सफलता की कहानी


SKILL vol.16

अपने जीवन कौशल और करिअर को समृद्ध बनाएं

डॉ।जितेंद्र नागपाल

जीवन कौशल और योग्यताएं अनुकूलन और रचनात्मक व्यवहार के अंतर्गत आती हैं, जो हमारे युवाओं को रोजमर्रा के जीवन की मांगों और चुनौतियों से कारगर ढंग से निपटने में सक्षम बनाती हैं। शिक्षण अथवा प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए अर्जित किए जाने वाले मानव कौशलों का एक ऐसा समूह है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में आमतौर पर सामना की जाने वाली समस्याओं और सवालों से निपटने में उपयोगी है। डॉ. जितेन्द्र नागपाल जीवन कौशल प्रशिक्षक हैं। वे युवाओं की खुशहाली और स्कूलों, कॉलेजों और कार्पोरेट क्षेत्र के लिए व्यावहारिक कौशल में एक विकासात्मक प्रशिक्षक हैं। इस नियमित स्तंभ (कॉलम) के अंतर्गत वे हमारे पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न: मेरी आयु 18 वर्ष है और मैं सेक्स और सेक्सुअल मुद्दों को लेकर काफी उलझन में हूं और अनजान हूं। लगता है मेरे दोस्त  इस बारे में बहुत जानकारी रखते हैं और मुझे इस बारे में अलग-अलग बातें सुनने को मिलती हैं। इसी वजह से मैं उलझन में हूं कि उन्हें भी शायद इसकी उचित जानकारी नहीं है। मुझे अपने माता-पिता और शिक्षकों से पूछने में शर्म आती है, परंतु मैं बहुत जिज्ञासु हूं।

उत्तर: आप अब बचपन को छोडक़र वयस्क होने के सुंदर बदलाव वाले समय से गुजर रहे हैं। जीवन के इस मनोहर समय के लिये जिम्मेदारी के साथ जागरूक होना आकर्षक और चुनौतीपूर्ण होता है। शारीरिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव के अलावा यह वह अवधि है जिसमें किशोरों में समाज से अक्सर मिलेजुले संकेतों के परिणामस्वरूप भ्रम की स्थिति, कुंठा और जोखि़म वाले व्यवहार उत्पन्न होते हैं। किशोर प्रजनन और यौन स्वस्थता के संबंध में जागरूकता, आप जैसे युवा लोगों को जिम्मेदारीपूर्ण अभिरुचियों और कामुकता के व्यापक पहलुओं जैसे कि लिंग, एचआईवी/एड्स, यौन शोषण और सबसे महत्वपूर्ण मज़बूत व्यक्तिगत स्वच्छता के लिये तैयार करने में मदद करती है।

सही ज्ञान रखने से आपको अपने वयस्क जीवन में सेक्स के बारे में स्वस्थ दृष्टिकोण और अच्छे संबंध रखने में मदद मिलेगी। इन मुद्दों को लेकर जिज्ञासा होना इस उम्र में आम बात होती है। इस बारे में गुनहगार अथवा अजीब महसूस न कीजिए। ये संवेग स्वाभाविक हैं इन्हें खुले दिमाग से जानना चाहिये। यदि आप अपने माता-पिता से बात नहीं कर सकते हैं तो एक विश्वसनीय वयस्क अथवा अपने स्कूल के काउंसलर से बात करें। काउंसलर खुले विचार के और शंका रहित होते हैं तथा इन मुद्दों के बारे में लोगों को शिक्षित करने हेतु प्रशिक्षित होते हैं तथा वे आपको सही जानकारी उपलब्ध करवाने में समर्थ होंगे। तब आप अपने साथियों को सही तथ्यों से अवगत करा सकते हैं और जागरूकता फैला सकते हैं। जागरूक और जिम्मेदार होना वर्तमान समय में आगे बढऩे का मूल मंत्र है।

प्रश्न: मेरी उम्र 21 वर्ष है और मैं दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र हूं। जब मैं कैम्पस में होता हूं अक्सर अपने को बाहरी महसूस करता हूं। मेरे भीतर आत्मविश्वास बहुत ही कम अथवा नगण्य है और लोगों के सामने आने से कतराता हूं। मेरे ऊपर हमेशा दूसरों का वर्चस्व रहता है अथवा वे मेरा मज़ाक उड़ाते हैं और कभी मुडक़र उत्तर नहीं दे पाता या स्पष्ट तौर पर समाज में घुलमिल नहीं पाता। कृपया मेरी मदद करें, अपना आत्म-विश्वास बढ़ाने और अपने आपको मूल्यवान समझने के लिये मुझे क्या करना चाहिये।

उत्तर: अच्छा मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थता बनाये रखने के लिये आत्म-विश्वास होना परमावश्यक है। शुरूआत के तौर पर अपनी ताकतों और कमज़ोरियों का स्पष्ट मूल्यांकन करें। अपनी ताक़तों को मज़बूती दें तथा उन्हें अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाएं। इससे आपको आत्मविश्वास जगाने में सहायता मिलेगी। अनावश्यक दबाव से बचने के लिये मुखर होना सीखें। अपनी सीमाओं का पता लगायें और सम्प्रेषित करें। अपने मित्रों को कहने में शर्म महसूस न करें, जब वे आपकी भावनाओं से खिलवाड़ करें अथवा अपनी सीमाएं लांघते हैं। वे ईमानदारी के लिये आपका सम्मान करेंगे। सही-सही तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं और लक्ष्य निर्धारित करें। इससे संरचना बनेगी और आपको अपने जीवन के बारे में स्पष्टता और उद्देश्यता का अहसास होगा। काम, परिवार, समाज और व्यक्तिगत पहलुओं और प्रत्येक समय आप जो लक्ष्य हासिल करते हैं उसे शामिल करें और स्वयं को थोड़ा सम्मान प्रदान करें। उपलब्धि की अनुभूति से आपके विश्वास में काफी बढ़ोतरी होगी।

 

कई बार दिखावट में बदलाव से भी सहायता मिलती है। बीती बातें छोड़ दीजिए। अब आगे से आप स्वयं को नये अंदाज में ढाल सकते हैं और अपने अंदर एक नया विश्वास उत्पन्न कर सकते हैं। यदि आप बार-बार अपने को नीचे आंकते रहेंगे इससे आपके भीतर का विश्वास भाग जायेगा। स्व-आलोचना से बचें। आपने जो कुछ भी अच्छी बातें की हैं उनको बार-बार स्मरण करें। सकारात्मक लोगों के साथ अधिक समय व्यतीत करें जो आपको बल प्रदान करते हैं और आपको अच्छा महसूस कराते हैं। नकारात्मक लोग धातु पर जंग की तरह विश्वास को क्षति पहुंचाते हैं। अपनी समस्याओं का निकट साथियों के समक्ष जिक्र करें और वे दूसरों के साथ बातचीत करने में आपकी मदद कर सकते हैं। सहारा देने वाले लोगों से जुड़ें और उनमें आपके प्रति रुचि जगायें। आप बेहतर महसूस करेंगे। (ई-मेल: e-mail: jnagpal10@gmailcom)