संपादकीय लेख


2-8 June, 2018

 
समावेशी विकास और सामाजिक न्याय के लिए उपेक्षितों का सशक्तिकरण


स्वदेश सिंह और देवीदयाल गौतम


पिछले चार वर्षों में श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट करके समतामूलक समाज की स्थापना के प्रति अपनी अटल वचनबद्धता प्रदर्शित की है. सरकार ने बहुत से प्रावधान किये हैं और शिक्षा तथा रोजग़ार के क्षेत्र में अनेक नीतियां व कार्यक्रम बनाए हैं ताकि समाज के दुर्बल, दलित और  वंचित वर्गों का सशक्तिकरण हो सके और सबको सामाजिक न्याय तथा सद्भाव के माहौल में जीने का मौका मिले. सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने ऐसे वर्गों को अपना खुद का कारोबार शुरू करने में मदद देने की भी कोशिश की है. इसके पीछे यह भी उद्देश्य है कि वे अपनी आजीविका अर्जित करने के साथ-साथ दूसरों के लिए रोजग़ार के अवसरों का सृजन भी कर सकें और इस तरह समाज में स्वयं को सशक्त बनाने के एक चक्र की शुरुआत हो. सरकार विकास के फायदों से वंचित लोगों के जीवन को आसान बनाने का भी प्रयास कर रही है और इसके लिए उन्हें किफायती दरों पर बुनियादी सामाजिक और आधारभूत ढांचे संबंधी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 के न्यू इंडियायानी नये भारत की जो भव्य परिकल्पना की है उसे साकार करने का कार्य चार साल पहले शुरू हो गया था. इसके तहत विकास के फायदों से वंचित वर्गों के लोगों का सशक्तिकरण किया जा रहा है और उनके लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की जा रही है.
सशक्तिकरण का नया तरीका
स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद हमने सामाजिक-आर्थिक विकास और समाज के दुर्बल वर्गों के सशक्तिकरण के लिए समूह आधारित दृष्टिकोण अपनाया. हमारे संविधान निर्माताओं ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की. उनका मानना था कि शिक्षा और रोजग़ार के क्षेत्र में आरक्षण सुनिश्चित करने से समानता की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा सकेगा और इससे बाकी तमाम समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी. लेकिन विभिन्न कारणों से ऐसा नहीं हुआ. आज हमें वंचित और उपेक्षित समुदायों को सशक्त बनाने के लिए नयी रणनीतियों की आवश्यकता  महसूस हो रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके लिए लीक से हटकर जो समाधान निकालने की कोशिश की है वह इस दिशा में सही पहल है. बीजापुर में आयुष्मान भारत योजना का उद्घाटन करते हुए अपने भाषण में उन्होंने कहा था: पुराने रास्ते पर चलते हुए आप कभी भी नई मंजिलों तक नहीं पहुंच सकते. पुराने तौर-तरीकों से दुनिया नहीं  बदल सकती. समयानुसार हमें अपने तौर-तरीके भी बदलने पड़ते हैं. अगर नए लक्ष्यों को प्राप्त करना है तो नए तरीके से काम करना ही होगा. हमारी सरकार इसी नयी एप्रोच के साथ काम कर  रही है. 
समावेशन      
वर्तमान सरकार के गठन के तुरंत बाद जन-धन योजना का शुभारंभ किया गया ताकि उन लोगों का वित्तीय समावेशन हो सके और जिनके पास अब तक बैंक खाते नहीं हैं उनके खाते खुल सकें. इस योजना के अंतर्गत खोले गये बैंक खाते आम तौर पर उन लोगों के हैं जो समाज के वंचित या उपेक्षित वर्गों से संबंध रखते हैं. इन लोगों के पास अब तक कोई बैंक खाता नहीं था, हालांकि इन्हें ऐसे खातों की सबसे अधिक जरूरत थी. अब विभिन्न सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे उनके बैंक खातों में भेज दिया जाता है और इस तरह बिचौलिये खत्म हो गये हैं और पैसे की बर्बादी भी बंद हो गयी है. इसी तरह प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत लाखों लोगों को ऋण दिये गये हैं जिनमें से ज्यादातर महिलाएं, दलित और पिछड़े वर्गों के लोग हैं. 
उद्यमिता को बढ़ावा
स्टैंड अप योजना के तहत दलितों, जनजातीय लोगों और महिलाओं को अपना नया उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी गयी. योजना के अंतर्गत 1.25 लाख बैंक शाखाओं में से प्रत्येक से यह अपेक्षा की गयी कि वह इस तरह के कम से कम दो उद्यमियों की मदद करे और अपना कारोबार शुरू करने में उन्हें सहायता दें. इस योजना से समाज के कमजोर वर्गों के प्रतिभाशाली और शिक्षित नौजवानों को अपना कारोबार शुरू करने और उद्यमी बनने में मदद मिली है. दलित उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने भी एक दलित वेंचर कैपिटल फंड बनाया है. 200 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी से शुरू की गयी इस योजना से दलित उद्यमियों को जबरदस्त फायदा मिला है. वित्त मंत्री ने चालू साल के बजट में दलितों के विकास के लिए 56,619 करोड़ रुपये और जनजातियों के विकास के लिए 39,135 करोड़ रुपये आबंटित किये हैं. इस योजना के तहत लाखों लोगों को ऋण दिये गये हैं. इस योजना की सफलता को देखते हुए चालू साल में इसके कुल खर्च को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. मौजूदा सरकार इस सोच के साथ काम कर रही है कि जब नौकरियों की संख्या सीमित हो, तो खाई को पाटने के लिए उद्यमिता का सहारा लिया जाना चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ऐसी नीतियां बना रही है जो अब सकारात्मक परिणाम देने लगी हैं. मुद्रा योजना और स्टैंड अप योजना जैसे कार्यक्रमों ने लाखों दलितों और पिछड़े युवाओं को सशक्त बनाया है. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने भी ऐसी योजनाएं प्रारंभ की हैं जिनमें स्वच्छता मिशन से जुड़े उद्यमियों के कारोबार में मदद दी जाएगी.     
संवैधानिक प्रावधान
सरकार ने दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए कठोर नियम बना रखे हैं ताकि सुरक्षा और स्वतंत्रता का माहौल बने. सरकार ने 123वां संविधान संशोधन भी पेश किया है जो यह सुनिश्चित करेगा कि सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए लोगों के लिए गठित किया जाने वाला नया आयोग और अधिक शक्तिशाली हो और इस समुदाय के लोगों के हितों की कारगर तरीके से हिफाजत की जा सके. मोदी सरकार ने डॉक्टर आंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच स्थानों को पंचतीर्थघोषित किया है और उनका विकास किया जा रहा है. डॉ. आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र की स्थापना अकादमिक अनुसंधान केन्द्र के रूप में की जा रही है ताकि आंबेडकर के जीवन-मूल्यों और उपेक्षित वर्गों के बारे में अनुसंधान को बढ़ावा मिले. दिल्ली में डॉ. आंबेडकर के मकान में पारस्परिक संवाद आधारित संग्रहालय बनाया जा रहा है जिसे आज डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक के नाम से जाना जाता है. डॉ. आंबेडकर लंदन में जिस मकान में रहे उसे भी सरकार ने खरीद लिया है. उनकी वर्षगांठ की तारीख (14 अप्रैल) को राष्ट्रीय सद्भाव दिवस घोषित कर दिया गया है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एक योजना प्रारंभ की है जिसके तहत 100 विद्वानों को विदेशों में डॉ. आंबेडकर के नाम से जुड़े दो स्थानों को भेजा जाएगा ताकि वे वहां जाकर प्रेरणा प्राप्त कर सकें. ये दो स्थान हैं शिकागो और लंदन जहां डॉ. आंबेडकर ने 20वीं सदी के प्रारंभ में अध्ययन किया था. 
महिलाएं
हालांकि देश में महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की है और उनकी स्थिति में भी सुधार हुआ है, मगर अब भी बड़ी तादाद में ऐसी महिलाएं हैं जिनकी ओर सरकार को ध्यान देने और कार्रवाई करने की आवश्यकता है. पुराने जमाने में ग्रामीण महिलाओं के लिए अशिक्षित होने के कारण सरकारी कार्यक्रमों का लाभ उठाना बड़ा मुश्किल था. असल में मोदी सरकार से पहले ऐसी महिलाओं के लिए कोई कारगर योजना या कार्यक्रम था ही नहीं. पिछले चार वर्षों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के जरिए कई कार्यक्रम प्रारंभ किये गये हैं. वित्त मंत्री ने इस अभियान के तहत शुरू की गयी सुकन्या समृद्धि योजना की सफलता की घोषणा की है. यह योजना 2015 में प्रारंभ की गयी और इसके अंतर्गत सिर्फ  दो साल के भीतर बालिकाओं के लिए 1.26 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं जिनमें कुल 19,183 करोड़ रुपये जमा किये गये हैं. मोदी सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाली महिलाओं के लिए प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना नाम का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम भी प्रारंभ किया है जिसके तहत ऐसी महिलाओं को रसोई गैस सिलिंडर उपलब्ध कराये जाते हैं. अब तक 5 करोड़ महिलाएं इस कार्यक्रम का लाभ उठा चुकी हैं. अब 2019 तक के लिए लक्ष्य को आगे बढ़ाकर 8 करोड़ महिलाओं को कार्यक्रम का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है.  
दिव्यांग    
दलितों, जनजातीय लोगों और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के अलावा केन्द्र सरकार ने समाज के ऐसे तबकों की भी पहचान की है जिनकी दशकों से उपेक्षा होती रही है. सरकार ने इन समूहों के लागों के लिए कारगर और विशिष्ट नीतियां तथा कार्यक्रम बनाए हैं. सरकार शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को अब दिव्यांगके नाम से पुकारती है. इस तरह के जरूरतमंद लोगों को कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र, तिपहिया साइकिल आदि उपलब्ध कराने के लिए कई बड़े शिविरों का आयोजन किया गया. जहां 1992 से 2014 तक की अवधि में केवल 100 शिविर आयोजित किये गये थे वहीं 2014 से 2016 तक के दो साल में एक सौ से अधिक शिविरों का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री ने ऐसे दो शिविरों में भाग लिया जिनमें 10,000 से अधिक लोगों को इस तरह के उपकरणों के वितरण का विश्व रिकॉर्ड गिनीज़ बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स में दर्ज हुआ. सुगम्य भारत कार्यक्रम के तहत सरकारी इमारतों में सूझबूझ से किये गये डिजायन संबंधी परिवर्तनों के जरिए उन्हें दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाया गया. कलेक्टेड वक्र्स ऑफ आंबेडकरपुस्तकमाला का ब्रेल में लिप्यंतरण किया      गया ताकि आंखों से लाचार लोग भी उनका अध्ययन कर सकें.
वरिष्ठ नागरिक 
देशवासियों की औसत अनुमानित आयु में बढ़ोतरी से उम्र संबंधी जनसांख्यिकीय आंकड़े भी बदल गये हैं और वरिष्ठ नागरिकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. केन्द्र सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किये हैं और विभिन्न कार्यक्रमों के तहत दी जाने वाली धनराशियों में भी 70 से 80 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी है. 2014-15 और 2015-16 में 41,000 वरिष्ठ नागरिकों पर 42,000 करोड़ रुपये खर्च किये गये. इसी तरह 2016-17 में वरिष्ठ नागरिकों के विभिन्न कार्यक्रमों पर 29 करोड़ रुपये खर्च किये गये. बदलती हुई सामाजिक-आर्थिक जरूरतों और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों संबंधी राष्ट्रीय नीति में भी बदलाव किया गया है. हर साल विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को वयोश्री पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है. वरिष्ठ नागरिकों को आधार कार्ड से जुड़े स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने के लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय एकजुट हुए हैं जिससे उन्हें स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी कई लाभ प्राप्त हो सकेंगे.
यायावर जनजातियां  
सरकार ने घुमंतू जनजातियों के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए एक आयोग गठित किया है. इन समुदायों के नौजवानों के लिए होस्टल बनाने के लिए नानाजी देशमुख के नाम पर एक कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है. 
छात्रवृत्तियां 
दलित और सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से पिछड़े समुदायों के मैट्रिक से पहले की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को बड़े पैमाने पर छात्रवृत्तियां दी गयी हैं. 2014-15 और 2015-16 में 49,24,700 छात्रों को 1,038.73 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां दी गयीं. 2016-17 में करीब 344.28 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां 13 लाख से अधिक दलित छात्रों को प्रदान की गयीं. अन्य पिछड़े वर्गों के करीब 50 लाख छात्रों को 2014-15 और 2015-16 में 230 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां दी गयीं. 2016-17 में इनकी राशि 106 करोड़ रुपये रही. इसी तरह उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दलित और अन्य पिछड़े वर्गों के जितने छात्रों को फैलोशिप्स दी गयीं उतनी इससे पहले कभी नहीं दी गयी थीं.    
उपेक्षितों के लिए बुनियादी ढांचा
केन्द्र सरकार ने गरीबों, वंचितों और समाज के उपेक्षित वर्गों के लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई कार्यक्रम प्रारंभ किये हैं. 14 अप्रैल, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना- आयुष्मान भारत-का शुभारंभ किया जिसका उद्देश्य समाज के उन वर्गों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है जो अब तक इससे वंचित रहे हैं. आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देश के पहले स्वास्थ्य और आरोग्य केन्द्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद प्रभावित बीजापुर जिले में किया. सरकार देश के विभिन्न भागों में इसी तरह के 1.5 लाख स्वास्थ्य और आरोग्य केन्द्र संचालित करेगी. इस कार्यक्रम के तहत देश में 10 करोड़ परिवारों, यानी 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. इन लोगों को स्वास्थ्य बीमा के तहत 5 लाख रुपये की सुरक्षा उपलब्ध करायी जाएगी. सरकार पहले से ही 800 से अधिक जन औषधि केन्द्रों का संचालन कर रही है जिनसे 800 से ज्यादा जीवन रक्षक दवाएं किफायती दामों पर खरीदी जा सकती हैं. स्वच्छता को विलासिता मानने की गलत धारणा को खत्म करते हुए सरकार ने गरीब लोगों को शौचालयों के निर्माण में मदद देने की एक योजना बनायी है जिसकी बड़ी आवश्यकता महसूस की जा रही थी. इसके अंतर्गत पिछले चार वर्षों में 6 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है और इस साल 2 करोड़ और शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने देश में प्रत्येक परिवार को रहने के लिए अपना घर उपलब्ध कराने का भी संकल्प लिया है और वह इस दिशा में अथक प्रयास कर रही है. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में इस साल ऐसे 51 लाख मकान बनाने की बात कही थी. चालू साल में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 14 लाख करोड़ रुपये आबंटित किये गये हैं. प्रधानमंत्री ने बिजली की सप्लाई में गड़बड़ी की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना प्रारंभ की है. इसके अंतर्गत 4 करोड़ परिवारों को 16,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की बिजली दी जाएगी.   
पिछड़े जिलों में कार्य
भारत में कई दशकों से जाति को पिछड़ेपन का मुख्य मानदंड माना जाता रहा है और सकारात्मक कार्रवाई संबंधी तमाम नीतियां इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं, जिससे जातिगत पहचान और भी पुख्ता हो जाती है. इसी बात को महसूस करते हुए मोदी सरकार ने जिलों को पिछड़ेपन का आधार बनाकर विचार करने का फैसला किया. अगर जिला पिछड़ा हुआ है और पिछड़ापन जाति से नहीं जुड़ा है तो उसमें रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति पिछड़ा हुआ होगा. इस आधार पर देश में 115 जिलों की पहचान की गयी है और उनके विकास के लिए अलग योजनाएं बनायी गयी हैं. जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों से मुलाकात की ताकि इन योजनाओं पर कारगर तरीके से अमल सुनिश्चित किया जा सके. हर एक व्यक्ति को आराम की जिन्दगी बसर करने का मौका देने के लिए मोदी सरकार समाज के दुर्बल, वंचित और उपेक्षित वर्गों के लिए खास तौर पर कार्य कर रही है. सरकार ने 2022 तक देश के किसानों की आमदनी बढ़ाकर दुगना करने का लक्ष्य रखा है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने अपने नवीनतम बजट में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना बढ़ोतरी करने का वादा किया. 2014 में जब सरकार का गठन हुआ था तो प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह सरकार समाज के गरीबों और उपेक्षित तबके की सरकार है. सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों पर एक नजर डालने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि पिछले चार वर्षों से सरकार इन वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य कर रही है. सरकार के इन बहुआयामी प्रयासों के अच्छे नतीजे सामने आने लगे हैं और अधिक से अधिक लोगों को इनका फायदा भी मिलने लगा है.     
(स्वदेश सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक हैं और देवी दयाल गौतम भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से संबद्ध हैं. इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं).
ई-मेल: swadesh171@gmail.com)