विशेष लेख


Volume-4

भारतीय सर्वेक्षण का माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर से मापने का प्रस्ताव


भारतीय सर्वेक्षण ने राष्ट्र की सेवा में 250 वर्ष पूरे कर लिए हैं और वह इस वर्ष अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रहा है. ‘‘भारत में भूस्थानिक नीति फ्रेमवर्क के बारे में इस्तेमाल कर्ताओं का संदर्श’’ विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय सर्वेक्षण और फिक्की द्वारा नई दिल्ली में किया गया. 10 अप्रैल का दिन राष्ट्रीय सर्वेक्षण दिवस के रूप में भी मनाया गया. ढाई सौ वर्ष पूर्ण होने के समारोहों के हिस्से के रूप में, भारतीय सर्वेक्षण ने वर्ष 2017 के दौरान माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर से मापने का प्रस्ताव किया है. भारत विश्व का पहला देश है, जिसने भारत के महा सर्वेक्षकके रूप में सर जार्ज एवरेस्ट के नेतृत्व में 1855 में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई घोषित की और यह सिद्ध किया कि माउंट एवरेस्ट दुनिया में सबसे ऊंची चोटी है. बाद में भारत ने 1956 में एक बार फिर से एवरेस्ट की ऊंचाई मापने की कवायद पूरी की और उसकी ऊंचाई घोषित की. वर्ष 2015 में गोरखा भूकम्प के बाद वैज्ञानिक समुदाय द्वारा अनेक संदेह व्यक्त किए गए. इन संदेहों को देखते हुए भारतीय सर्वेक्षण ने नेपाल के सर्वेक्षण विभाग के साथ मिल कर भारत-नेपाल संयुक्त वैज्ञानिक अभ्यासके रूप में माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई फिर से मापने का प्रस्ताव किया है. यह प्रस्ताव राजनयिक चैनलों के जरिए नेपाल को भेज दिया गया है और नेपाल सरकार की औपचारिक सहमति मिलने के बाद यह अभियान शुरू किया जाएगा.
परिचर्चाओं के दौरान भारतीय सर्वेक्षण के उत्पादों एवं सेवाओं के सभी हितभागियों के विचार-विमर्श और विश्लेषण में भारत में भूस्थानिक नीति फ्रेमवर्क के बारे में इस्तेमालकर्ताओं के संदर्श पर ध्यान केंद्रित किया गया.
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा कि देश में वर्तमान प्रौद्योगिकी परिदृश्य और विकासात्मक जरूरतों एवं चुनौतियों को देखते हुए परिचर्चाओं में व्यक्त विचारों और सम्मेलन में एकत्र हुए सभी हितभागियों के सुझावों से एक व्यापक स्पैक्ट्रम को शामिल करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे देश में भूस्थानिक नीति पैराडिग्म को आकार देने के लिए अति उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी.
‘‘नक्शे’’ पोर्टल का शुभारंभ
भारतीय सर्वेक्षण (एसओआई) की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक नए वेब पोर्टल नक्शेका शुभारंभ किया. एसओआई 1767 में अपनी स्थापना के बाद से और राष्ट्रीय मानचित्र नीति - 2005 के अनुरूप प्राकृतिक और मानव निर्मित भौगोलिक विशेषताओं से युक्त प्राकृतिक मानचित्र या मुक्त सीरीज़ मानचित्र (ओएसएम) तैयार कर रहा है. इनमें भू-भाग या स्थलाकृति विशेषताएं भी शामिल होती हैं. ये ओएसएम मानचित्र ‘‘नक्शे’’ वेब पोर्टल से 1: 50,000 स्केल पर फ्री डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराए गए हैं. इन्हें भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप आधार सक्षम इस्तेमालकर्ता प्रमाणन प्रक्रिया के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है.
भारतीय सर्वेक्षण देश की प्रमुख मानचित्र एजेंसी है, जो इस वर्ष अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रही है. भारतीय सर्वेक्षण की उत्पत्ति वर्ष 1767 में हुई थी. यह भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और दुनिया में स्थापित प्राचीनतम सर्वेक्षण विभागों में से एक है. 19वीं सदी में 10 अप्रैल, 1802 को जाने माने सर्वेक्षकों कर्नल लैम्टन और सर जार्ज एवरेस्ट ने द ग्रेट ट्रिग्नोमीट्रिक सर्वे (जीटीएस) के साथ देश में वैज्ञानिक सर्वेक्षण और मानचित्रण के लिए फाउंडेशन की स्थापना की. एसओआई देश के प्रत्येक भाग का सर्वेक्षण और मानचित्रण कर चुका है. इन मानचित्रों ने भारत के राष्ट्र निर्माण की कहानी में बहुमूल्य भूमिका अदा की है और वे आधुनिक भारत की सभी प्रमुख विकास गतिविधियों की स्थापना में ध्रुवीय योगदान करते रहे हैं.
पोर्टल के शुभारंभ के बाद एसओआई जियो-पोर्टल और वेब सर्विस प्लेटफार्म के बारे में कर्टेन रेजर और भारत में भूस्थानिक पैराडिग्म के बारे में एक परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें भारत में भूस्थानिक नीति फ्रेमवर्क के बारे में इस्तेमालकर्ताओं के संदर्श पर विचार किया गया. देश के लिए जियोइड मॉडल के विकास के बारे में एक तकनीकी प्रेजेंटेशन भी किया गया.
विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री श्री वाई एस चौधरी, सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, डॉ. आशुतोष शर्मा, भारत के महा सर्वेक्षक डॉ. स्वर्ण सुब्बाराव और भूस्थानिक उद्योग के कई अन्य वैज्ञानिक एवं व्यवसायी भी इस अवसर पर मौजूद थे.