नौकरी फोकस


career volume- 19

सामाजिक कार्य में करिअर : सब सुखी तो हम सुखी

डॉ. पूर्वी प्रकाश 

अनेक लोग सामाजिक कार्य में कॅरिअर चुनते हैं क्योंकि यह हमारे समाज को सकारात्मक योगदान की संतुष्टि देता है।

यह कॅरिअर ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो अच्छा बनने और अच्छाकरने में, तथा विपत्ति में घिरे व्यक्तियों की सहायता करने में विश्वास रखते हैं।

सामाजिक कार्य व्यवसायियों के लिए इस कार्य की संभावना प्रतिदिन बढ़ रही है। शिक्षा, औषधि, न्याय, वन संरक्षण, पशु अधिकार के साथ-साथ आप अन्य अनेक कारणों से इस कार्य से जुड़ सकते हैं और इस क्षेत्र में अपना कॅरिअर बना सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अनुसंधान कार्य, नीति-विकास, सामाजिक कार्य शिक्षा, सामाजिक विकास, सामुदायिक कार्य, पर्यवेक्षकीय कार्य तथा प्रबंधकीय कार्य जैसे अनेक कार्य कर सकते हैं।

यद्यपि सामाजिक कार्यकत्र्ता मुख्य रूप से परोपकार कार्य से जुड़े कार्य करते हैं और मनुष्यों तथा अन्य जीव-जंतुओं के जीवन की परिरक्षा करते हैं, किंतु व्यापक शब्दों में, यह कार्य सामाजिक-आर्थिक जटिलताओं का सामना करने तथा समाज में प्रत्येक मनुष्य के लिए शानदार जीवन-स्तर उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।

सामाजिक कार्यकर्ता कैसे बनें?

समाज-सेवा की भावना रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस व्यवसाय में प्रवेश कर सकता है, कई व्यक्ति ऐसे होते हैं जो इस क्षेत्र में व्यक्तिगत रूप में अथवा स्वयंसेवी के रूप में गैर-सरकारी संगठनों के साथ कार्य करते हैं, और कई ऐसे व्यक्ति होते हैं जो अकेले समाज में अत्यधिक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाते हैं।आपने गया, बिहार के गहलौर गांव के एक श्रमिक दशरथ मांझी के बारे में अवश्य सुना होगा जिसने अपने गांव को चिकित्सा सुविधा वाले निकटतम शहर से जोडऩे के लिए अकले पहाड़ी क्षेत्र को काटकर मार्ग बनाया था। कैलाश सत्यार्थी ने 2014 में नोबल पुरस्कार जीता था। वह बाल-अधिकार कार्यकर्ता है और उन्होंने 144 देशों के 83,000 से भी अधिक बच्चों के अधिकारों की रक्षा की है। ऐसे महान व्यक्तियों को अन्यों से आदर एवं सम्मान प्राप्त करने के लिए किसी शैक्षिक डिग्री की आवश्यकता नहीं होती। अपने निर्वाह के लिए न तो वे किसी पारिश्रमिक पर निर्भर होते हैं और न ही वे अपने कार्यों की मान्यता के लिए किसी पुरस्कार की कामना करते हैं। यदि आप सामाजिक कार्य को एक संभावित कॅरिअर के रूप में देखते हैं तो इस क्षेत्र में आने के लिए आपको एक अधिक औपचारिक मार्ग का अनुसरण करना होगा। जिन व्यक्तियों को अपना धर चलाने के लिए किसी वेतन की आवश्यकता होती है, वे सामाजिक कार्य में स्नातक और मास्टर डिग्री कर सकते हैं। किसी भी विधा के छात्र इसमें स्नातक डिग्री कर सकते हैं, जबकि मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए सामाजिकी, स्नातकों को थोड़ी-बहुत वरीयता मिल सकती है।

इस क्षेत्र में आने के लिए आप निम्नलिखित डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम कर सकते हैं:-

*सामाजिक कार्य में प्रमाणपत्र,

*पुनर्वास परामर्श में प्रमाणपत्र,

*समाज कल्याण प्रशासन में उच्च पाठ्यक्रम,

*कार्मिक प्रबंधन में डिप्लोमा,

*अस्पताल प्रशासन में डिप्लोमा,

*समाज कल्याण प्रशासन में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र, और

*अनुसंधान प्रणाली विज्ञान में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र।

योग्यता प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता गैर-सरकारी संगठनों, स्कूलों, अस्पतालों, न्यायालयों और सार्वजनिक एजेंसियों में रोजग़ार तलाश सकते हैं। वे प्राकृतिक आपदाओं और अन्य प्रकार की संकट-स्थितियों से प्रभावित व्यक्तियों को राहत देने के कार्य से जुड़ी सरकारी या कार्पोरेट एजेंसियों द्वारा भी रोजग़ार पर रखे जा सकते हैं। इस क्षेत्र में उच्च अध्ययन करने के इच्छुक व्यक्ति एम।फिल और पी।एच।डी। कर सकते हैं तथा अनुसंधान कार्य, परामर्शी कार्य या नीति निर्माण अथवा प्रशासनिक कार्य से जुड़ सकते हैं।

सामाजिक कार्य में कोई पाठ्यक्रम करने का विकल्प तभी लें यदि आप किसी मामले का अच्छी तरह विश्लेषण करने की क्षमता रखते हैं, शीघ्र निर्णय से सकते हों, मानव मनोविज्ञान की अच्छी समझ रखते हों, और जटिल स्थितियों से कुशलतापूर्वक निपटने का अत्यधिक धैर्य रखते हों।

भारत में सामाजिक कार्य के 10 बड़े कॉलेज

वीक-हंस अनुसंधान सर्वेक्षण 2015 के अनुसार, भारत में सामाजिक कार्य के 10 बड़े कॉलेज निम्नलिखित हैं:-

1 टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टी।आई।एस।एस।), मुंबई

2 सामाजिक कार्य विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

3 मद्रास सामाजिक कार्य विद्यालय, चेन्नै

4 सामाजिक कार्य विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली

5 सामाजिक कार्य महानिदेशालय, निर्मल निकेतन, मुंबई

6 लोयला सामाजिक कार्य महाविद्यालय, तिरुवनंतपुरम

7 कार्बी सामाजिक सेवा संस्थान, पुणे

8 सामाजिक कार्य संकाय, एम।एस। बड़ौदा विश्वविद्यालय, वड़ोदरा

9 सामाजिक कार्य विभाग, मंगलौर विश्वविद्यालय, मंगलौर

10 रोडा मिस्त्री सामाजिक कार्य महाविद्यालय और अनुसंधान केन्द्र, हैदराबाद।

सामाजिक कार्य में (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) (एम.एस.डब्ल्यू.)

सामाजिक कार्य का क्षेत्र अन्य क्षेत्रों जैसे मानव-विज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान और सामाजिकी से परस्पर जुड़ा हुआ है। सामाजिक कार्य में कोई डिग्री आपको इस क्षेत्र के सभी पहलुओं जैसे नीतिशास्त्रगत इसकी संहिता, आपको आवश्यक शंसापत्रों, राज्य लाइसेंसिंग अपेक्षाओं और प्रैक्टिस मानकों की समझ में सहायता कर सकती है। पाठ्यक्रम-कार्य में प्राय: कक्षा में अध्ययन तथा क्षेत्रगत प्रशिक्षण (अध्ययन दौरों एवं ग्रामीण कैंपों के रूप में) सेमीनार एवं प्रचार-प्रसार शामिल होते हैं।

सामाजिक कार्य में मास्टर (एम.एस.डब्ल्यू.)चार सेमेस्टरों वाला एक दो-वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम है। इसे एक व्यावसायिक डिग्री और एक शैक्षिक डिग्री-दोनों माना जाता है। पूर्णकालिक पाठ्यक्रम के अलावा, कोई भी  व्यक्ति अंशकालिक, पत्राचार या दूरस्थ अध्ययन पद्धति के माध्यम से भी पाठ्यक्रम कर सकता है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) आपको 2-वर्षीय एम।एस।डब्ल्यू। पाठ्यक्रम पत्राचार के माध्यम से अधिकतम 5 वर्षों में करने की अनुमति देता है, किंतु यह समय अवधि एक संस्थान से दूसरे संस्थान में भिन्न हो सकती है।

कुछ विश्वविद्यालय और संस्थान सामाजिक कार्य में मास्टर ऑफ आर्ट्स या एम.ए. (एस.डब्ल्यू.) के रूप में पाठ्यक्रम चलाते हैं। ऐसे विश्वविद्यालय भी हैं जो सामाजिक कार्य में पांच-वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम बी.एस.डब्ल्यू (तीन वर्ष की अवधि के) और (एम.एस.डब्ल्यू.) (दो वर्ष की अवधि के) को मिलाकर चलाते हैं।

अच्छे विश्वविद्यालय और संस्थानों में, (एम.एस.डब्ल्यू.)पाठ्यक्रम के लिए चयन प्रवेश-परीक्षा, सामूहिक विचार-विमर्श एवं साक्षात्कार के माध्यम से दिया जाता है। साक्षात्कार का उद्देश्य यह मूल्यांकन करना होता है कि क्या कोई उम्मीदवार सामाजिक कार्य का वास्तव में इच्छुक है या नहीं।

एम.एस.डब्ल्यू में प्रवेश के लिए कुछ प्रसिद्ध प्रवेश परीक्षाएं:-

*अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (ए.एम.यू.)- एम.एस.डब्ल्यू. प्रवेश परीक्षा

*जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जे.एम.आई.)-एम.. (सामाजिक कार्य) प्रवेश परीक्षा

*टाटा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टी.आई.एस.एस.) प्रवेश परीक्षा

अधिकांश एम.एस.डब्ल्यू. प्रवेश परीक्षाओं में, उम्मीदवारों के सामान्य ज्ञान, सामाजिक कार्य की रुचि, मौखिक कौशल तथा तर्कणा क्षमता की संभाव्यता का मूल्यांकन करने के लिए ऑब्जेक्टिव प्रकृति के प्रश्न पूछे जाते हैं। छात्रों द्वारा बिना सोचे-समझे अनुमानित उत्तर लिखने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए अधिकांश संस्थाएं प्रवेश-परीक्षा में गलत उत्तर के अंक काटने की प्रणाली अपनाती हैं।

भारत में पाठ्यक्रम अधिकांशत: अंग्रेजी एवं हिंदी में उपलब्ध हैं। अत्यधिक प्रसिद्ध एम.एस.डब्ल्यू विशेषज्ञताएं निम्न हैं:-

*सामुदायिक विकास

*परिवार एवं बाल कल्याण

*चिकित्सा एवं मनश्चिकित्सा सामाजिक कार्य, एवं

*औद्योगिक संबंध तथा श्रमिक कल्याण।

एम.एस.डब्ल्यू पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र अधिकांशत: उक्त में से किन्हीं दो के क्षेत्रों में विशेषज्ञता कर सकते हैं। इस क्षेत्र में विशेषज्ञता के लिए चुने जा सकने वाले अन्य विषय निम्नलिखित हैं:-

*मानव संसाधन प्रबंधन

*कार्मिक प्रबंधन

*शहरी एवं ग्रामीण सामुदायिक विकास

*स्कूल सामाजिक कार्य और

*अपराध विज्ञान सुधारक प्रशासन

सामाजिक कार्य में रोजग़ार संभावनाएं

परिवर्तनकर्ता व्यक्ति होने के कारण, सामाजिक कार्यकर्ताओं को, व्यक्तियों तथा उनके परिवेश को सरलता से हस्तन करने के लिए विविध कौशल एवं तकनीकधारी होना चाहिए। जिन मध्यस्थता मामलों में वे शामिल होते हैं, वे मामले व्यक्ति केंद्रित मनो-सामाजिक नीतियों के नियोजन एवं विकास जैसे विविध कार्यों के हो सकते हैं। कार्य की प्रकृति भी काफी विभिन्न होती है। आप परामर्श कार्य, अध्यापन कार्य, नैदानिक कार्य, सामूहिक कार्य, पारिवारिक उपचार, व्यक्तियों को, उनके लिए उपलब्ध विभिन्न संसाधन योजना तथा सेवाएं दिलाने में सहायता कार्यों में शामिल हो सकते हैं।

सभी सामाजिक कार्य प्रयासों को निम्नानुसार तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:-

*बृहद्ध-स्तरीय सामाजिक कार्य : यह इस वर्ग के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय पैमाने पर समाज या समुदायों पर एक पूर्ण समर्थन एवं नीति निर्माण कार्य करता है।

*मध्यम-स्तरीय सामाजिक कार्य : यह एजेंसियों, छोटे संगठनों या छोटे व्यक्ति-समूहों से संबंधित है। किसी विशेष समुदाय या निकटवर्ती के लिए कार्यक्रमों का विकास करना इस वर्ग के अंतर्गत आता है।

*सूक्ष्म-स्तरीय सामाजिक कार्य : ऐसे कार्य जो व्यक्ति या परिवारों से जुड़े होते हैं, जैसे-मादक पदार्थ सेवन करने वालों का पुनर्वास कार्य, इस वर्ग में रखे जा सकते हैं।

एम.एस.डब्ल्यू अंतर्राष्ट्रीय रूप से अत्यधिक प्रसिद्ध है। डब्ल्यू.एस.., यूनेस्को, यूनिसेफ एवं क्राई जैसे प्रमुख संगठन, तृतीय विश्व तथा विकासशील देशों में जागरूकता अभियान तथा बड़ी परियोजनाएं चलाने में सामाजिक कार्यकर्ताओं को सेवा में रखते हैं। अंतर्राष्ट्रीय रूप में मान्यताप्राप्त व्यावसायिक निकाय जैसे इंटरनेशनल फैडरेशन ऑफ सोशल वर्कर्स (आई.एफ.एस.डब्ल्यू.), इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ स्कूल ऑफ सोशल वर्क (आई. एम.एस.डब्ल्यू), ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ सोशल वर्कर्स (बी..एस.डब्ल्यू.), और अमरीका में सामाजिक कार्यकर्ताओं का सबसे बड़ा व्यावसायिक संगठन - नेशनल एसोसिएशन ऑफ सोशल वर्कर्स (एन..एस.डब्ल्यू.) भी भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को रोजग़ार की अच्छी संभावनाओं के साथ-साथ उच्च वेतन भी देते हैं। हैल्प एज इंडिया, अन्य वृद्धाश्रम, अनाथालय, कैदी सुधार गृह, परामर्श केन्द्र, आपदा प्रबंधन विभाग, शैक्षिक क्षेत्र, क्लीनिक, अस्पताल, स्वास्थ्य उद्योग, लिंग मामलों या आदिवासियों से जुड़े संघ या समूह, मानव अधिकार एजेंसियां, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी कंपनियां तथा विभिन्न उद्योगों के मानव संसाधन विभाग भी सामाजिक कार्य विशेषज्ञ व्यक्तियों को रोजग़ार में रखते हैं।

भारत सरकार ने भी पिछले दो वर्षों में अनेक ध्वज-पोत समाज-कल्याण कार्यक्रम चलाए हैं, जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और क्लीन इंडिया (स्वच्छ भारत अभियान नाम से भी प्रसिद्ध), जिसमें सरकार का उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता, सफाई और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त, 100 स्मार्ट सिटीज़ बनाने की परियोजना है, सरकार द्वारा चलाई गई अन्य मुख्य परियोजनाएं इस प्रकार हैं:-

*स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया: इसके अंतर्गत उन दलित व्यक्तियों तथा महिलाओं को 10 लाख रु। से एक करोड़ रु। तक ऋण दिया जाता है जो नया उद्यम प्रारंभ करना चाहते/चाहती हैं। नए उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया भी अब आसान कर दी गई है। 125 लाख बैंक सीमांत समुदायों के 1.25 लाख युवा उद्यमियों को ऋण देंगे। भारत में 292 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अब अपनी 20'आवश्यकताएं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र से प्राप्त करना अनिवार्य हैं।

*प्रधानमंत्री उज्जवला योजना: वाराणसी को, प्रदूषण कम करने और लाभभोगियों के जीवन-स्तर में सुधार लाने के लिए शीघ्र ही 11 सौर-विद्युत ई-नोट और 1,000 ई।रिक्शा मिलेंगी। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली 5 करोड़ महिलाओं को अगले तीन वित्तीय वर्षों में नि:शुल्क एल.पी।.जी. कनेक्शन भी दिए जाएंगे।

*दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना: भारत की सौर विद्युत उत्पादन क्षमता कम समय अवधि में ही 1500 मे.वा.  से बढ़ाकर 10,000 मे.वा. कर दी गई है। 2015 में चलाई गई योजना के अंतर्गत 7012 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

*आधार एवं जन-धन योजना: पेंशन एवं बीमा योजनाओं तथा अन्य समतुल्य लाभों में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के वित्तीय समाहन का पता लगाना है।

*ग्रामोदय से भारत उदय अभियान: इस अभियान का लक्ष्य पंचायती राज प्रणाली को मजबूत करना तथा ग्रामीण विकास और किसानों की कल्याण योजनाओं को बढ़ावा देना है। इसमें भू-जल स्तर में सुधार लाने के लिए पांच लाख कृषि तालाबों का निर्माण करना और ई-नाम (ई-ट्रेडिंग प्लेटफार्म नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) जैसी पहल शामिल है।

*उमंग (यूनिफाइड मोबाइल ऐप फोर न्यू एज गवर्नेंस): सरकार एक ऐसे मोबाइल-आधारित ऐप का विकास कर रही है जो पासपोर्ट सेवा, आयकर, ई-पोस्ट, महिला सुरक्षा जैसी 200 सार्वजनिक सेवाओं को जोड़ेगा।

*प्रधानमंत्री आवास योजना: इस योजना के अंतर्गत 2508 शहरों तथा 26 राज्यों में शहरी निर्धनों को वहन करने योग्य (सस्ते) मकान उपलब्ध कराये जाएंगे।

इन सभी योजनाओं में संबंधित कौशल और विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्ति सेवा में रखे जाते हैं। संक्षेप में इन क्षेत्र में कार्य-अवसरों की कोई कमी नहीं है।

कोई सामाजिक कार्यकर्ता कितना वेतन प्राप्त करता है

यद्यपि सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए कोई निश्चित वेतनमान नहीं है, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में अध्यापकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्राय: प्रारंभ में 7000 रु. से 8000 रु. प्रति माह का वेतनमान मिलता है। गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी परियोजनाओं में सेवारत सामाजिक कार्यकर्ता प्राय: पर्याप्त अच्छा वेतन एवं अनुलाभ प्राप्त करते हैं। सामान्य प्रवृत्ति दर्शाती है कि अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन भारत स्थित गैर-सरकारी संगठनों से अधिक वेतन देते हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ता ऐसे हैं जो अपना गैर-सरकारी संगठन चलाते हैं और उससे अच्छी धन-राशि प्राप्त करते हैं।

आज अधिकांश कार्पोरेट गृहों के अपने निजी कार्पोरेट सामाजिक दायित्व (सी.एस.आर.) स्कंध हैं, जो जरूरतमंद व्यक्तियों की सहायता के लिए असंख्य कार्यकलाप आयोजित करते हैं। इन कार्यों में कौशल प्रशिक्षण देना, प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वालों को रोजग़ार देना, गरीब बच्चों को शिक्षा देना, स्वच्छता अभियान चलाना या किसी गांव को गोद लेना शामिल है। ये सी.एस.आर. विभाग सामाजिक कार्यकर्ताओं को अच्छे वेतन और कार्य-संतुष्टि के साथ-साथ पुरस्करणीय रोजग़ार देते हैं। पहले, सामाजिक कार्यकर्ताओं को कम वेतन वाला व्यवसाय माना जाता था, किंतु इस क्षेत्र में अधिकाधिक कार्पोरेट हस्तियों के आने से सामाजिक विशेषज्ञों के लिए अन्य क्षेत्रों के व्यवासियों जितना ही वेतन दिया जाता है।

 

जॉन एफ. केनेडी ने एक बार कहा था, ‘‘एक व्यक्ति परिवर्तन ला सकता है, और सभी को इसका प्रयास करना चाहिए।’’ बेहतर विश्व बनाने के प्रयास में लगे रहें, और आपका जीवन भी बेहतर हो जाएगा।