संपादकीय लेख


Volume-32, 10-16 November, 2018

 

भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर

डॉ. रंजीत मेहता

भारत को ऊर्जा की व्यापक आवश्यकता है. देश की प्रति व्यक्ति विद्युत खपत दुनिया की औसत प्रति व्यक्ति खपत का एक तिहाई से भी कम है. भारत सरकार ने 2022 तक देश में 175 जीडब्ल्यू ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से हासिल करने का समग्र लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से 100 जीडब्ल्यू (गीगा वॉट) बिजली सौर ऊर्जा के रूप में हासिल करने का लक्ष्य है. इसमें 40 जीडब्ल्यू ऊर्जा भवनों की छतों से और 60 जीडब्ल्यू बड़ी और मध्यम आकार की ग्रिड कनेक्टिड सौर ऊर्जा परियोजनाओं से हासिल की जाएगी. 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा के 175 जीडब्ल्यू के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के अंतर्गत 100 गीगा वॉट सौर ऊर्जा, 60 गीगा वॉट पवन ऊर्जा, 10 जीडब्ल्यू जैव ऊर्जा और 5 जीडब्ल्यू लघु पन विद्युत परियोजनाओं के जरिए हासिल करना शामिल है.

2015 के पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के अंतर्गत भारत ने, जो कुल मिला कर ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करने के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है, अपने प्रयासों के हिस्से के रूप में 2005 के स्तर से 2030 तक उत्सर्जन में एक तिहाई कमी लाने का संकल्प व्यक्त किया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की विद्युत क्षमता में 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान दोगुना करते हुए इसे 40 प्रतिशत पर पहुंचाना होगा.

नवीकरणीय ऊर्जा के विकास के मामले में भारत एक भरोसेमंद, विविध साधनों से तेजी से उत्पादन करने वाला और वित्तीय दृष्टि से सशक्त बाजार है. भारत को बढ़ती आबादी, ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए प्रावधान और बिजली की भारी कमी को पूरा करने की बढ़ती चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए भी उसे अन्य उत्पादन स्रोतों को अपनाना होगा. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित और व्यवस्थित करने की भारत की जरूरत इस तथ्य से भी उजागर होती है कि ईंधन के प्राथमिक स्रोत खनिज तेल और कोयले की हिस्सेदारी आयात में सबसे अधिक है. उच्च वस्तु मूल्य चक्र के दौरान देश को प्राथमिक ईंधन की आपूर्ति में व्यवधान उच्च बजटीय घाटे और नतीजतन मुद्रास्फीति की समस्या का सामना करना पड़ता है. भारत जैसी तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी है, क्योंकि उत्पादित मिश्रित ऊर्जा में ईंधन के रूप में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत है. ऊर्जा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधनों के अधिक इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन अधिक होता है, जिससे विकास में अस्थिरता आती है.

अगले दशक में भारत के ऊर्जा पोर्टफोलियो में सौर ऊर्जा के एक निर्णायक स्रोत बनने की संभावना है. सौर ऊर्जा के विकास के प्रमुख कारणों में से एक यह तथ्य है कि अन्य ऊर्जा स्रोतों की तुलना में सौर ऊर्जा संयंत्र सबसे कम अवधि में स्थापित किया जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नवीकरणीय ऊर्जा निवेश में वैश्विक प्रवृत्तियां 2016’ नामक रिपोर्ट में भारत को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने वाले विश्व के दस प्रमुख देशों में शामिल किया गया है. वैश्विक दृष्टि से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के क्षमता संवर्धन की दृष्टि से अमरीका, चीन और जापान के बाद भारत का दुनिया में चौथा स्थान है.

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के अनुसार भारत की अनुमानित सौर ऊर्जा क्षमता करीब 750 गीगावॉट (जीडब्ल्यू) है. यह क्षमता अनेक राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात में फैली है. भारत में एक वर्ष के दौरान 300 दिन से अधिक धूप उपलब्ध रहती है. इसे देखते हुए भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक सुपर पॉवर बनने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है. 2009 में राष्ट्र ने पहली बार राष्ट्रीय सौर मिशन का शुभारंभ किया था, तब से लेकर देशभर में इस्तेमाल में न आ रहे बड़े भू-क्षेत्रों पर सोलर पार्क संस्थापित किए गए हैं.

सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार के अवसर

वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए सौर ऊर्जा निश्चित रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनेक ऐसी पद्धतियां हैं, जिनसे सूर्य के विकिरण को विविध प्रकार के सोलर उत्पादों में संरक्षित किया जा सकता है, जैसे सोलर पैनल, सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर इन्वर्टर्स, सोलर यूपीएस, सोलर मोबाइल चार्जर्स, सोलर फैन, सोलर केबल्स, सोलर होम सिस्टम्स और यहां तक कि सोलर सीसीटीवी कैमरे. इतने सारे सोलर उत्पादों के विनिर्माण, बिक्री अथवा संस्थापना में निश्चित रूप से बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोज़गार के अवसर उपलब्ध होंगे. आज, स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आकर्षक पारिश्रमिक के साथ रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध हुए हैं. यूरोपीय डिफेंस फंड (ईडीएफ) के अनुसार सौर ऊर्जा आपूर्ति कंपनियां प्रति डॉलर निवेश के अनुसार अधिक संख्या में रोज़गार प्रस्तावित करने में सक्षम हैं. अमरीका की समूची अर्थव्यवस्था की तुलना में इस क्षेत्र में रोज़गार के अवसर 12 गुणा अधिक हैं.

सौर ऊर्जा क्षेत्र हाल के वर्षों में एक नए औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उभरा है. अधिकाधिक लोग अपने घरों और कार्यालयों में, अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए सोलर पैनल स्थापित कराने लगे हैं, इसलिए सोलर उद्योग बिक्री, संस्थापना और विनिर्माण के मामले में पहले की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो रहा है. अगर हम अमरीका में रोज़गार सृजन पर एक निगाह डालें, तो सोलर उद्योग में 350,000 से अधिक लोग नियोजित हैं और अनुमान है कि 2025 तक इस क्षेत्र में रोज़गार के 202,000 अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे.

भारत की 1.3 अरब की आबादी में बेरोज़गारों की बड़ी संख्या विश्व की सबसे तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था को आघात पहुंचा रही है. अनुमान है कि 2022 तक सौर ऊर्जा क्षेत्र में 16 लाख रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, जिसमें से अकेले निर्माण क्षेत्र में 600,000 से अधिक रोज़गार के अवसर होंगे.

हाल के वर्षों में यदि वैश्विक प्रवृत्तियां देखें, तो अमरीका, चीन और जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक महत्व दे रहे हैं, जिससे उन्हें वैश्विक गैस उत्सर्जन में 40 प्रतिशत तक कमी लाने की योजना बनाने में मदद मिली है. इन योजनाओं में ऐसी फैक्ट्रियां लगाना शामिल है, जो स्वच्छ ऊर्जा पैदा करेंगी और जिनमें 430,000 रोज़गार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे. प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में यह देखा जा रहा है कि सन 2000 के प्रारंभ की तुलना में सोलर टेक्नोलोजी के इस्तेमाल और कार्यान्वयन में निरंतर बढ़ोतरी हुई है. सौर ऊर्जा आज विश्व में नवीकरणीय ऊर्जा का सबसे तीव्र गति से उभरने वाला स्रोत है, जिसका विश्वभर में कुल उत्पादित ऊर्जा में करीब 1 प्रतिशत योगदान है. वास्तव में, सौर ऊर्जा उत्पादन विश्वभर में परमाणु ऊर्जा उत्पादन से होड़ कर रहा है. 2015 मेंं सौर ऊर्जा क्षमता करीब 350 जीडब्ल्यू (गीगा वॉट) थी, जिसकी तुलना में उसी वर्ष 391 जीडब्ल्यू क्षमता के साथ परमाणु ऊर्जा का स्थान सर्वोच्च था. इसके अतिरिक्त यह अनुमान लगाया गया है कि सौर ऊर्जा में रूपांतरण की वर्तमान दर यदि जारी रहती है, तो यह 2050 तक जीवाश्म ईंधन को पीछे छोड़ देगी, जहां अधिकतर विश्व सूर्य द्वारा उत्पादित ऊर्जा पर निर्भर होगा.

नवीकरणीय ऊर्जा विकेंद्रीकृत विद्युत है, अत: इससे गांवों में रोज़गार के अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं. भारत जिस तरह से अपनी विकास आवश्यकताओं के लिए ईंधन के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी मजबूत करने के महत्वपूर्ण उपाय कर रहा है, उसे देखते हुए इसके और भी रचनात्मक प्रभाव सामने आएंगे. ऊर्जा सुरक्षा में सुधार के अलावा ऊर्जा पहुंच में बढ़ोतरी और जलवायु परिवर्तन की समस्या में कमी जैसे फायदों के अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा गरीबी कम करने और रोज़गार के अवसर पैदा करने में भी मदद करेगी. ये रोज़गार ऐसे होंगे, जो उच्च से लेकर न्यूनतम व्यवसायिक कौशल रखने वालों तक के अनुकूल होंगे. अत: व्यवसायियों के साथ साथ सीमित शैक्षिक अवसरों वाले व्यक्तियों के लिए भी इस क्षेत्र में रोज़गार की संभावनाएं होंगी.

सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार उपलब्ध होने से नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में योगदान के साथ ही गरीबी कम करने के भी अवसर पैदा होंगे. वर्तमान में, सौर ऊर्जा क्षेत्र में 100,000 से अधिक लोग नियोजित हैं, जबकि पवन ऊर्जा क्षेत्र में 48,000 लोगों को रोज़गार प्राप्त है. ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण परिषद द्वारा कराए गए अध्ययन के अनुसार 2022 तक जब भारत सौर और पवन ऊर्जा से 160 जीडब्ल्यू बिजली पैदा करने का अपना लक्ष्य हासिल करेगा, तो यह संख्या बढ़ कर 3,33,000 पर पहुंच जाएगी. यह अध्ययन रोज़गार के अवसरों और विशेष रूप से ग्रामीण भारत में गरीबी दूर करने में उनकी क्षमता का गुणात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है.

रोज़गार के ये अवसर भौगोलिक दृष्टि से ऐसे क्षेत्रो में संवितरित होंगे, जो कस्बों और शहरों से दूरवर्ती क्षेत्रों में फैले होंगे. इससे आर्थिक लाभों का विस्तार होगा. ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां लोगों में नवीकरणीय ऊर्जा कौशल कम है और जहां मौसमी खेती के अलावा वैकल्पिक रोज़गार के अवसर बहुत कम हैं.

सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में विनिर्माण से लेकर प्रचालन तक प्रति मेगावाट संस्थापित क्षमता के लिए न्यूतनम 17 व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है, जबकि कोयला क्षेत्र में यह औसत मात्र 5 की है. परिणाम स्वरूप, कोयला क्षेत्र में रोज़गार सृजन के अवसर सीमित हैं और इसकी तुलना में सौर ऊर्जा अथवा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध हैं, जो संवितरित हैं और उनके रख-रखाव और प्रचालन के लिए अधिक लोगों की आवश्यकता पड़ती है.

आने वाले वर्षों में, सौर प्रौद्योगिकी के अन्य अनुप्रयोगों, जैसे पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं के लिए वाटर पंपों की संस्थापना में भी रोज़गार के अवसर पैदा होंगे. चूंकि यह एक बहु-उपयोगी प्रौद्योगिकी है, अत: इसमें रोज़गार के अवसर भी व्यापक हैं. सौर ऊर्जा परियोजनाएं हरित रोज़गार सृजित करती हैं और भारत की विकासशील अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाती हैं. ऐसे देश में जहां बढ़ती आबादी को देखते हुए ऊर्जा की मांग में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है, स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का दोहन करने से स्थायी आधार पर ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी करने में मदद मिल सकती है और साथ ही नए आर्थिक अवसरों को भी बढ़ावा मिलता है. सोलर फोटोवोल्टेइक (पीवी) में प्रति यूनिट रोज़गार के अधिक अवसर पैदा होते हैं; अत: भारत की बढ़ती आबादी और श्रमिकों की संख्या को देखते हुए यह क्षेत्र बेरोज़गारी का बेहतर समाधान करने की क्षमता रखता है.

सौर ऊर्जा मिशन के दूसरे चरण के दौरान भारत सोलर स्थापनाओं में तीव्र गति से वृद्धि कर रहा है, अत: इस संभावित परिवर्तन कारक ऊर्जा स्रोत को अधिक जन समर्थन प्राप्त होने की संभावना है. स्वच्छ ऊर्जा के स्थानीय फायदों को प्रदर्शित करने का एक आसान तरीका यह है कि इस क्षेत्र में रोज़गार सृजन का प्रचार किया जाए.

कुल मिला कर, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं में रोज़गार के अनेक स्थानीय अवसर पैदा हो रहे हैं, जो उत्पादन प्रारंभ होने से पहले निर्माण चरण में एकबारगी रोज़गार से लेकर सोलर प्लांट के कई दशकों के जीवनकाल को देखते हुए प्रचालन और रख-रखाव संबंधी स्थायी रोज़गार तक व्याप्त हैं. सोलर उद्योग के विकास में मदद करने और स्थानीय व्यापारियों द्वारा अपनी जरूरतें प्रचारित करने से इस संभावनाशील क्षेत्र को आगे बढ़ाया जा सकता है. भारत की विकासशील अर्थव्यवस्था में एक मजबूत सोलर बाजार नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करने और ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने के अलावा रोज़गार के अवसर सृजित कर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार की खबरों के अनुसार सोलर फोटोवोल्टेइक क्षेत्र में महत्वपूर्ण संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा हुए हैं. वास्तव में कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यह क्षेत्र ऊर्जा के किसी अन्य स्रोत की तुलना में प्रति यूनिट अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान कर रहा है. रोज़गार के ये अवसर विशेष रूप से सोलर पीवी पावर प्लांटों के निर्माण और संस्थापना के दौरान उपलब्ध होते हैं. फोटोवोल्टेइक बाजार में प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सीधे तौर पर पीवी परियोजना कार्यान्वयन करने वाली कंपनियों, सोलर डिवेल्पर्स, ईपीसी कंपनियों और पीवी कंपोनेंट विनिर्माता कंपनियों में अधिक सृजित होते हैं. इसके अलावा परोक्ष रोज़गार के अवसर पीवी उद्योग को अधिक सामान्य सेवाएं प्रदान करने वाले व्यवसायों, जैसे विनिर्माताओं को कच्चे माल की आपूर्ति, विद्युत आपूर्ति और प्रशासन एवं वित्त की व्यवस्था करने वाले सार्वजनिक कार्यालयों द्वारा प्रदान किए जाते हैं. परियोजना के निर्माण और उसे चालू करने के अंतर्गत वास्तविक संस्थापना और राष्ट्रीय पॉवर ग्रिड के साथ कनेक्ट करना शामिल है. निर्माण श्रमिकों, इलेक्ट्रिशियनों, तकनीशियनों, इंजीनियरों, मौसम वैज्ञानिकों और उपकरण विक्रेता के रूप में काम करने वाले तकनीशियनों (जैसे इनवर्टर आपूर्तिकर्ता) के रूप में प्रत्यक्ष रोज़गार के असवर सृजित होते हैं. निर्माण चरण के दौरान कुशल और अकुशल, दोनों तरह के मजदूरों की आवश्यकता पड़ती है. प्रचालन और रख-रखाव में तकनीशियनों, इलेक्ट्रिशियनों, रख-रखाव और सुरक्षा स्टाफ  तथा प्रचालन प्रबंधकों के लिए प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होते हैं. संयंत्र के प्रचालन और रख-रखाव के लिए कुशल और अकुशल, दोनों तरह के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है.

(लेखक डॉ. रंजीत मेहता पीएच.डी चेंबर ऑफ  कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, नई दिल्ली के प्रधान निदेशक हैं. लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. ईमेल ranjeetmehta@ gmail.com)

(चित्र साभार: गूगल से)