संपादकीय लेख


Volume-6

संयुक्त विधि प्रवेश परीक्षा (सीएलएटी) -विधि व्यवसाय का प्रवेश द्वार

श्रीप्रकाश शर्मा

क्या आप कभी ऊंची गगनचुम्बी अदालती भवनों में और काला कोट पहने हुए वकीलों को अपने मुवक्किलों के मामलों की जिरह और बचाव की दलीलें पेश करते हुए देखकर प्रभावित हुए हैं? क्या आपको निर्दोष लोगों को अत्यधिक ज़रूरी जीवन रक्षक न्याय प्राप्त करने में, जो उनके लिये कानूनी रूप से अपेक्षित है और वे लंबे समय से इसका इंतज़ार कर रहे होते हैं, उनकी मदद करते हुए एक तरह की दिव्य संतुष्टि भी महसूस होती है? क्या आपको भी कुछ भाषाओं, विशेषकर अंग्रेजी में धारा प्रवाह सम्प्रेषण का अच्छा कौशल प्राप्त है? और अंत में, क्या आप बहस करने और अपने विरोधियों पर तार्किक लड़ाई लडऩे और अदालती कमरों में अपने बिंदुओं को सिद्ध करने और उन्हें मज़बूती प्रदान करने के वास्ते सबूत और गवाहों को एकजुट करने और उन्हें पेश करने तथा जीत हासिल करने की असाधारण प्रतिभा के धनी हैं? यदि ऊपर वर्णित प्रश्नों का उत्तर हां में है तो सचमुच में आप वकील के व्यवसाय में प्रवेश पाने के लिये एक वास्तविक और उपयुक्त अभ्यर्थी हो सकते हैं.
विधि के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिये, इच्छुक अभ्यर्थियों के लिये देश में स्नातक पूर्व (एलएल.बी) और स्नातकोत्तर (एलएल.एम) विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिये सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा संयुक्त विधि प्रवेश परीक्षा, जो कि सीएलएटी के तौर पर लोकप्रिय है, में उपस्थित होने की आवश्यकता होती है.
संयुक्त विधि प्रवेश  परीक्षा देश में 18 प्रमुख राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिये एक राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है. यह हर वर्ष ऐसे अभ्यर्थियों के लिये आयोजित की जाती है जो 5 वर्षीय एकीकृत स्नातकपूर्व एलएल.बी पाठ्यक्रम और एक वर्षीय मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) कार्यक्रम में प्रवेश पाने का सपना साकार करने की इच्छा रखते हैं. इस प्रवेश परीक्षा की शुरूआत देश में पहली बार 11 मई 2008 को हुई थी.
2 घण्टे की परीक्षा में प्राथमिक गणित, अंग्रेज़ी की समझ, सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स, लॉजिकल रिजनिंग और विधि की अभिरुचि तथा कानूनी जागरूकता से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न शामिल किये जाते हैं. सीएलएटी स्कोर अन्य विधि महाविद्यालयों-निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के दोनों में प्रवेश और भर्ती के पैरामीटर के तौर पर भी काम करता है.
इस परीक्षा का आयोजन सभी 18 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों द्वारा बारी बारी से किया जाता है. पिछले वर्ष इस परीक्षा का आयोजन राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटियाला, पंजाब ने किया था.
इस परीक्षा का आयोजन मई माह के दूसरे रविवार को किया जाता है. इस वर्ष इसके आयोजन का जि़म्मा चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना को सौंपा गया है.
पात्रता
सीएलएटी में केवल भारतीय नागरिक और अनिवासी भारतीय पात्र होते हैं. विदेशी नागरिकों के लिये सीटें आरक्षित होती हैं और उसके लिये उन्हें उन विश्वविद्यालयों से संपर्क करना अपेक्षित होता है जहां पर वे प्रवेश लेना चाहते हैं. उन्हें सीधे इस परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती है.
स्नातक पूर्व पाठ्यक्रमों (एलएल.बी) में प्रवेश के लिये पात्रता मानदंड के रूप में अन्य बातों के साथ-साथ मान्यताप्राप्त बोर्ड से अनारक्षित श्रेणी के लिये कुल मिलाकर कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ और अजा तथा अजजा से संबंधित उम्मीदवारों के लिये 45 प्रतिशत अंकों के साथ वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल या इंटरमीडिएट अथवा इसके समकक्ष प्रमाण-पत्र उत्तीर्ण होना अपेक्षित होता है. जिन छात्रों ने अर्हक परीक्षाएं (अर्थात् 12वीं कक्षा या इसके समकक्ष) दी हैं और परिणाम का इंतज़ार कर रहे हैं, वे भी परीक्षा के लिये आवेदन कर सकते हैं.
स्नातकोत्तर पाठयक्रमों (एलएल.एम) में प्रवेश के लिये, अपेक्षित शैक्षणिक अर्हता कुल मिलाकर न्यूनतम 55 अंकों के साथ (अजा और अजजा उम्मीदवारों के मामले में 50 प्रतिशत अंक) मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से एलएल.बी. अथवा बी.एल. डिग्री है. यहां तक कि उम्मीदवार जिन्होंने अर्हक परीक्षा पूरक अथवा कम्पार्टमेंटल अथवा पुन: प्रयासों के तहत उत्तीर्ण की है वे भी इस प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के पात्र हैं.
सामान्य श्रेणी उम्मीदवारों के लिये ऊपरी आयु सीमा परीक्षा के वर्ष में 20 वर्ष से कम है जबकि आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये 22 वर्ष है.
परीक्षा की पद्धति
2 घण्टे की अवधि की परीक्षा में 200 बहु विकल्प प्रकार के प्रश्न शामिल होते हैं. प्रत्येक सही उत्तर के लिये परीक्षार्थी को एक अंक दिया जाता है जबकि गलत उत्तर के लिये नकारात्मक अंक निर्धारित हैं और प्रत्येक गलत उत्तर के लिये 0.25 अंक काटे जाते हैं. यह एक पूर्णत: कम्प्यूटर आधारित परीक्षा है जोकि ऑनलाइन आयोजित की जाती है. परीक्षा के लिये भाषा का माध्यम केवल अंग्रेजी है. सीएलएटी के जरिये स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिये कोई आयु सीमा नहीं है.
सीएलएटी के स्नातकपूर्व पाठ्यक्रमों की विषयवस्तु के पांच भाग होते हैं
1.अंग्रेजी -समझ ज्ञान सहित-40 अंक
2.सामान्य ज्ञान और ताज़ा घटनाक्रम-50 अंक
3.प्रारंभिक गणित अथवा संख्यात्मक योग्यता-50 अंक
4.विधि अभिरुचि-50 अंक
5.लॉजिकल रीजनिंग-40 अंक
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिये 150 बहु-विकल्प प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं जिनका 2 घण्टों में उत्तर देना अपेक्षित होता है. परीक्षा के लिये कुल अंक 150 हैं. प्रत्येक सही उत्तर के लिये एक अंक प्रदान किया जाता है जबकि गलत उत्तर के लिये 0.25 अंक काटे जाते हैं. निम्नलिखित पेपर्स से प्रश्न पूछे जाते हैं-
1.संवैधानिक कानून-50 अंक
2.न्यायशास्त्र-50 अंक
3.अन्य विधिक विषय, जैसे कि संविदा, धोखाधड़ी कानून (कानूनी शब्दों में धोखाधड़ी को गलत कारनामों के लिये संदर्भित किया जाता है जो कि एक पक्ष तथा दूसरे पक्ष के प्रति किये जाते हैं और जिसके लिये घायल व्यक्ति दूसरे पक्ष पर मुकदमा कर सकता है. इन मामलों के निपटारे से जुड़े कानून को धोखाधड़ी कानून पुकारा जाता है)
सीएलएटी के लिये पाठ्यक्रम
सीएलएटी के स्नातकपूर्व पाठ्यक्रम की विषयवस्तु का विवरण नीचे दिया गया है:-
अंग्रेजी ज्ञान
परीक्षा के इस भाग के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों से प्रश्न पूछे जाते हैं-
कॉम्प्रिहेन्शन पैराग्राफ, व्याकरण, त्रुटियां एवं सुधार, समानार्थक, विपरीतार्थक, एनालॉग्स, अनेक शब्दों का एक शब्द, खाली स्थान भरो, गलत वाक्य, स्पॉटिंग त्रुटियां, शब्द त्रुटियां, पैराग्राफ  में वाक्यों का पुन: व्यवस्थापन, अव्यवस्थित वाक्य, वाक्य सुधार. इस हिस्से की तैयारी के लिये उम्मीदवारों को अंग्रेजी व्याकरण के बुनियादी ज्ञान को ठीक करने और शब्द ज्ञान में सुधार करने की भी आवश्यकता होती है.
सामान्य ज्ञान- इस हिस्से में परीक्षार्थियों की सामान्य जागरूकता की जांच की जाती है और इसकी तैयारी के लिये 12वीं स्तर के समूचे विषय बहुत संगत हो सकते हैं.
पाठ्यक्रम में निम्नलिखित विषयों पर नवीनतम घटनाएं और समाचार शामिल किये जा सकते हैं-
संस्कृति, इतिहास, खेल, समाचार, पुस्तकें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नृत्य, नाटक, सिनेमा, कम्प्यूटर, अन्वेषण, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं.
दरअसल सामान्य जागरूकता का क्षेत्र इतना व्यापक है कि इसका सारांश निकालना बहुत ही कठिन होता है. लेकिन एनसीईआरटी की कक्षा छह से 12वीं तक की सभी विषयों की पुस्तकों का अध्ययन छात्र की इस भाग के लिये तैयारी करने में बहुत मददगार हो सकता है.
प्रारंभिक अंकगणित
इस पेपर का मुख्य उद्देश्य छात्र की कक्षा 10 तक के गणित की दक्षता की जांच करना है. और इस उद्देश्य के लिये लाभ और हानि, दशमलव, फ्रैक्शन, साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज, प्रतिशतता, आयु, एचसीई और एलसीएम, संख्या प्रणाली, रूट्स, अधिकतम, अनुपात और समानुपात, लघुत्तम, छूट, क्षेत्रफल और मात्रा तथा परिमाण के अन्य विषय बहुत लाभदायक हो सकते हैं.
विधिक अभिरुचि
विधिक परिस्थिति या सिद्धांत. इसमें विधि, शोध अभिरुचि और समस्या समाधान कौशलों के अध्ययन के लिये छात्र की रुचि की जांच की जाती है.
लॉजिकल रीजनिंग
इस पेपर में सामान्यत: निम्नलिखित खण्डों से लॉजिक के प्रश्न शामिल किये जाते हैं:
पद्धतियां, साइलोगिज़्म, एनालॉग्स, सिक्वेंसिस और विजुअल रिजनिंग. इस पेपर की तैयारी के लिये कठिन अभ्यास करने बहुत आवश्यक होता है.
सीएलएटी के लिये आवेदन कैसे करें
सीएलएटी में उपस्थित होने के लिये पात्र उम्मीदवारों के लिये सर्वप्रथम आवेदन प्रोसेसिंग प्रणाली पर पंजीकृत होना अपेक्षित होता है. पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरा होने के उपरांत पंजीकृत उम्मीदवार की यूजर ई-मेल आईडी पर एक ई-मेल और एसएमएस भेजा जाता है. इसके बाद आवेदन प्रपत्र में महत्वपूर्ण सूचनाएं भरनी होती है. आवेदन प्रपत्र भरने का आखिऱी चरण अपेक्षित परीक्षा शुल्क का भुगतान करना होता है.
2008 में जब इस परीक्षा की शुरूआत की गई थी, तब इसे देश के मात्र 7 विधि विश्वविद्यालयों ने स्वीकार किया था परंतु वर्तमान में सीएलएटी छात्रों को एलएल.बी. और एलएल.एम के पाठ्यक्रमों में अध्ययन के लिये देश भर में निम्नलिखित 18 विधि विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिये पात्र बनाता है.
देश में निम्नलिखित 18 प्रमुख विधि विश्वविद्यालय हैं:-
1.नेशनल लॉ स्कूल ऑफ  इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलौर
2.राष्ट्रीय विधि अध्ययन और अनुसंधान विश्वविद्यालय अकादमी, हैदराबाद
3.राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय, भोपाल
4.पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता
5.राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर
6.हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर
7.गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, गांधीनगर
8.डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ
9.राजीव गांधी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटियाला
10.चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना
11.राष्ट्रीय उन्नत विधि अध्ययन विश्वविद्यालय, कोच्चि
12.राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, कटक, ओडिशा
13.राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय, रांची
14.राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और न्यायिक अकादमी, गुवाहाटी, असम
15.दामोदरन संजीवा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम
16.तमिलनाडु राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली
17.महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, मुंबई
18.महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नागपुर
प्रवेश-पत्र और हॉल टिकट
सीएलएटी प्रवेश-पत्र अथवा हाल टिकट सामान्यत: अप्रैल के मध्य में इसकी आधिकारिक वेबसाइट: www.clat.ac.in से डाउनलोड करने की आवश्यकता होती है. इसके लिये सभी परीक्षार्थियों को अपने यूजर आईडी के जरिये संपर्क के लिये एक पासवर्ड दिया जाता है.
सीएलएटी के लिये तैयारी कैसे करें
सीएलएटी में उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों की संख्या हर वर्ष लगातार बढ़ रही है. औसतन 50 हजार छात्र सभी 18 विधि विश्वविद्यालयों की मात्र लगभग 2100 सीटों के लिये इस परीक्षा में बैठते हैं और इस तरह छात्रों के बीच इसमें उत्तीर्ण होने के लिये बहुत ही कठिन प्रतिस्पर्धा होती है. परीक्षा की कठोरता को ध्यान में रखते हुए हमें बहुत गंभीरता के साथ और योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन करने की आवश्यकता होती है. किसी अभ्यर्थी को निम्नलिखित महत्वपूर्ण रणनीतियों से बहुत ही स्वाभाविक और गंभीरता के साथ गुजरना चाहिये:-
1. अपने पाठ्यक्रम को जानिए
उम्मीदवारों को पाठ्यक्रम और परीक्षा की पद्धति को अच्छी तरह से जान लेना चाहिये. उन्हें परीक्षा की योजना में नवीनतम बदलावों, यदि कोई है, के बारे में जानकारी होनी चाहिये. इस संबंध में समग्र जानकारी के लिये उम्मीदवार पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों और बाज़ार मेें विभिन्न प्रकाशनों द्वारा प्रकाशित नमूना पेपर्स से भी मदद ले सकते हैं.
2. कठोर परिश्रम का कोई जवाब नहीं होता
इस बात से कौन इन्कार कर सकता कि कठोर परिश्रम ही इस तरह की कठिन परीक्षा में सफलता दिला सकता है जहां हजारों अभ्यर्थियों का कॅरिअर दांव पर लगा होता है? अत: प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी होती है और इस प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिये अभ्यर्थी को योजनाबद्ध समय सारणी के अनुसार अत्यधिक कठोर परिश्रम करने की आवश्यकता होती है.
3. नोट तैयार करें
महत्वपूर्ण विषयों, ताज़ा घटनाक्रमों, शब्दावली, समानार्थक, विपरीतार्थक और अंग्रेजी के विभिन्न अन्य भागों के नोट तैयार करने से इस प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिये काफी मदद मिल सकती है. स्वयं तैयार किये गये नोट हमेशा याद करने में आसान होते हैं और लंबे समय तक बनाये रखे जा सकते हैं.
4. अभ्यास परीक्षाओं की प्रेक्टिस करें
अभ्यास परीक्षाएं अंतिम परीक्षाओं का पूर्वाभ्यास होते हैं. जब कोई उम्मीदवार अभ्यास परीक्षाओं की प्रैक्टिस करता है, उसे अत्यधिक अपेक्षित आत्म-विश्वास हो जाता है और धीरे-धीरे प्रश्नों के उत्तर देने की गति में वृद्धि होती है. उम्मीदवारों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की पद्धति की जानकारी भी प्राप्त होती है.
5. स्वयं को अद्यतन रखें
सामान्य जागरूकता के प्रश्नों के उत्तर देने के लिये उम्मीदवारों को कम से कम दो अंग्रेजी समाचार-पत्रों का गहन अध्ययन करने का परामर्श दिया जाता है. समाचार पत्र पढऩे से न केवल अभ्यर्थियों को नवीनतम घटनाक्रमों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व की जानकारी प्राप्त होती है बल्कि अंग्रेजी का ज्ञान भी मज़बूत होता है जिससे परीक्षार्थी को परीक्षा के अंग्रेजी भाग में प्रश्नों को आसानी से हल करने में सहायता मिलती है.
6. प्राथमिक गणित में निपुणता
उम्मीदवारों को प्राथमिक गणित की तैयारी के लिये बहुत गंभीरता के साथ संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करना चाहिये. अनुपात और समानुपात, लाभ और हानि तथा साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज के हिस्से से प्रश्नों को हल करने के लिये छात्रों के लिये कुछ गुप्त संकेतों को समझना जरूरी है जिनमें केवल नियमित अभ्यास से ही निपुणता हासिल की जा सकती है. अनेक अभ्यास परीक्षाएं देने और मॉडल सैम्पल पेपर्स से निश्चित तौर पर परीक्षा हाल में उच्च शुद्धता के साथ प्रश्नों को हल करने की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी.
रोजग़ार के अवसर कहां हैं
कानून का शासन हर जगह होता है. परिवार से लेकर समाज तक, रोजगार से लेकर विवाह तक, नियोक्ता से लेकर सरकार तक कानून मानवीय जीवन से अलग नहीं हो सकता. कानून के सार्वभौमिक महत्व के परिप्रेक्ष्य में एक विधि स्नातक अथवा स्नातकोत्तर के पास रोजग़ार के अवसरों की कोई कमी नहीं होती है, विशेषकर जब हम 21वीं सदी की ज्ञान संचालित अर्थव्यवस्था में रह रहे हैं.
कानून की डिग्री धारण करने वाला व्यक्ति कानून के एक से अधिक विषयक्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकता है जैसे कि दीवानी, आपराधिक, साइबर, पेटेंट, परिवार, कर, श्रम, प्रशासन, कंपनी और कई अन्य विषय आदि. इसके अलावा विधि में डिग्री धारक अपने स्वयं के घर से प्राइवेट अथवा स्वतंत्र वकील के तौर पर भी प्रेक्टिस कर सकता है. बैंक और कार्पोरेट कंपनियां भी विभिन्न कानूनी विवादों के निपटारे के लिये विधि सलाहकारों की नियुक्ति करते हैं. यही नहीं विधि में स्नातकोत्तर छात्र देश और विदेश के विभिन्न विधि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण का व्यवसाय भी अपना सकते हैं. संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि विधि का विषयक्षेत्र रोजग़ार के अवसरों वाला सदाबहार क्षेत्र है और इसमें होनहार कॅरिअर की प्रचुरता है.
लेखक जवाहर नवोदय विद्यालय बिरौली, डाकघर-आर.आई. बिरौली, जिला समस्तीपुर (बिहार) में पढ़ाते हैं. ई-मेल :spsharma.rishu@gmail.com
चित्र: गूगल के सौजन्य से
(विवरण के लिये इस वर्ष की परीक्षा आयोजित कर रहे संबंधित विधि विश्वविद्यालय की वेबसाइट देखें)