सफलता की कहानी


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अपने जीवन कौशल और करिअर को समृद्ध बनाएं

डॉ. जितेंद्र नागपाल

जीवन कौशल, अनुकूल और सकारात्मक व्यवहार से संबंधित वे योग्यताएं हैं, जो हमारे युवाओं को रोज़मर्रा के जीवन की आवश्यकताओं और चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने में सक्षम बनाती हैं। ये ऐसे मानव कौशल हैं, जिन्हें शिक्षण अथवा रोजमर्रा के जीवन में सामान्य रूप से सामने वाली समस्याओं और सवालों से निपटने के प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है। डॉ। जितेंद्र नागपाल जीवन कौशल प्रशिक्षक (लाइफ स्किल कोच) हैं। वे युवाओं के कल्याण और स्कूलों, कॉलेजों और कार्पोरेट क्षेत्र के लिए व्यवहार कौशल (सॉफ्ट स्किल्स) से संबंधित डेवलपमेंटल ट्रेनर हैं। इस नियमित कॉलम में वे हमारे पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न : मेरी आयु 23 वर्ष है। निकट संबंधियों से अपेक्षाएं रखना और संबंध विच्छेद होने पर दुखी होने की गंभीर प्रवृत्ति के कारण मैं बहुत कठिनाई में हूं। सबसे हाल की घटना मेरे लिये बहुत पीड़ादायक रही है, परंतु मैं इसका अच्छी तरह से सामना करना चाहता हूं। मेरी अपने जीवन में आगे बढऩे और मेरे अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की इच्छा है परंतु मैं ऐसा करने के अपनी प्रयासों में लगातार असफल हो रहा हूं। कृपया मेरी मदद करें?

उत्तर: संबंध और कॅरिअर आपके मानसिक और जीवन कौशलों की परीक्षा के लिये अक्सर एक दूसरे के अनुषंगी होते हैं। परंतु यह जीवन के लिये अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी वर्तमान यथार्थता को स्वीकार करें और अपने सोच-विचार में बदलाव लाने की कोशिश करें। आपको ये समझने की आवश्यकता है कि जीवन बहुत ही अप्रत्याशित होता है और अक्सर ऐसी बातें घटित हो जाती हैं अथवा ऐसी स्थितियां अचानक उत्पन्न हो जाती हैं जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। परंतु साथ ही हमारे अंदर ऐसी स्थितियों का सामना करने और इनसे प्रभावी तरीके से निपटने का साहस और शक्ति होनी चाहिये। यह उत्साह व्यक्ति विशेष की अभिरुचि और अवधारणाओं में बदलाव करने से आता है। हमेशा याद रखें कि बीता समय एक सूचना बैंक है जिससे आप सीख ले सकते हैं परंतु यह कोई जाल नहीं है जिसमें आप पकड़े जायें। आप बीते काल के साथ संचालित नहीं हो सकते न ही आप इसे बदल सकते हैं। यह हमेशा आपके साथ बना रहेगा लेकिन यह अपेक्षित होता है कि आप अपनी बीती बातों को एक शिक्षण अनुभव के तौर पर यादाश्त में बनाये रखें। उदास होने की बजाए आत्मविश्लेषण करने की कोशिश करें और अपने आप से पूछें, आप उस संबंध विशेष में कहां गलत हैं अथवा ब्रेकअप होने के पीछे क्या कमियां रही हैं। आपको उस घटनाक्रम को एक अनुभव के तौर पर लेना चाहिये जिससे आपको बहुत कुछ सीखने को मिला है। अत: सकारात्मक यादों को संजोकर रखने का प्रयास करें और समय के साथ आप उन सब दुखद स्मृतियों से उभर सकेंगे जिन्होंने आपको प्रभावित किया है। आपको एक अच्छा ही नहीं बल्कि महान मित्र होना स्वस्थ जीवन का पहला अवयव है।

अपने भविष्य के बारे में भी आशावादी बनें और यह भावना आपको उत्कृष्ट संभव तरीके के साथ आगे बढऩे और पनपने की ताकत प्रदान करेगी। सदैव याद रखें कि जीवन में जो कुछ भी घटित होता है अच्छे के लिये होता है और इस भण्डार में आपके लिये कोई बेहतर चीज़ अथवा व्यक्ति मौजूद है। आपको केवल खुश रहने की ज़रूरत है और अपने उदीयमान भविष्य को लेकर आगे बढऩा है, जो आपके समक्ष मुंह बाये खड़ा है। उज्ज्वल भविष्य के लिये शुभकामनायें।

प्रश्न: मेरी आयु 24 वर्ष है और मेरा अन्य सभी मित्रों की तुलना में सामान्य से अधिक वजन है। मैं सचमुच में अपना वजन कम करना चाहता हूं। मुझे कुछ खाने का मन नहीं होता जिसकी वजह से मेरा अपने माता-पिता से अक्सर झगड़ा होता है। मैं उन्हें कैसे समझाऊं कि मैं बहुत अधिक नहीं खा सकता हूं? इन सबके बीच मेरा जीवन प्रभावित हो रहा है क्योंकि मैं ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा हूं। क्या ये किसी अनहोनी का संकेत तो नहीं है? मुझे क्या करना चाहिये?

उत्तर: किसी को भी यह समझ लेना होगा कि भोजन शरीर के लिये महत्वपूर्ण है और विविध उद्देश्यों की पूर्ति करता है। यह ऊर्जा का बुनियादी स्रोत है और शरीर के लिये सभी संकायों, यहां तक कि बोधात्मकता के संचालन के लिये आवश्यक होता है। शरीर के स्वास्थ्य और स्थिर कामकाज और इसकी महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिये भोजन के जरिये प्राप्त होने वाले पोषक तत्व और मेटाबोलिज़्म के जरिये इसका उपयोग जरूरी है। आपका ध्यान केंद्रित न होने का कारण पोषक तत्वों के बुनियादी ज्ञान का न होना है। कृपया ध्यान दें कि न खाने से आपका वजन कम तो हो सकता है परंतु यह स्वास्थ्यवद्र्धक नहीं है। सही प्रकार भोजन नहीं करने से शरीर किसी भी प्रकार के भोजन का भण्डारण केवल वसा में परिवर्तन के लिये करता है। आपका वास्तविक वजन कम होना केवल मांसपेशियों का वजन होता है। इस तरीके से वजन को कम करने का अर्थ है कि जब भी आप खाना शुरू करेंगे, प्रतिक्रिया स्वरूप आपका वजन फिर बढ़ जायेगा। परिणामस्वरूप, किसी में भी एनोरेक्सिा और बुलिमिया जैसे चयापचय और खानपान संबंधी विकार उत्पन्न हो जायेंगे। संभवत: यही माता-पिता के साथ झगड़े का एक कारण है क्योंकि वे आपको जीवनपर्यन्त चलने वाली इस तरह की गंभीर समस्याओं से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

किसी को भी अपने शरीर की अनुकूलता को समझना होगा और यदि किसी तरह के परिवर्तन की आवश्यकता है तो दौड़, बाह्य कार्य, नृत्य आदि जैसे स्वास्थ्यवर्धक उपाय तलाशें। बाहर निकलने से न केवल आप स्वस्थ तरीके से अपना वजन कम कर पायेंगे बल्कि इससे आपके रक्त संचार में भी सहायता होगी जिससे आपकी ध्यान केंद्रित करने की शक्ति बढ़ेगी। अत: सोचिए और कार्रवाई कीजिए। यह आपकी भलाई के लिये ही है।

 

(e-mail: jnagpal10@gmail.com)