विशेष लेख


Special Article Volume-33

 

स्वच्छता पखवाड़ा
कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय में स्वच्छता पखवाड़ा मंडियों में लगेंगे कचरा प्रबंधन संयंत्र
केन्द्रीय कृषि और कृषक कल्याण मंत्री

राधा मोहन सिंह ने हाल ही में मीडिया को स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान अपने मंत्रालय की पहलकदमियों और उनके नतीजों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय के सभी तीन विभागों ने इस साल 16 से 31 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया। कृषि, सहकारिता और कृषक कल्याण विभाग, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र विभाग (डीएडीएफ) तथा कृषि अनुसंधान और शिक्षण विभाग ने कार्यालय परिसरों से बाहर निकल कर कृषि मंडियों, मछली बाजारों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के नजदीक के गांवों में स्वच्छता अभियान चलाया। पखवाड़े के दौरान उस तरह के कदमों पर ध्यान केन्द्रित किया गया जो इसके खत्म होने के बाद भी जारी रखे जायेंगे।

पखवाड़े के दौरान 271 कृषि मंडियों में स्वच्छता अभियान चलाया गया। एक स्वच्छता एक्शन प्लान तैयार कर उसमें इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (इनाम) योजना के तहत हर मंडी में कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने के लिये 10 लाख रुपये का प्रावधान करने का फैसला किया गया। यह फैसला भी किया गया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के कोष का एक प्रतिशत हिस्सा ठोस कचरा प्रबंधन पर खर्च किया जायेगा। इसके अलावा तीनों विभागों के विभिन्न कार्यालयों में सफाई की गयी, शौचालयों में सेंसर लगाये गये तथा गैरजरूरी कागजातों, कबाड़ और अवैध कब्जों को हटाया गया। श्री राधा मोहन सिंह 26 अक्टूबर को नयी दिल्ली के कृषि भवन में कृषि, सहकारिता और कृषक कल्याण विभाग के मुख्यालय में तथा 28 अक्टूबर को चंडीगढ़ की कृषि मंडी में सफाई और वृक्ष रोपण अभियान में शामिल हुए। इस विभाग के अधीन भारतीय मृदा और भूमि उपयोग सर्वेक्षण (एसएलयूएसआई) के देश भर के केन्द्रों ने स्वच्छता गतिविधियों में स्थानीय सांसदों और अन्य जन प्रतिनिधियों को शरीक किया। एसएलयूएसआई कोलकाता में एक कंपोस्ट पिट का उद्घाटन  किया गया। राज्यों के सहयोग से मंडियों में कंपोस्ट मशीनें भी लगायी जा रही हैं।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान राष्ट्रीय मत्स्य क्षेत्र विकास बोर्ड (एनएफडीबी), भारतीय मत्स्य क्षेत्र सर्वेक्षण (एफएसआई), केन्द्रीय मत्स्य क्षेत्र, समुद्री और इंजीनियरी प्रशिक्षण संस्थान (सीआईएफएनईटी), राष्ट्रीय मत्स्य क्षेत्र, उत्पादन पश्चात प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण संस्थान (एनआईएफपीएचएटीटी) तथा केन्द्रीय मत्स्य क्षेत्र तटीय इंजीनियरी संस्थान (सीआईसीईएफ) ने भी स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान कई कार्यक्रम चलाये। पंद्रह राज्यों में 50 थोक और खुदरा मछली बाजारों की सफाई कर उनमें स्वच्छता बनाये रखने के लिये जागरूकता फैलाने की मुहिम चलायी गयी। मत्स्य विभाग के अधीन सभी संस्थानों की इमारतों और उनके परिसरों में सफाई की गयी। स्वास्थ्यकर मत्स्य प्रबंधन तथा मछली के बाजारों और इसके प्रसंस्करण की प्रक्रिया में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये शिविरों और पदयात्राओं का आयोजन किया गया और पर्चे बांटे गये। एनएफडीबी के गुवाहाटी स्थित पूर्वोत्तर क्षेत्र केन्द्र में समेकित मत्स्य पालन के जरिये कचरे के पुनर्चक्रण तथा कोलकाता के नलबन में अवशिष्ट जल मत्स्य पालन पर राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गयीं।

सांसदों, पश्चिम बंगाल के मत्स्य क्षेत्र मंत्री, केरल और तमिलनाडु के महापौरों और पार्षदों, राज्य मत्स्य क्षेत्र विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिलाधिकारियों वगैरह ने स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभायी। कृषि और कृषक कल्याण राज्यमंत्री परषोत्तम रूपाला ने गुजरात के अमरेली में स्वच्छता कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान देश भर में चलाये गये विभिन्न कार्यक्रमों में मछली विक्रेताओं, खुदरा व्यापारियों, जाल बनाने वालों, संस्थानों के छात्रों, कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं, मछुआरा संगठनों के सदस्यों तथा आम नागरिकों को भी शामिल किया गया। राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों के सहयोग से देश भर में जागरूकता शिविर और स्वच्छता अभियान चलाये गये। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और दुर्ग, असम के गुवाहाटी, सिलचर और कछार, मणिपुर के विष्णुपुर, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तथा तमिलनाडु के कड्डालोर और नागरकोइल के अलावा कोलकाता, बंगलूरू, लखनऊ, रांची और कोच्चि में इस तरह के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

कृषि अनुसंधान और शिक्षण विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में भी 16 के 31 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया गया। आईसीएआर के नयी दिल्ली स्थित मुख्यालय, सभी 102 अनुसंधान संस्थानों और 648 कृषि विज्ञान केन्द्रों ने पखवाड़े के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्होंने अपने परिसरों और रिहायशी क्षेत्रों के अलावा उनके आसपास के गांवों और अन्य इलाकों में सफाई की तथा विचार गोष्ठियों, जागरूकता शिविरों, रैलियों, नुक्कड़ नाटकों और विशेषज्ञों के व्याख्यानों का आयोजन किया।

कृषि विज्ञान केन्द्रों और संस्थानों के जरिये 3040 गांवों में किसानों और ग्रामीण युवाओं की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छता को बढ़ावा देने से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। खेती की स्वच्छ प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं तथा कृषि अवशेषों के सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल को बढ़ावा देने के प्रयास किये गये। पखवाड़े के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में केन्द्रीय और स्थानीय नेताओं तथा संस्थानों और आईसीएआर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नयी दिल्ली ने अपने आवासीय परिसर के हर ब्लॉक के लिये स्वच्छता निरीक्षकों की एक टीम गठित की है जो घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को निवासियों की भागीदारी से अलग-अलग कर उनके समुचित पुनर्चक्रण की व्यवस्था करेगी।

कृषि विज्ञान केन्द्र, शिकोहपुर (गुडग़ांव) में 27 अक्टूबर को कृषि अवशेष से धन सृजन विषय पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कृषि और कृषक कल्याण राज्यमंत्री सुदर्शन भगत ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। इसमें कृषि अवशेष के सर्वश्रेष्ठ उपयोग से संबंधित प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन भी किया गया। इनमें बायो कंपोस्ट तैयार करने, कीट कंपोस्टिंग, भूसे के उपयोग, पुआल संवद्र्धन, अवशिष्ट जल पुनर्चक्रण तथा कपास और मत्स्य क्षेत्र कचरा प्रबंधन से संबंधित प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। संगोष्ठी में 350 से अधिक किसानों और वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। आईसीएआर मुख्यालय के कार्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कृषि विज्ञान केन्द्रों के लिये एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसके  विजेताओं का चयन स्वच्छता गतिविधियों की दैनिक और अंतिम रिपोर्टिंग के आधार पर किया जायेगा। बेहतरीन स्वच्छता गतिविधियां चलाने वाले विजेताओं को आईसीएआर के स्थापना दिवस के अवसर पर पुरस्कृत किया जायेगा।

राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ 27 अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंस कर उन्हें स्वच्छता पखवाड़ा से संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गयी। उनसे अनुरोध किया गया है कि वे कृषि अवशेष से कंपोस्ट बनाने के लिये अपनी मौजूदा योजनाओं में पर्याप्त प्रावधान करें। डीडी किसान से राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र की ठोस कचरा निस्तारण प्रौद्योगिकी और आईसीएआर की तरल कचरा निस्तारण प्रौद्योगिकी पर दो फिल्में बनाने के लिये कहा गया है जिन्हें इस टेलीविजन चैनल के मौजूदा कार्यक्रमों में दिखाया जायेगा।

स्वच्छ भारत अभियान में नदियों की प्रमुख भूमिका है। गंगा भारत में चिरकाल से स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक रही है। इसे फिर से साफ बनाने के लिये जरूरी है कि इसके किनारे के क्षेत्रों में जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जाये ताकि खेती में हानिकारक कीटनाशकों, उर्वरकों और अन्य रसायनों का इस्तेमाल घटाया जा सके। कृषि और कृषक कल्याण मंत्रालय ने 16 सितंबर को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के साथ एक करार किया। इस करार के तहत उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल तक 1657 ग्राम पंचायतों के निवासियों को जैविक खेती के लिये प्रेरित किया जायेगा ताकि प्रदूषणकारी रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल घटा कर गंगा की प्राचीन पवित्रता को बहाल किया जा सके। मीडिया के साथ बातचीत में श्री भगत, कृषि, सहकारिता और कृषक कल्याण विभाग के सचिव एसके पट्टनायक, डीएडीएफ के सचिव देवेन्द्र चौधरी तथा आईसीएआर के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान और शिक्षण विभाग के सचिव त्रिलोचन महापात्रा भी मौजूद थे।    

 

-रोस