विशेष लेख


Special article vol.31

भारत में प्रशिक्षुता प्रशिक्षण का

वर्तमान परिदृश्य

प्रशिक्षुता अधिनियम, 1961 के अधीन देश भर में 30,165 स्थापनाओं में केवल 230 लाख ट्रेड प्रशिक्षु प्रशिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इनमें से 36000 प्रशिक्षु केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/केंद्रीय सरकार में और 194 लाख प्रशिक्षु राज्य सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों/राज्य सरकार के विभागों और निजी क्षेत्र में हैं। हमारे पास प्रशिक्षुता को प्रोत्साहित करने और युवाओं के लिये सीधे उद्योग से जुडऩे के अवसर विस्तारित करने के व्यापक अवसर हैं।

प्रशिक्षुता अधिनियम का उद्देश्य जिसमें अब सुधार किया गया है

प्रशिक्षुता अधिनियम, 1961 का अधिनियमन उद्योग में मौजूद सुविधाओं का उपयोग करते हुए ऑन-जॉब प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के कार्यक्रम के नियमन के उद्देश्य से किया गया था। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिये जि़म्मेदार प्रशासनिक मंत्रालय है।

प्रशिक्षुता के बारे में कौशल नीति क्या कहती है?

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 15 जुलाई, 2015 को शुरू की गई राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता नीति में प्रशिक्षुता पर भारत में कुशल मानवशक्ति के सृजन के लिये एक प्रमुख कार्यक्रम के तौर पर फ़ोकस किया गया है। नीति में 2020 तक देश में प्रशिक्षुता अवसरों को दस गुणा बढ़ाने में सुविधा के लिये एमएसएमई सेक्टर सहित उद्योग के साथ सक्रियता से काम करने का प्रस्ताव किया गया है।

आज के दिन प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के क्या फायदे हैं?

प्रशिक्षुता प्रशिक्षण स्थापनाओं में प्रशिक्षण अवसंरचना पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना कुशल मानवशक्ति के विकास का एक सर्वाधिक दक्षतापूर्ण मार्ग है। प्रशिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत कोई भी व्यक्ति आसानी से नियमित रोजग़ार के समय औद्योगिक वातावरण में आसानी से ढल सकता है।  प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के अन्य लाभ भी हैं।

प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के बारे में विश्वव्यापी क्या परिदृश्य है?

प्रशिक्षुता प्रशिक्षण समूची दुनिया में बहुत अधिक महत्व हासिल कर रहा है। प्रशिक्षुता को कार्यबल का कौशल बढ़ाने और देश की संपूर्ण उत्पादकता बढ़ाने के लिये एक तंत्र के तौर पर देखा जाता है। जापान में 10 मिलियन प्रशिक्षु, जर्मनी में 3 मिलियन प्रशिक्षु, अमरीका में 05 मिलियन प्रशिक्षु, ब्रिटेन में 05 मिलियन प्रशिक्षु हैं।

कई देशों में सरकारों ने कंपनियों को प्रशिक्षुता सेवाओं में शामिल होने और अपनी प्रशिक्षुता सीटें बढ़ाने के वास्ते प्रोत्साहित करने और कंपनियों द्वारा प्रशिक्षुता प्रशिक्षण पर आने वाली लागत को बांटने के लिये प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की है। अक्सर प्रयोग किये जाने वाले प्रोत्साहन तंत्रों में प्रशिक्षण लेवी प्रणाली के भाग के तौर पर प्रशिक्षण लागतों की प्रतिपूर्ति (अथवा आंशिक प्रतिपूर्ति), उदाहरणार्थ डेनमार्क, दक्षिण अफ्रीका में यह व्यवस्था लागू है अथवा सरकार द्वारा कंपनियों को सीधे सब्सिडी का भुगतान किया जाता है जो कि अप्रेंटिसिस के रोजग़ार को प्रमाणित कर सकती हैं (आस्ट्रेलिया, फ्रांस)। अन्य देशो ंमें प्रशिक्षुता में संलग्न कंपनियों के लिये विशेष कर प्रोत्साहन दिये जाते हैं उदाहरण के लिये कनाडा में टैक्स क्रेडिट स्कीम है जिसके तहत प्रशिक्षुता पर किये गये व्यय के 30 से 40 प्रतिशत की टैक्स क्रेडिट के रूप में प्रतिपूर्ति की जाती है।

सरकारें प्रशिक्षुता के समर्थन में बड़ी मात्रा में धन ख़र्च करती हैं। आस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ सरकार प्रशिक्षुता को प्रोत्साहन देने के लिये 11 बिलियन अमरीकी डॉलर खर्च करती है। यू।के। प्रशिक्षुता कार्यक्रम पर 15 बिलियन यूरो वार्षिक खर्च करता है और 16-18 वर्ष के बीच की आयु के युवाओं के लिये प्रशिक्षुता के लिये आने वाली 100 प्रतिशत प्रशिक्षण लागत सरकार वहन करती है। फ्रांस प्रति अकादमिक वर्ष प्रति प्रशिक्षु न्यूनतम 3000 यूरो और जर्मनी दोहरी प्रणाली के लिये 3 अरब यूरो हर वर्ष खर्च करता है। कई देशों ने प्रशिक्षुता में डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम आरंभ किये हैं।

राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना क्या है?

मंत्रिमंडल ने 5 जुलाई, 2016 को हुई बैठक में राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) को मंजूरी प्रदान की थी। तदनुसार एनएपीएस के दिशानिर्देश तैयार कर दिये गये और 19 अगस्त, 2016 को इन्हें अधिसूचित कर दिया तथा अधिसूचना की तिथि से इन्हें प्रभावी कर दिया गया।

योजना के घटक क्या हैं?

 

योजना के दो घटक हैं: नियोक्ता के पास प्रति प्रशिक्षु प्रति माह अधिकतम रु 1500/- के विषयाधीन निर्धारित वृत्तिका के 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी करना। नये प्रशिक्षुओं के लिये बेसिक प्रशिक्षण अवधि के दौरान वृत्तिका सहायता नहीं दी जायेगी। उन प्रशिक्षुओं के संबंध में रु 7500 की बेसिक प्रशिक्षण की लागत की हिस्सेदारी करना जो कि किसी औपचारिक ट्रेड प्रशिक्षण के बगैर प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के लिये सीधे आये हैं।