सफलता की कहानी


Volume-12, 22 - 28 June 2019

स्पष्ट लक्ष्य और दृढ़ संकल्प सफलता के मंत्र: छवि बंसल

प्रियंका जिंदल

छवि बंसल - दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा २०१८ में द्वितीय रैंक प्राप्त की, उन्होंने रोज़गार समाचार पाठकों के साथ अपनी सफलता की कार्य योजना साझा की.

 दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा संचालित की जाती है. छवि ने यह सफलता अपने प्रथम प्रयास में प्राप्त की है. इस साक्षात्कार में हमने उनकी कार्य-नीति परीक्षा पद्धति और अन्य विषयों को संजोने के प्रयास किए हैं, जो सामान्य रूप से न्यायिक सेवा परीक्षा और विशेष रूप से दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले प्रत्याशियों के अत्यधिक उपयोगी हो सकते हैं.

छवि जी आपका बहुत-बहुत स्वागत और आपकी इस सफलता के लिए आपको ढ़ेर सारी बधाई. कृपया आप हमें अपने बारे में कुछ बताएं.

1. क्या आपको उच्च स्थान के साथ सफलता प्राप्त करने का विश्वास था और इस समाचार पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

छवि : प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की प्रकृति के कारण परिणाम थोड़ा अप्रत्याशित था, किंतु यह मेरे लिए एक बहुत सुखद आश्चर्य था. मेरे मामले में यह आश्चर्य बहुत अधिक था, क्योंकि यह मेरा पहला प्रयास था और मैंने अनुभव किया कि इस परीक्षा की तैयारी करने में मुझे बहुत अधिक समय नहीं मिला.

2. आप विधि के क्षेत्र में कैसे आईं, न्यायिक सेवा में जाने के लिए आपको किसने प्रेरित किया?

छवि : मैंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के तुरंत बाद विधि में (आई.पी. विश्वविद्यालय, दिल्ली से ५ वर्षीय पाठ्यक्रम में) प्रवेश लिया. कार्य अवधि के दौरान मुझे कई बार न्यायालयों में जाने का और न्यायिक अधिकारियों से सम्पर्क करने का अवसर मिला. उनके मिलने से मुझे इस प्रतिष्ठित सेवा से जुडऩे की प्रेरणा मिली.

3. आपने न्यायिक सेवा तथा दिल्ली न्यायिक सेवा के लिए अपनी तैयारी कब से प्रारंभ की? आपकी सम्पूर्ण तैयारी नीति क्या थी? क्या आपने कोचिंग से कोई सहायता ली?

छवि : मैंने कोई कोचिंग नहीं ली. चूंकि मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि विधि की है, मेरे अभिभावक मेरे मार्गदर्शक थे. दिल्ली न्यायिक सेवा के लिए मेरी तैयारी विशिष्ट रूप से नवंबर, २०१८ में प्रारंभ हुई. पहले प्रारंभिक परीक्षा, उसके बाद मुख्य परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार को उत्तीर्ण करना मेरी सम्पूर्ण कार्यनीति थी. प्रारंभिक परीक्षा के लिए मेरा ध्यान (फोकस) बेयर अधिनियमों का व्यापक अध्ययन करके विधि की संकल्पनात्मक स्पष्टता प्राप्त करने पर था. मैंने पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का और अन्य एम.सी.क्यू. का अध्ययन किया और उनके उत्तर लिखती रही ताकि प्रारंभिक परीक्षा की अच्छी तैयारी कर सकूं. मुख्य परीक्षा के लिए मैंने विधि का टॉपिक-वार और विषय-वार अध्ययन किया. मुख्य परीक्षा के संबंध में मैंने बेयर अधिनियमों, मानक पाठ्य-पुस्तकों और अपने कॉलेज के नोट्स को मुख्य परीक्षा के लिए अपनी तैयारी का मुख्य आधार बनाया. कुछ विषयों के लिए मैंने बाजार में उपलब्ध संग्रहों की सहायता ली. साक्षात्कार के लिए, मैंने बेयर अधिनियमों को दोहराया और स्वयं को अपने आस-पास हुए विधिक विकास से अवगत रखा.

4. क्या आप आई.पी.सी., सी.आर.पी.सी., सी.पी.सी., एविडेंस एक्ट जैसे विषयों पर विषय-वार कार्य-नीति पर और प्रकाश डाल सकती हैं? कृपया हमें उन पुस्तकों के बारे में भी बताएं जिनकी आपने अपनी तैयारी में सहायता ली.

छवि : मेरी राय में आई.पी.सी. की तैयारी करना थोड़ा आसान है, क्योंकि अपराधों के घटकों की जानकारी इसका आधार है और महत्वपूर्ण मामला विधियां इसमें सहायक होती हैं. मैंने सी.आर.पी.सी. के लिए अध्ययन किया, मैंने केलकर और ए.के. जैन के पोर्शन्स की सहायता ली. सी.पी.सी. के लिए मैंने टेकवानी और ए.के. जैन की पुस्तकें पढ़ीं, एविडेंस के लिए मैंने अवतार सिंह और ए.के. सिंह की पुस्तकें पढ़ीं.

कार्य-पद्धति से जुड़ी विधियों के लिए मैं अपने विषयों के संबंध में कुछ चयनात्मक थी क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बीच मेरे पास बहुत अधिक समय नहीं था. इस प्रकार, मुख्य परीक्षा के लिए मैंने उन विषयों ंको छोड़ दिया जो बेयर एक्ट से प्रत्यक्षत: जुड़े नहीं थे (अर्थात् विभिन्न न्यायालयों में ट्रायल की पद्धति).

5. दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा के संबंध में आपकी दृष्टि में कौन सा विषय सबसे अधिक कठिन है और महत्वपूर्ण टॉपिक्स कौन से हैं?

छवि : दिल्ली न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा (सिविल लॉ-१) का प्रश्र-पत्र-३ मेरे लिए अत्यधिक बोझिल था क्योंकि इस पाठ्यक्रम में ८ कानूनों की तैयारी करना शामिल है. इस कारण इस प्रश्न-पत्र की तैयारी करना अधिक कठिन था. इनमें से अधिकांश का अध्ययन मैंने सीधे बेयर एक्ट से किया और ए.के. जैन पुस्तक से भी सहायता ली. विषयों के महत्व को समझने के लिए उम्मीदवार पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों का अध्ययन कर सकते हैं. इस प्रक्रिया से आपको पता लग जाएगा कि कौन सा टॉपिक अन्य टॉपिक्स से महत्वपूर्ण है.

6. क्या आप हमें बता सकती हैं कि अपनी तैयारी करते समय आपने किन पत्रिकाओं, समाचार पत्र या किसी अन्य ऑनलाइन संसाधनों का अध्ययन किया?

छवि : प्रारंभिक एवं मुख्य-दोनों परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान के लिए मैंने प्रतियोगिता दर्पण पत्रिका का सहारा लिया. मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए मैंने दृष्टि करेंट अफेयर्स पत्रिका भी पढ़ी. इनके अतिरिक्त, जब भी मुझे समय मिलता था मैं insightsonindia.com पर दैनिक वर्तमान घटनाओं का भी अध्ययन करती थी. इसके अलावा, अंग्रेजी प्रश्न-पत्र के लिए मैंने ऐसे विषय तलाशे जिन पर संभावित निबंध लिखे जा सकते थे.

7. प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं के लिए आपने कौन सी कार्य-नीति अपनाई?

छवि : ऊपर बता चुकी हूं.

8. साक्षात्कार के लिए आपने तैयारी कैसे की? क्या आपने मॉक इंटरव्यू का भी सहारा लिया ?

छवि : समाचार पत्रों का पठन करके मैंने स्वयं को वर्तमान घटनाओं पर अद्यतन बनाए रखा. इनके अतिरिक्त, साक्षात्कार से पहले मैं अपने बेयर एक्ट्स की तैयारी को दोहराती रही. मैंने किसी मॉक इंटरव्यू का सहारा नहीं लिया.

9. किसी भी तैयारी के लिए समय प्रबंधन एक मुख्य घटक होता है. तैयारी करते समय और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन हेतु आपकी क्या कार्य-नीति थी?

छवि : प्रश्नों के अंकों को ध्यान में रखते हुए मेरा लक्ष्य यह था कि अधिक अंक वाले प्रश्नों पर मैं अधिकतम समय लगा सकूं. उदाहरण के लिए, मैंने निर्णय लिया कि 5 अंक के प्रश्न पर मैं 5 मिनट से अधिक समय नहीं लगाउंगी. विधि का प्रत्येक प्रश्न पत्र 200 अंक का था, और इसके उत्तर 3 घंटों में देने थे. इस कार्य-नीति से पूरे प्रश्न-पत्र का उत्तर तीव्र गति से लिखने के बारे में मुझे रफ आइडिया मिला.

10. अपने मूल लक्ष्य अर्थात न्यायिक सेवा में कॅरिअर के लिए अपनी तैयारी करते समय क्या आप अन्य कॅरिअर अवसरों के लिए भी तैयारी कर रही थीं?

छवि : एक एडवोकेट के रूप में मैं अंशकालिक प्रैक्टिस कर रही थी.

11. दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करने की सफलता का आपका क्या रहस्य है?

छवि : मेरे विचार में, मैं नहीं समझती कि मैंने कोई ऐसी विशेष तैयारी की है जो सामान्यत: अन्य उम्मीदवार नहीं करते. तथापि मैं यह कह सकती हूं कि मुख्य परीक्षा में अपने उत्तर लिखने की शैली से मैंने समझौता नहीं किया. मैंने प्वाइंट वार और एक संचरित रूप में और भूमिका, निष्कर्ष प्रारूप अपने उत्तर लिखने का विकल्प चुना. मैं समझती हूं कि इससे मुझे अपने उत्तर लिखने में सहायता मिली.

12. क्या भावी प्रत्याशियों को आप कोई सुझाव/परामर्श देंगी?

छवि : इस परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करने का श्रेष्ठ समय उसी दिन से प्रारंभ हो जाता है जब भविष्य में ऐसी परीक्षा देने का निर्णय लेते हैं. किसी भी कार्य में शीघ्रता या विलंब नहीं होता. विशेष रूप से छात्रों को कॉलेज में नोट्स तैयार करके समय का उपयोग करना चाहिए. मेरे नोट्स ने, मेरी तैयारी के दौरान मुझे व्यापक रूप से सहायता दी है.

बहुत-बहुत धन्यवाद और आपके भावी प्रयासों के लिए आपको ढ़ेर सारी शुभकामनाएं.

(लेखिका नॉलेज स्टार्ट अप देहली नॉलेज ट्रैककी संस्थापक निदेशक हैं. उनसे priyarjindal@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है.)

व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं.