विशेष लेख


volume-1 , 2017

जानिए अपने राज्यों को : ओड़ीशा

पहली अप्रैल को ओड़ीशा दिवस मनाया जाता है

ओड़ीशा नाम की व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘‘ओद्रा विषया’’ अथवा ‘‘ओद्रा देश’’ से हुई है. प्राचीन प्रांत ‘‘ओद्रा देश’’ अथवा ‘‘ओर-देशा’’ महानदी घाटी और सुबर्णरेखा नदी के निचले जलमार्ग तक सीमित था. इसमें वर्तमान कटक और संबलपुर जिले तथा मिदनापुर का एक हिस्सा शामिल था. पश्चिम में यह गोडवाना से, उत्तर में जाशपुर और सिंहभूम के वन्य पर्वतीय राज्यों, पूर्व में समुद्र से और दक्षिण में गंजम से घिरा था.
ओड़ीशा राज्य, जो कि एक समय राजाओं और साम्राज्यों की भूमि हुआ करती थी, अब प्राकृतिक संसाधनों का समृद्ध स्रोत मानी जाती है. इसके लोग, मंदिर, वास्तुकला, शास्त्रीय नृत्य, धार्मिक समारोह, मेले और त्यौहार, विशिष्ट हथकरघा और हस्तशिल्प, ग्रीन वुडलैंड्स, रॉक गुफाएं, आकर्षक नीली पहाडिय़ां अक्सर दुनिया भर के सैलानियों और यात्रियों के आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं. इसका समृद्ध इतिहास, क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन, आकर्षक मूर्तिकला से परिपूर्ण मंदिर और स्मारक, आदिवासी नृत्य, संगीत, रीतिरिवाज, शिकार, उल्लास और वन्य मार्ग महान इतिहासकारों और शोधार्थियों के लिये शोध के महत्वपूर्ण विषय रहे हैं.
ओड़ीशा 17.49 उ. और 22.34 उ. अक्षांश के समानांतर और 81.27 पू. तथा 87.29 पू. देशांतर के मध्य स्थित है. पूर्व में यह बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में मध्य प्रदेश और दक्षिण में आंध्र प्रदेश से घिरा है. इसकी तटीय रेखा कऱीब 450 कि.मी. है. इसका क्षेत्र 155,707 वर्ग कि.मी. है जो कि भारत के कुल क्षेत्रफल का करीब 4.87 है:
प्रमुखता:
एकरूपता, निरंतरता और भौगोलिक चरित्र के आधार पर ओड़ीशा को पांच प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया जाता है:
1)पूर्व में ओड़ीशा तटीय मैदान
2)मध्यवर्ती पर्वतीय और पहाड़ी क्षेत्र
3)मध्य पठार
4)पश्चिमी रोलिंग ऊपरी भूभाग और
5) प्रमुख बाढ़ वाले मैदानी हिस्से
नदियां:
यहां नदियों के चार समूह हैं जो कि ओड़ीशा से होकर बंगाल की खाड़ी में प्रवाहित होते हैं 
ये हैं:-
(1)नदियां, जिनका स्रोत राज्य से बाहर है (सुबर्णरेखा, ब्रह्मी और महानदी).
(2)नदियां जिनका स्रोत राज्य के भीतर है (बुढ़ाबलंक, वैतरणी, सालांडी, और रूशिकुल्या)
(3)नदियां, जिनका स्रोत ओड़ीशा के भीतर है परंतु अन्य राज्यों से होकर बहती हैं (बहुडु, वंशधारा और नागावली)
(4)नदियां, जिनका स्रोत ओड़ीशा के भीतर है परंतु नदियों की सहायक नदियां अन्य राज्यों से होकर बहती हैं (मचकुंद, सिलेरू, कोलाब और इंद्रावती)
झीलें
चिल्का झील ओड़ीशा के दक्षिणी भाग में तटीय मैदान में खारे पानी की झील है। इसका क्षेत्रफल सर्दियों से मानूसन तक 780 वर्ग कि.मी. से 144 वर्ग कि.मी. तक भिन्न-भिन्न होता है और 71 कि.मी. लंबा तथा 32 कि.मी. चौड़ा होता है. मानसून के दौरान इसकी लवणता कम होती है. परंतु सर्दियों में बंगाल की खाड़ी से तंग मुहाने से समुद्री ज्वार के अधिक प्रवाह के कारण यह अधिकतम हो जाता है.
अनसुपा कटक जिले के बांकी में स्थित मीठे पानी की झील है. इसकी लंबाई 3 कि.मी. और चौड़ाई 1.5 कि.मी. है। सारा पुरी के निकट स्थित मीठे पानी की एक अन्य झील है. इसकी लंबाई 5 कि.मी. और चौड़ाई 3 कि.मी. है. भुवनेश्वर के निकट कटक जिले के नंदनकानन में स्थित करीब 134 एकड़ में फैली कंजिया एक अन्य मीठे पानी की झील है.
राज्य के प्रतीक
राज्य पशु:सांबर हिरण
राज्य पक्षी: इंडियन रोलर (ब्लू जे)
राज्य वृक्ष: कदम्ब
राज्य फूल: अशोक
कुछ उच्च अनुवर्ती तथ्य:
*2011 की जनगणना के अनुसार इसकी कुल जनसंख्या 41,974,218 है।
*(क) कुल पुरुष 2,12,12,136
*(ख) कुल महिलाएं 2,07,62,082
*कुल अनुसूचित जाति जनसंख्या (2011) 71,88,463 और कुल जनसंख्या का प्रतिशत 17.1%
*कुल अनुसूचित जनजाति जनसंख्या (2011) 95,90,756 और कुल जनसंख्या का प्रतिशत
22. 08%
*जिलों की संख्या 30
*उप-मण्डलों की संख्या 58
*तहसीलों की संख्या 317
*ग्राम पंचायतों की संख्या 6,227
*ब्लॉकों की संख्या 314
*गांवों की कुल संख्या 2011,51,313
*विधानसभा सीटों की संख्या - 147
*लोकसभा सीटों की संख्या - 21
*राज्यसभा सीटों की संख्या - 10
कला और संस्कृति:
उडिय़ा साहित्य
ओड़ीशा मौखिक साहित्य की बहुत ही समृद्ध परंपरा से परिपूर्ण है जिसमें असंख्य मिथक, किंवदंतियां और लोकगीत शामिल हैं. दूसरी भारतीय भाषाओं में साहित्य की तरह, आधुनिक उडिय़ा साहित्य पिछले एक सौ वर्षों के दौरान तेज़ी से विकसित हुआ है. 14वीं सदी के सरला दास (सिद्धेश्वर पांडा) उडिय़ा के पहले महान कवि थे, जिसने शास्त्रीय महाभारत को साधारण उहिडय़ा में अपनाया और देवी दुर्गा की प्रशंसा में चंडी पुराण तथा विलांक मयाना की रचना की। अर्जुन-दास ने पहली उडिय़ा कविता रामबिबाह लिखी. फकीर मोहन सेनापति को आधुनिक उडिय़ा साहित्य के जनक के तौर पर सम्मानित किया जाता है.
महत्वपूर्ण नृत्य शैलियां:
ओडि़शी नृत्य: ओडि़शी नृत्य राज्य का ठेठ शास्त्रीय नृत्य है. इसकी शुरूआत मंदिरों से हुई.
दालखाई नृत्य: यह पश्चिमी ओड़ीशा का सबसे लोकप्रिय लोक-नृत्य है। यह दशहरा, भाईजिउंटिया, फागुन पुनि, नौखई आदि जैसे बहुत ही सामान्य त्यौहारों पर प्रस्तुत किया जाता है.
छाऊ नृत्य: छाऊ एक प्राचीन नृत्य शैली है. इसकी व्युत्पत्ति उडिय़ा पैकास (योद्धाओं) की उपहासभरी लड़ाइयों से हुई है जो कि स्वदेशी संगीत उपकरणों के साथ लयबद्धता से लड़ते थे.
जनजातीय नृत्य: जनजातियां, जो कि ओड़ीशा की कुल जनसंख्या का करीब एक चौथाई हिस्सा हैं, धर्मनिरपेक्ष, धार्मिक और मौसमी चरित्र के बहुत से नृत्य करती हैं.
महारी: यह पूर्वी भारतीय राज्य ओड़ीशा का एक धार्मिक प्रकृति का नृत्य है जो कि पुरी में भगवान जगन्नाथ के मंदिर में किया जाता है.
प्रसिद्ध मंदिर
भगवान जगन्नाथ मंदिर, पुरी: यह भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक पवित्र वैष्णव मंदिर है.
रथ यात्रा
यह जून से जुलाई माह के दौरान अथवा आषाढ़ शुक्ल द्वितीय तिथि को आयोजित की जाती है। यह एक सबसे प्रसिद्ध त्यौहार है जिसमें दुनिया भर से तीर्थयात्री और दर्शक पहुंचते हैं. रथ यात्रा के दौरान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां मंदिर से बाहर लाई जाती हैं और एक बड़े रथ में रखी जाती हैं तथा हजारों लोग इसे खींचते हैं. लोकप्रिय परंपरा के अनुसार रथों को पुरी के गजपति महाराज द्वारा सोने की झाड़ू के साथ साफ किये जाते हैं. मूर्तियों को गुंडिचाघर ले जाया जाता है जहां वे आठ दिनों तक ठहरते हैं और अपने मंदिर में बहुदा यात्रा को लौट आते हैं.
सूर्य मंदिर, कोर्णाक: 13वीं सदी का मंदिर एक विशाल रथ के आकार में नक्काशी वाले पत्थर के पहियों, स्तम्भों और दीवारों पर खड़ा है.
लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर: यह मंदिर शिव और विष्णु के रूप में हरिहर को समर्पित है। यह भुवनेश्वर में सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है.
प्रमुख वन
उष्णकटिबंधीय सूखी पर्णपाती वन
उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन
उष्णकटिबंधीय अद्र्ध सदाबहार वन
समुद्र तटीय और दलदल वन क्षेत्र
बागान टीओएफ
राष्ट्रीय उद्यान:
भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान
सिमिलिपल राष्ट्रीय उद्यान
रामसर नम भूमि:
भीतरकनिका मैंग्रोव, चिल्का लागून
टाइगर रिजर्व
सिमिलिपल रिजर्व, सातकोसिया रिजर्व
एलिफेंट रिजर्व
मयूरभंज एलिफेंट रिजर्व
महानदी एलिफेंट रिजर्व
संबलपुर एलिफेंट रिजर्व
बैतरणी एलिफेंट रिजर्व
दक्षिण ओड़ीशा एलिफेंट रिजर्व
ओड़ीशा में विश्वविद्यालयों की सूची
*उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
*उत्कल संस्कृति विश्वविद्यालय
*संबलपुर विश्वविद्यालय, बुरला
*बरहामपुर विश्वविद्यालय, भंजविहार
*रावेनशा विश्वविद्यालय, कटक
*श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी
*फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालासोर
*नार्थ ओड़ीशा विश्वविद्यालय, बरिपडा
*ओड़ीशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
*बीजू पटनायक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, राउरकेला
*राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (पूर्ववर्ती क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कालेज), राउरकेला
*वीर सुरेंद्र साई प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बुरला
*अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी)
*कलिंगा औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान, विश्वविद्यालयवत्
*शिक्षा ओ अनुसंधान विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालयवत् )
*सेंटुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट
*नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, ओड़ीशा, कटक
*केंद्रीय विश्वविद्यालय, ओड़ीशा, कोरापुट
ओड़ीशा में राष्ट्रीय संस्थानों की सूची
*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर
*राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला
*बीजू पटनायक राष्ट्रीय इस्पात संस्थान, पुरी
*भारतीय जनसंचार संस्थान, ढेनकनाल
*केंद्रीय मात्स्यिकी संस्थान, कौशल्यगंगा
*केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक
*भौतिकी संस्थान, भुवनेश्वर
*क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, भुवनेश्वर
*क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, भुवनेश्वर
*क्षेत्रीय कृषि महिला अनुसंधान केंद्र
*समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ
*ओड़ीशा दूरसंचार सर्कल
*राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान
*अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान
ओड़ीशा में तकनीकी संस्थान
*आईआईआईटी, भुवनेश्वर
*राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (पूर्ववर्ती क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कालेज) राउरकेला
*यूनिवर्सिटी कालेज ऑफ इंजीनियरिंग, बुरला, संबलपुर
*कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर
*इंदिरा गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान, सारंग, ढेनकनाल
*जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर
*कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, विश्वविद्यालयवत्
*ओड़ीशा इंजीनियरिंग कालेज, भुवनेश्वर
*कालेज ऑफ इंजीनियरिंग, भुवनेश्वर
*सिलिकान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
*करूपाजला ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स
*इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन एंड रिसर्च
*सीवी रामन कालेज ऑफ इंजीनियरिंग, भुवनेश्वर
*धनेश्वर रथ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट स्टडीज, कटक
*गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
*राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान-बरहामपुर
*घनश्याम हेमलता इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुरी
*सिनर्जी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
*सीमांत इंजीनियरिंग कालेज, मयूरभंज
*सामंत चंद्र शेखर इंस्टी. ऑफ टेक. एंड मैनेजमेंट
*पदमानव कालेज ऑफ इंजीनियरिंग राउरकेला
*सत्यसाई इंजीनियरिंग कालेज, बालासोर
*अजय बिनय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी,कटक
*जगन्नाथ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कटक
*माझिघरियानी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
*जगन्नाथ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट
*सेंचुरियन स्कूल ऑफ रूरल इंटरप्राइज मैनेजमेंट
राज्य सिविल सेवाएं:
ये परीक्षाएं अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं के साथ ओड़ीशा लोक सेवा आयेाग द्वारा आयोजित की जाती हैं। ओड़ीशा लोक सेवा आयोग का गठन 1 अप्रैल, 1949 को पूर्ववर्ती बिहार और ओड़ीशा संयुक्त लोक सेवा आयोग से अलग होने के बाद किया गया था. आयोग के पास छह से अधिक दशकों के इसके कार्यकाल के दौरान ओड़ीशा सरकार की विभिन्न सेवाओं के कार्मिकों के चयन के मामले में भिन्न-2 प्रकार का अनुभव और विशेषज्ञता है. इसने ओड़ीशा की सार्वजनिक सेवाओं के लिये उत्कृष्ट कार्मिक तैयार करने का उद्देश्य हासिल करने के दृष्टिगत एक लंबा मार्ग तय किया है. आयोग वेबसाइट है: www.opsc.gov.in (मोहित मिश्रा, वरि. पत्रकार द्वारा संकलित) (विवरण और आंकड़े भारत सरकार और ओड़ीशा सरकार के पोर्टलों से लिये गये हैं)