों को प्रशिक्षण एनएसक्यूएफ के अनुरूप प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण लागत सिविल कार्य की कुल अनुमानित लागत के 005 प्रतिशत की दर पर आकस्मिक निधि के प्रावधान से वहन की जायेगी। उदाहरण के लिये यदि कुल सिविल निर्माण लागत 100 करोड़ रुपये है, 28 प्रतिशत की दर से आकस्मिक खर्च 28 करोड़ होगा। 005 प्रतिशत की दर से यथा प्रस्तावित कौशल विकास हेतु प्रावधान तब 005 करोड़ होगा और मुख्य कार्य के लिये उपलब्ध आकस्मिक खर्च की राशि रुपये 275 करोड़ होगी। इस प्रशिक्षण के लिये मंत्रालय प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण की अवधि के दौरान आय की हानि की प्रतिपूर्ति के लिये न्यूनतम दिहाड़ी पर आधारित वृत्तिका का भी भुगतान करेगा। इस खर्च को सीआरएफ आबंटन से पूरा किया जायेगा।

 

हाल के परिपत्र का उद्देश्य निजी ठेकेदारों/कन्सेसनेअर्स को प्रशिक्षण योजना से जोडऩा भी है, जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि संविदा दस्तावेजों/समझौते को यह प्रावधान शामिल करने के लिये संशेाधित किया जाये कि ठेकेदार/कन्सेसनेअर्स कम से कम 10 प्रतिशत प्रशिक्षित कामगारों को एनएसक्यूएफ के अनुरूप नियुक्त करने का प्रयास करेगा। यदि आवश्यक हो तो अपेक्षित कामगारों को मान्यता प्राप्त संस्थानों के जरिये प्रशिक्षित किया जा सकता है और साथ ही ठेकेदार/कन्सेसनेअर्स जब भी अपेक्षित होगा प्रशिक्षण संस्थानों और परियोजना निदेशक/कार्यपालक अभियंता के साथ परामर्श से अंतिम रूप दिये गये प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुरूप प्रशिक्षुओं के लिये प्रशिक्षण परियोजना स्थल/स्थलों पर संचालित करेगा। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि उपरोक्त प्रावधान तत्काल निविदा दस्तावेजों में शामिल किये जाने चाहिये और 100 करोड़ रुपये और इससे ऊपर के सिविल कार्यों वाली सभी परियोजनाओं के लिये लागू किया जाये जो कि निविदा चरण में हैं अथवा जिन्हें अभी अवार्ड किया जाना है। चालू परियोजनाओं के लिये इसे मुख्य संविदा समझौते के पूरक समझौते के तौर पर हस्ताक्षर करते हुए शामिल किया जाये।