सफलता की कहानी


Volume-22

जीवन कौशल और कॅरिअर को समृद्ध बनाएं

डॉ. जितेंद्र नागपाल

जीवन कौशल और योग्यताएं अनुकूलन और रचनात्मक व्यवहार के अंतर्गत आती हैं, जो हमारे युवाओं को रोजमर्रा के जीवन की मांगों और चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने में सक्षम बनाती हैं। शिक्षण अथवा प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए अर्जित किए जाने वाले मानव कौशलों का एक ऐसा समूह है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में आमतौर पर सामना की जाने वाली समस्याओं और सवालों से निपटने में उपयोगी है। डॉ। जितेन्द्र नागपाल जीवन कौशल प्रशिक्षक हैं। वे युवाओं की खुशहाली और स्कूलों, कॉलेजों और कार्पोरेट क्षेत्र के लिए व्यावहारिक कौशल में एक विकासात्मक प्रशिक्षक हैं। इस नियमित स्तंभ (कॉलम) के अंतर्गत वे हमारे पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न: मेरी आयु 21 वर्ष है और मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रही हूं। मुझे पारिवारिक कारणों से पिछले वर्ष कालेज बदलना पड़ा। तब से लेकर मैं अपने नये कॉलेज में सामंजस्य नहीं बना पा रही हूं। मैं अक्सर खोया सा महसूस करती हूं, मेरे अंदर बहुत ही कम या यूं कहें कि बिल्कुल भी आत्म-विश्वास नहीं है और लोगों के रूबरू नहीं हो पाती हूं। मैं अक्सर अपने ऊपर दूसरों का वर्चस्व महसूस करती हूं या वे मेरा मज़ाक बनाते हैं। मैं यह भी महसूस करती हूं कि मैं उनकी टिप्पणियों का प्रत्युत्तर करने में असमर्थ हूं या यूं कहें कि मैं जो कुछ चाहती हूं सामाजिक तौर पर स्पष्ट नहीं हो पाता है? मेरे अच्छे दोस्त भी नहीं हैं और पुराने कालेज की याद सताती रहती है। कृपया मेरी मदद करें, मुझे अपना आत्म-विश्वास बढ़ाने और स्वयं को मूल्यवान समझने के लिये क्या करना चाहिये?

उत्तर: अच्छा मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य बनाये रखने के लिये आत्म-विश्वास का होना परमावश्यक है। इस वक्त पुराने माहौल को छोडक़र नये में अपने आपको ढालना काफी मुश्किल हो सकता है क्योंकि वहां आपने अपना अधिकतर समय मित्रों के साथ बिताया है। सबसे पहले आपको पुरानी बातों को भूल जाना होगा, आपको स्वयं को ये बताने की जरूरत है कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि पूर्व में क्या हुआ लेकिन अब आप स्वयं को एक मूर्त रूप दे सकते हैं और अपने अंदर आत्मविश्वास का सृजन कर सकती हैं। आपने जो कुछ सकारात्मक कार्य किये हैं उनमें झांकने का प्रयास करें। अपनी कक्षा में कुछ सकारात्मक लोगों को ढूंढऩे का प्रयास करें और उनके साथ अधिक समय बिताएं। आप अपने परिवार के साथ भी मेलजोल के जरिये आत्मविश्वास जगा सकती हैं जिसने आपको हमेशा अच्छा महसूस कराया है। आप अपनी समस्या किसी निकट मित्र को भी बता सकती हैं जो अन्यों के साथ आपकी बातचीत कराने में मददगार हो सकता है। हौसला अफज़ाई करने वाले लोगों से जुडिय़े उनके मन में अपने प्रति लगाव उत्पन्न कराएं। अपना आत्मविश्वास पुन: हासिल करने के लिये आप अपनी ताकतों और कमज़ोरियों का स्पष्ट मूल्यांकन कर सकती हैं। अपनी ताकतों को पोषित करना बहुत महत्वपूर्ण है और उन्हें अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं क्योंकि इससे आपको अपने भीतर आत्म-विश्वास कायम करने में सहायता मिलेगी। आपको दूसरों के अनावश्यक वर्चस्व से बचने के लिये मुखर होने की तरक़ीब सीखने की भी आवश्यकता है। ऐसा अपनी सीमाओं का आकलन करते हुए अपनी बात रखते हुए किया जा सकता है। जब आपके दोस्त अपनी सीमाओं को लांघते हैं या आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं तो उन्हें इसका अहसास कराने से बिल्कुल न हिचकें। मुझे विश्वास है कि वे आपकी ईमानदारी का सम्मान करेंगे। आप जो कुछ करना चाहते हैं उसे तय कर लें और अपने लक्ष्यों को निर्धारित करें। इससे संरचना खड़ी होगी और आप अपने जीवन के बारे में जो कुछ करना चाहते हैं उसके बारे में उद्देश्य और स्पष्टता सामने आयेगी। कार्य, परिवार, समाज और व्यक्तिगत पहलुओं को शामिल करें और हर बार आप लक्ष्य को हासिल करेंगे जिससे आपको थोड़ी आत्म संतुष्टि का अहसास होगा। उपलब्धि महसूस करने से आपके अंदर आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। कई बार दिखावट में बदलाव से भी सहायता मिलती है। आत्म निंदा का त्याग करें। यदि आप बार-बार अपने को नीचा दिखायेंगे इससे आपका विश्वास डगमगा जायेगा। आत्म आलोचना से बचें। मुझे पक्का  विश्वास है कि इससे आप बेहतर महसूस करेंगी। शुभ कामनाएं।

प्रश्न: मेरी उम्र 21 वर्ष है और मैं एक पुरुष हूं। मैं पिछले 6 वर्षों से तनहा-सा महसूस कर रहा हूं, परंतु मैं इससे पूरी तरह से छुटकारा पाना चाहता हूं क्योंकि मैं सशस्त्र बलों में शामिल होने का इच्छुक हूं। कृपया मेरी सहायता करें।

उत्तर: संकोच या तनहा होना मन में बढ़ते उद्वेग का परिणाम होता है। इस स्थिति से उबरने के लिये अपने ऊपर यह विश्वास होना बहुत जरूरी है कि आप जो कुछ करना चाहते हैं उसे कर सकते हैं और जब भी आप ऐसी स्थिति से गुजरते हैं, आपको शांतिपूर्वक शांत रहने के प्रयास करने चाहियें। यह चिकित्सा के जरिये भी हासिल किया जा सकता है जिसके लिये आपको किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह करनी होगी अथवा शांत रहने की तकनीकें अपनानी होंगी, क्योंकि इससे आपकी चिंता कम होगी। स्थान की पहचान करें और स्थिति से निपटने के उपाय खोजें। शुरू में घर पर ही श्वास क्रियायें करें और श्वास को रोक कर दस तक गिनती करें तथा धीरे-धीरे इसे 45 तक ले जायें और जब आप 45 सेकेंड तक श्वास रोकने को तैयार होते हैं तो यह अच्छी स्थिति हो सकती है। यदि आप का श्वास बीच में टूट जाता है तो शेष श्वास को छोडक़र पुन: इस क्रिया को दोहराएं।

यदि आपका श्वास कुछ छोटा होता है तो आप इसमें सुधार कर सकते हैं। एक बार आप यदि इसे कर लेते हैं तो पुन: इसमें वृद्धि कर सकते हैं। जहां तक सशस्त्र बलों में शामिल होने की बात है यह स्थिति इस लाइन में कोई बाधा नहीं है क्योंकि ये एक डर मात्र है और कोई नि:शक्तता नहीं है।

 

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