संपादकीय लेख


Volume-52

कृषि विस्तार सेवाएं

पंकज कुमार ओझा, प्रियंका कुमारी
और कल्याण घेदई


कृषि विस्तार सेवाओं (एईएस) का मुख्य लक्ष्य किसानों को अद्यतन तकनीकी जानकारी सम्प्रेषित करना है. इसके अलावा एईएस सेवाओं में फसल तकनीकों के बारे में किसानों की जानकारी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है और उत्पादकता बढ़ाने में उनकी मदद की जाती है. यह कार्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, खेत भ्रमणों, खेतों में परीक्षणों, किसान मेलों, किसान क्लबों, परामर्शी बुलेटिनों और ऐसे ही अन्य कार्यक्रमों के जरिए किया जाता है.
कृषि विस्तार सेवाओं या कृषि परामर्श सेवाओं का लक्ष्य किसानों के सहयोग से कृषि क्षेत्र में कार्यक्रमों और परियोजनाओं का कार्यान्वयन और संचालन करना है. विस्तार सेवाएं विस्तार कार्यकर्ताओं अथवा विस्तार एजेंटों द्वारा प्रदान की जाती हैं. वे हमेशा कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, ग्रामीण आजीविका में सुधार लाने और निर्धन-उन्मुखी आर्थिक विकास के इंजन के रूप में कृषि को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कृषि विस्तार सेवाओं का लक्ष्य
कृषि विस्तार सेवाओं के निम्नांकित लक्ष्य हैं:
*किसानों को अद्यतन जानकारी सम्प्रेषित करना.
*उनकी जानकारी बढ़ाना और खेती को उनके लिए अधिक लाभप्रद बनाना.
*खेती में आने वाली समस्याओं और दबावों के बारे में किसानों से प्राप्त जानकारी (फीडबैक) विस्तार अधिकारियों/वैज्ञानिकों तक पहुंचाना.
*विस्तार कार्यकर्ताओं की व्यावसायिक योग्यता बढ़ाना.
*किसानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना.
*किसानों, विस्तार अधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं के बीच सुदृढ़ संबंध कायम करना.
*किसानों को समग्र विकास के लिए प्रेरित करना.
 
बृहत्तर अर्थ में विस्तार एक शैक्षिक प्रक्रिया है, जिसमें सूचना सम्प्रेषण एक मूलभूत घटक है. वैन देन बैन और हॉकिन्स (1966) ने विस्तार शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था कि यह सूचना सम्प्रेषण का सजग इस्तेमाल है, ताकि लोगों को सुदृढ़ राय विकसित करने और बेहतर निर्णय करने में मदद की जा सके. एक प्रणाली के रूप में, विस्तार ज्ञान, सूचना और प्रौद्योगिकियों तक किसानों, उनके संगठनों और अन्य बाजार कार्यकर्ताओं की पहुंच बढ़ाने, अनुसंधान, शिक्षा, कृषि-व्यापार प्रतिभागियों और अन्य सम्बद्ध संस्थानों के साथ संपर्क कायम करने में उनकी मदद करता है. इसके अतिरिक्त विस्तार गतिविधियां उन्हें स्वयं के तकनीकी, संगठनात्मक और प्रबंधकीय कौशल एवं पद्धतियां विकसित करने में भी सहायता करती हैं. (क्रिस्टोप्लोस, 2010)
ग्रामीण आजीविका में विस्तार की भूमिका के संदर्भ में, कृषि विस्तार के अंतर्गत उन सभी संगठनों का समूचा समूह शामिल है, जो कृषि उत्पादन में लगे लोगों को उनकी समस्याएं दूर और उनकी आजीविका एवं समृद्धि में सुधार के लिए जानकारी, कौशल एवं प्रौद्योगिकियां प्राप्त करने में उनकी सहायता करता है (बिरनेर और अन्य, 2006). किसी भी आजीविका में चूंकि जीविका के साधनों के लिए अपेक्षित क्षमताएं, परिसंपत्तियां और गतिविधियां शामिल होती हैं, अत: ऐसा लगता है कि कृषि विस्तार का लक्ष्य न केवल उत्पादकता और आय में वृद्धि करना है, (एंडर्सन और फेडर, 2007; वैडिंग्टन और अन्य, 2010), बल्कि ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं में सुधार लाना भी है. कृषि विस्तार आज विश्व के अधिकतर देशों में एक समान गतिविधि है, और ग्रामीण क्षेत्रों में
परिवर्तन लाने से संबंधित कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं में यह एक बुनियादी तत्व है. विस्तार सेवा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रशासनिक ढांचे की एक समान विशेषता है और किसानों के साथ भागीदारी के जरिए इन सेवाओं का दायित्व परिवर्तन के लिए कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं का संचालन करना है. कोई भी कृषि विस्तार सेवा किसानों को खेती के बारे में तकनीकी परामर्श प्रदान करती है, और उन्हें अपनी कृषि उपज बढ़ाने में सहायक जानकारी और सेवाएं भी प्रदान करती है. यह सेवाएं किसानों को जानकारी देती हैं और उन्हें कृषि अनुसंधान केंद्रों द्वारा विकसित नए विचारों से अवगत कराती हैं. कृषि विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत परिष्कृत फसल प्रजातियां, बेहतर पशुधन नियंत्रण, उन्नत जल प्रबंधन खर-पतवार और कीट या पादप बीमारियों पर नियंत्रण सहित व्यापक क्षेत्र को शामिल किया जाता है. जहां कहीं उचित हो, कृषि विस्तार स्थानीय किसानों के समूहों एवं संगठनों की स्थापना में भी मदद पहुंचाता है, ताकि वे विस्तार कार्यक्रमों का लाभ उठा सकें. अत: कृषि विस्तार ऐसे अपरिहार्य तत्व प्रदान करता है, जिनकी आवश्यकता किसानों को अपनी कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए पड़ती है.
हाल के वर्षों में मूल्य वृद्धि के कारण समूचे विश्व का ध्यान कृषि पर लौटा है. इसकी वजह यह रही है कि समुचित प्रौद्योगिकी के सम्प्रेषण में लंबे समय से लापरवाही बरती गई, जिससे बढ़ती आबादी की तुलना में उत्पादन अवरुद्ध हो गया. वर्तमान कृषि के समक्ष उत्पादन बढ़ाना एक प्रमुख चुनौती है. कम भूमिधारक किसानों, जिनका विकासशील देशों में आधिक्य है, के लिए यह जरूरी है कि वे कि समुचित ज्ञान और जानकारी हासिल करके अपनी खेती में सुधार लाएं. कृषि विस्तार सेवाएं ज्ञान, सूचना और प्रौद्योगिकी तक महत्वपूर्ण पहुंच प्रदान करती हैं, जिसकी आवश्यकता किसानों को उत्पादकता में सुधार लाने के लिए होती है और इस तरह वे अपने जीवन और आजीविका की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं. इस प्रकार किसानों को ज्ञान और सूचना समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. टेलीसेंटर जैसे कुछ आधारभूत उपकरण सूचना, ज्ञान और विकास के अवसरों के लिए प्रमुख प्रेरक के रूप में काम कर सकते हैं, परंतु ढांचागत सुविधाओं के अभाव के कारण सुदूर गांवों के किसानों की इन केंद्रों तक पहुंच परिसीमित है.
नई प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी का सम्प्रेषण अनिवार्य है, ताकि किसान अद्यतन कृषि गतिविधियों का इस्तेमाल कर सकें. अनुसंधान के निष्कर्षों और किसानों की जरूरतों के बीच एक अंतराल भी बना हुआ है. प्रौद्योगिकी को सफल बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अंतिम इस्तेमालकर्ता के उपयोगी प्रयोजन को पूरा करे. किसानों और कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों के बीच अंतराल को दूर करने वाला संस्थान कृषि विस्तार सेवा है. यह सेवा राज्यों में कृषि अनुसंधान प्रणाली के जरिए काम करती है.
राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष राष्ट्रीय संस्थान है. यह कृषि विस्तार के कारगर प्रबंधन और अन्य कृषि प्रबंधन पद्धतियों में राज्य सरकारों, भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य संगठनों की मदद करता है.
कृषि विस्तार सेवा और किसानों को प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए अधिकतर गांवों में किसान क्लब बनाए जा रहे हैं. इन क्लबों में नवीन किसान, प्रगतिशील किसान और किसान-हित समूह शामिल हैं. प्रत्येक क्लब का एक नवीन किसान संयोजक अथवा सम्पर्क व्यक्ति के रूप में काम करता है. ये किसान समूह-केंद्रित खेती पद्धतियों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं, जैसे कीट नियंत्रण अभियान आयोजित करना. राज्य कृषि विभाग ने भी विस्तार कार्मिकों के प्रशिक्षण के लिए विभिन्न केंद्रों की स्थापना की है.
एसएएमईटीआई एक स्वायत्त राज्य स्तरीय संस्थान है, जो विभिन्न समान विभागों की परियोजनाओं के कार्यान्वयन और कृषक समुदाय के प्रति उत्तरदायी है. संक्षेप में एसएएमईटीआई निम्नांकित के लिए जिम्मेदार हैं:-
1.कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों (एटीएमए) को परियोजना आयोजना, कार्यान्वयन और मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों में जरूरत आधारित परामर्शी सेवाएं प्रदान करना.
2.मानव और सामग्री संसाधनों के लिए उपयुक्त प्रबंधन उपकरण विकसित और प्रोत्साहित करना.
3.मध्यम और निचले स्तर के कृषि विस्तार स्टाफ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था करना.
4.प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से मिली फीडबैक (जानकारी) के फलस्वरूप प्रबंधन, सम्प्रेषण और प्रतिभागी पद्धतियां विकसित करना.
5.कृषि विस्तार प्रबंधन, कृषि उपज विपणन, मानव संसाधन विकास, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित समस्याओं के बारे में अध्ययन संचालित करना.
कृषि विस्तार सेवाओं का क्षेत्र
विस्तार सेवाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम/परियोजनाएं/अनुशंसाएं शामिल हैं, जो विस्तार सेवाओं द्वारा अपने ग्राहकों को विस्तार शिक्षा प्रक्रिया के जरिए प्रदान की जाती हैं. कृषि विस्तार सेवा के अंतर्गत कृषि और ग्रामीण मुद्दों के सभी पहलू शामिल हैं. इनमें समय पर जानकारी का प्रावधान, किसानों को खेती संबंधी जानकारी और ऋण सुविधाओं के स्रोतों के साथ जोडऩा और सर्वाधिक महत्वपूर्ण, किसानों के लिए शिक्षा सेवाओं का प्रावधान करना शामिल है. लोग अक्सर ये गलती करते हैं कि वे कृषि विस्तार सेवाओं को खेत में फसल लगाने और अन्य अपेक्षित सामग्री जुटाने में किसानों की मदद करने तक सीमित समझते हैं. परंतु, कठिन प्रयोगों के बाद लोगों ने यह एहसास किया है कि किसी भी कृषि परियोजना या कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की पूर्ण भागीदारी अवश्य होनी चाहिए ताकि वे आयोजना से कार्यान्वयन तक सभी गतिविधियों में भागीदारी निभा सकें. आधुनिक कृषि विस्तार कार्य के अंतर्गत सेवाओं का व्यापक स्पैक्ट्रम शामिल है, जिनमें उत्पादन, विपणन, भंडारण, प्रसंस्करण, मछली उद्योग, कृषि वानिकी, निवेश-आपूर्ति और वितरण, कार्मिक विकास, घरेलू अर्थव्यवस्था/कृषि में महिलाओं का योगदान, सिंचाई, भूमि प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण, भू-क्षरण नियंत्रण, पशुधन प्रबंधन, मानव संसाधन/विकास, प्रशासन/प्रबंधन, कार्यक्रम आयोजन और मूल्यांकन, युवा विकास कार्यक्रम आदि में सुधार लाना शामिल है (अनेटो, 2003). यहां इस बात पर बल देना जरूरी है कि विस्तार यदि अकेला होगा, तो वह एक कमजोर उपकरण सिद्ध होगा. परंतु, मूल्य, प्रोत्साहन, निवेश आपूर्ति, ऋण, बीज विस्तार और ऐसी ही अन्य चीजों के साथ जोडऩे पर यह शक्तिशाली बन जाता है (कंटैडो, 1979). इसे अनुसंधान-विस्तार-कृषक सम्पर्क के बीच एक पहले से ज्ञात संबंध में सुधार के रूप में देखा जा सकता है, जिसे अनुसंधान-विस्तार कृषक-जानकारी संपर्क (आरईएफआईएलएस) के जन्म के रूप में समझा जा सकता है. परंतु यह तथ्य बना हुआ है कि इस संपर्क से विस्तार सेवा के स्वरूप में वास्तव में सुधार नहीं हुआ है, अत: अनेटो (2003) ने विस्तार सेवा को उसकी शैक्षिक सेवा के अतिरिक्त प्रत्यक्ष निवेश वितरण में शामिल करने की आवश्यकता बताई.
कृषि विस्तार सेवा की भूमिका
किसी भूमिका को मानदंडों, मूल्यों के समूह, और निर्दिष्ट श्रेणी के व्यक्तियों से सम्बद्ध परस्पर संवाद पद्धतियों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है. इसलिए यह एक निर्दिष्ट स्तर से सम्बद्ध कार्य है. इसे श्रम के विभाजन की आर्थिक धारणा के साथ स्पष्ट किया जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि व्यक्ति अर्थव्यवस्था के अलग अलग क्षेत्रों में काम करते हैं.  कृषि विस्तार सेवा सरकारी एजेंसी हो सकती है, अथवा वह मंत्रालय हो सकता है, जो शैक्षिक प्रक्रियाओं के जरिए नई वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाए जाने और इस्तेमाल किए जाने को बढ़ावा देने के प्रति जिम्मेदार होता है (यूवकाह,1984). अनेक कृषि विस्तार सेवाएं गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओज़), अनेक प्राइवेट कंपनियों और निजी संगठनों में भी देखी जा सकती हैं. इस प्रकार विस्तार सेवा की भूमिका के अंतर्गत कृषि विकास संस्थानों जैसे अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय और लक्षित समूहों (जिनमें किसान, महिला समूह, युवा आदि हो सकते हैं) के बीच एक मध्यस्थ या बिचौलिए या एक संपर्क बिंदु के रूप में शामिल करना, स्वीकृत कृषि विस्तार नीतियों को कार्यान्वित करना, किसानों को खेती संबंधी जानकारियों और ऋण सुविधाओं के स्रोत के साथ जोडऩा, खेती के विकास के लिए सार्थक नए आविष्कारों और पद्धतियों की जानकारी समय पर प्रदान करना, किसानों को शैक्षिक सेवाएं प्रदान करना, किसी देश के कृषक समुदाय विकास में सक्रिय भूमिका निभाना शामिल है. इससे स्पष्ट होता है कि विश्वभर में ग्रामीण विकास के लिए विस्तार सेवाओं को कार्यनीतियों में से एक क्यों समझा जाता है. ये सेवाएं लोगों को अपनी समस्याओं का निर्धारण करने, उनके लिए वांछनीय समाधान तय करने में मदद करती है और तदनुरूप कार्रवाई करने, सभी लोगों के नजरिए में लाभप्रद परिवर्तनों को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करती हैं. विस्तार सेवाएं परिवर्तित स्थितियों के अनुरूप समय समय पर अपना मूल्यांकन करती हैं और बदलते हालात के अनुकूल अपने कार्यक्रमों में संशोधन करती हैं, ताकि युवाओं और परिवारों को बेहतर और अधिक लाभप्रद जीवन जीने के लिए अधिकतम अवसर प्रदान किए जा सकें. वे अपने कार्यकर्ताओं में सर्वोच्च प्रवीणता बनाए रखने के लिए उन्हें प्रासंगिक और निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, ताकि उन्हें सभी मानव और प्राकृतिक संसाधनों के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग और संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. इनके जरिए स्वयंसेवी कार्यकर्ता तैयार करने और सक्षम कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के वास्ते विभिन्न कार्यों में मदद करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने तथा विस्तार कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में उनकी मदद प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है. विस्तार सेवाओं का लक्ष्य संस्थानों का विकास करना है, ताकि उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के कल्याण के लिए कृषि उपज का सही संचालन किया जा सके. उचित अनुसंधान और कृषि, घरेलू अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य संबंधी समस्त व्यावहारिक जानकारी लोगों के बीच संप्रेषित करने के लिए शैक्षिक प्रयासों पर बल दिया जाता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विस्तार सेवाएं सभी लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन को प्रोत्साहित करती हैं (एडम्स, 1982).
कृषि विस्तार सेवाएं मुख्य रूप से तीन स्रोतों से प्रदान किए जाने की संभावना है, ये हैं: सरकारी क्षेत्र, निजी गैर-लाभकारी क्षेत्र और प्राइवेट लाभकारी क्षेत्र. सरकारी क्षेत्र के अंर्तगत कृषि मंत्रालय और कृषि विभाग तथा कृषि अनुसंधान क्षेत्र शामिल हैं. निजी गैर-लाभकारी क्षेत्र के अंतर्गत स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन, फांडेशन, सामुदायिक बोर्ड, द्विपक्षीय और बहु-पक्षीय सहायता परियोजनाएं और अन्य गैर-व्यावसायिक संगठन शामिल हैं. प्राइवेट लाभकारी क्षेत्र के अंतर्गत वाणिज्यिक उत्पादन और विपणन कंपनियां (जैसे निवेश विनिर्माता और वितरक), वाणिज्यिक किसान या किसान-समूह संचालित उद्यम, जिनमें किसान कृषि-विपणन और प्रसंस्करण कंपनियों, व्यापार संघों और निजी परामर्श मीडिया कंपनियों के कृषि सूचना प्रदाता और इस्तेमालकर्ता होते हैं. अत: कृषि विस्तार सेवाएं मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और आय की दृष्टि से किसानों का सशक्तिकरण करते हुए कृषि प्रणाली को सुदृढ़ करने पर ध्यान केन्द्रित करती हैं.
(पंकज कुमार ओझा और प्रियंका कुमारी कृषि विस्तार शिक्षा विभाग, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर में डॉक्टरल अनुसंधान स्कॉलर हैं (ईमेल: pankajojhabhu@gmail.com), और कल्याण घेदई बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, में विस्तार शिक्षा विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं)

चित्र: गूगल के सौजन्य से