संपादकीय लेख


Volume-15

जीएसटी: संसद के ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र में भारत के अब तक
के सबसे बड़े कर सुधार कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को गुड एंड सिम्पल टैक्सयानी अच्छा एवं आसान कर की संज्ञा दी

आनंद सौरभ

देश स्वतंत्रता के बाद से अब तक के सबसे बड़े कर सुधार के शुभारंभ का उस वक्त गवाह बना जब 30 जून-01 जुलाई 2017 की मध्यरात्रि को नई दिल्ली में संसद के केंद्रीय कक्ष में ऐतिहासिक मध्यरात्रि सत्र में वस्तु एवं सेवा कर लागू किये जाने की घोषणा की गई. मध्यरात्रि होते ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बटन दबाकर जीएसटी का शुभारंभ किया, जो कि एक दर्जन से अधिक राज्य और केंद्रीय करों का स्थान लेगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी के शुभारंभ से पहले सभा को संबोधित किया.
इस अवसर पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन देश का भविष्य निर्धारित करने के लिहाज से एक निर्णायक मोड़ है. उन्होंने याद किया कि संसद का यह केंद्रीय कक्ष पहले भी कई ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी रहा है जिसमें 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक, 14 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को देश के भाग्य को बदलने की घोषणा, और 26 नवंबर, 1949 को देश के संविधान को अंगीकार करना शामिल हैं. जीएसटी को एक अच्छा और आसान कर बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि इससे व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों का उत्पीडऩ ख़त्म हो जायेगा और भारत का एक ही कर दर के साथ एक बाज़ार के रूप में एकीकरण होगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी से समय और धन की काफी बचत होगी. राज्य की सीमाओं को पार करते समय होने वाली देरी से ईंधन नष्ट होने से बचेगा, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी से हमारा आधुनिक कर व्यवस्था के युग में प्रवेश होगा जो कि सरल, अधिक पारदर्शी है तथा यह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सहायक होगा. उन्होंने कहा कि यह शासन की नई संस्कृति लेकर आयेगा, कर आतंक और इंस्पेक्टर राज को समाप्त करेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी से वैश्विक निवेशकों के लिये भारतीय बाज़ार में निवेश करना आसान होगा. उन्होंने जीएसटी का एक आर्थिक एकीकरण के तौर पर उल्लेख किया जिस प्रकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र का एकीकरण किया था. प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन को याद करते हुए, जिन्होंने कहा था कि आयकर दुनिया में समझने की सबसे मुश्किल चीज़ है, उन्होंने कहा कि जीएसटी से एक राष्ट्र, एक कर सुनिश्चित हो सकेगा. उन्होंने जीएसटी को सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि जीएसटी के लागू होने के साथ ही, टीम इंडिया ने अपनी क्षमता और कर्मठता को साबित कर दिया है.
 जीएसटी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए, जो कि राष्ट्र को तीव्र विकास की ओर अग्रसर करेगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे सभी राज्यों को बड़ा फायदा होने वाला है क्योंकि उन्हें अब विकास के बराबर अवसर प्राप्त होंगे. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से न केवल पहले से विकसित राज्यों को साधन सुलभ होंगे बल्कि पिछड़े राज्यों को भी विकास के अवसर प्राप्त होंगे. उन्होंने कहा कि जीएसटी के अधीन पहली बार केंद्र और राज्य सरकारें एक ही दिशा में मिलकर कार्य करेंगी जो एक भारत श्रेष्ठ भारतका उदाहरण है तथा इसके प्रभाव को लेकर आने वाली पीढिय़ां बहुत गर्व महसूस करेंगी. उन्होंने जीएसटी परिषद की 18 बैठकों की समानता भगवद् गीता के 18 अध्यायों से की और महान दार्शनिक तथा अर्थशास्त्री चाणक्य का उल्लेख किया कि कठोर परिश्रम से सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है और कठिन से कठिन वस्तु को भी हासिल किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यद्यपि शुरूआत में कुछ कठिनाइयां हो सकती हैं, यहां तक कि आंख के चश्मे को एडजस्ट होने में भी थोड़ा वक्त लग जाता है. उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने का आह्वान किया और कहा कि नये कर के बारे में आशंकाएं पैदा न करें. उन्होंने कहा कि हो सकता है हर कोई प्रौद्योगिकी से सुपरिचित नहीं हो, हरेक परिवार में दसवीं या बारहवीं पास छात्र होगा, जो हर महीने ऑनलाइन रिटर्न भरने की जीएसटी के अनुपालन की अपेक्षा को पूरा कर सकता है.
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरूआत को राष्ट्र के लिये एक महत्वपूर्ण घटना बताया. उन्होंने कहा कि कराधान का नया युग केंद्र और राज्यों के बीच हुई व्यापक सहमति का परिणाम है. उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता और बुद्धिमत्ता का परिणाम है.
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में जीएसटी की चौदह वर्ष की लंबी यात्रा का जिक्र किया जो कि दिसंबर 2002 में उस वक्त आरंभ हुई थी जब अप्रत्यक्ष कराधान पर केलकर कार्यबल ने मूल्यवॢधत कर सिद्धंात पर आधारित समग्र वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का सुझाव दिया था. उन्होंने कहा कि जीएसटी का प्रस्ताव सबसे पहले वित्तीय वर्ष 2006-07 के बजट भाषण में प्रस्तुत किया गया था. प्रस्ताव में न केवल केंद्र द्वारा लगाए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर में सुधार बल्कि राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले करों में सुधार करना भी शामिल था. इसे तैयार करनेे और लागू करने की कार्य योजना बनाने की जिम्मेदारी राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को दी गई जिसे पहले मूल्यवॢधत कर (वैट) लागू करने का दायित्व सौंपा गया था. अधिकार प्राप्त समिति ने नवंबर 2009 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर पहला विमर्श पत्र जारी किया. राष्ट्रपति ने कहा कि जीएसटी की शुरूआत उनके लिये व्यक्तिगत संतोष का लम्हा है, क्योंकि बतौर वित्तमंत्री उन्हों ने ही 22 मार्च 2011 को कर व्यवस्था में बदलाव के लिये संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था. बाद में 8 सितंबर 2016 को भारत के राष्ट्रपति के तौर पर श्री मुखर्जी ने संसद के दोनों सदनों तथा पचास प्रतिशत से अधिक राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयक को संविधान संशोधन (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम को मंजूरी प्रदान की थी.
राष्ट्रपति ने जीएसटी को एक कठिन बदलाव बताते हुए कहा कि जब इतने बड़े पैमाने पर बदलाव लाया जाने वाला हो, चाहे वह कितना ही सकारात्मक क्यों न होए शुरूआती अवस्था में थोड़ी बहुत कठिनाइयां और परेशानियां तो होती ही हैं. श्री मुखर्जी ने प्रत्येक भारतीय से नई व्यवस्था के सफल कार्यान्वयन में सहयोग करने की अपील की.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऐसी यात्रा है जहां भारत अपने आर्थिक क्षितिज और गौरवशाली राजनीतिक विजऩ को विस्तार देने की असीम संभावनाओं के लिये जगेगा. श्री जेटली ने कहा कि जीएसटी भले ही गंतव्य कर हो, लेकिन यह भारत के लिये एक नई यात्रा की शुरूआत है. उन्होंने कहा कि पुराना भारत आर्थिक दृृष्टि से खण्डित था, नया भारत एक देश के लिये एक कर, एक बाज़ार बनायेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र, विधानसभाओं सहित 29 राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों तथा व्यापक वैविध्यपूर्ण हितों वाले बहुदलीय लोकतंत्र की विशाल और जटिल प्रणाली में हमने संविधान संशोधन लागू किया और भारतीय राजनीति के उत्कर्ष को प्रदर्शित करते हुए विशाल कर सुधार को अंजाम दिया. उन्होंने कहा कि यह कार्य हमने ऐसे समय में किया है जबकि समूचा विश्व धीमी वृद्धि, पृथकतावाद और संरचनात्मक सुधारों के अभाव से जूझ रहा है. जीएसटी के माध्यम से भारत ने यह दिखा दिया है कि समावेशन, खुलेपन और साहस के साथ इन ताकतों पर काबू पाया जा सकता है.
संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में महत्वपूर्ण जीएसटी के शुभारंभ के समय सर्वोच्च नेतागण, उद्योगपति, अर्थशास्त्री, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे. समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के लगभग सभी सदस्य, सत्ताधारी गठबंधन के सांसद और विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी, बीजू जनता दल, एनसीपी और जेडी(यू) के नेता उपस्थित थे. भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल, उद्योगपति रतन टाटा के साथ-साथ विजय केलकर, जिन्होंने 2003 में वित्त मंत्रालय को प्रस्तुत एक रिपोर्ट में पहली बार जीएसटी की अवधारणा का सूत्रपात किया था, भी जीएसटी के शुभारंभ के समय मौजूद थे.
चित्र: गूगल के सौजन्य से